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आख़िर माँ को मिला इन्साफ

६ सालों से चल रहे नीतीश कटारा मर्डर केस मे विशाल और विकास यादव को उम्र कैद की सजा हो गई है।फरवरी २००२ मे नीतीश का मर्डर विशाल और विकास ने किया था और वजह थी यादव बंधुयों की बहन भारती यादव का नीतीश से प्यार करना। जो इस परिवार को बिल्कुल भी पसंद नही था। इस लड़ाई को नीतीश की माँ ने बड़ी हिम्मत से लड़ा क्यूंकि जहाँ एक तरफ़ वो थी वहीं दूसरी तरफ़ यू,पी,के डी.पी.यादव थे जिनके बारे मे तो सभी जानते है। इस ६ सालों मे कितने ही गवाह मुकर गए पर अजय कटारा जो की इस केस का मुख्य गवाह था उसकी गवाही ने इस केस को इसके अंजाम तक पहुंचाने मे मदद की। २ दिन पहले इस केस की सुनवाई खत्म हुई थी और आज इन दोनों भाइयों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई। आज एक माँ की जीत हुई है। और आज ये कहने मे कोई संकोच नही है कि भगवान के घर देर है अंधेर नही।

रीटा आइस क्रीम

ये ice creem शब्द सुनकर ही बहुत कुछ याद आ जाता है । अब जैसे हमे rita ice cream की याद आ गई । भाई हमने तो अपने बचपन मे ये आइस क्रीम बहुत खाई है। इलाहाबाद मे ये अब मिलती है या नही पता नही पर जब हम छोटे थे तब जहाँ शाम के ५ बजे नही कि एक आदमी छोटी सी हाथ गाड़ी जिस पर चारों और rita ice cream लिखा होता था आता rita ice cream की आवाज आती और झट से हम घर के बाहर. हम क्या मोहल्ले के जितने बच्चे सभी घर के बाहर निकल पड़ते थे. और चूँकि हम लोगों के मोहल्ले मे हर घर मे खूब सारे बच्चे थे और गर्मी की छुट्टियों मे तो हर किसी के घर मे ननिहाल या ददिहाल के लोग आए हुए होते थे अरे मतलब ज्यादा बच्चे ,तो ice-cream वाले की भी खूब बिक्री होती थी। और हर किसी को सबसे पहले ice-cream चाहिए होती और हर कोई चिल्ला रहा होता कोई चिल्लाता orange तो कोई mango तो कोई chocolate bar। किसी को vanila का cup चाहिए होता था। और ice-cream वाला हम सभी को एक-एक करके अपनी ही धीमी स्पीड से ice-cream बांटता ।हमे तो orange ice-cream हमेशा से ही कुछ ज्यादा ही प्रिय रही है। हमारी और हमारी दीदी ...

क्या कभी आपने सड़क पर पड़ा रुपया उठाया है ?

आजकल टी.वी. मे किसी pain relief cream शायद iodex का विज्ञापन आता है जिसमे एक आदमी सड़क पर पड़े ५०० के नोट को झुक कर उठा नही पाता है क्यूंकि उसकी कमर मे दर्द है। इसी विज्ञापन को देख कर हमे एक वाकया याद आया है।उस समय दिल्ली के जिस ऑफिस मे हम काम करते थे ये वाकया ऑफिस मे साथ मे काम करने वाली हमारी एक बहुत अच्छी दोस्त के साथ हुआ था।इस घटना को अब ७ साल तो हो ही चुके है।दिल्ली का एम.ब्लाक मार्केट मंगलवार को बंद रहता है बस खाने-पीने की दुकाने खुली रहती है।और इसलिए वहां मंगलवार को ज्यादा भीड़-भाड़ नही होती थी। एक ऐसे ही मंगलवार को हमारी दोस्त अपनी बेटी के साथ एम.ब्लाक मार्केट के pizza hut मे pizza खाने गई थी।जैसे ही वो कार से उतरकर pizza hut की ओर चली कि उनकी निगाह सड़क पर पड़े ५०० रूपये के नोट पर पड़ी और उन्होंने वो रुपया उठा लिया और अपनी बेटी से हँसते हुए कहा की चलो आज तो अपने पैसे बच गए। आज का pizza तो फ्री मे खाया जायेगा क्यूंकि ये ५०० रूपये का नोट जो मिल गया है। खैर दोनों माँ-बेटी ने pizza खाया और बिल उसी ५०० रूपये से दिया और खुश होकर बाहर अपनी कार की तरफ़ जैसे ही वो बढ़ी की उ...

बेटियाँ ही बेटे है.

बेटे की चाहत हर दादा-दादी को होती है क्यूंकि बुजुर्गों का मानना है कि वंश तो लड़कों से ही चलता है। और लड़कियां तो पराया धन होती है जो शादी करके दूसरे घर चली जाती है। ३० साल पहले तो आज से भी ज्यादा बेटे की इच्छा लोगों मे होती थी और बेटी का जन्म होना यानी एक और खर्चा माना जाता था। और ये बात ३०-३२ साल पहले की है और दिल्ली के जिस परिवार की हम यहां बात कर रहे है उसमे पति २ भाई है और पत्नी अकेली बेटी है। और इस दंपत्ति के ३ बेटियाँ है ।और जैसा की हर परिवार मे बेटे के चाहत होती है ठीक वैसे ही इस परिवार को भी बेटे की चाहत थी। शादी के २ साल बाद जब इस दंपत्ति की पहली बेटी पैदा हुई तो सास कुछ ज्यादा खुश तो नही हुई पर निराशा भी नही हुई क्यूंकि एक तो ये पहला बच्चा था और दूसरे सास के दिल मे कहीं ये उम्मीद थी कि हो सकता है की अगली बार बेटा हो जाए।अभी बेटी ढाई साल की हुई ही थी कि उन्होंने एक और बेटी को जन्म दिया। अब दूसरी बेटी के पैदा होने पर सास-ससुर बहुत दुखी हुए । ससुर जी ने तो कुछ नही कहा पर सास एक और बेटी के पैदा होने से बिल्कुल भी खुश नही थी। उन्हें ये लग रहा था की दो लड़कियां हो गई ह...

गोवा के एक ट्राइबल गाँव की झलक

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ऐसा नही है की ट्राइबल सिर्फ़ जंगलों मे ही रहते है। अंडमान मे और मध्य प्रदेश मे भी हमने ट्राइबल देखे थे।और अब यहां गोवा मे ट्राइबल को देखने का अवसर मिला। ये ट्राइबल विलेज पंजिम से करीब ५० की.मी .दूर कनकोना के पास कजूर ( cazur ) नाम का छोटा सा गाँव है।जब हम लोग इस गाँव मे पहुंचे तो देखा की एक औरत अपने सिर पर लकड़ी को रखकर बड़े आराम से चली जा रही है। हालांकि इस गाँव मे पानी के लिए इन सबके घरों मे नल (tap water) नही है। गाँव मे कुआं है ये सब लोग उस कुएं से पानी भरते है। और पूछने पर की कुएं से पानी लाने मे दिक्कत होती होगी तो इनका जवाब था की नही कुआं पास मे ही है। इस गाँव मे महिला मंडल है और आँगनवाडी भी है।यहां के बच्चों को स्कूल के लिए काफ़ी दूर आना पड़ता है। गोवा का ट्राइबल विलेज देख कर खुशी हुई की ये लोग सभ्यता और संस्कृती से अलग नही है। और इसी गाँव मे हमने पहली बार boiled rice कैसे बनाते है उसे देखा। अब बोएल राइस के बारे मे तो हम सभी ने सुना है और घर मे भी कभी-कभी इस्तेमाल करते है।खास कर फ्राईड राइस के लिए। पर क्या आप जानते है की इसे कैसे बनाते है।नही ना। तो चलिए हम...

बचपन की कुछ पुरानी कविताएं

आज बस यूं ही मौसम को देख कर हमे भी एक बचपन की कुछ कविताएं याद आ गई।थोडी बेसिर पैर की है पर बचपन मे इन्हे जोर-जोर से बोलने मे बड़ा मजा आता था। वैसे ये पहली लाला जी वाली कविता तो हिन्दी की किताब मे सचित्र पढी थी। लालाजी ने केला खाया केला खाकर मुंह बिचकाया। मुंह बिचकाकर तोंद फुलाई तोंद फुलाकर छड़ी उठाई। छड़ी उठाकर कदम बढ़ाया कदम के नीचे छिलका आया । लालाजी गिरे धड़ाम से बच्चों ने बजाई ताली। चलिए एक और ऐसी ही छोटी सी मस्ती भरी कविता पढिये। मोटू सेठ सड़क पर लेट गाड़ी आई फट गया पेट गाड़ी का नम्बर ट्वेन्टी एट (२८) गाडी पहुँची इंडिया गेट इंडिया गेट पर दो सिपाही मोटू मल की करी पिटाई। लगे हाथ इसे भी पढ़ लीजिये। मोटे लाला पिलपिले धम्म कुंयें मे गिर पडे लुटिया हाथ से छूट गई रस्सी खट से टूट गई।

गोवा की होली की एक झलक

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कहिये आप लोगों की होली कैसी रही।आशा है की आप लोगों ने भी खूब होली खेली होगी और मस्ती की होगी। भाई हमारी होली तो बढ़िया रही। और इस बार गोवा की होली का भी भरपूर मजा हमने उठाया। इस बार गोवा मे होली के अवसर पर गुलालोत्सव मनाया गया।२१ तारिख को पेपर मे ख़बर छपी थी की पंजिम के आजाद मैदान मे गुलालोत्सव मनाया जायेगा ९.३० से १२.३० । इसके लिए एक यात्रा पंजिम के महा लक्ष्मी मन्दिर से परम्परा गत तरीके से ९.३० बजे ढोल और ताशे बजाते और नाचते हुए आजाद मैदान जायेगी जहाँ पर गुलाल से होली खेली जायेगी।और १२.३० बजे कारों की रैली पूरे पंजिम शहर मे निकाली जायेगी। दिल्ली मे इस तरह का सामुहिक आयोजन आम तौर पर कालोनी मे तो होता है पर शहर मे ऐसा आयोजन पहली बार सुना था। इसलिए सोचा की इस बार गोवा की होली का पूरा मजा लिया जाए। और हाँ इस आयोजन की ख़ास बात ये थी कि कोई भी किसी को जबरदस्ती रंग नही लगायेगा ।अगर कोई रंग लगवाना चाहता है तभी रंग लगाया जायेगा।और वहां पर औरकेस्त्रा पार्टी भी थी लोगों का मनोरंजन करने के लिए। इस फोटो मे ये जो दो बच्चियां दिख रही है ये पूरी मस्ती मे ड्रम बजा रही थी। वैसे गो...

महिला दिवस के अवसर पर ये विज्ञापन कुछ कहता है. ...

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यहां गोवा मे लोग अखबार को माध्यम के तौर पर चुनते है । हर आम अखबार की तरह यहां के अखबार मे भी ना केवल बड़ी खबरें बल्कि छोटी खबरें भी छपती है । पर एक विशेष बात है की यहां के अखबार मे देश - विदेश की ख़बरों के साथ - साथ यहां बच्चों के जन्म की खबरें भी छपती है । जब भी किसी दंपत्ति को संतान होती है वो चाहे लड़का हो या लड़की उसकी ख़बर अखबार मे जरुर छपती है। जहाँ हर रोज हर अखबार मे भ्रूण हत्या और पैदा होते ही लड़की को मारने की ख़बर छपती है वहीं यहां के अखबार मे बेटी पैदा होने की ख़बर छपती है। जो हमारे ख़्याल से बहुत ही अच्छी बात है।काश दूसरे लोग भी इनसे कुछ सबक सीखें । एक और बहुत अच्छा चलन है डॉक्टर को धन्यवाद देने का , जैसा की आप इन सभी विज्ञापनों मे देख सकते है । आज महिला दिवस है और इस अवसर पर हम गोवा के अखबार मे छपे कुछ विज्ञापनों को लगा रहे है। ( माता - पिता और अन्य रिश्तेदारों के नाम हमने हटा दिए है । ) आप बस देखिये और अपनी राय दीजिये। जब आप इन मे से किसी पर भी क्लिक करें...