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बंद और चक्का जाम

चाहे कोई राजनैतिक पार्टी हो या कोई आन्दोलन कारी हो जिस किसी को भी आपना आक्रोश दिखाना होता है वो बंद , और चक्का जाम का सहारा लेता है। पिछले १४-१५ दिनों से आरक्षण के लिए राजस्थान मे गुज्जर आन्दोलन के चलते सारे रेलवे ट्रैक को गुज्जर आन्दोलन कारियों ने जाम कर रक्खा है। कितनी ही ट्रेन रद्द कर दी गई और कितनी ही ट्रेनों के रास्ते बदल दिए गए। और जब ये आन्दोलन और बढ़ा तो इसने दूसरे राज्यों मे भी अपना रूप दिखाया जैसे दिल्ली ,यू,पी,वगैरा मे जब ये आन्दोलन बढ़ा तो ना केवल रेलवे ट्रैक बल्कि सड़कों को भी बंद किया गया और चक्का जाम किया गया। अभी गुज्जरों का आन्दोलन चल ही रहा था कि केन्द्र सरकार द्वारा की गई पेट्रोल ,डीजल ,और एल,पी,जी,गैस के दामों मे हुई बढोत्तरी और महंगाई को लेकर लेफ्ट ने आन्दोलन का एलान कर दिया। लेफ्ट पार्टी यू.पी.ए.सरकार मे पहले दिन से ही उनकी नीतियों के ख़िलाफ़ जब-तब रुठती रहती है और समर्थन वापसी की धमकी भी देती रहती है पर बस जनता के लिए ही वो सरकार का साथ दे रही है। इस तरह से धमकियाँ देते हुए लेफ्ट ने ४ साल तो निकाल ही दिए है पर अब पेट्रोल के दामों के बढ़ने पर एक बा...

क्या स्त्री-पुरुष एक-दुसरे के पूरक नही हो सकते है ?

स्त्री और पुरुष के बिना किसी भी समाज की कल्पना नही की जा सकती है । क्यूंकि ना तो केवल स्त्रियों और ना ही केवल पुरुषों से ही समाज या संसार चलता है । किसी भी इमारत की नींव हमेशा मजबूत होनी चाहिऐ क्यूंकि अगर नींव कमजोर होगी तो इमारत ढह जायेगी । और जिस समाज या संसार मे हम रहते है उसकी नींव स्त्री - पुरुष दोनो होते है । जिस तरह एक इमारत को खड़ा करने के लिए नींव और खम्भों की जरुरत होती है उसी तरह समाज और घर - परिवार रूपी इमारत को खड़ा करने मे स्त्री और पुरुष दोनो की बराबर की हिस्सेदारी होती है । जरा भी संतुलन बिगड़ता है तो इमारत के ढहने का खतरा हो जाता है । स्त्री को जहाँ जननी और अन्नपूर्णा कहा गया है वहीं पुरुष को पालनहार माना गया है । जननी इस शब्द से ही ज्ञात होता है कि एक नए जीवन को इस संसार मे लाना यानी जन्म देना । और जननी के साथ ही जन्मदाता को हम भूल नही सकते है क्यूंकि किसी भी नए जीवन को संसार मे लाने मे जननी और ...