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एक-दूसरे पर आक्षेप करना ही क्या ब्लॉगिंग है ?

कितने अफ़सोस की बात है कि हर कुछ दिन पर एक हंगामा होना ब्लॉग जगत का एक नियम सा बन गया है । हर बार हंगामा पिछले हंगामे से ज्यादा बड़ा होता है । कभी महिला ब्लॉगर तो कभी उनके द्वारा लिखे गए लेखों को लेकर हंगामा हो जाता है । और कल तो हद ही हो गयी । कल हमने कई दिन बाद जब ब्लॉग वाणी खोला तो हम कुछ चकरा से गए क्यूंकि कई पोस्टें समीर जी , ज्ञान जी और अनूप जी के नाम के साथ लिखी दिखी । और उन्हें पढ़कर अफ़सोस तो हुआ साथ ही बहुत दुःख भी हुआ । कि आखिर हम लोग किस तरह कि ब्लॉगिंग कर रहे है जिसमे एक - दूसरे पर कीचड उछालना क्या सही है । जब हमने २००७ मे ब्लॉगिंग शुरू की थी तब आज की तुलना मे ब्लोगर जरुर बहुत कम थे ( शायद ५०० - ६०० ) पर इस तरह का रवैया कभी एक - दूसरे के लिए नहीं देखा था । हाँ छोटी - मोटी नोक - झोक होती रहती थी जो ब्लॉगिंग और ब्लॉगर दोनों के लिए जरुरी और अच्छी होती थी । पर अब इस नोक - झोक का स्वरुप बद...

कोहरा ,बादल,उमस,और उकताहट :(

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कुछ अजीबो -गरीब शीर्षक है न । :) अब क्या करें जैसे हालात चल रहे है बस वही शीर्षक लिख दिया । अब यहाँ जाडा तो पड़ता नही है पर पिछले ७-८ दिन से रोज सुबह यहाँ पर कोहरा छा जाता है । क्या आप को यकीन नही आ रहा है की इस समय यहाँ कोहरा भी हो सकता है तो लीजिये कोहरे की फोटो देखिये । :) पहले दिन क ोहरा देख कर खुश हुए कि चलो कुछ मौसम ठंडा होगा पर हुआ ठीक उसका उल्टा (जैसा सोचो वही तो नही होता ना ) ठंडा मौसम तो दूर की बात उलटे गरमी का मौसम आ गया । कोहरा जब छंट जाता है तो उसके बाद सूरज देवता कभी दीखते है तो कभी छुप जाते है और एक अजीब सा धुंधला सा मौसम बना रहता है । और इस बादल और कोहरे का नतीजा की इतनी उमस भरी गरमी हो जाती है कि हाल बेहाल हो जाता है ।जरा देर बाहर निकलो और बस पसीने से लथ पथ हो जाओ । ऐसी चिपचिपाती गरमी मे बाहर निकलने से अच्छा तो घर मे रहना है । और आज कल हम वही कर रहे है । :) अब इस उमस भरी गरमी को भी झेल जाए पर इस इन्टरनेट का क्या किया जाए जिसने इस पूरे हफ्ते ठीक से चलना मंजूर ही नही किया ।ना तो ब्लोग्वानी और ना ही कोई और ब्लॉग ठीक से खुल पा रहा है । आज क...