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एक-दूसरे पर आक्षेप करना ही क्या ब्लॉगिंग है ?

कितने अफ़सोस की बात है कि हर कुछ दिन पर एक हंगामा होना ब्लॉग जगत का एक नियम सा बन गया है । हर बार हंगामा पिछले हंगामे से ज्यादा बड़ा होता है । कभी महिला ब्लॉगर तो कभी उनके द्वारा लिखे गए लेखों को लेकर हंगामा हो जाता है । और कल तो हद ही हो गयी । कल हमने कई दिन बाद जब ब्लॉग वाणी खोला तो हम कुछ चकरा से गए क्यूंकि कई पोस्टें समीर जी , ज्ञान जी और अनूप जी के नाम के साथ लिखी दिखी । और उन्हें पढ़कर अफ़सोस तो हुआ साथ ही बहुत दुःख भी हुआ । कि आखिर हम लोग किस तरह कि ब्लॉगिंग कर रहे है जिसमे एक - दूसरे पर कीचड उछालना क्या सही है । जब हमने २००७ मे ब्लॉगिंग शुरू की थी तब आज की तुलना मे ब्लोगर जरुर बहुत कम थे ( शायद ५०० - ६०० ) पर इस तरह का रवैया कभी एक - दूसरे के लिए नहीं देखा था । हाँ छोटी - मोटी नोक - झोक होती रहती थी जो ब्लॉगिंग और ब्लॉगर दोनों के लिए जरुरी और अच्छी होती थी । पर अब इस नोक - झोक का स्वरुप बद...

क्या करें लगता है हम भी लो फेज मे आ गए है .... :(

जब तक हम दिल्ली मे थे उस दौरान तो हमने बहुत ही कम लिखा था पर गोवा आने के बाद सोचा था कि अब पहले की तरह ही रोज लिखा करेंगे पर पता नही जब भी लिखने चलते है तो जैसे दिमाग बिल्कुल खाली सा लगता है (है या नही पता नही ) तो कुछ आधी-अधूरी पोस्ट लिख कर छोड़ देते है . तो कभी कुछ ब्लॉग पोस्ट पढ़कर या कभी-कभी बस ब्लौगवाणी को स्क्रोल करके देख लेते है और कम्पूटर बंद कर देते है । पिछले १०-१२ दिन बेटा आया हुआ था तो घूमने-फिरने मे लगे थे पर कल बेटा वापिस चला गया और कल शाम से भी कई बार पोस्ट लिखने की सोची पर फ़िर न जाने क्यूँ मन ही नही हुआ । ऐसा नही है कि विषयों की कमी हो गई है इतना कुछ है लिखने के लिए पर बस लिखते समय मन उचट जाता है । अब इस ८ लाइन की पोस्ट लिखने मे ही आधे घंटे से ज्यादा लगा दिया तो आप समझ ही सकते है । और आज से हम कोशिश करने वाले है कि पहले की तरह ही हम अपने ब्लॉग पर लिखना शुरू कर दे । :)