ग़ायब होते गीत के विषय
आज सुबह सुबह मशहूर कवि और गीतकार गोपालदास नीरज के निधन की ख़बर पढ़ी , उनकी लिखी कवितायें और गीत भला कौन भुला सकता है । पहले जब दूरदर्शन पर कवि सम्मेलन होता था तो उनकी कविता पाठ से ही कवि सम्मेलन का समापन होता था । और उनका लिखा ये गीत जो एक ज़माने में विविध भारती पर खूब बजता था । ए भाई ज़रा देख के चलो आगे ही नहीं पीछे भी दायें ही नहीं बायें भी ऊपर ही नीचे भी ए भाई ना केवल ये गीत बल्कि इनके लिखे अन्य गीत भी बहुत ही लोकप्रिय थे । हर गीत एक से बढ़कर एक और जीवन का फ़लसफ़ा समझाते हुये । देव आनन्द की फ़िल्मों के पसंदीदा गीतकार थे । कारवाँ गुज़र गया ग़ुबार देखते रहे जैसे फूलों के रंग से ,दिल की क़लम से रंगीला रे ,तेरे रंग में यूँ रंगा है मेरा मन लिखे जो ख़त तुझे मेघा छाये आधी रात मेरा मन तेरा प्यासा अनायास ही मन में विचार आया कि अब तो ऐसे गीत और गीतकार ही नहीं रहे । आजकल की हिन्दी फ़िल्मों से बहुत सारे गीत के विषय ग़ायब से होते जा रहे है । जैसे रक्षाबंधन,होली ,दिवाली,देशभक्ति ,भाई-बहन,दोस्ती,और मॉं और पिता ,बच्चे और बचपन पर आधारित गीत तो आजकल विरले ही सुनने को मिलते है । हाँ ...