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ट्राइबल गाँव की आँगन वाडी

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गोवा के ट्राइबल गाँव मे घूमते हुए हम यहां की आंगन वाडी मे गए और आँगन वाडी की साफ-सफ़ाई और बच्चों को ड्रेस मे देख कर अचंभित हुए बिना नही रहे। आम तौर पर आँगन वाडी मे ड्रेस का कोई सिस्टम नही होता है पर इस आँगन वाडी मे इंचार्ज और अभिभावकों ने मिल कर ये ड्रेस का सिस्टम रक्खा है।इस ड्रेस का खर्चा बच्चों के माता-पिता ही करते है। और वहां की इंचार्ज ने बताया की इससे अभिभावकों को भी अच्छा रहता है और बच्चो ं मे स्कूल जाने की भावना भी आती है। जब हम लोग यहां पहुंचे तो बच्चे अपने खेल मे मस्त थे।हम लोगों को देख कर पहले टीचर ने और फ़िर बच्चों ने गुड मॉर्निंग कहा। उसके बाद टीचर ने इन बच्चों को एक गाना सुनाने को कहा। और बच्चों ने एक्शन के साथ गाना सुनाया । थोडी देर आँगन वाडी मे रुकने के बाद हम लोग वापिस पंजिम की ओर चल पड़े ।

एप्रैल फूल बनाने के मजेदार तरीके

पहली एप्रैल यानी एक-दूसरे को बुद्धू बनाने का दिन है और इस एक दिन का भी अपना ही मजा होता है। अब बचपन मे और बाद मे यूनिवर्सिटी के दिनों मे हम लोग घर मे एक-दूसरे को और स्कूल मे दोस्तों को एप्रैल फूल बनाते थे। धीरे-धीरे बड़े होते गए और अब तो एप्रैल फूल बस एक तारीख की तरह ही आती है और चली जाती है। अब जब छोटे थे तब घर मे तो एप्रैल फूल बनाने का सबसे आम तरीका होता था फ़ोन का रिसीवर उठाकर दीदी या भइया को कहना की तुम्हारा फ़ोन आया है।और जैसे ही वो फ़ोन पर हेलो बोलते की हम जोर से गाते एप्रैल फूल बनाया । स्कूल मे दोस्तों को एप्रैल फूल बनाने मे भी खूब मजा आता था । कभी किसी को कहते की तुम्हे क्लास टीचर ने बुलाया है। तो कभी कोई हमे कहता की तुम्हे इंग्लिश टीचर ने बुलाया है। और ऐसे मे कई बार सच मे भी टीचर बुलाती तो भी लगता था की कहीं हम एप्रैल फूल ना बन जाए। उफ़ अब तो यादें ही रह गई है एप्रैल फूल की। वो भी क्या दिन थे।अब तो ऐसे मजाक से छोटे बच्चे भी बुद्धू नही बनते है। पर ऐसे ही कल नेट पर सर्फ़ करते हुए मजेदार साईट मिली जिसमे एप्रैल फूल बनाने के कुछ मजेदार तरीके लिखे हुए थे । पहले तो ...