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खुदा के लिए (In the name of god )

तीन दिसम्बर को ईफ्फी २००७ ख़त्म हो गया। यूं तो हमने पहली ही सोचा था की हम ईफ्फी मे देखी हुई कुछ फिल्मों के बारे मे यहां लिखेंगे फिर सोचा कि नही लिखेंगे कि कहीं आप लोग बोर न हो जाएँ । पर कल शास्त्री जी ने अपनी टिप्पणी मे हमे अच्छी फिल्मों के बारे मे लिखने के लिए कहा इसीलिए हम कुछ फिल्मों का जिक्र करेंगे । तेईस से तीन के बीच मे हमने करीब २०-२५ फिल्में देखी। ये तो जाहिर सी बात है कि इतनी फिल्मों मे से हर पिक्चर तो अच्छी हो नही सकती है पर फिर भी कुछ फिल्में बहुत पसंद आई(जिनका हम जिक्र करते रहेंगे) जिनमे से खुदा के लिए एक है । ये पिक्चर पाकिस्तान के डाइरेक्टर शोएब मंसूर ने बनाई है।इस फिल्म की खास बात ये है की इस फिल्म ने एक ऐसे विषय को उठाया है जिस पर आज तक किसी ने भी कुछ कहने की हिम्मत नही की है। की किस तरह एक साधारण लड़का संगीत और अपने परिवार को छोड़कर तालिबानी बन जाता है। फिल्म एक छोटे और सुखी पाकिस्तानी परिवार की है । परिवार मे सबको आजादी है कि वो अपनी जिंदगी अपने ढंग से जियें। परिवार मे दो बेटे है और दोनो गायक है। ...

ईफ्फी २००७ गोवा

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जी हाँ कल से गोवा मे भारत का ३८ वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह शुरू हुआ है। जिसमे देश-विदेश से कुल मिला कर करीब २०० फिल्में दिखाई जायेंगी। गोवा मे पिछले चार सालों से ईफ्फी का आयोजन होता आ रहा है और आगे भी गोवा मे ही ईफ्फी होगा क्यूंकि गोवा को ईफ्फी का स्थाई आयोजक बना दिया गया है। ।कल गोवा के कला अकेडमी मे हुए इस उदघाटन समारोह के मुख्य अतिथि शाह रुख खान थे।दक्षिण की हिरोइन प्रिया मणि ,प्रिय रंजन दास मुंशी,गोवा के मुख्य मंत्री,गोवा के मुख्य सचिव ,गोवा के मेयर ,फिल्म फेडरेशन की डाइरेक्टर, आदि लोग इस उदघाटन समारोह मे मौजूद थे। पिछले की तरह इस साल नाच-गाना तो नही हुआ पर भाषण पिछले साल की तरह ही हुए। इस समारोह की शुरुआत मे सभी ने भाषण दिए। भाषण पर हम यहां प्रिय रंजन दास मुंशी के भाषण का जिक्र करना चाहेंगे।( बस जरा चूक हो गयी कि हम रेकॉर्ड नही कर पाए) जिसमे उन्होंने शुरुआत मे तो फिल्म समारोह पर बोला और फिर उन्होने मुख्य अतिथि शाह-रुख खान के बारे मे जो बोलना शुरू किया की रुकने का नाम ही नही लिया कि शाह रुख खान एक महान हस्ती है किंग खान है । और इन्होंने अपना कैरियर फौजी से शुरू किया औ...