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TIATR ( तिअत्र ) कुछ अलग है

ये शब्द पढने और सुनने मे कुछ अजीब सा लग रहा है पर असल मे ऐसा कुछ नही है ।वैसे इसका सही उच्चारण भी अभी तक ठीक से क्या है हमें पता नही है क्यूंकि कोई तिअत्र तो कोई तिअतर तो कोई तियत्र कहता है । खैर नाम मे न उलझ कर कुछ इसके बारे मे बताते है । गोवा मे tiatr १०० साल से होता चला आ रहा है । tiatr के लिए कहा जाता है कि इसे बहुत अधिक loud होना चाहिए । इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमे जो भी कहानी होती है वो गोवा के लोगों की जिंदगी पर आधारित होती है वो चाहे राजनीति हो या फ़िर कोई सोशल मुद्दा हो , पुलिस हो या चाहे आम आदमी की जिंदगी ।हर दर्शक कहानी से अपने आप को identify कर सकता है । इसमे सटायर भी खूब होता है ।और इसमे संदेश भी होता है । यहाँ के लोगों का कहना है कि ये आम नाटकों ( ड्रामा और थिएटर ) से थोड़ा अलग है । हालाँकि अब इस tiatr मे हिंदू कलाकार भी भाग लेने लगे है पर ऐसा कहते है कि शुरूआती दौर मे ज्यादातर कैथोलिक ही इसमे भाग लेते थे क्यूंकि इसमे saxtti ( कोंकणी ) भाष ा का इस्तेमाल किया जाता है जिसे साउथ goa मे बोला जाता है और ...

जब हमने euphoria के लाइव शो का लुत्फ़ उठाया ...

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पहली मई को यहां कला अकेडमी मे गोवा के चौथे कोंकण फ़िल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह मे EUPHORIA ग्रुप भी आया था। समारोह के उदघाटन का समय तो ६ बजे था और उसके बाद ही इन लोगों का कार्यक्रम था।दीप जलाने और भाषण वगैरा होने के बाद लोगों को इस बैंड को सुनने की ललक थी।भाषण और दीप जलाने का काम आधे घंटे मे ख़त्म हो गया और फ़िर ये एनाउंस किया गया की बस आधे घंटे मे EUPHORIA का प्रोग्राम शुरू होगा। इस एनाउंस मेंट के बाद कुछ लोग तो बाहर चाय - काफ़ी पीने चले गए और कुछ लोग वहीं बैठे रहे।और फ़िर शुरू हुआ स्टेज को सेट करने का काम। कभी माइक टेस्ट करते तो कभी लाईट । थोडी देर तो हम लोग भी ये सब देखते रहे पर ७ बजे हमारा सब्र टूट गया और हम लोग बाहर jetty पर घूमने चले गए । करीब पंद्रह मिनट बाद बाहर गिटार और ड्रम की आवाज आने लगी तो हम लोग वापिस हॉल मे आए पर हॉल के अन्दर तो अभी भी टेस्टिंग चल रही थी। खैर हम लोग बैठ गए ...