Posts

Showing posts with the label धारावाहिक

कुछ बातें सीरियल की....

आज कई दिनों बाद हम टी.वी.पर आने वाले कुछ सीरियल की बात करने जा रहे है। अरे-अरे आप भागिये मत । इतना डरने की जरुरत भी नही है। असल मे वो क्या है ना कि आजकल न्यूज़ देखना भी उतना ही दुखदायी होता जा रहा है जितना कि टी.वी.सीरियल। अब टी.वी.सीरियल की बात हो और बालाजी का नाम ना आये तो ये तो संसार का आठवां आश्चर्य हो जाएगा आख़िर एकता कपूर टी.वी.जगत की पहली सोप क्वीन (अरे साबुन नही सीरियल की)जो मानी जाती है। पर आज हम एकता कपूर के सीरियल की बात नही करेंगे। वो क्या है ना कि बीच मे कुछ दिनों के लिए हमने सीरियल से ब्रेक ले लिया था पर आजकल फिर से हम सीरियल देखने लगे है। ओह्हो आप बड़ी जल्दी घबरा जाते है कि अगर एकता की नही तो फिर आख़िर हम किसकी बात करने जा रहे है। तो जनाब जैसा की हमने एक बार पहले भी कहा था कि सोनी पर आने वाला सीरियल विरूद ्व बहुत अच्छा है और एक बार फिर हम आपसे कहते है कि विरूद्व बहुत अच्छा सीरियल है। कम से कम सास -बहू की तरह उबाऊ और खीचाऊ सीरियल नही है। जितनी दमदार कहानी है उतनी ही दमदार सारे कलाकारों की एक्टिंग भी है। वो चाहे स्मृति इरानी हो या विक्रम गोखले हो या सुशांत सिंह या फि...

सोनी की दुर्गेश नंदिनी

कई दिन हो गए दुर्गेश नंदिनी के बारे मे बात किये हुए इसलिये हम हाजिर है। जी हां इस सीरियल मे एक नया मोड़ या यूं कहें की पुराना मोड़ आ गया है अरे वही तीसरा शख्स सिकंदर । पहले तो अमित साद जो क्षितिज बने थे कुछ ठीक लग रहे थे पर अब कोई और इस किरदार को निभायेगा जो कुछ खास अच्छा नही लग रहा है। और दुर्गेश के लिए तो कुछ ना कहें तो ही अच्छा है। हमने पहले भी कहा था जीते है ....बहुत अच्छा चल रहा है और सबसे बड़ी बात इस सीरियल को अभी तक तो खीचने की कोशिश नही की गयी है। और एक्टिंग भी सब अच्छी कर रहें है। और कहानी काफी जल्दी -जल्दी आगे बढ़ रही है जो हम जैसे दर्शकों के लिए अच्छा है। एक माँ की अपने बच्चों को पाने की जंग इसमे दिखायी गयी है। इसी हफ्ते विरूद्व भी देखना शुरू किया ये भी काफी अच्छा है । पहले हम इसलिये नही देखते थे क्यूंकि उसमे तुलसी रानी जो है पर देखने पर लगा कि चलो कुछ नयी कहानी तो है। कम से कम सास -बहू का ड्रामा तो नही है। बस तुलसी अपनी तुलसी वाली आदतों को जरा छोड़ दे तो अच्छा होगा। क्यूंकि उनका लोगों को देखने का स्टाइल वैसा ही है। और थोडा वजन भी और घटाना चाहिऐ क्यूंकि वो विक्रम गोखल...

सोनी के ....

लीजिये हम फिर से हाजिर है दुर्गेश नंदिनी को लेकर । पैसे के लिए बेटे और बहु किस हद तक जा सकते है और दुर्गेश कैसे हर मुसीबत को दूर करतीहै ये इसमे देखा जा सकता है। दुर्गेश हर जगह सही समय पर पहुंच जाती बिल्कुल spider वूमन की तरह एक पल मे ऑफिस तो एक पल मे घर पहुंच जाती है। कमाल की फुर्ती है और मजाल है जो चेहरे पर शिकन आ जाये। पर छोटे- छोटे बच्चों का अपने माँ-बाप पर निगरानी रखना कुछ अच्छा नही लगता है। सोनी पर ही जीते हैं जिसके लिए आता है जो अभी तक बहुत अच्छा चल रहा है और अपनी कहानी से भटका नही है। यूं तो इसमे सब कुछ अच्छा है सिर्फ एक बुआ (अदिरा )को छोड़कर, पर कम से कम इसमे वो सास -बहु की खिट-खिट नही है। वैसे बुआ ने गड़बड़ करने मे कोई कसर नही छोडी है। सबसे कमाल का तो एक लडकी अनजानी सी है जिसमे पिछले हफ्ते लगा की चलो अब तो हीरो -हिरोइन मिल गए और अब पूरा परिवार हंसी-ख़ुशी रहेगा पर नही फिर से एक नयी लडकी का किरदार इसमे जोड़ दिया , इसे आगे बढ़ाने के लिए। सबकी बात हो और बाबूजी की ना हो ऐसा कैसे कर सकते है। हम बात थोड़ी ख़ुशी थोड़े गम की कर रहे है जिसमे एक गुजराती परिवार को दिखाया गया ...