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अब इसमें यू.पी.बिहार वाली क्या बात है ?

अरुणाचल प्रदेश मे ज्यादातर बैंक के ए. टी.एम. मे अलग लाईन जैसा कुछ system है शुरू मे ये हमें पता नहीं था। अब वैसे ए.टी.एम मे महिला और पुरुष की अलग लाईन का कोई तुक तो नहीं बनता है ।और कहीं ऐसा देखा भी नहीं था। यहां ए.टी.एम मे कोई भी गेट के बाहर नहीं इंतज़ार करता है बल्कि सभी लोग अन्दर लाईन लगा कर खड़े रहते है ।बिलकुल एक के पीछे एक इतना पास-पास खड़े रहते है कि एक दूसरे का पिन नंबर भी देख सकते है। ये जरुर हमारे पतिदेव ने बताया था। वैसे ए.टी.एम.के बाहर लिखा भी रहता है तो भी हर कोई अन्दर आ जाता है । खैर ये जनवरी की बात है जब हम नए-नए थे, एक दिन हम एक बैंक के ए.टी.एम. मे पैसे निकालने गए और चूँकि वहां ३-४ लड़के अन्दर खड़े थे इसलिए हम शराफत मे गेट पर खड़े होकर अपने नंबर का इंतज़ार करने लगे । ए . टी . एम के अन्दर एक महिला भी थी जो कभी ए . टी . एम . मशीन के पास जाती और कभी वापिस गेट पर आती । हम समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर माजरा क्या है । फिर उसने हमसे पूछा कि क्या हम उसकी पैसे निकालने मे मदद कर देंगे । तो हमने हाँ कह दिया । तब ...

उफ़ ये कानून के रक्षक है या भक्षक

कल शाम टी.वी . पर एक न्यूज़ देख कर मन तड़प गया और सोचने पर मजबूर हो गए की ये कानून के रक्षक है या भक्षक । उत्तर प्रदेश के इटावा के एक पुलिस स्टेशन की ख़बर दिखाई जा रही थी जहाँ ७ साल की एक छोटी सी लड़की को २ पुलिस वाले (जो उमर मे काफ़ी बड़े लग रहे थे ) उसके सर के बाल को खींच-कर उससे सच उगलवाने की कोशिश कर रहे थे की उसने चोरी की है ।इन दो पुलिस वालों मे से एक ने तो बच्ची के बाल जोर-जोर से खींच कर छोड़ दिया था परन्तु दूसरे पुलिस वाले ने अपनी वरदी का पूरा जोर उस बच्ची पर ही निकलना ठीक समझा और इसके लिए उसने बच्ची के बालों को दोनों हाथों से पकड़ कर बच्ची को ऊपर उठा कर उससे सच उगलवा रहे थे । और वो बच्ची जोर-जोर से चीख रही थी पर उसकी चीखें उन लोगों के कान तक नही पहुँच रही थी क्यूंकि आख़िर उन्होंने एक चोर को जो पकड़ लिया था और सारी ताकत उस पर ही निकालनी थी । क्या एक पल के लिए भी उन्हें ये एहसास नही हुआ की वो एक छोटी सी बच्ची है । काबिले तारीफ़ है इन पुलिस वालों की सच उगलवाने की तरकीब । हो सकता है की इस बच्ची ने चोरी की हो पर उसकी ऐसी निर्मम सजा । उस न्यूज...

श्रुति-गोरे ने ये साबित किया कि ......

१० जून को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इस साल के राष्ट्रीय बालश्री पुरस्कार प्रदान किए। श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने श्रुति और गोरे को बालश्री award प्रदान किया। श्रुति और गोरे जुड़वाँ बहने है । ये दोनों बहने कानपुर उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। श्रुति और गोरे की उम्र १६ साल है। ये दोनों बहने बहुत सुंदर पेंटिंग्स करती है।और गाना भी अच्छा गाती है। पूरी ख़बर इस लिंक पर जाकर पढिये। इन दोनों बहनों ने ये साबित कर दिया की अगर मन मे चाह हो तो जीवन मे कुछ भी हासिल किया जा सकता है। और अपनी मंजिल हासिल करने मे ना तो कोई बीमारी और ना ही समाज कोई बाधा खड़ी कर सकता है । श्रुति और गोरे के माता - पिता को भी श्रेय जाता है जिन्होंने अपनी बेटियों को जीवन से हारना नही बल्कि जीवन को जीतना सिखाया है ।

गोली मार भेजे मे....

ये कल्लू मामा वाला गाना आज के समय मे चारों तरफ़ दिखाई दे रहा है। क्या यू.पी.क्या बिहार,क्या मुम्बई और क्या दिल्ली। बस दो गोली और सामने वाला ढेर।गोली मारने वाले को तसल्ली की उसने अपना हिसाब चुका लिया। पहले तो हिन्दी फिल्मों मे जितना खून-खराबा देखने को मिलता था उतना तो अब आम जिंदगी मे रोज ही देखने को मिल रहा है। यू.पी.का नोएडा तो जैसे आजकल गोली मारे जाने के लिए ही न्यूज़ मे आ रहा है।तीन दिन पहले ११ बजे रात मे एक एयर होस्टेस की तीन मोटर साइकिल सवार गोली मार कर हत्या कर देते है । अभी ये न्यूज़ ख़त्म भी नही हुई थी की दिल्ली मे गोली मारकर व्यापारी की हत्या करने की ख़बर आ गई। अभी इन दो गोली मारे जाने की खबर आ ही रही थी की हरियाणा के दस साल के बच्चे की ख़ुद को गोली मारने की खबर आई।तभी दोपहर मे मुजफ्फर नगर मे एक कार मे एक लड़के और लड़की का मृत शरीर मिला और उन दोनों की मौत भी गोली लगने से हुई थी। अब ये हत्या थी या आत्महत्या ये तो पता नही। कभी आर्मी के तो कभी पुलिस के जवान या तो ख़ुद को गोली मार लेते है या दूसरे को गोली मार देते है। लगता है गन या पिस्तौल का लाईसेंस मिलना बड़ा आसान हो गया ...

गोवा की होली की एक झलक

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कहिये आप लोगों की होली कैसी रही।आशा है की आप लोगों ने भी खूब होली खेली होगी और मस्ती की होगी। भाई हमारी होली तो बढ़िया रही। और इस बार गोवा की होली का भी भरपूर मजा हमने उठाया। इस बार गोवा मे होली के अवसर पर गुलालोत्सव मनाया गया।२१ तारिख को पेपर मे ख़बर छपी थी की पंजिम के आजाद मैदान मे गुलालोत्सव मनाया जायेगा ९.३० से १२.३० । इसके लिए एक यात्रा पंजिम के महा लक्ष्मी मन्दिर से परम्परा गत तरीके से ९.३० बजे ढोल और ताशे बजाते और नाचते हुए आजाद मैदान जायेगी जहाँ पर गुलाल से होली खेली जायेगी।और १२.३० बजे कारों की रैली पूरे पंजिम शहर मे निकाली जायेगी। दिल्ली मे इस तरह का सामुहिक आयोजन आम तौर पर कालोनी मे तो होता है पर शहर मे ऐसा आयोजन पहली बार सुना था। इसलिए सोचा की इस बार गोवा की होली का पूरा मजा लिया जाए। और हाँ इस आयोजन की ख़ास बात ये थी कि कोई भी किसी को जबरदस्ती रंग नही लगायेगा ।अगर कोई रंग लगवाना चाहता है तभी रंग लगाया जायेगा।और वहां पर औरकेस्त्रा पार्टी भी थी लोगों का मनोरंजन करने के लिए। इस फोटो मे ये जो दो बच्चियां दिख रही है ये पूरी मस्ती मे ड्रम बजा रही थी। वैसे गो...

आत्महत्या और शिक्षा प्रणाली

मार्च का महीना यानी दसवीं और बारहवीं के बोर्ड के इम्तिहान का समय । हर साल फरवरी और मार्च के महीने मे छात्र -छात्राओं द्वारा आत्महत्या की खबरें पढने -देखने को मिलती है। बच्चों के कोमल दिमागमे पढ़ाई के साथ-साथ मे बोर्ड और फ़ेल और पास होने को लेकर इतना भय रहता है की कई बार बच्चे ऐसी परिस्थितियों से छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या का सहारा ले लेते है। ऐसे कदम उठाने मे बच्चे का कोई दोष नही होता है बल्कि माँ-बाप और स्कूल वाले ही उन्हें एक तरह से ऐसा करने को उकसाते है। आज के समय मे जहाँ हर कोई ९० %और १०० %की बात करता है वहां ६०-७०और ८० % वालों की कोई पूछ नही है। पर क्या हमारी शिक्षा प्रणाली इसके लिए जिम्मेदार है।अभी दो-तीन दिन पहले संसद मे भी इस विषय पर चर्चा हुई थी और ये कहा जा रहा है कि इम्तिहान का सिस्टम ही खत्म कर देना चाहिए।पर क्या इमिहान ख़त्म कर देने से सब समस्या हल जायेगी। खैर अगर हम अपने समय की बात करें तब तो हम लोगों के पास(यू.पी.बोर्ड मे ) ओप्शन होता था आर्टस और साईंस का और अपनी पसंद के विषय पढने का।कोई भी पाँच विषय लिए जा सकते थे। उस समय ये नही होता था की सोशल साईंस मे च...

ग्यारह सितंबर का दिन किस पर कितना भारी

कल ग्यारह सितंबर का दिन था। और इस दिन को तो पूरी दुनिया मे शायद ही कोई भूल सकता है। क्यूंकि ९/११ के नाम से अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मे हुए हादसे की याद आ जाती है जिसमे देखते ही देखते ट्विन टावर को हवाई जहाज से गिरा दिया गया था और जिसमे सैकड़ों लोगों की जान चली गयी थी। हालांकि इस हादसे को छे साल हो गए है पर अमेरिका को ये दिन अभी भी दहशत भरी यादों की याद दिलाता है।यूं तो आजकल हादसे आम व्यक्ति की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे है । पर ग्यारह सितंबर का दिन ना केवल अमेरिका बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए भी कुछ ऐसा ही दिन रहा जहाँ मायावती की सरकार ने मुलायम सिंह की सरकार द्वारा भर्ती ६५०० पुलिस जवानों की नियुक्ति को रद्ध कर दिया और १२ आई.पी.एस अफसरों को सस्पेंड कर दिया क्यूंकि ये १२ आई.पी.एस अफसर उन boards मे थे जिन्होंने इन पुलिस वालों का चयन कर उन्हें नियुक्त किया था। अब देखना ये है कि क्या मायावती इन पुलिस वालों की जगह फिर से भरती है या नही ?और अगर भर्ती करती है तो किस आधार पर। निष्पक्ष या फिर जातिवाद पर आधारित। या वो भी वही करेंगी जो मुलायम सिंह ने किया था ? आजकल हैदराबाद मे एक-के ...