Posts

Showing posts with the label old hindi film songs

सजन रे झूठ मत बोलो .......

भई है तो ये गाना बहुत पुराना पर आज भी इसके एक - एक बोल बिल्कुल सोने के जैसे खरे है । उस समय की हिट चौकडी यानी राज कपूर , मुकेश , शैलेन्द्र और शंकर जयकिशन का कोई मुकाबला नही है । तो लीजिये हम ज्यादा बक - बक नही करते है और आप लोगों को गीत सुनने देते है । वैसे आप को याद है न कि आज रात साढ़े आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक यानी एक घंटे earth hour के लिए लाइट बंद रखनी है । Powered by eSnips.com

बोल री कठपुतली , रात और दिन

ओह हो कन्फुज मत होइए ये दोनों एक नही अलग-अलग गीत है जिन्हें लता मंगेशकर ने गाया है । लता मंगेशकर के अपने पसंदीदा गीतों की श्रंखला को आज थोड़ा और आगे बढाया है । इसमे जो आखिरी गीत मन डोले है ,उसे बरसात के दिनों मे या रात मे बजाने को मना किया जाता था क्योंकि ऐसा कहा जाता था कि इसमे बजने वाली बीन को सुनकर कहीं कोई नागिन या नाग न आ जाए । हालाँकि ऐसा कभी हुआ नही था । :) Powered by eSnips.com

कुछ पुराने लता मंगेशकर के गीत सुनिए

आज अपनी पसंद के कुछ बहुत पुराने लता मंगेशकर के गीत लगा रहे है आशा करते है कि आपको भी पसंद आयेंगे ।(गीत बहुत सारे है थोड़े-थोड़े करके सुनवायेंगे । :) अब वैसे ये कोई कहने कि बात नही क्योंकि हम सभी जानते है कि पुराने गीतों की अपनी ही मिठास है जिन्हें आज भी सुनकर एक अजीब सा सुकून मिलता है । पहले गीत सुनिए और फ़िर बताइये कि आपको ये गीत पसंद आए या नही । वैसे हम जानते है गीत ना पसंद आने का कोई सवाल नही है । :) सही कहा है ना । Powered by eSnips.com

भाभी आई -भाभी आई गीत मिल गया ...

बहुत दिन पहले रेडियोनामा पर अन्नपूर्णा जी ने इस गाने का जिक्र किया था । और कल esnip पर ढूँढने पर ये गाना मिल गया ।इस गाने को सुनते हुए उस ज़माने मे लौट जाइए जब छुक - छुक गाड़ी धुआं उड़ाती हुई चलती थी।और हम और आप कितनी ही बार खिड़की से बाहर झांकते थे और बाहर झाँकने पर आँख मे कोयला पड़ता था और तब हाथ से आँख मलते हुए सिर अन्दर करके कुछ देर बैठते थे और थोडी देर बाद फ़िर सिर बाहर । :) ( तब ज्यादातर ट्रेन की खिड़कियों मे लोहे की rod नही लगी होती थी ) फ़िल्म सुबह का तारा (१९५४) के इस गाने मे तो भाभी को ना जाने कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ा जरा सुनिए । Powered by eSnips.com