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नेताओं की भी रिटायरमेंट एज होनी चाहिए .....

पिछले कुछ दिनों से देश मे लोक सभा चुनावों को लेकर सभी राजनैतिक पार्टियाँ सक्रिय हो गई है क्यूंकि ऐसी उम्मीद लग रही है कि चुनाव अप्रैल-मई तक हो जायेंगे । चुनाव मे टिकट के लिए हर नेता पूरी जद्दोजहद से जुट जाते है । चुनाव के लिए अगर टिकट न मिले तो या तो किसी दूसरी राजनैतिक पार्टी मे जा मिलते है या फ़िर अपनी ही नई पार्टी बना लेते है । हर कोई वो चाहे नेता हो या फ़िर जनता हो ,कहती है कि युवा पीढी को आगे आना चाहिए पर जब चुनाव मे टिकट देने की बात आती है तो वही सारे पुराने लोगों को टिकट दिया जाता है जो पिछले बीसियों साल से चुनाव लड़ते आ रहे है । वो चाहे भैरों सिंह शेखावत हो या चाहे प्रणब मुखर्जी हो या चाहे सोमनाथ चटर्जी हो या फ़िर अडवाणी जी या मन मोहन सिंह जी ही क्यों न हो । अर्जुन सिंह हो या करूणानिधि हो या बंसी लाल या फ़िर मोती लाल वोरा या मुरली मनोहर जोशी या अशोक सिंघल ही क्यूँ न हो ।ऐसे नेताओं की लिस्ट बहुत लम्बी है । लिखने लगे तो अंत नही होगा । अभी हाल ही मे हम एक मैगजीन मे पढ़ रहे थे की भैरों सिंह शेखावत जो उप राष्ट्रपति रह चुक...

TIATR ( तिअत्र ) कुछ अलग है

ये शब्द पढने और सुनने मे कुछ अजीब सा लग रहा है पर असल मे ऐसा कुछ नही है ।वैसे इसका सही उच्चारण भी अभी तक ठीक से क्या है हमें पता नही है क्यूंकि कोई तिअत्र तो कोई तिअतर तो कोई तियत्र कहता है । खैर नाम मे न उलझ कर कुछ इसके बारे मे बताते है । गोवा मे tiatr १०० साल से होता चला आ रहा है । tiatr के लिए कहा जाता है कि इसे बहुत अधिक loud होना चाहिए । इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमे जो भी कहानी होती है वो गोवा के लोगों की जिंदगी पर आधारित होती है वो चाहे राजनीति हो या फ़िर कोई सोशल मुद्दा हो , पुलिस हो या चाहे आम आदमी की जिंदगी ।हर दर्शक कहानी से अपने आप को identify कर सकता है । इसमे सटायर भी खूब होता है ।और इसमे संदेश भी होता है । यहाँ के लोगों का कहना है कि ये आम नाटकों ( ड्रामा और थिएटर ) से थोड़ा अलग है । हालाँकि अब इस tiatr मे हिंदू कलाकार भी भाग लेने लगे है पर ऐसा कहते है कि शुरूआती दौर मे ज्यादातर कैथोलिक ही इसमे भाग लेते थे क्यूंकि इसमे saxtti ( कोंकणी ) भाष ा का इस्तेमाल किया जाता है जिसे साउथ goa मे बोला जाता है और ...

ठक-ठक कौन है --ठाकरे

ठाकरे अब वो चाहे राज ठाकरे हो यस उद्धव ठाकरे हो या फ़िर बाला साहेब ठाकरे हो रोज ही इन तीनों मे से कोई ना कोई उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ कुछ ना कुछ बोलता या लिखता रहता है। फरवरी मे जो राज ठाकरे ने उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ अपना भाषण दिया उसके बाद मुम्बई मे जितनी तोड़-फोड़ और मार पीट हुई वो हम सभी जानते है।उस दिन से आज तक ठाकरे का उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ बोलना जारी है। राज ठाकर े अमिताभ बच्चन को कहते है कि वो यू.पी को अपना मानते है तो इसमे ग़लत क्या है. कोई भी इंसान जहाँ वो पैदा हुआ और बड़ा हुआ है क्या उस जगह को कभी भूल सकता है। कभी नही। वो हमेशा अपनी मिटटी से जुडा रहता है।आप चाहे मुम्बई मे रहे या विदेश मे अपनी जगह को भूल नही सकते है। ठाकरे अपने आप को महाराष्ट्र और मराठियों का बचाने वाला कहते है पर क्या कभी किसी ने ने ये सोचा कि क्या सारे मराठी मानुष भी वही सोचते है जैसा कि राज ठाकरे सोचते है।अब राज की तरह अमिताभ बच्चन कम से कम यू.पी के लोगों को भड़काने का काम नही कर रहे है। राज अपनी मुम्बई से प्यार करते है ये बहुत अच्छी बात है । जब राज ठाकरे ने अमिताभ बच्चन को मुम्बई से ज्यादा यू...