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अमिताभ बच्चन को लेकर इतनी नाराजगी क्यों ?

कल से सभी न्यूज़ चैनल यही खबर दिखा रहे है की मुंबई के बांद्रा सी लिंक के उदघाटन मे अमिताभ बच्चन कैसे गए और उन्हें किसने बुलाया । अरे भाई अगर चले भी गए तो ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा। आखिर अमिताभ बच्चन का अपना भी तो कोई वजूद है और फिर उन्हें इस सदी का महानायक भी कहा जाता है। तो अगर सदी के महानायक पुल के उदघाटन मे चले गए तो इसमें कांग्रेस को अपना इतना अपमान क्यूँ महसूस हो रहा है। और फिर जब कांग्रेस के नेता और मंत्री उससे हाथ मिलाने मे जरा भी नहीं सकुचा रहे थे तो फिर बाद मे इस बात से मुकर जाना कि अमिताभ बच्चन को उन्होंने नहीं बुलाया था ,कहाँ की शराफत है। दुनिया भर मे अमिताभ बच्चन को लोग इतना सम्मान देते है पर अपने ही देश मे इस तरह से अपमान होना ,कहाँ तक सही है।

आ गई प्यारी सी छोटी सी nano ....

अब जैसा की टाटा ने वादा किया था हिन्दुस्तान की जनता को लखटकिया कार देने का तो वो इंतजार ख़त्म हुआ और टाटा ने तीन दिन पहले अपना वादा पूरा किया । मुंबई मे पूरे शान-ओ- शौकत से nano को लॉन्च किया गया । और इस कार के एक नही बल्कि ३ नए मॉडल लॉन्च किए गए है । और हर मॉडल का दाम और सुविधाएं (फीचर्स)अलग -अलग है । वैसे टाटा ने एक लाख की कार का वादा किया था पर सबसे कम दाम वाली कार एक लाख बारह हजार की है (मतलब लाख से ऊपर) जिसमे न तो ए.सी.है और न ही स्टीरियो है पर हाँ इन सबके लिए कार मे स्पेस दिया हुआ है जिससे अगर कार लेने वाला चाहे तो बाद मे अपनी सुविधा से ए.सी.और स्टीरियो लगवा सकता है । बाकी के दूसरे मॉडल जैसे CX और LX मे जहाँ दाम ज्यादा है वहीं इन मॉडल मे ए.सी और स्टीरियो के साथ ही साथ कुछ और नए फीचर्स भी है । कार के रंग से भी जैसे अगर मेटलिक है तो कार का दाम ज्यादा हो गया है । इसके अलावा हर शहर मे भी nano का दाम अलग है । और सबसे महँगी एक लाख पचासी हजार (१.८५ )की होगी । जितना कुछ nano के बारे मे पढ़ा और देखा है उससे लगता है ये nano काफ़ी हलकी-फुलकी कार है पर sturdy हो सकती है...

राज की सेना का देश के प्रति जज्बा .....

२६ नवम्बर को जब मुंबई रेलवे स्टेशन ,ताज होटल,ओबराय होटल , नरीमन हाउस और कामा हॉस्पिटल मे आतंकी हमले हो रहे थे और उस समय राज की सेना मुंबई मे कहाँ थी किसी को भी नही पता था यहाँ तक की उस आतंकी हमले के पंद्रह दिन बाद भी कहीं भी राज की सेना और बाल ठाकरे की सेना का कहीं कुछ अता- पता नही था । पर फ़िर अचानक एक दिन बाल ठाकरे जी जागे और मुंबई हमले के आतंकी कसाब को सरेआम फांसी की अपील की । अब जब चाचाजी ने अपील की तो भला भतीजे जी कैसे पीछे रहते उनकी सेना भी हरकत मे आ गयी और जो वकील कसाब का केस लड़ने के लिए तैयार हुआ था उसके घर जाकर राज की सेना ने तोड़-फोड़ कर अपने जौहर का प्रदर्शन किया ।और आख़िर मे उस वकील ने अपना नाम वापिस ले लिया जबकि सभी को पता है कि अगर कोई वकील नही होगा तो कसाब का केस कमजोर हो जायेगा । और इसके लिए c.j.i. को स्टेटमेंट देना पड़ा तब कहीं जाकर कसाब के लिए वकील हुआ । और आज अखबार मे ख़बर पढ़ी कि ( अब जब राज की सेना जाग गई है तो )कल उनकी सेना ने एक पाकिस्तानी कॉमेडियन को शो और देश से बाहर निकालने का बीड़ा उठाया और उसे बाहर कर दिया । काश राज की सेना २६ नवम्बर ...

मुंबई को नजर लग गई है ...

मुंबई जिसे महानगरी , मायानगरी , सपनों की नगरी और न जाने क्या - क्या कहा जाता रहा है जहाँ धर्म - जाति या प्रांत के लिए नही बल्कि व्यक्ति को उसके नाम और काम से जाना जाता रहा है । पर अब ऐसा नही है अब व्यक्ति को उसके नाम और गाँव के नाम से जाना जा रहा है । जनवरी २००८ की शुरुआत से ही मुंबई मे कुछ न कुछ ऐसा घटता चला आ रहा है जिसे देख और पढ़ कर लगता है कि मुंबई को नजर लग गई है । अब इस प्रदेश की लड़ाई को ही देख लीजिये धीरे - धीरे कितना विकराल रूप लेती जा रही है । मुंबई जहाँ के लिए कहा जाता रहा है कि वहां धर्म - जात - प्रदेश को महत्त्व नही दिया जाता है अब उसी मुंबई मे इन्ही सब बातों के लिए लोगों को मारा - पीटा जाता है । कुछ दिन पहले शुरू हुई प्रदेश की लड़ाई भी अब दिनों दिन बढती ही जा रही है । चंद रोज पहले railways की परीक्षा देने गए छात्रों के साथ जो कुछ हुआ उस के बारे मे तो हम सभी जान गए है कि किस बुरी तरह से छात्रों क...

ठक-ठक कौन है --ठाकरे

ठाकरे अब वो चाहे राज ठाकरे हो यस उद्धव ठाकरे हो या फ़िर बाला साहेब ठाकरे हो रोज ही इन तीनों मे से कोई ना कोई उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ कुछ ना कुछ बोलता या लिखता रहता है। फरवरी मे जो राज ठाकरे ने उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ अपना भाषण दिया उसके बाद मुम्बई मे जितनी तोड़-फोड़ और मार पीट हुई वो हम सभी जानते है।उस दिन से आज तक ठाकरे का उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ बोलना जारी है। राज ठाकर े अमिताभ बच्चन को कहते है कि वो यू.पी को अपना मानते है तो इसमे ग़लत क्या है. कोई भी इंसान जहाँ वो पैदा हुआ और बड़ा हुआ है क्या उस जगह को कभी भूल सकता है। कभी नही। वो हमेशा अपनी मिटटी से जुडा रहता है।आप चाहे मुम्बई मे रहे या विदेश मे अपनी जगह को भूल नही सकते है। ठाकरे अपने आप को महाराष्ट्र और मराठियों का बचाने वाला कहते है पर क्या कभी किसी ने ने ये सोचा कि क्या सारे मराठी मानुष भी वही सोचते है जैसा कि राज ठाकरे सोचते है।अब राज की तरह अमिताभ बच्चन कम से कम यू.पी के लोगों को भड़काने का काम नही कर रहे है। राज अपनी मुम्बई से प्यार करते है ये बहुत अच्छी बात है । जब राज ठाकरे ने अमिताभ बच्चन को मुम्बई से ज्यादा यू...

आख़िर आमिर खान ने अवार्ड ले ही लिया.

आमिर खान और अवार्ड !! इतने सालों से आमिर खान किसी भी अवार्ड फंक्शन मे ना तो जाते थे और ना ही कोई अवार्ड लेते थे।वो चाहे फ़िल्म फेयर अवार्ड हो या ज़ी सिने अवार्ड हो या फ़िर आई फा अवार्ड ही क्यों ना हो। आमिर ने अपना उसूल बना रखा था इस तरह के अवार्ड फंक्शन से दूर रहने का। पर कल आमिर ने अपने उसूल को तोड़ा । क्या कहा आपको यकीन नही हो रहा है तो इस लिंक पर क्लिक करिये और ख़ुद देखिये और पढिये । और कल आमिर ना केवल अवार्ड फंक्शन मे गए बल्कि ख़ुद ही अवार्ड भी लिया । आमिर खान को ये स्पेशल अवार्ड उनके हिन्दी सिनेमा मे किए गए योगदान के लिए दिया गया है । कल मुम्बई मे हुए एक समारोह मे लता मंगेशकर ने मास्टर दीनानाथ मंगेशकर अवार्ड आमिर खान को दिया ।और अवार्ड लेते हुए आमिर भी खुश ही लग रहे थे।

ये कैसी सोसाइटी ....

मुम्बई मायानगरी की एक बड़ी ही दिल मे हलचल मचाने वाली न्यूज़ देखी । मुम्बई की एक ग्रुप हाऊसिंग सोसाईटी जहाँ सारे घरों मे हिंदू जैन परिवार रहते है उसी सोसाइटी मे एक मुस्लिम परिवार भी रहता है । पर सोसाइटी के लोगों ने इस मुस्लिम परिवार के घर का पानी और बिजली बंद कर रक्खी है । पिछले २ सालों से ये परिवार लालटेन और मोमबत्ती की रौशनी से अपने घर मे उजाला करता है । और मुनिस्पल्टी के नल से जरी कैन मे पानी भर - भर कर अपने घर लाता है । वो भी सीढियों के रास्ते क्यूंकि लिफ्ट मे तो उनको चलने की मनाही है । हफ्ते मे एक दिन वो अपने किसी दूसरे रिश्तेदार के घर जा कर परिवार के कपड़े धोते है । इस मुस्लिम परिवार का कहना है कि बिजली - पानी के लिए उन्होंने १ . २५ लाख का डिपॉजिट भी सोसाइटी को ९ महीने पहले दे दिया था पर आज तक ना तो पानी और ना ही बिजली उनके घर मे आई । इस परिवार को सोसाइटी से बाहर करने के लिए भी बाकी दूसरे परिवार लगे हुए ह...

आत्महत्या और शिक्षा प्रणाली

मार्च का महीना यानी दसवीं और बारहवीं के बोर्ड के इम्तिहान का समय । हर साल फरवरी और मार्च के महीने मे छात्र -छात्राओं द्वारा आत्महत्या की खबरें पढने -देखने को मिलती है। बच्चों के कोमल दिमागमे पढ़ाई के साथ-साथ मे बोर्ड और फ़ेल और पास होने को लेकर इतना भय रहता है की कई बार बच्चे ऐसी परिस्थितियों से छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या का सहारा ले लेते है। ऐसे कदम उठाने मे बच्चे का कोई दोष नही होता है बल्कि माँ-बाप और स्कूल वाले ही उन्हें एक तरह से ऐसा करने को उकसाते है। आज के समय मे जहाँ हर कोई ९० %और १०० %की बात करता है वहां ६०-७०और ८० % वालों की कोई पूछ नही है। पर क्या हमारी शिक्षा प्रणाली इसके लिए जिम्मेदार है।अभी दो-तीन दिन पहले संसद मे भी इस विषय पर चर्चा हुई थी और ये कहा जा रहा है कि इम्तिहान का सिस्टम ही खत्म कर देना चाहिए।पर क्या इमिहान ख़त्म कर देने से सब समस्या हल जायेगी। खैर अगर हम अपने समय की बात करें तब तो हम लोगों के पास(यू.पी.बोर्ड मे ) ओप्शन होता था आर्टस और साईंस का और अपनी पसंद के विषय पढने का।कोई भी पाँच विषय लिए जा सकते थे। उस समय ये नही होता था की सोशल साईंस मे च...