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रांची का नेता गिरी विद्यालय

अब आम स्कूल और विद्यालय के बारे मे तो हम सभी जानते है पर क्या आपने कभी नेता गिरी स्कूल के बारे मे पढ़ा या सुना है ।हमने तो नही सुना था । पर कल ही हमने टाईम्स ऑफ़ इंडिया के गोवा एडिशन मे इस स्कूल के बारे मे पढ़ा तो सोचा आप लोगों को भी इस स्कूल के बारे मे बताना चाहिए ।अब वो क्या है ना की आज कल चुनावों का मौसम है तो ऐसे मे हो सकता है किसी के काम ही आ जाए ये ख़बर । :) ख़बर तो आप पढ़ ही लेंगे चलिए थोड़ा -बहुत हम भी बता ही देते है । ये नेता गिरी विद्यालय बर्द्धवान कम्पाउंड रांची मे स्थित है । और इस में प्रवेश लेने के लिए बस पाँचवीं पास होना चाहिए और इसकी फीस महज ५० रुपये है जो आज के जमाने के हिसाब से बहुत कम है । :) और हाँ इसमे १८ से ५५ साल तक के लोग प्रवेश ले सकते है । और इस विद्यालय की क्लास लोगों की सहूलियत ध्यान मे रखते हुए हर शनिवार को २ घंटे के लिए होती है ताकि लोग आसानी से क्लास attend कर सके ।और कोई भी क्लास मिस ना करे । अरे -अरे ये क्या आप तो चल दिए । अरे ख़बर तो पूरी पढ़ लीजिये फ़िर जाइयेगा स्कूल मे एडमीशन लेने । :) इस नेतागिरी विधालय के छात्र भविष्य मे क्या कर...

एप्रैल फूल बनाने के मजेदार तरीके

पहली एप्रैल यानी एक-दूसरे को बुद्धू बनाने का दिन है और इस एक दिन का भी अपना ही मजा होता है। अब बचपन मे और बाद मे यूनिवर्सिटी के दिनों मे हम लोग घर मे एक-दूसरे को और स्कूल मे दोस्तों को एप्रैल फूल बनाते थे। धीरे-धीरे बड़े होते गए और अब तो एप्रैल फूल बस एक तारीख की तरह ही आती है और चली जाती है। अब जब छोटे थे तब घर मे तो एप्रैल फूल बनाने का सबसे आम तरीका होता था फ़ोन का रिसीवर उठाकर दीदी या भइया को कहना की तुम्हारा फ़ोन आया है।और जैसे ही वो फ़ोन पर हेलो बोलते की हम जोर से गाते एप्रैल फूल बनाया । स्कूल मे दोस्तों को एप्रैल फूल बनाने मे भी खूब मजा आता था । कभी किसी को कहते की तुम्हे क्लास टीचर ने बुलाया है। तो कभी कोई हमे कहता की तुम्हे इंग्लिश टीचर ने बुलाया है। और ऐसे मे कई बार सच मे भी टीचर बुलाती तो भी लगता था की कहीं हम एप्रैल फूल ना बन जाए। उफ़ अब तो यादें ही रह गई है एप्रैल फूल की। वो भी क्या दिन थे।अब तो ऐसे मजाक से छोटे बच्चे भी बुद्धू नही बनते है। पर ऐसे ही कल नेट पर सर्फ़ करते हुए मजेदार साईट मिली जिसमे एप्रैल फूल बनाने के कुछ मजेदार तरीके लिखे हुए थे । पहले तो ...