सोशल मीडिया और सोशल डिस्टेंसिंग ( उन्नीसवाँ दिन )
हमें लगता है कि सोशल मीडिया और सोशल डिस्टेंसिंग की आज के माहौल में बहुत ज़रूरी है ।आपको नहीं लगता है कि ये दोनों एक दूसरे के पूरक से हो गये है । इस कोरोना के कारण जब सभी लोग घरों में ही है और घर से ही ऑफ़िस का भी काम धाम चल रहा है और चूँकि घर से बाहर निकलना मना है तो ऐसे में ये सोशल मीडिया ही काम आ रहा है । फिर वो चाहे मनोरंजन हो या कुछ काम ही क्यूँ ना हो । कभी कभी हम सोचते है कि अगर सोशल मीडिया ना होता तो हम लोगों का क्या होता । क्योंकि इसके चलते एक तो दूरी पता नहीं चलती है और दूसरे सबसे जुड़े भी रहते है । मतलब साफ़ सोशल डिस्टेंसिग रखते हुये सबसे सोशली जुड़े रहो । जरा सोचिये अगर आज फेसबुक ,वहाटसऐप ,इंसटाग्राम, ट्वीटर यू ट्यूब टिकटॉक नहीं होते तो हम लोग कैसे समय काटते । क्योंकि आज के समय में इनके बिना तो जिंदगी सोची ही नहीं जा सकती है । और आज के इस कवैरंटाईन के समय में ये ही हम सबका सबसे बड़ा सहारा है । अब वहाटसऐप को ही लीजिये हम लोग घरों में पहले भी कुछ ना कुछ स्पेशल बनाते थे पर ऐसा नहीं था कि हमेशा खाने की फ़ोटो खींचें और वहाटसऐप पर लगायें । पर आज के समय में खाने की फ़...