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मायावती को पहनाई गयी लाखों करोड़ों की माला

आज कल राजनीति मे इतनी ज्यादा शो बाजी शुरू हो गयी है जिन्हें देख कर लगता है कि १५-२० साल पहले राजनैतिक पार्टियाँ भला कैसे अपना अधिवेशन या स्थापना दिवस मनाया करती थी। हो सकता है पहले ये खर्च हजारों मे होता रहा होगा । पर अब तो करोड़ों खर्च कर दिए जाते है सिर्फ दिखावे के लिए । और वो भी जनता का पैसा ही होगा । जिसे इस बेदर्दी से खर्च किया जाता है। बी.एस.पी.के २५ साल होने की ख़ुशी मे मायावती और उनकी पार्टी ने २०० करोड़ तो यूँ ही उड़ा दिए । और सोने पे सुहागा की मायावती के कर्नाटक के समर्थक या so called fans ने उन्हें एक हजार के नोटों की माला पहनाई ।और वो भी किसलिए सिर्फ दिखावे के लिए । और उस माला मे तकरीबन ५ करोड़ के नोट लगे हुए थे। २०० करोड़ मे से अगर कुछ करोड़ भी सड़क निर्माण और उत्तर प्रदेश के विकास मे लगाए गए होते तो यू.पी. का उद्धार हो जाता । पर भला ऐसा हों जाए तो यू.पी.क्या सारे देश से गरीबी का नामों निशान मिट जाएगा।पर भला देश के नेता ऐसा क्यूँ चाहेंगे क्यूंकि अगर ऐसा हो गया तो भला वो नोट देकर वोट कैसे लेंगे।

कौन नही बनना चाहता है इस देश का प्रधान मंत्री.......

चुनावों की घोषणा के साथ ही देश मे एक अजीब से सरगरमी सी आ गई लगती है । अखबार पढिये या चाहे न्यूज़ देखिये हर जगह बस जोड़ तोड़ की राजनीति ही दिखाई दे रही है । कोई एक राजनैतिक दल छोड़कर दूसरे राजनैतिक दल मे जा रहा है तो कोई नई party ही बना रहा है । हर बार जब लोक सभा चुनाव आने वाले होते है तो एक नया (पर अब पुराना ) third front बनता है जिसमे हर वो राजनैतिक दल शामिल होता है जिसे सरकार या opposition से कोई न कोई प्रॉब्लम होती है । पर पिछले दो बार के चुनावों मे ये भी देखा कि जैसे ही चुनावों का नतीजा आता है तो third front पता नही कहाँ चला जाता है । और कुछ - कुछ शोले के असरानी वाले style मे आधे इधर जाओ आधे उधर जाओ और बाकी मेरे पीछे आओ , जैसा हाल हो जाता है । :) खैर एक बार फ़िर third front की आवाज पूरे जोर-शोर से सुनाई दे रही है । और इस third front मे left party जो साढ़े चार साल तो यू.पी.ए.सरकार के साथ रही वो भी शामिल है । लेफ्ट साढ़े चार साल तक लेफ्ट - राईट - सेंटर करती रही पर फ़िर अचानक उनके अन्दर का ओरिजनल लेफ्ट जाग गया और वो यू . पी . ऐ . से...