याद है स्टीरियो और रिकार्ड प्लेयर
समय कैसे और कितनी जल्दी बदलता है । हर वो चीज़ जो एक समय में बहुत पॉपुलर होती है वो धीरे धीरे बिलकुल ग़ायब हो जाती है । अब स्टीरियो और रिकार्ड प्लेयर को ही देखिये । एक समय था जब ये घरों के ड्राइंग रूम की शोभा हुआ करते थे । स्टीरियो के साथ बड़े बड़े स्पीकर भी होते थे जिनसे गाना और म्यूज़िक बिलकुल अलग अलग सुनाई देता था । उस समय ये बहुत ही बड़ी बात मानते थे । एसपी और एल पी रिकार्ड्स खूब बिका करते थे । फ़िल्मी , ग़ैर फ़िल्मी ,भक्ति के ,ग़ज़लें वग़ैरह । हरेक की पसंद के रिकॉर्ड हुआ करते थे । हम लोगों के ड्राइंग रूम में भी बहुत समय तक स्टीरियो बड़ी शान से विराजमान रहा था । मम्मी नवरात्रों में मुकेश की गाई हुई रामचरितमानस सुनती तो वहीं हम बहनें फ़िल्मी गीत सुनते ,पापा मधुशाला सुनते और भइया ज़्यादातर इंगलिश गाने और वो भी खूब तेज़ आवाज़ में ही सुनते थे । वैसे हम भी हमेशा थोड़ा तेज़ आवाज़ में ही म्यूज़िक सुनना पसंद करते है । 😃 फिर आया टेप रिकॉर्डर । वैसे टेप रिकॉर्डर के आने के बाद भी स्टीरियो पर गाने सुनने का मजा ही अलग था । पर वही समय बदला और धीरे धीरे ना जाने कब सटीरियो को छोड़कर टेप रि...