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आख़िर आमिर खान ने अवार्ड ले ही लिया.

आमिर खान और अवार्ड !! इतने सालों से आमिर खान किसी भी अवार्ड फंक्शन मे ना तो जाते थे और ना ही कोई अवार्ड लेते थे।वो चाहे फ़िल्म फेयर अवार्ड हो या ज़ी सिने अवार्ड हो या फ़िर आई फा अवार्ड ही क्यों ना हो। आमिर ने अपना उसूल बना रखा था इस तरह के अवार्ड फंक्शन से दूर रहने का। पर कल आमिर ने अपने उसूल को तोड़ा । क्या कहा आपको यकीन नही हो रहा है तो इस लिंक पर क्लिक करिये और ख़ुद देखिये और पढिये । और कल आमिर ना केवल अवार्ड फंक्शन मे गए बल्कि ख़ुद ही अवार्ड भी लिया । आमिर खान को ये स्पेशल अवार्ड उनके हिन्दी सिनेमा मे किए गए योगदान के लिए दिया गया है । कल मुम्बई मे हुए एक समारोह मे लता मंगेशकर ने मास्टर दीनानाथ मंगेशकर अवार्ड आमिर खान को दिया ।और अवार्ड लेते हुए आमिर भी खुश ही लग रहे थे।

हो गई ओलम्पिक मशाल की दौड़

ओलम्पिक मशाल और तिब्बतियों के विरोध के बीच मे ओलम्पिक मशाल का भारत मे आना और सही सलामत ओलम्पिक दौड़ का आयोजन हो जाना भारत सरकार इसे एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर मान रही है । पर क्या वाकई ये ओलम्पिक दौड़ का आयोजन सफ़ल रहा है । अब ये तो जानकार लोग ही बता पायेंगे । ओलम्पिक मशाल की दौड़ के बराबर ही तिब्बतियों ने भी एक मशाल रैली निकाली थी । कल जिस दौड़ को दोपहर एक बजे शुरू होना था वो शाम को ४ बजे शुरू हुई । और उसपर भी इतनी सुरक्षा जितनी तो शायद देश के प्रधान मंत्री या राष्ट्रपति की भी नही होती । तकरीबन १७००० सुरक्षा कर्मी लगाए गए थे । खैर मशाल की दौड़ जब शुरू हुई और जो देखने को मिला उसमें ना तो खेल भावना दिखी और ना ही लोगों या जनता मे इस ओलम्पिक मशाल की दौड़ को देखने के लिए कोई उत्साह दिखा । वैसे लोगों मे अगर उत्साह होता भी तो बेचारे सिर्फ़ सुरक्षा कर्मी को ही देख पाते क्यूंकि मशाल को देख पाना तो नामुमकिन ही था । तीन ...

अप्पू (घर)अब चला जायेगा

अप्पू घर इस नाम से ना केवल दिल्ली वाले अपितु दूसरे प्रदेश और शहरों के लोग भी वाकिफ है।अप्पू घर amusement park जो कि एक तरह से दिल्ली की पहचान सा बन गया था अब ना केवल अपनी पहचान बल्कि अपना अस्तित्व ही खोने जा रहा है।अप्पू घर जिसे बने २३ - २४ साल हो गए है पर अभी तक इतने सालों के बाद भी अप्पू घर घूमने वालों के जोश मे कोई कमी नही आई । किसी भी रविवार को अप्पू घर के बाहर लोगों की भारी भीड़ देखी जा सकती थी।यहां झुला झूलने के लिए लोग बिना सर्दी गर्मी कि परवाह किए घंटों लाइन मे खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते देखे जा सकते थे। ( थे इसलिए क्यूंकि बीते रविवार यानी १७ फरवरी से अप्पू घर बंद हो रहा है ) अप्पू घर से तो हमारी भी बहुत सारी यादें जुड़ी हुई है। जब बेटे छोटे थे तो अक्सर ही अप्पू घर जाते थे।और घंटों बच्चे झुला झूलते थे जैसे मोनो रेल , स्माल कार , उड़न तश्तरी , बाईक्स , और ना जाने क्या - क्या। और पिछले २३ - २४ ...