टेस्ट मैच देखा क्या 😊
क्रिकेट तो हमेशा से हम हिन्दुस्तानियों के दिल और दिमाग़ में बसता है । फिर वो चाहे साठ सत्तर वाला दशक रहा हो या अस्सी नब्बे का दशक रहा हो या अभी हाल का समय रहा हो । अब पुराने ज़माने में तो सिर्फ़ टेस्ट मैच ही होते थे पर तब भी कमेण्ट्री सुनने के लिये सबके मन में पूरा जोश रहता था । और उन दिनों हर आदमी कान में रेडियो लगाये नज़र आता था । और क्रिकेट कमेंट्रटर ( सुशील दोशी ,जसवंत सिंह ) जिस तरह हर बॉल के साथ दौड़ते हुये कमेंट्री करते थे वो भी लाजवाब होता था । जिसने सुना होगा उसे याद होगा कि वो किस तरह बोलते थे कि गावस्कर ने गेंद को बाउंड्री की तरफ़ मारा और गेंद बाउंड्री की तरफ़ जा रही है खिलाड़ी गेंद को पकड़ने के लिये दौड़ रहें है और ये गेंद बाउंड्री के पार चार रन के लिये । 🤓 बचपन में हमारे बाबा जाड़े में धूप में ( तब सिर्फ़ जाड़े में ही क्रिकेट होता था ) बैठकर क्रिकेट कमेंट्री सुना करते थे । जब भी इंडिया का कोई क्रिकेट टेस्ट मैच होता था तो बाबा पूरे दिन कान में टरांजिसटर लगाकर सुनते रहते थे और जब भी कोई चौका लगता या कोई आउट होता था तो खूब ज़ोर से चिल्लाते थे ये मारा चौका या क्...