कभी कभी जब सदबुद्धि आ जाती है ( लॉकडाउन २.० ) सत्रहवाँ दिन
आज अचानक फ़रवरी की एक बात याद आ गई । कि कैसे समय रहते भगवान ने हमें सदबुद्धि दी और हम बच गये । दरअसल पिछले कुछ से हर साल फ़रवरी के पहले या दूसरे हफ़्ते में हमारा ट्रैवल ऐजेंट फोन करके पूछता है कि मैम इस साल गरमियों में आप कहाँ घूमने जायेंगी । तो हम जहाँ जाना होता था उसे बता देते थे और वहाँ का टूर प्रोग्राम और पैकेज वग़ैरह उससे मँगवा लेते थे । कई बार दो तीन देशों का भी पैकेज मँगवा लेते थे और तब फ़ाइनल करते थे कि कहाँ जाना है । अब आप कहेंगें कि दो तीन जगहों का क्यों । तो वो इसलिये क्यों कि कहीं भी घूमने जाने के पहले उसमें होने वाला ख़र्चा सबसे बड़ा मुद्दा होता है ।और क्योंकि हमारा अपना बजट होता है और उसी के अनुसार और उसी के मुताबिक़ हम घूमने के लिये कहाँ जायेंगे ये डिसाइड करते है । अब कुछ देशों के पैकेज कई बार बहुत महंगें होते है क्योंकि अकसर पैकेज में सिर्फ़ एक देश नहीं बल्कि दो तीन देश होते है । और कभी कभी पाँच और सात देश एक ही बार में घूमने का पैकेज होता है । मतलब एक ही बार में बहुत कुछ देखने का मौक़ा । पर ऐसे बडे पैकेज में ख़र्चा भी ज़्यादा और दिन भी ज़्यादा चाहिये ...