Posts

Showing posts with the label comments

आप सबकी खट्टी-मीठी टिप्पणियों की बदौलत ब्लॉग ने पूरे किए दो साल

आज इस ब्लॉग्गिंग परिवार मे हमारा दूसरा जन्मदिन है ।अरे मतलब आज ही के दिन हमने ब्लॉग्गिंग शुरू की थी । :) इस दो साल के सफर मे हमें एक ऐसे परिवार का साथ मिला जिसमे दूरियां कोई मायने नही रखती है । और इस परिवार से एक अटूट रिश्ता बन गया है । इस परिवार के सदस्य सुख -दुःख मे हमेशा साथ खड़े नजर आते है । और अब तो चाहे वो खुशी की बात हो या गम की बात हो जब तक यहाँ पर जिक्र न कर ले तब तक मन मानता ही नही है । वो क्या कहते है की पेट मे बात पचती नही है । :) हमारी ब्लॉग्गिंग के पहले और दूसरे साल मे वैसा ही फर्क है जैसे पहले साल मे बच्चे के क्रौल करने और दूसरे साल मे बच्चे के चलने का होता है । ओह हो नही समझे अरे मतलब जहाँ पहले साल मे बस ८ - १० रीडर थे वहीं अब ४० - ४७ के आस - पास रीडर हो गए है जो हमें खुश करने के लिए काफ़ी है । और stat s काउंटर मे २५ हजार से ज्यादा का आंकडा भी दिख रहा है । :) और हाँ हमारी क्या आपने चलती ट्रेन वाली पोस्ट ने तो अब तक हमारे पोस्ट पर आई टिप्पणियों का भी रिकॉर्ड...

अरविन्द जी की इस टिप्पणी ने बहुत hurt किया

आम तौर पर हम कभी किसी टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नही करते है भले ही कोई चाहे टिप्पणी मे प्रशंसा हो या बुराई . और न ही कभी कुछ ऐसा लिखते है जिसमे कहीं भी महिला या पुरूष के लिए कुछ अलग माप दंड होता है । हम जो भी लिखते है बस अपने मन के भाव लिखते है । आज अभी-अभी जैसे ही अपने ब्लॉग पर आई टिप्पणी देखी और उसमे अरविन्द जी की टिप्पणी पढ़कर मन बहुत दुखी हो गया । कल हमारी dev d यानी bold and beautiful पर लिखी समीक्षा पर अरविन्द जी की टिप्पणी जिसे हम नीचे वैसे ही लगा रहे है क्या यह फिल्म महिलाओं को सिर्फ़ इसलिए अच्छी लग रही है की उनकी विभीषिकाओं को यह मुखर करती है और पुरूष को नकारा साबित करती है -केवल पुरूष ही इमोशनल अत्याचारी है ? यह नारी एंगल को उभारती एक चालाक कोशिश है -पर कुछ दृश्य सचमुच सौन्दर्यबोध का कबाडा कर देते हैं पोर्नो को भीमात करते हैं ! पढ़कर ये सोचने लगे कि हमने उसमे ऐसा क्या और कहाँ लिखा जिससे उन्हें ये पुरूष विरोधी लग गई । अगर एक महिला होने के नाते हमें फ़िल्म पसंद आई तो उसमे हमारी ऐसी भावना कहाँ से उजागर हो गई । क्या फ़िल्म को सिर्फ़ एक फ़िल्म के तौर पर न...

पहला जन्मदिन यानी ३६५ दिन ब्लॉगिंग के

आज यानी २१ फरवरी के दिन ही हमने ब्लॉगिंग की दुनिया मे जन्म लिया था ,अरे मतलब आज ही के दिन इसी समय हमने अपनी पहली पोस्ट लिखी थी।आज पूरा एक साल हो गया हमे ब्लॉगिंग करते हुए। जिस तरह से एक बच्चा अपने पैदा होने के साथ ही सीखना शुरू करता है ठीक उसी तरह हमने भी इस ब्लॉगिंग की दुनिया मे आकर बहुत कुछ सीखा है। हमारी शुरूआती दिनों की पोस्ट कुछ ऐसी ही थी जैसे जब बच्चा चलना सीखता है तो उसके कदम डगमगाते है पर धीरे-धीरे चलना सीख ही जाता है और इसी तरहडगमगाते हुए हमने भी ब्लॉगिंग के तीन महीने पूरे किए थे। अपने इस एक साल की ब्लॉगिंग का सबसे ज्यादा श्रेय हमारे दोनों बेटों को है जिन्होंने हमे एक तरह से जबरदस्ती ठोक-ठोक कर ब्लॉगिंग करना सिखाया।और अभी भी जब भी कोई गड़बड़ होती है तो हम बेटों से ही पूछ कर ठीक करते है।पतिदेव तो हमसे कहते-कहते थक गए थे कि हम भी कंप्यूटर सीख ले। खैर अब सभी खुश है । इस एक साल मे आप सबने अपनी टिप्पणियों से जिस तरह से हमारी हौसला अफजाई की है उसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। क्यूंकि जिस तरह इंसान को जिंदा रहने के लिए साँस लेने की जरुरत होती है उसी तरह ब्ल...