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Daryaganj in aerocity

Daryaganj in aerocity पढ़कर चौंकिए मत ।  दरअसल में daryaganj एक रेस्टोरेंट का नाम है जो कि एयरोसिटी में है ।  यूं तो एक दो बार हम लोगों ने वहां से खाना मंगाया है ( home delivery ) और चूंकि हम लोगों को वहां का खाना बहुत पसंद आया था तो सोचा कि इस बार अपनी शादी की वर्षगांठ के मौके पर वहीं खाना खाने जाया जाए। बस फिर क्या था पिछले हफ्ते यानी कि बाईस अक्टूबर को प्लान के मुताबिक     अपनी शादी की वर्षगांठ पर हम सपरिवार दरियागंज पहुंच गए। Aerocity का भी नाम तो बहुत सुन रक्खा था पर कभी जाने का मौका ही नही मिला था । एयरोसिटी के world mark में Daryaganj रेस्टोरेंट है ।  वैसे इसकी entry थोड़ी confusing सी लगी । जैसे ही अंदर जाते है तो थोड़ी अंधियारी सी गैलरी( मतलब बहुत dim light) पड़ती है और bar और pub दिखते है। वहां से जैसे ही थोड़ा और अंदर जाते है तो food court नज़र आता है  और वहीं daryaganj रेस्टोरेंट भी दिखाई देता है । अंदर से daryaganj को पुरानी नायाब फोटो और चीजों से सजाया हुआ है । Seating area अच्छा है । बस सर्विस थोड़ी ढीली थी ।  हम लोगों ने अपनी पसंद ...

भईया बिना राखी

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सपने में क्या कभी ऐसा ख्याल भी नहीं आया था कि राखी पर भइया हम लोगों के साथ नहीं होंगें ।   जब से होश संभाला है हमेशा भइया की कलाई पर राखी बांधते आये है । बचपन से हर राखी पर भइया हम सभी बहनों को कोई ना कोई सरप्राइज़ देते ही रहते थे । कभी राखी के दिन हम सबको राखी बाँधने के लिये इंतज़ार करवाना,  तो कभी गिफ़्ट देने में तंग करना । और हमारा हर रक्षा बंधन पर रोना (शगुनुआ के तौर पर ) । कभी गिफ्ट के लिए तो कभी रक्षा बंधन का गाना  गाते हुए । पिछले साल २०२० में कोरोना की वजह से राखी पर हम सब भाई बहन मिल नहीं पाये थे पर वीडियो कॉल के ज़रिये हम सभी ने राखी मनाई थी ।    पर  क्या पता था कि ये हम बहनों की भईया के साथ में आख़िरी राखी है । जहां पहले हर राखी हम सब बहनें अपने अपने पसंदीदा रक्षाबंधन के गाने गाते थे  भईया मेरे राखी के बंधन को निभाना बहनों ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है मेरे भईया मेरे चंदा मेरे अनमोल रत्न ये राखी बंधन है ऐसा  आज भी हम बहनें तो एक साथ इकट्ठा हुए है पर तुम हम लोगों के साथ नहीं हो ।   आज इस रक्षा ब...

बधाई अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज सुबह से लगातार वहाटसऐप पर ढेरों मीम और मैसेज आ रहें है । हमें क्या आप सबको भी भर भर कर वीमेंस डे के संदेश आ रहे होंगें । कुछ तो ऐसे कि पढ़कर हँसी आ जाये तो वहीं कुछ नारी शक्ति को दर्शाने वाले तो कुछ नारी विशेष को दर्शाने वाले । वैसे कोरोना और लॉकडाउन के दौरान नारी शक्ति का हर रूप हम सबमें बख़ूबी दिखाई दिया था । ना कोई काम रूका और ना ही कोई काम कम हुआ था । बल्कि काम चौगुना हो गया था । पर मजाल है जो कोई गिला शिकवा किया हो । बल्कि उस लॉकडाउन के समय तो हम सभी की विलक्षण प्रतिभा ही उभर कर सामने आई थी । और ऐसा उभरी कि लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद भी बरकरार है । 😁 तो चलिये अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की हम सभी को बहुत बहुत बधाई ।

टेस्ट मैच देखा क्या 😊

क्रिकेट तो हमेशा से हम हिन्दुस्तानियों के दिल और दिमाग़ में बसता है । फिर वो चाहे साठ सत्तर वाला दशक रहा हो या अस्सी नब्बे का दशक रहा हो या अभी हाल का समय रहा हो । अब पुराने ज़माने में तो सिर्फ़ टेस्ट मैच ही होते थे पर तब भी कमेण्ट्री सुनने के लिये सबके मन में पूरा जोश रहता था । और उन दिनों हर आदमी कान में रेडियो लगाये नज़र आता था । और क्रिकेट कमेंट्रटर ( सुशील दोशी ,जसवंत सिंह ) जिस तरह हर बॉल के साथ दौड़ते हुये कमेंट्री करते थे वो भी लाजवाब होता था । जिसने सुना होगा उसे याद होगा कि वो किस तरह बोलते थे कि गावस्कर ने गेंद को बाउंड्री की तरफ़ मारा और गेंद बाउंड्री की तरफ़ जा रही है खिलाड़ी गेंद को पकड़ने के लिये दौड़ रहें है और ये गेंद बाउंड्री के पार चार रन के लिये । 🤓 बचपन में हमारे बाबा जाड़े में धूप में ( तब सिर्फ़ जाड़े में ही क्रिकेट होता था ) बैठकर क्रिकेट कमेंट्री सुना करते थे । जब भी इंडिया का कोई क्रिकेट टेस्ट मैच होता था तो बाबा पूरे दिन कान में टरांजिसटर लगाकर सुनते रहते थे और जब भी कोई चौका लगता या कोई आउट होता था तो खूब ज़ोर से चिल्लाते थे ये मारा चौका या क्...

हमारे वैक्सीन लगवाने का ऐतिहासिक दिन

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सीनियर सिटीजन होने का आज पहली बार मजा मिला ।😀 अब यूं तो हम पिछले साल ही सठिया गए थे पर corona के चलते सठियाने का कुछ ज्यादा लुत्फ़ नही उठा पाए थे । और हमारे सारे plan धरे के धरे रह गए थे । वैसे पिछले साल जब हम अपना सठियाने वाला जन्मदिन मनाने उदयपुर गए थे और वहां एक जगह टिकट लेने पर जब काउंटर वाले ने बेटे से पूछा की कोई सीनियर सिटीजन है तो छोटे बेटे ने कहा कि नहीं ।   तो जब उसने हम लोगों को ये बताया तो बड़ा बेटा हंसते हुए बोला कि अरे हम लोग तो यही सेलिब्रेट करने (60 yrs )आए है ।  खैर उस समय तो नही पर आज सठियाने का फायदा हुआ । अरे भाई covid की vaccine जो आज यानि पहली मार्च दो हजार इक्कीस (1.3.2021) से साठ साल के ऊपर वालों को लगनी शुरू हुई तो जैसे एक ज़माने में हम पिक्चर का फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखते थे वैसे ही आज हमने vaccine का फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखा ।😁 मतलब COVISHIELD Vaccine लगवा ली । वैसे तो आप सभी जानते है कि vaccine लगवाने के लिए सबसे पहले co win की एप या वेबसाइट पर जा कर रजिस्ट्रेशन करना होता है ।  तो सुबह जब वेबसाइट पर जाकर रजिस्टर करना शुरू किया तो जब भी रजिस्टर...

भूकम्प और हम 😁

कल रात में दिल्ली सहित कई जगहों पर भूकम्प आया था । और काफ़ी अच्छा ख़ासा भूकम्प था । और इसका एहसास हम लोगों को भी हुआ था । हम लोग ड्राइंग रूम में थे और मूबी पर फ़िल्म देख रहे थे कि अचानक लगा मानो किसी ने सोफ़े को हल्का सा धक्का दे दिया हो । और ऐसा महसूस होते ही हम बड़ी ज़ोर स चिल्लाये कि अरे भूकम्प । पतिदेव बोले कि क्या भूकम्प आया है । तो हमने कहा हाँ , देखो पंखा और लैम्प शेड हिल रहें है । और ऐसा कहते हुये हमने वीडियो बनाना शुरू कर दिया । 🤓 फिर हमने मेन डोर खोला पर तब एक दो मिनट के लिये लगा कि सब कुछ रूक गया है पर तभी एक बार फिर से ज़मीन हल्की सी हिलती हुई महसूस हुई तब तक बडा बेटा भी कमरे से बोलता हुआ आया कि अभी भी भूकम्प है । तो हमने हाँ कहते हुये छोटे को आवाज़ लगाई । क्यों कि वो फोन पर बात कर रहा था । और एक बार फिर से लैम्प शेड वग़ैरा हल्के हल्के से झूमने लगे थे । और हम दोबारा वीडियो बनाने लग गये । तो पतिदेव बोले क्या तुम हर समय वीडियो बनाने लगती हो । अब हम भी क्या करें । डर को भगाने के लिये कुछ तो करना होगा ना । 😳 अब आप भी कहेंगें कि भूकम्प में डर कर वीडियो बनाने...

टैक्नॉलजी का ऐसा कमाल

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कल हमारे भइया ने इलाहाबाद की एक फोटो शेयर की जिसे देखकर हम आश्चर्य में आ गये । कि अरे क्या ऐसा भी हो सकता है । ये जो फोटो है , ये उस जगह की है जहाँ दो दिन पहले तक मंदिर हुआ करता था पर अब वहाँ मंदिर नहीं है । ऐसा सुना है कि वहाँ से मंदिर को कहीं और शिफ़्ट कर दिया गया है क्योंकि वहाँ पर फ़्लाई ओवर बनना है । कुछ नहीं तो कम से कम पचास साल से ज़्यादा पुराना मंदिर तो रहा ही होगा । वो हम इसलिये कह रहें हैं क्यों कि जब हम नौ -दस साल के रहे होगें तब से इस मंदिर को देख रहें है । हमने हमेशा से इस पीपल के पेड़ की छांव में मंदिर देखा है और आते जाते भगवान के आगे नतमस्तक भी होते थे । और कैसे रातों रात में मंदिर को वहाँ से कहीं और शिफ़्ट कर दिया गया ये तो टैक्नॉलजी का ही कमाल होगा क्यों कि ना केवल पूरा का पूरा मंदिर बलकि वहाँ जो भी चारों ओर बनी दीवार ग्रिल वग़ैरा का मलबा रहा होगा वो भी पूरी तरह से साफ़ । आश्चर्य है कि वहां ना कोई गड्ढा ना ही उबड़ खाबड़ जमीन । और अब आलम ये है कि इस जगह को देखकर तो कहा ही नहीं जा सकता है कि वहाँ कभी मंदिर भी था ।

क्या कहता है ये विज्ञापन

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परसों पश्चिम विहार से लौटते हुए हमने एक बैटरी रिक्शा के पीछे ये विज्ञापन देखा और फोटो ले ली । और रास्ते भर हम इस विज्ञापन में लिखे हुए संदेश के बारे में सोचते रहे । और ये हमारी समझ से परे था । क्यूंकि अगर किसी का सोना गिरवी रक्खा  है तो वो कौन सा सोना बेचकर गिरवी रक्खा हुआ सोना छुड़ाएगा । और अगर किसी के पास इतना सोना है तो भला वो सोना गिरवी क्यूं रक्खेगा । हम थोड़ा कंफ्यूज हो गए है ।🙄 आप लोगों का क्या सोचना है इस विज्ञापन के बारे में ।

कभी भुनी हुई मूँगफली को धोकर खाया है

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आप भी सोच रहें होंगें कि भला भुनी हुई मूँगफली को कौन धोकर खाता है । हमने खाई है। 😁 दरअसल में क़िस्सा यूँ है कि अब आजकल तो कोरोना के चलते हर सामान वो चाहे फल सब्ज़ी हो या चाहे राशन , सभी चीज़ों को या तो सैनिटाइज किया जाता है या फिर पानी से धोया जाता है । तो हुआ यूँ कि हमने कुछ फल सब्ज़ियों के साथ जाड़े का मेवा यानि भुनी हुई मूँगफली भी मँगाई थी । और सब सामान बैग में ही था । जब हमारी पार्वती ( हैल्पर ) आई और बैग देखकर उसने पूछा दीदी सब फल सब्ज़ी धोकर रखना है । तो हमने हाँ कहा । और हम कुछ काम करने कमरे में चले गये । हालाँकि बीच में उसने हमें आवाज़ लगाई कि दीदी सब कुछ धोकर रखना है । तो हमने भी कमरे से ही बोला कि हाँ सब कुछ धोकर डलिया में रख दो । हम भूल गये थे कि फल और सब्ज़ियों में मूँगफली का पैकेट भी है । बस फिर क्या था पार्वती ने पैकेट फाड़ा और उस भुनी मूँगफली को पानी से धोकर डलिया में सब के साथ रख दिया । और अपना काम करके वो घर चली गई । बाद में जब हम अपना काम ख़त्म करके आये और मूँगफली खाने के लिये पैकेट ढूँढने लगे तो हम समझ नहीं पाये कि आख़िर मूँगफली का...

नाम में क्या रक्खा है

आजकल नाम बदलने का रिवाज कुंछ बढ़ता सा लग रहा है । वैसे न्यूज़ पेपर के एक कॉलम में पढ़ने को मिलता है कि फ़लाँ ने अपना नाम बदल लिया है । या फ़लाँ ने अपना सरनेम बदल लिया है । वैसे कभी कभी दसवीं में भी लोग अपना नाम बदल लेते है और कभी कभी शादी के बाद लड़कियों का नाम बदल दिया जाता था ( और शायद है )जो कि किसी का भी निजी फ़ैसला हो सकता है । समय बदला और फिर सड़कों और शहरों के नाम बदले जाने लगे । चलो भाई ये भी ठीक है । पर लो अब तो फल का नाम भी बदलना शुरू हो रहा है । सुना तो होगा ना कि ड्रैगन फ़्रूट का नाम अब बदलकर कमलम कर दिया गया है । क्योंकि ये एक चाइनीज़ फल है और नाम भी । और क्या ड्रैगन नाम वाले रेस्टोरेंट का भी नाम बदला जायेगा मसलन गोल्डन ड्रैगन को क्या अब सुनहरा कमलम कहेंगें । 😁😁 और तो और तो हम ये सोच रहें है कि अब चीनी को चीनी ही कहें या इसके नये नामकरण का इंतज़ार करें । 😝

बायोमेट्रिक्स है तो क्या फ़िकर

अब इस कोरोना के चलते सीनियर सिटिज़न को बैंक या ऑफिसों में जाकर जीवन प्रमाण सर्टिफ़िकेट देना भी ख़तरे से ख़ाली नहीं है । क्योंकि कई बार सारी एहतियात बरतने के बाद भी लोग कोरोना से संक्रमित हो जाते है । हालाँकि अब तो कोरोना से लोग कम डरते है । पर दिसम्बर तक तो डरते ही थे । अक्टूबर से हमारे यहाँ भी पतिदेव को अपना ये सर्टिफ़िकेट देने के लिये मैसेज आता रहता था कि आप अपना जीवन प्रमाण सर्टिफ़िकेट जमा करा दीजिये । और नवम्बर बीतते बीतते तो घर में अकसर ही ये बात होती कि लाइव सर्टिफ़िकेट देने के लिये बैंक जाना है । कब और कैसे जायें । पर उन दिनों कोरोना का क़हर और डर और फिर बैंक सिर्फ़ इस सर्टिफ़िकेट के लिये जाना ,कोई बहुत अच्छा डिसिजन नहीं लग रहा था । जब भी मैसेज आता तो बैंक जाने के विचार पर घर में बात होती कि सर्टिफ़िकेट देना भी ज़रूरी है । हालाँकि उस समय दिसम्बर तक डेट बढ गई थी । फिर बेटे ने सर्च किया तो पता चला कि ये सर्टिफ़िकेट ऑनलाइन भी दिया जा सकता है । और इसके लिये ये ज़रूरी नहीं है कि आप ख़ुद पर्सनली बैंक या ऑफ़िस जाकर ही ये सर्टिफ़िकेट दीजिये । और इसके लिये सरकार द्वारा ब...

मकर संक्रान्ति यानि खिचड़ी

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सबसे पहले तो सभी को मकर संक्रान्ति यानि खिचड़ी की हार्दिक शुभकामनायें । 🙏 ऊपर खिचड़ी पढ़कर कहीं आप कन्फ़्यूज तो नहीं हो गये । अरे वो क्या है ना कि आज के दिन यानि मकर संक्रान्ति के दिन हम लोगों के यहाँ छिलके वाली उरद दाल की खिचड़ी और तैहरी ही बनती है । इलाहाबाद में तो आज के दिन गंगा नहाने का भी बडा महत्त्व होता है । हम लोग भी पहले खिचड़ी पर संगम नहाने जाते थे । खिचड़ी यानि मकर संक्रान्ति के लिये पहले से तैयारी शुरू हो जाती है । जब हम छोटे थे तो हमें तैयारी से तो कोई मतलब नहीं होता था पर हाँ काले तिल के लडडू , सफ़ेद तिल की और मेवे की पट्टी खाने का बडा इंतज़ार रहता था । और ये सब बनने के बाद हम लोग घूम घूमकर बस खाते ही रहते थे । 😁 इलाहाबाद में क्या हम यहाँ भी आज के दिन सबसे पहले नहाकर सिद्धा छूना और दान करना जिसमें छिलके वाली उरद दाल ,चावल , आलू,नमक, काले तिल का लडडू और पैसा और फिर सबसे पहले काले तिल का लडडू खाना । उसके बाद ही कुछ और खाना । खैर अब तो हमको ही ये सब बनाना और करना पड़ता है । पर अगर त्योहार में नहीं बनायेंगें तो भला कब बनायेंगे । 😋

फाइनली दो हज़ार बीस जा रहा है

दो हज़ार बीस अर्थात २०२० ख़त्म होने जा रहा है । पर इस एक साल में जीवन में इतने उतार चढ़ाव देखे । जितने शायद आजतक कभी नहीं देखे । जहाँ पहले २०२० के आने का बेसब्री से इंतज़ार था वहीं अब ये साल जल्दी ख़त्म हो इसका भी इंतज़ार है । जहाँ साल के शुरूआती समय में सब कुछ इतना अच्छा लग रहा था वहीं साल ख़त्म होते होते दिल और दिमाग़ दोनों ही दुखी हो गए । मार्च में कोरोना का आना और लॉकडाउन होना , हम सबका अपने अपने घरों में बंद हो जाना । जिंदगी का ठहर सा जाना । और फिर उस ठहरी हुई जिंदगी में रोज नये नये जतन करके ख़ुश रहना । पर फिर अक्टूबर में अचानक परिवार के दो सदस्यों को पंद्रह दिन में खो देना । जिसके बाद बस यही लगता रहा कि कब ये २०२० ख़त्म हो । और आज आख़िर कार दो हज़ार बीस ख़त्म हो रहा है । अब तो बस यही आशा और उम्मीद करते है कि आने वाला नया साल २०२१ हम सबके जीवन में सुख-शान्ति लाये ।

सतवां महीना लग गया

कल यानि पच्चीस तारीख़ से सतवां महीना शुरू हो गया है । किसका ? अरे कोरोना का और किसका । ☹️ देखते देखते और काम करते करते इतने महीने हो गये पर कोरोना रूकने का , जाने का नाम ही नहीं ले रहा है । सबकी नाक में दम कर रखा है । और जाना तो दूर उलटा दिन दूनी रात चौगुनी रफ़्तार से बढ़ता ही जा रहा है । 😡 ना घूमने की आज़ादी ना ही कहीं आने जाने की ।😒 वैसे छठां महीना अच्छा गुज़रा क्योंकि बर्तन और पोछे से निजात जो मिल गई थी , अरे मतलब पार्वती के आने से कम से कम इन दो कामों से तो छुटकारा मिल ही गया है । और बाक़ी काम तो हो ही जाते है । तो चलिये सातवें महीने को भी विभिन्न प्रकार के भोजन और मिठाई बनाकर बिताया जाये । क्योंकि कोरोना काल में सिर्फ़ एक यही काम है जो निरन्तर चल रहा है बिना किसी रुकावट के । और मनोरंजन का भी ये एक अच्छा साधन रहा है क्योंकि अगर चीज़ अच्छी बन जाये तो बढ़िया और ना बने तो एक और ट्रायल करो । 😜 वैसे भी कोरोना वो बला है जो गोद भराई के बाद चली जाये तो ग़नीमत समझो ।

मुआ कोरोना स्कूल रीयूनियन भी खा गया 😡

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इस साल सितम्बर बहुत ही सूना सूना और खाली खाली सा बीत रहा है । 😧 पिछले तीन सालों से हर साल सितम्बर में हम लोग स्कूल रीयूनियन करते थे । यानि स्कूल फ़्रेंड्स सितम्बर के महीने में चार पाँच दिन के लिये मिलते थे । २०१७ में जब चालीस साल बाद पहली बार हम लोगों ने इलाहाबाद में स्कूल रीयूनियन किया तो हम सभी में वही चपलता और शरारत थी जो स्कूल के ज़माने में स्कूल में थी । बल्कि थोड़ी ज़्यादा ही थी । 😜 पहली बार तो महीनों की तैयारी के बाद इलाहाबाद में पहला रीयूनियन किया गया था । और वहीं ये तय हुआ कि हर साल हम लोग कम से कम चार पाँच दिन सिर्फ़ अपनी स्कूल फ़्रेंड्स के साथ ही बितायेंगें । बिलकुल दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे स्टाइल में -- जा सिमरन जी ले अपनी जिंदगी । 😛 वो चार दिन हम सब घर गृहस्थी की चिन्ताओं को छोड़कर फ़ुल ऑन मस्ती मजा करते थे । और उसी का नतीजा था कि २०१८ में हम लोग दिल्ली में मिले और २०१९ में नैनीताल में हम लोगों ने स्कूल रीयूनियन किया । हर रीयूनियन में अगला रीयूनियन कहाँ होगा ये भी तय हो जाता था । और अगला रीयूनियन आने के महीनों पहले से ही तक जब तब ग्रुप पर चर्चा भी होत...

बड़े काम की चीज़

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अब इस कोरोना काल के दौरान बहुत कुछ नया ट्राई किया और बहुत कुछ नई नई खाने की चीज़ें भी बनाई है । और उन्हीं ट्राई की हुई नई चीज़ है ये बेकर्स विप का विपिंग क्रीम पाउडर जिससे व्हिपड क्रीम बनाना और आइसिंग करना दोनों बहुत आसान हो गये है । 😝 अब यूँ तो हम केक हमेशा से बनाते रहें है पर कभी आइसिंग नहीं करते थे । क्यूँ ? बता रहें हैं । दरअसल इसके दो तीन कारण है । एक तो पहले कभी ज़रूरत नहीं महसूस हुई । क्योंकि ख़ास मौक़ों के लिये तो बाज़ार से ही केक आता था । और दूसरे हमें आइसिंग करना बड़ा झंझटी लगता था । पहले व्हिपड क्रीम मंगाओ । कभी मिले कभी ना मिले । तो उससे अच्छा है प्लेन केक खा लो । पर अब नहीं । क्योंकि अब हमें आइसिंग करना आसान लगने लगा है । हांलाकि अभी आइसिंग करने में हम पूरी तरह पक्के नहीं हुए है । 😁 असल में कुछ समय पहले हमारी दीदी ने हमें इस के बारे में बताया था तो हमने अमेजॉन से इसे मँगाया । असल में हमने केक के लिये बल्कि क्रीम रोल बनाने के लिये मँगाया था । 😃 चूँकि ये पाउडर है तो इससे क्रीम बनाने में मुश्किल से कुछ दो चार मिनट लगते है और बस आइसिंग के लिये क्रीम तैयार ...

लो भइया अब यूज़र चार्ज भी दो 😳

आज सुबह सुबह ये ख़बर पढ़ने को मिली कि अब से ट्रेन में यात्रा करने वालों को यूज़र चार्ज भी देना पड़ेगा । अब सिर्फ़ टिकट लेकर ही नहीं बल्कि ट्रेन और स्टेशन को यात्रा के लिये इस्तेमाल करने के लिये यूज़र चार्ज देना पड़ेगा । हद हो गई । वैसे यूज़र चार्ज लगाने के लिये कहा जा रहा है कि अगर अच्छी सुविधायें यात्रियों को देना है तो चूँकि ख़र्चा बढ़ेगा तो इसलिये चार्ज लगाना पड़ेगा । मतलब हर तरह से जनता को ही लूटना है । लगा लो यूज़र चार्ज हम लोग कर ही क्या सकते है सिवाय पैसा देने के । अब जो ना होय सो थोड़ा वाली बात हो गई ।

आरामे बंदिश 😝

इस महीने जब से हमने अपनी हैल्पर को बुलाना शुरू किया तो हमें आरामे बंदिश टाइप वाली फीलिंग आती रहती है । अरे मतलब उसके आने से जहाँ हमें बर्तन धोने से छुट्टी होने से आराम है तो वहीं उसके रहते हम पर बंदिश भी रहती है । किचन में मत जाओ ड्राइंग रूम या डाइनिंग रूम में जाने से परहेज़ करो । अब वो क्या है ना जब सुबह वो आती है तो जितनी देर वो काम करती है उतनी देर हम अपने कमरे में ही रहते है आराम फ़रमाते टाइप से । क्या करें छ फ़ीट की दूरी जो बनानी है लिहाज़ा जितनी देर वो किचन में बर्तन वग़ैरा धोती रहती है तो हम अंदर ही रहते है । और कभी कभी तो लगता है कि उफ़ क्या मुश्किल है कि उसके रहते हम किचन में चाय तक बनाने नहीं जा सकते है । मतलब अगर उसके काम करते चाय पीने का मन हो तो भी नहीं बना सकते है । उसके जाने का इंतज़ार करना पड़ता है । एक बंधन या यूँ कहें अपने ऊपर एक तरह की बंदिश लगी सी महसूस होती है । सुबह और शाम दोनों समय की चाय उसके आने के पहले ही बनाकर कमरे में आ जाते है और जब वो चली जाती है तब ही कमरे से बाहर निकलते है । और उसके रहते जितनी बार कमरे से निकलो तो मास्क से लैस होकर निकलो...

चौदह सितम्बर यानि हिन्दी दिवस

हर साल सितम्बर महीने की चौदह तारीख़ को हिन्दी दिवस मनाया जाता है । तो हिन्दी दिवस की शुभकामनायें । यूँ तो हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है पर फिर भी हिन्दी बोलने में बहुत बार लोग झिझकते है । पर क्यों ? शायद कभी ज़रूरत तो कभी सिर्फ़ दिखावे के लिये । वैसे जब हमने २००७ में ब्लॉगिंग शुरू की थी उस ज़माने में बमुश्किल हिन्दी के दो चार सौ ब्लॉगर थे पर आज के समय में हिन्दी ब्लॉगर भी हज़ारों की संख्या में है । जिसे देखकर अच्छा लगता है । हिन्दी में जो एक सबसे अच्छी बात है कि अब इसमें अंग्रेज़ी के बहुत सारे शब्द भी हिन्दी रूपी हो गये है । मतलब अब उनका आम बोलचाल की भाषा में इतना प्रयोग होता है कि वो अंग्रेज़ी के नहीं बल्कि हिन्दी के ही शब्द लगते है । हिन्दी ने उन शब्दों को आत्मसात कर लिया है । वैसे हिन्दी भले चाहे लोग बोलें या ना बोलें पर हिन्दी गाने और हिन्दी फ़िल्में जरूर देखते है । 🤓

स्मार्ट लाइट का ज़माना आया 😜

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स्मार्ट फोन, स्मार्ट टी वी और अब स्मार्ट लाइट । और ये स्मार्ट लाइट फ़िलिप्स ने बनाई है । और ये थोड़ी महँगी भी है । पर ठीक है ना । स्मार्ट लाइट मतलब वाई फ़ाई से कनेक्शन । और हर बार या हर समय लाइट को ऑन या ऑफ़ करने के लिये उठकर स्विच बोर्ड तक जाने की ज़रूरत नहीं है । वैसे काफ़ी समय से इसके बारे में सुनते थे कि अब ऐसी लाइट आती है जिन्हें ऐलैकसा या गूगल को कमांड देकर ऑन और ऑफ़ करा जा सकता है । 😛 पर चूँकि ये हमारे घर में अभी आई है तो हमारे लिये तो ये नई ही है ना । वैसे इसे ख़रीदने का कई बार प्लान भी बना था । पर ख़रीदी अब गई । और अभी तो सिर्फ़ एक ही बल्ब लगाया है । और ऐलैकसा को कमांड देकर लाइट को जलाया ,बुझाया और लाइट के कलर को भी बदला । 😊 और इसमें लाइट के जलने को भी शेडयूल कर सकते है मतलब टाइमर है , उसे धीमी या मध्यम करने की भी सैटिंग है । और इसे ना सिर्फ़ हम बल्कि घर के बाक़ी लोग भी कमांड दे सकते है । और ना केवल घर से बल्कि घर के बाहर रहते हुये भी । और हाँ इसमें डिस्को लाइट भी है । 💃 और हमें ऐसा करने में मतलब ऐलैकसा को कमांड देने में बडा मजा आया था । अब आप कहेंगें ...