मुबारक हो तीन महीने हो गये ( अनलॉक ३.० )

हम सबको आत्म निर्भर बने हुये पूरे तीन महीने हो चुके है । बिलकुल प्रेगनेंसी टाइप वाली फीलिंग आ रही है ना । 😜

शुरू शुरू में कुछ परेशानियाँ और तीन महीने बीतते बीतते सब कुछ सैटल सा हो रहा है । 😁

अब विदेश में तो लोग अपना हर काम स्वयं ही करते है पर अपने देश में ये कामवाली और हैल्पर की जो सहूलियत हम लोगों को थी वो भी इस कोरोना ने छीन ली । 😬

हम लोगों ने हमेशा कामवाली हैल्पर और सेवक को अपने घरों में काम करते देखा है पर अब तो हम लोग ही फ़ुल टाइम सेवक टाइप हो गये है ।

पर इन तीन महीनों में हम ने बहुत कुछ सीखा और समझा है ।

पहली बात तो आत्म निर्भर होने की है जो हमने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि हम कभी इतने आत्म निर्भर बन सकते है और बन जायेंगें । पर कोरोना ने वो भी बना दिया ।


अपना तो ये हाल था कि अगर पार्वती एक दिन छुट्टी कर ले तो ना तो हम काम करते थे और ना ही घर में कोई हमें करने देता था । 🤓

बाहर का खाना जो हमारे यहाँ जब तब आता था अब पिछले तीन महीने से बंद है और हम हर तरह का खाना बनाने में हाथ आज़मा रहें है । 😛

वैसे पार्वती या कोमल तो नहीं है पर फिर भी हमारी मदद के लिये छोटू तो है ना । अरे उससे बड़ा रिलीफ़ है वरना रोज झाड़ू पोछा करके बुरा हाल था । 😜

अब तो ये हाल होता जा रहा है कि कल हम और पतिदेव शाम को बालकनी में खडे होकर बाहर का नज़ारा देख रहे थे तो हम बोले कि अब तो बाहर जाने का मन ही नहीं करता है । बाहर जाकर लगेगा कि हर तरफ़ कितनी भीड भाड है ।

जब पहले कोई ऐसा कहता था ( हैं दो चार ऐसे लोग ) कि हमें बाहर ना जाकर घर पर रहना अच्छा लगता है तो हम को लगता था कि भला ये भी कोई लाइफ़ है । कुछ तो गड़बड़ है ।

पर अब हमारी सोच भी वैसी ही होती जा रही है कि बाहर जाने से घर पर रहना ही अच्छा है ।

और हम जो पहले कपड़े शॉप पर जाकर ट्राई करे बिना नहीं ख़रीदते थे अब घर बैठे ऑनलाइन शॉपिंग करने लगे है ।

खैर अब तो हम रम गये है , ना बाहर जाओ ,ना बाहर से कुछ खाना मंगाओ और ना ही कोई शॉपिंग करने जाओ ।


तो बस नो ख़र्चा ओनली बचत ।😂



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