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नेताओं की भी रिटायरमेंट एज होनी चाहिए .....

पिछले कुछ दिनों से देश मे लोक सभा चुनावों को लेकर सभी राजनैतिक पार्टियाँ सक्रिय हो गई है क्यूंकि ऐसी उम्मीद लग रही है कि चुनाव अप्रैल-मई तक हो जायेंगे । चुनाव मे टिकट के लिए हर नेता पूरी जद्दोजहद से जुट जाते है । चुनाव के लिए अगर टिकट न मिले तो या तो किसी दूसरी राजनैतिक पार्टी मे जा मिलते है या फ़िर अपनी ही नई पार्टी बना लेते है । हर कोई वो चाहे नेता हो या फ़िर जनता हो ,कहती है कि युवा पीढी को आगे आना चाहिए पर जब चुनाव मे टिकट देने की बात आती है तो वही सारे पुराने लोगों को टिकट दिया जाता है जो पिछले बीसियों साल से चुनाव लड़ते आ रहे है । वो चाहे भैरों सिंह शेखावत हो या चाहे प्रणब मुखर्जी हो या चाहे सोमनाथ चटर्जी हो या फ़िर अडवाणी जी या मन मोहन सिंह जी ही क्यों न हो । अर्जुन सिंह हो या करूणानिधि हो या बंसी लाल या फ़िर मोती लाल वोरा या मुरली मनोहर जोशी या अशोक सिंघल ही क्यूँ न हो ।ऐसे नेताओं की लिस्ट बहुत लम्बी है । लिखने लगे तो अंत नही होगा । अभी हाल ही मे हम एक मैगजीन मे पढ़ रहे थे की भैरों सिंह शेखावत जो उप राष्ट्रपति रह चुक...

क्या स्त्री-पुरुष एक-दुसरे के पूरक नही हो सकते है ?

स्त्री और पुरुष के बिना किसी भी समाज की कल्पना नही की जा सकती है । क्यूंकि ना तो केवल स्त्रियों और ना ही केवल पुरुषों से ही समाज या संसार चलता है । किसी भी इमारत की नींव हमेशा मजबूत होनी चाहिऐ क्यूंकि अगर नींव कमजोर होगी तो इमारत ढह जायेगी । और जिस समाज या संसार मे हम रहते है उसकी नींव स्त्री - पुरुष दोनो होते है । जिस तरह एक इमारत को खड़ा करने के लिए नींव और खम्भों की जरुरत होती है उसी तरह समाज और घर - परिवार रूपी इमारत को खड़ा करने मे स्त्री और पुरुष दोनो की बराबर की हिस्सेदारी होती है । जरा भी संतुलन बिगड़ता है तो इमारत के ढहने का खतरा हो जाता है । स्त्री को जहाँ जननी और अन्नपूर्णा कहा गया है वहीं पुरुष को पालनहार माना गया है । जननी इस शब्द से ही ज्ञात होता है कि एक नए जीवन को इस संसार मे लाना यानी जन्म देना । और जननी के साथ ही जन्मदाता को हम भूल नही सकते है क्यूंकि किसी भी नए जीवन को संसार मे लाने मे जननी और ...