Posts

Showing posts with the label ट्रेन

क्या आपने कभी चलती ट्रेन या कार से गंगा जी मे सिक्का डाला है .... :)

अरे क्या आपने कभी भी ऐसा नही किया है ? आश्चर्य ! पर हमने तो बचपन मे ऐसा खूब किया है । हम लोग जब भी इलाहाबाद से बनारस ,लखनऊ ,कानपुर वगैरा जाते तो गंगा जी मे खासकर सिक्के जरुर फेंकते थे । क्यों फेंकते थे इसका कुछ ख़ास कारण था या नही पर गंगा जी मे सिक्के डालने का मतलब कुछ-कुछ दान करने से ही रहा होगा । कार से ज्यादा ट्रेन से सिक्का फेंकने मे मजा आता था ।चलती कार से सिक्का फेंकने पर कई बार सिक्का सड़क पर ही गिर जाता था इसलिए कभी-कभी जब गंगा जी के पुल से जा रहे होते तो पापा कार को धीमी करवा देते थे जिससे गंगा जी मे सिक्का डाला जा सके । पर इसमे उतना मजा नही आता था । पर फ़िर भी सिक्का डाले बिना नही रहते थे । :) चलती ट्रेन से सिक्के फेंकने मे बड़ा मजा आता था । उसमे हम लोग आपस मे competition भी करते थे कि किसका सिक्का बिना टकराए एक बार मे ही गंगा जी मे चला गया ।जैसे इलाहाबाद के नजदीक पहुँचने पर जब फाफामऊ आने वाला होता था तो हम मम्मी से जल्दी-जल्दी सिक्के लेकर खिड़की पर बैठ जाते (अब उस जमाने मे a.c. मे नही चलते थे :) )और जैसे ही ट्रेन पुल पर से ...

दिल्ली से गोवा वापसी का सफर jetlite से

Image
करीब ढाई महीने दिल्ली रहकर पिछले शनिवार वापिस गोवा आ गए । वैसे इस बार दिल्ली से गोवा का हवाई सफर भी जरा सफ्फरी मामला रहा । :) कैसे ? अरे बताते है ना । हर बार की तरह इस बार भी हमने jetlite की फ्लाईट बुक की थी पर इस बार का jetlite का अनुभव हर बार की तरह का नही था । एयर पोर्ट पर पहुँच कर जब चेक इन करने के लिए गए तो काउन्टर पर बैठी लड़की ने हमसे पूछा कि कौन सी सीट लेना पसंद करेंगे तो हमने विण्डो सीट कहा । और जब प्लेन मे पहुंचे तो विण्डो सीट को देख कर समझ नही आया कि आख़िर उसने प्लेन मे सीट का ऑप्शन पूछा ही क्यूँ था। असल मे हुआ ये थे कि हमे A 10 सीट मिली थी जहाँ पर खिड़की थी ही नही। वैसे वहां इमरजेंसी एग्जिट भी नही लिखा था । तो सबसे पहले तो एयर होस्टेस को बुलाकर सीट बदलने के लिए कहा तो उसने कहा कि जब फ्लाईट टेक ऑफ़ करने लगेगी माने जब बोर्डिंग बंद हो जायेगी तब वो हमारी सीट change कर देगी । और जैसे ही प्लेन का दरवाजा बंद हुआ तो उसने हमें आगे की लाइन जो की पूरी खाली थी उस सीट पर शिफ्ट होने को क हा । तो इस तरह सीट का मसला तो हल हो गया । अब जब जून मे हम गोवा से दिल्ली...

इलाहाबाद यात्रा की यादें (६ )प्रयाग राज एक्सप्रेस से वापिस दिल्ली का सफर

Image
एक हफ्ते इलाहाबाद मे रहकर २९ अगस्त को हम इलाहाबाद से वापिस दिल्ली के लिए प्रयाग राज एक्सप्रेस जो रात ९.३० बजे चल कर सुबह ६.५० पर दिल्ली पहुँचती है उस से चले पर इस बार भी रास्ते मे कुछ न कुछ तो होना ही था । :) जब हम ट्रेन मे अपने कोच A-3 मे अपनी सीट पर पहुंचे तो देखा कि हमारी आधी से ज्यादा सीट पर खूब सारा सामान रखा है बैग और सूट केस वगैरा और नीचे जहाँ सामान रखते है वहां भी जगह खाली नही थी। गनीमत है कि हमारे पास एक छोटी सी अटैची और एक बैग ही था।तो सामने वाली बर्थ पर बैठी हुई महिला से पूछा कि क्या ये आपका सामान है तो उसने इनकार कि या तभी एक और सज्जन ने लपक कर बताया कि ये उनका सामान है और चूँकि वो ५-६ लोग एक साथ है और सबकी सीट अलग-अलग है इसलिए यहाँ पर सबका सामान एक साथ रख दिया है । ये सुनकर खीज तो बहुत हुई पर फ़िर कुली से कहा कि इसे किसी तरह नीचे रख दो। जैसे ही ट्रेन चलने को हुई कि उस ग्रुप मे से एक सज्जन खाने का एक पैकेट लेकर आए और उ से भी उसी सामान पर रख कर चला गए । ट्रेन ठीक समय ९.३० पर चल दी और ट्रेन चलने के १० मिनट बाद उस ग्रुप मे से एक सज्जन आए और खाने का पैकेट ले जात...

भाभी आई -भाभी आई गीत मिल गया ...

बहुत दिन पहले रेडियोनामा पर अन्नपूर्णा जी ने इस गाने का जिक्र किया था । और कल esnip पर ढूँढने पर ये गाना मिल गया ।इस गाने को सुनते हुए उस ज़माने मे लौट जाइए जब छुक - छुक गाड़ी धुआं उड़ाती हुई चलती थी।और हम और आप कितनी ही बार खिड़की से बाहर झांकते थे और बाहर झाँकने पर आँख मे कोयला पड़ता था और तब हाथ से आँख मलते हुए सिर अन्दर करके कुछ देर बैठते थे और थोडी देर बाद फ़िर सिर बाहर । :) ( तब ज्यादातर ट्रेन की खिड़कियों मे लोहे की rod नही लगी होती थी ) फ़िल्म सुबह का तारा (१९५४) के इस गाने मे तो भाभी को ना जाने कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ा जरा सुनिए । Powered by eSnips.com

बंद और चक्का जाम

चाहे कोई राजनैतिक पार्टी हो या कोई आन्दोलन कारी हो जिस किसी को भी आपना आक्रोश दिखाना होता है वो बंद , और चक्का जाम का सहारा लेता है। पिछले १४-१५ दिनों से आरक्षण के लिए राजस्थान मे गुज्जर आन्दोलन के चलते सारे रेलवे ट्रैक को गुज्जर आन्दोलन कारियों ने जाम कर रक्खा है। कितनी ही ट्रेन रद्द कर दी गई और कितनी ही ट्रेनों के रास्ते बदल दिए गए। और जब ये आन्दोलन और बढ़ा तो इसने दूसरे राज्यों मे भी अपना रूप दिखाया जैसे दिल्ली ,यू,पी,वगैरा मे जब ये आन्दोलन बढ़ा तो ना केवल रेलवे ट्रैक बल्कि सड़कों को भी बंद किया गया और चक्का जाम किया गया। अभी गुज्जरों का आन्दोलन चल ही रहा था कि केन्द्र सरकार द्वारा की गई पेट्रोल ,डीजल ,और एल,पी,जी,गैस के दामों मे हुई बढोत्तरी और महंगाई को लेकर लेफ्ट ने आन्दोलन का एलान कर दिया। लेफ्ट पार्टी यू.पी.ए.सरकार मे पहले दिन से ही उनकी नीतियों के ख़िलाफ़ जब-तब रुठती रहती है और समर्थन वापसी की धमकी भी देती रहती है पर बस जनता के लिए ही वो सरकार का साथ दे रही है। इस तरह से धमकियाँ देते हुए लेफ्ट ने ४ साल तो निकाल ही दिए है पर अब पेट्रोल के दामों के बढ़ने पर एक बा...