क्या स्त्री-पुरुष एक-दुसरे के पूरक नही हो सकते है ?
स्त्री और पुरुष के बिना किसी भी समाज की कल्पना नही की जा सकती है । क्यूंकि ना तो केवल स्त्रियों और ना ही केवल पुरुषों से ही समाज या संसार चलता है । किसी भी इमारत की नींव हमेशा मजबूत होनी चाहिऐ क्यूंकि अगर नींव कमजोर होगी तो इमारत ढह जायेगी । और जिस समाज या संसार मे हम रहते है उसकी नींव स्त्री - पुरुष दोनो होते है । जिस तरह एक इमारत को खड़ा करने के लिए नींव और खम्भों की जरुरत होती है उसी तरह समाज और घर - परिवार रूपी इमारत को खड़ा करने मे स्त्री और पुरुष दोनो की बराबर की हिस्सेदारी होती है । जरा भी संतुलन बिगड़ता है तो इमारत के ढहने का खतरा हो जाता है । स्त्री को जहाँ जननी और अन्नपूर्णा कहा गया है वहीं पुरुष को पालनहार माना गया है । जननी इस शब्द से ही ज्ञात होता है कि एक नए जीवन को इस संसार मे लाना यानी जन्म देना । और जननी के साथ ही जन्मदाता को हम भूल नही सकते है क्यूंकि किसी भी नए जीवन को संसार मे लाने मे जननी और ...