Posts

Showing posts with the label दिल्ली.

रीटा आइस क्रीम

ये ice creem शब्द सुनकर ही बहुत कुछ याद आ जाता है । अब जैसे हमे rita ice cream की याद आ गई । भाई हमने तो अपने बचपन मे ये आइस क्रीम बहुत खाई है। इलाहाबाद मे ये अब मिलती है या नही पता नही पर जब हम छोटे थे तब जहाँ शाम के ५ बजे नही कि एक आदमी छोटी सी हाथ गाड़ी जिस पर चारों और rita ice cream लिखा होता था आता rita ice cream की आवाज आती और झट से हम घर के बाहर. हम क्या मोहल्ले के जितने बच्चे सभी घर के बाहर निकल पड़ते थे. और चूँकि हम लोगों के मोहल्ले मे हर घर मे खूब सारे बच्चे थे और गर्मी की छुट्टियों मे तो हर किसी के घर मे ननिहाल या ददिहाल के लोग आए हुए होते थे अरे मतलब ज्यादा बच्चे ,तो ice-cream वाले की भी खूब बिक्री होती थी। और हर किसी को सबसे पहले ice-cream चाहिए होती और हर कोई चिल्ला रहा होता कोई चिल्लाता orange तो कोई mango तो कोई chocolate bar। किसी को vanila का cup चाहिए होता था। और ice-cream वाला हम सभी को एक-एक करके अपनी ही धीमी स्पीड से ice-cream बांटता ।हमे तो orange ice-cream हमेशा से ही कुछ ज्यादा ही प्रिय रही है। हमारी और हमारी दीदी ...

हो गई ओलम्पिक मशाल की दौड़

ओलम्पिक मशाल और तिब्बतियों के विरोध के बीच मे ओलम्पिक मशाल का भारत मे आना और सही सलामत ओलम्पिक दौड़ का आयोजन हो जाना भारत सरकार इसे एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर मान रही है । पर क्या वाकई ये ओलम्पिक दौड़ का आयोजन सफ़ल रहा है । अब ये तो जानकार लोग ही बता पायेंगे । ओलम्पिक मशाल की दौड़ के बराबर ही तिब्बतियों ने भी एक मशाल रैली निकाली थी । कल जिस दौड़ को दोपहर एक बजे शुरू होना था वो शाम को ४ बजे शुरू हुई । और उसपर भी इतनी सुरक्षा जितनी तो शायद देश के प्रधान मंत्री या राष्ट्रपति की भी नही होती । तकरीबन १७००० सुरक्षा कर्मी लगाए गए थे । खैर मशाल की दौड़ जब शुरू हुई और जो देखने को मिला उसमें ना तो खेल भावना दिखी और ना ही लोगों या जनता मे इस ओलम्पिक मशाल की दौड़ को देखने के लिए कोई उत्साह दिखा । वैसे लोगों मे अगर उत्साह होता भी तो बेचारे सिर्फ़ सुरक्षा कर्मी को ही देख पाते क्यूंकि मशाल को देख पाना तो नामुमकिन ही था । तीन ...

अंडमान मे रहते हुए जब मजबूरी का एहसास होता है.(१)

यूं तो अंडमान मे हमारा तीन साल का समय बहुत ही अच्छा बीता पर उन्ही तीन सालों मे हमारे मायके और ससुराल मे अच्छे काम भी हुए माने दीदी और ननद की लड़की की शादी हुई। और उन्ही तीन सालों मे हम लोगों के जीवन की सबसे बड़ी ट्रेजडी भी हुई । जून से नवम्बर का समय तो बस अंडमान घुमते हुए मजे मे निकल रहा था। नवम्बर मे दीदी बेटी की शादी मे दिल्ली आए और उसके बाद हम लोग करीब १० दिन दिल्ली रहकर वापिस अंडमान चले गए।अंडमान पहुँचने के एक हफ्ते बाद यानी २ दिसम्बर २००३ की शाम को दिल्ली से हमारी ननद का फ़ोन आया कि पापाजी (ससुरजी ) घर मे गिर गए है।और उनके पैर मे फ्रैक्चर हो गया है। वो लोग पापाजी की खूब देख भाल कर रहे थे।और चूँकि हमारी ननद और नन्दोई डॉक्टर है इसलिए हम लोगों को चिंता करने की कोई जरुरत नही थी। इसलिए हम लोग निश्चिंत थे । रोज हम लोग उनका हाल-चाल लेते थे और उनसे बात करते थे।पर अचानक १३ दिसम्बर को दिल्ली से फ़ोन आया कि पापाजी को हार्ट अटैक हुआ है । पापा की हालत काफ़ी ख़राब है और उन्हें हॉस्पिटल ले जा रहे है। उस समय पापाजी से बात की और ननद और नन्दोई से बात हुई ।और पतिदेव ने...