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दिल्ली से ईटानगर का सफ़र

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जैसा कि हमने अपनी पिछली पोस्ट मे लिखा था कि अब हम ईटानगर आ गए है तो सोचा कि दिल्ली से ईटानगर तक के सफ़र की बातें भी कुछ की जाए । दिल्ली या कहीं से भी सीधे ईटानगर नहीं आया जा सकता है फिर चाहे रेल से यात्रा कर रहे हो या हवाई जहाज से यात्रा कर रहे हो। सभी ट्रेने गुवाहाटी तक आती है और कुछ उसके आगे रंगिया, तिनसुखिया तक भी आती है ,उसके बाद सड़क यातायात का सहारा लेना पड़ता है । और हवाई जहाज से भी गुवाहाटी तक ही आते है उसके बाद ईटानगर आने के लिए या तो सड़क यातायात माने कार या बस या फिर हेलीकाप्टर से ही आया जा सकता है ।वैसे अगले ३-४ साल मे अरुणाचल तक रेल मार्ग बन जाएगा ऐसी संभावना है । खैर किंग फिशर की ११ बजे चलने वाली फ्लाईट से दिल्ली से गुवाहाटी की बुकिंग करवाई गयी ।जिससे गुवाहाटी सवा बजे तक पहुँच जाए क्यूंकि गुवाहाटी से ईटानगर का हेलीकाप्टर दो से ढाई बजे के बीच मे चलता है । चूँकि जनवरी मे दिल्ली मे कोहरा काफी रहता था इस लिए हम लोगों की फ्लाईट आधे घंटे लेट हो गयी और हम लोग सोच रहे थे की हेलीकाप्टर तो चला गया होगा पर जब plane से हेलीकाप्टर को खड़े देखा तो लगा कि हम लोग ईटानगर के लिए...

ठक-ठक कौन है --ठाकरे

ठाकरे अब वो चाहे राज ठाकरे हो यस उद्धव ठाकरे हो या फ़िर बाला साहेब ठाकरे हो रोज ही इन तीनों मे से कोई ना कोई उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ कुछ ना कुछ बोलता या लिखता रहता है। फरवरी मे जो राज ठाकरे ने उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ अपना भाषण दिया उसके बाद मुम्बई मे जितनी तोड़-फोड़ और मार पीट हुई वो हम सभी जानते है।उस दिन से आज तक ठाकरे का उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ बोलना जारी है। राज ठाकर े अमिताभ बच्चन को कहते है कि वो यू.पी को अपना मानते है तो इसमे ग़लत क्या है. कोई भी इंसान जहाँ वो पैदा हुआ और बड़ा हुआ है क्या उस जगह को कभी भूल सकता है। कभी नही। वो हमेशा अपनी मिटटी से जुडा रहता है।आप चाहे मुम्बई मे रहे या विदेश मे अपनी जगह को भूल नही सकते है। ठाकरे अपने आप को महाराष्ट्र और मराठियों का बचाने वाला कहते है पर क्या कभी किसी ने ने ये सोचा कि क्या सारे मराठी मानुष भी वही सोचते है जैसा कि राज ठाकरे सोचते है।अब राज की तरह अमिताभ बच्चन कम से कम यू.पी के लोगों को भड़काने का काम नही कर रहे है। राज अपनी मुम्बई से प्यार करते है ये बहुत अच्छी बात है । जब राज ठाकरे ने अमिताभ बच्चन को मुम्बई से ज्यादा यू...

गोली मार भेजे मे....

ये कल्लू मामा वाला गाना आज के समय मे चारों तरफ़ दिखाई दे रहा है। क्या यू.पी.क्या बिहार,क्या मुम्बई और क्या दिल्ली। बस दो गोली और सामने वाला ढेर।गोली मारने वाले को तसल्ली की उसने अपना हिसाब चुका लिया। पहले तो हिन्दी फिल्मों मे जितना खून-खराबा देखने को मिलता था उतना तो अब आम जिंदगी मे रोज ही देखने को मिल रहा है। यू.पी.का नोएडा तो जैसे आजकल गोली मारे जाने के लिए ही न्यूज़ मे आ रहा है।तीन दिन पहले ११ बजे रात मे एक एयर होस्टेस की तीन मोटर साइकिल सवार गोली मार कर हत्या कर देते है । अभी ये न्यूज़ ख़त्म भी नही हुई थी की दिल्ली मे गोली मारकर व्यापारी की हत्या करने की ख़बर आ गई। अभी इन दो गोली मारे जाने की खबर आ ही रही थी की हरियाणा के दस साल के बच्चे की ख़ुद को गोली मारने की खबर आई।तभी दोपहर मे मुजफ्फर नगर मे एक कार मे एक लड़के और लड़की का मृत शरीर मिला और उन दोनों की मौत भी गोली लगने से हुई थी। अब ये हत्या थी या आत्महत्या ये तो पता नही। कभी आर्मी के तो कभी पुलिस के जवान या तो ख़ुद को गोली मार लेते है या दूसरे को गोली मार देते है। लगता है गन या पिस्तौल का लाईसेंस मिलना बड़ा आसान हो गया ...