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Showing posts from April, 2007

तुम,तुम्हे,तुझे,तेरे को,तू,

इसमे हम जो भी लिख रहे है वो किसी का मजाक नही बना रहे है बस इतने सालों मे जो हमने महसूस किया है वो ही लिख रहे है। बचपन से हमारी माँ ने सिखाया है कि कभी भी किसी को तू-तडाक करके बात नही करनी चाहिऐ हमेशा आप,हम और तुम करके बात करनी चाहिऐ और हमने भी अपने बच्चों को यही सिखाया है। पर हिंदी के ये शब्द यूं तो हर कोई बोलता है पर कौन बोल रहा है और किसको बोल रहा है इससे बहुत फर्क पड़ता है।जैसे बनारस मे हमारे बाबा के यहाँ हमेशा अयिली -गयिली , हमरा-तुम्हरा वाली मीठी भाषा का प्रयोग होता रहा है। जब हम लोग छोटे थे और आज भी हम बातचीत मे हम -तुम शब्द ही इस्तेमाल करते है । शादी के बाद जब हम दिल्ली आये तो वहां पर हम-तुम कि बजाए लोग मै-तू बोलते थे पर हमसे मै-तू बोला ही नही जाता था। और हमारे इस हम-तुम की भाषा सुनकर लोग पूछते थे कि क्या आप u.p. से है। दिल्ली मे कई लोगों को ये कहते सुना है तू खाना खा ले ? हमारे बच्चे कई बार कहते थे कि इस तरह बोलने पर स्कूल मे लोग समझ नही पाते है इसलिये वो लोग स्कूल मे और अपने दोस्तो मे मै-तू करके ही बात करते है। पर घर मे नही बोलते है। दिल्ली के बाद जब हम अंडमान

स्पीड पोस्ट की माया

दिसम्बर महीने मे इन्जीनरिंग के फॉर्म भरे जाते है और इसमे ये भी लिखा होता है कि फॉर्म को या तो स्पीड पोस्ट से भेजे या रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजे। चुंकि आज कल हम लोग गोवा मे है इसलिये हमारे छोटे बेटे ने भी यहाँ गोवा मे बैंक से फॉर्म लिया और भरा और उसे स्पीड पोस्ट से दिल्ली भेज दिया और हम लोग निश्चिंत हो गए क्यूंकि आख़िरी तारीख से करीब बीस दिन पहले फॉर्म जो भेज दिया था। धीरे -धीरे समय बीतने लगा और मार्च आ गया पर उसका admit card नही आया तो हमने बेटे से पूछा कि उस पर पता तो सही लिखा था ना इस पर वो बोला कि पता तो उसमे पहले से ही लिखा होता है। जब अप्रैल भी आ गयी और उसका admit card नही आया तो हम लोगों ने दिल्ली मे पता लगवाने की कोशिश शुरू कि भाई आख़िर माजरा क्या है। और ये सुनकर कि हमारे बेटे का फॉर्म वहां पहुंचा ही नही है हम लोग थोडा सकते मे आ गए क्यूंकि समय बहुत कम बचा था । खैर दिल्ली मे सम्बंधित अधिकारियों ने कहा कि आप लोग फॉर्म की फोटो कापी हो तो वो दे दें तो दूसरा admit card बन जाएगा पर इसके लिए उन्हें स्पीड पोस्ट की ओरिजनल कापी चाहिऐ थी क्यूंकि जो फोटो कापी थी उसमे कुछ क

महात्मा गाँधी

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K.Gopinathan द्वारा खींची गयी यह फोटो आज के The Hindu मे छपी है। इस पर आप क्या कुछ कहना चाहेंगे? (चित्र यहाँ से ली है)

कुलफी और चाट

पहले अंडमान और अब गोवा ,इन दोनो जगहों पर वैसे तो खाने की ज्यादातर चीजें मिल जाती है पर इलाहाबाद और दिल्ली की चाट और मिठाई और लखनऊ की कुलफी नही मिलती। अब ये मत पूछिये की हम इलाहाबाद कब पहुंचे अरे भाई इलाहाबाद हमारा मायका है और लखनऊ हमारी ससुराल और दिल्ली शादी के बाद हमारा घर । अंडमान मे जो तीन साल रहे तो चाट और कुलफी का स्वाद एक तरह से भूल ही जाते अगर बीच -बीच मे हम दिल्ली ,इलाहाबाद और लखनऊ ना आते -जाते रहते। इलाहाबाद के सिविल लाएईन की चाट का कोई जवाब नही क्यूंकि जैसी खालिस आलू की कुरकुरी टिक्की वहां बनती है वैसी तो दिल्ली मे भी नही बनती। दिल्ली की टिक्की मे दाल को भरते है जो वैसे तो खाने मे अच्छी होती है पर यहाँ पर तो ना सादी और ना दाल वाली अच्छी टिक्की मिलती है। अंडमान मे गोलगप्पे जिसे वहां लोग पुच्का कहते है मिलते तो बहुत थे पर कभी खाने की इच्छा नही हुई क्यूंकि उनका गोलगप्पे का पानी देखकर ही कभी मन नही हुआ क्यूंकि पानी से ही सबसे ज्यादा इन्फेक्शन का खतरा होता है। दिल्ली के ऍम .ब्लॉक मार्केट मे तो गोलगप्पे का पानी भी मिनेरल वाटर से बनाते है। गोवा मे भी गोलगप्पे और टिक्की तो

ज़ी के सात फेरे

आज हम आपसे ज़ी पर आने वाले सीरियल सात फेरे की बात कर रहे है जिसमे कहानी घूम घूम कर एक ही जगह आ जाती है। ऐसा लगता है सलोनी बेचारी को सिर्फ मुसीबतों का सामना ही करना लिखा है। हर समय रोने के अलावा जैसे कुछ काम ही नही रहा है। कहानी को ख़त्म करने की बजाये इतना तगड़ा मोड़ देते है की दर्शक बेचारे समझ ही नही पाते है। कुछ दिन पहले चांदनी ने सलोनी के ससुराल वालों के घर और बिजनेस पर कब्जा कर लिया और उन्हें घर से बाहर निकाल दिया पर शायद अगर सलोनी ना होती तो उसके परिवार वाले इस मुसीबत का सामना नही कर पाते क्यूंकि सीरियल की हिरोइन सबसे अकलमंद है। कावेरी तो शायद बदलेगी ही नही क्यूंकि अगर वो सीधी हो जायेगी तो क्लेश कौन करेगा। दुल्हन नाम के सीरियल मे विद्या जो एक अनपढ़ है जब शादी के बाद वो शहर आयी थी तो हमे लगा था की शायद कोई उसे पढने के लिए प्रेरित करेगा पर ऐसा कुछ नही हुआ । चले अब हम उम्मीद करते है की सागर ठीक होकर उसे पढने के लिए प्रेरित करेगा। पर अगर कहीँ ऑपरेशन के बाद सागर की याददाश्त चली गयी तो क्या होगा , ऐसा होने की अधिक उम्मीद है वरना सीरियल ख़त्म करना पड़ेगा। क़सम से की बानी को अब

feed मे बदलाव

हमने अपने ब्लोग की r.s.s. feed बदल दी है उसका नया (अंतर्जाल पता )address है http://feeds.feedburner.com/mamtatv आप से अनुरोध है कृपया अपने रीडर मे इसे अपडेट कर ले।

अफ्तारनुन सिएस्टा

दिल्ली मे पिछले २० सालों से रहते हुए कभी भी बाजार जाने और खरीदारी करने की आदत सी थी पर जब अंडमान गए तो अपनी इस आदत को बदलना पड़ा । वहां जाकर समझ आया कि अफ्तारनुन सिएस्टा क्या है। भाई हम ठहरे दिल्ली वाले जब मन हुआ बाजार चले गए .क्यूंकि दिल्ली मे अफ्तारनुन सिएस्ता जैसा कुछ नही है, सो हम आराम से तैयार होकर करीब १२ बजे जब खरीदारी करने बाजार पहुंचे तो चोंक गए क्यूंकि या तो दुकाने बंद हो गयी थी या बंद हो रही थी। जब हमने अपने ड्राइवर से इसका कारण पूछा तो वो बडे ही शान्त भाव से बोला कि मैडम यहाँ पर तो ऐसे ही है । १२ बजे सब दुकाने बंद हो जाती है और फिर ३ बजे दोपहर मे खुलती है। अब तो आप ३ बजे के बाद ही सामान ले पाएंगी । ये सुनकर ड्राइवर से जब हमने पूछा कि तुमने पहले क्यों नही बताया तो वो बोला कि मैंने समझा कि आप बस घूमने जा रही है। चूंकि अंडमान मे सुबह जल्दी होती है और १२ बजे तक सूरज अपनी चरम सीमा पर होता है और कुछ कोस्तेल एरिया कि वजह से भी ,वहां सभी दुकाने साढे आठ सुबह खुल जाती है ,दोपहर मे १२ से ३ बंद रहती है और फिर ३ बजे के बाद रात ९ बजे तक खुली रहती है। वहां ऑफिस भी साढे

ख़बरों की खबर बोर्ड का हौवा ख़त्म करने की कोशिश

आज के अखबार मे खबर थी कि अब से कक्षा १० के विद्यार्थियों को ये विकल्प दिया जाएगा कि यदि वो चाहे तो दसवी की परीक्षा दे या चाहे तो सीधे बारहवी की परीक्षा दे । दो साल के समय मे विद्यार्थी जब चाहे मतलब अपनी तैयारी के हिसाब से परीक्षा दे सकता है। ये कहा जा रहा है कि ऐसा इसलिये किया जा रहा है जिससे बच्चों पर ज्यादा बोझ ना पडे । पर हमारे ख़्याल से ऐसा करने से बच्चों मे पढने के प्रति रूचि कम भी हो सकती है क्यूंकि उन्हें ये लगेगा कि अभी तो दो साल का समय है बाद मे पढ़ लेंगे। जिन बच्चों को पढना होता है वो वैसे भी पढ़ लेते है। बोर्ड का हौवा ख़त्म करने और बच्चों मे anxiety को कम करने के लिए ये किया जा रहा है। पर क्या ये ठीक है ? हमे लगता है कि थोड़ी बहुत anxiety होना भी अच्छा होता है क्यूंकि anxiety एक ह्यूमन नेचेर है जिसका इन्सान मे होना बहुत जरूरी है। बच्चों मे anxiety को कम किया जा सकता है अगर अभिभावक चाहे तो क्यूंकि बच्चों से ज्यादा तो माँ-बाप मे anxiety होती है कि उनके बच्चे का कितना परसेंट आएगा। और देखा जाये तो एक तरह से माँ-बाप ही बच्चों पर ज्यादा दबाव बनाते है। जब हमारा बड

हाय ये न्यूज़ चैनल

भाई हम तो समझ ही नही पा रहे है की हम इन t.v.चैनल वालों का क्या करें।ना चाहते हुए भी हमे ये सब देखना पड़ा ,एक n.d.t.v.(जो कम से कम और ख़बरों को भी दिखा रहा था ) को छोड़कर सारे हिंदी चैनल अभी भी अभी-एश की खबर देने मे लगे है। अरे भाई अब तो बक्शो। कल बिदाई ऐसे दिखा रहे थे मानो कोई नेशनल इवेंट हो और तारीफ़ करनी होगी इन रिपोर्टर्स की जो पिछले ३-४ दिन से प्रतीक्षा, जलसा और ला मेर पर डटे हुए थे पर मजाल है जो उन्हें किसी की झलक भी मिल जाये। पर तब भी ना तो किसी के चेहरे पर शिकन और ना ही जोश मे कमी।यहाँ तक कि सुरक्षा गार्ड से धक्के भी खाए पर वही डटे रहे । हर बात का जिक्र ऐसे करते है मानो वही मौजूद हो। उन लोगों की गाड़ी के पीछे ऐसे भाग रहे थे की बस।सबसे कमाल कि बात कि ये चैनल पर बिदाई गीत भी बजाये जा रहे थे जैसे कि डोली वही से जा रही हो। पर ये सिलसिला यही ख़त्म नही हो गया । सहारा समय के प्रस्तुत कर्ता ने तो ये सवाल भी पूछ लिया की क्या मीडिया उनकी शादी मे ज्यादा हस्तक्षेप (interfere) कर रहा है ? अरे ये भी कोई पूछने की बात है। कोई चैनल ये दिखा कर कि बिदाई के समय एश के चेहरे पर दुःख के

धो डाला

कल के वर्ल्ड कप मुक़ाबले मे ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को २१५ रनों से हराकर एक बार फिर ये साबित कर दिया कि वो दुनिया की सबसे बेहतरीन टीम है और इसमे कोई शक भी नही है। जिस तरह से कल के मैच मे ऑस्ट्रलिया ने न्यूजीलैंड को हराया वो काबिले तारीफ है। इसे कहते है टीम और देश के लिए खेलना। जब भी खेलते है पूरी जान लड़ा देते है । हर मैच को जीतना ही उनका लक्ष्य होता है और इसमे बुराई भी क्या है आख़िर खेल तो हर कोई जीतने के लिए ही खेलता है। और इसे ही कहते है धो डाला । ऑस्ट्रेलियी खिलाडी चाहे जैसे भी हो (व्यवहार )पर जब वो खेलते है तो उनका जोश और होश देखने लायक होता है ,काश हमारी टीम मे भी ऐसा जोश होता तो शायद आज टीम इंडिया वर्ल्ड कप से बाहर नही होती। पर अपने यहाँ तो भगवान ही मालिक है। टीम इंडिया से एक और बात याद आयी कल बांग्लादेश के लिए जो टीम चुनी गयी उसमे सचिन और सौरव नही है। इस खबर पर न्यूज़ चैनल वाले अब सबसे ये पूछने मे लगे है कि क्या सचिन और सौरव को टीम मे नही लेने का फैसला सही है । अभी दो दिन पहले तक सारे न्यूज़ चैनल पर यही चर्चा हो रही थी कि उन्हें टीम मे रखा जाये या नही। और अब जब

अंडमान निकोबार (बारतांग )

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बारतांग भी पोर्ट ब्ल्येर से दो घंटे की दूरी पर है। वहां जाने के दो साधन है या तो आप बोट से जाये या फिर सड़क से। बोट से जाने मे ४से ५ घंटे लग जाते है जबकि अगर कार या बस से जाएँ तो २ घंटे मे पहुंच जाते है। सड़क का रास्ता इसलिये भी अच्छा है क्यूंकि इसमे जंगल पार करना पड़ता है और इसी जंगल के रास्ते मे जारवा भी मिलते है । जिरका टांग से काफिले की तरह जाना पड़ता है जिसमे सबसे आगे बस मे फॉरेस्ट गार्ड बैठता है और कारों मे भी गार्ड बैठता है जिससे जारवा कोई गाड़ी ना रोक सके। यूं तो अब जारवा पहले की तरह नही है कि देखते ही तीर मार दे पर अभी भी अगर वो गाड़ी रोक ले तो जरा मुश्किल हो जाती है । वैसे अब वो लोग कुछ-कुछ हिंदी भी समझ लेते है और कुछ छोटे-छोटे शब्द भी बोलते है जैसे पान ,बिस्किट , खाना , पैसा वगैरा। अब तो कई बार वो लोग जंगल से जड़ी-बूटी , सुपारी लाते है और दुकानों मे बेचते है और बिस्किट, पान वगैरा खरीदते है। जारवा लड़कियों को सजने का बहुत शौक़ होता है और उन्हें लाल,नीला रंग पसंद है कहने का मतलब है कि उन्हें bright colours पसंद आते है । ज्यादातर महिलाएं गले मे और सिर पर कुछ

ख़बरों की खबर जान्हवी का ट्विस्ट

आज सुबह जब हमने न्यूज़ देखने के लिए आज तक चलाया तो उस पर और अन्य चेन्नलों पर ब्रेकिंग न्यूज़ मे यही खबर दिखायी जा रही है की जान्हवी ने अभिषेक पर क्या - क्या आरोप लगाए है । और आज तक तो जैसा वो दावा करता है कि वो सबसे आगे रहता है तो बस उस चैनल पर सिर्फ यही खबर पिछले एक घंटे से दिखायी जा रही है । अभी तक तो शादी की खबरें दिखा - दिखा कर परेशान किये हुए थे उस पर ये खबर । और जान्हवी से बात करना और दुनिया भर के बकवास सवाल पूछना , आख़िर ये लोग ये क्यों नही समझते कि आज कल लोग कई बार मीडिया के द्वारा मशहूर होना चाहते है और ये जान्हवी प्रकरण उसी का सबूत है । आज का पूरा दिन तब तक सिर्फ इसी खबर को दिखायेंगे जब तक कि शादी ना शुरू है जाये । अभी तो अमर सिंह और अमिताभ से भी ये सवाल पूछेंगे कि जान्हवी के बयान मे कितनी सच्चाई है ? क्या वाकई मे अभिषेक ने उससे शादी का वादा किया था ? अरे भाई जब पुलिस ने ही उसकी रिपोर्ट लि

सोनी के ....

लीजिये हम फिर से हाजिर है दुर्गेश नंदिनी को लेकर । पैसे के लिए बेटे और बहु किस हद तक जा सकते है और दुर्गेश कैसे हर मुसीबत को दूर करतीहै ये इसमे देखा जा सकता है। दुर्गेश हर जगह सही समय पर पहुंच जाती बिल्कुल spider वूमन की तरह एक पल मे ऑफिस तो एक पल मे घर पहुंच जाती है। कमाल की फुर्ती है और मजाल है जो चेहरे पर शिकन आ जाये। पर छोटे- छोटे बच्चों का अपने माँ-बाप पर निगरानी रखना कुछ अच्छा नही लगता है। सोनी पर ही जीते हैं जिसके लिए आता है जो अभी तक बहुत अच्छा चल रहा है और अपनी कहानी से भटका नही है। यूं तो इसमे सब कुछ अच्छा है सिर्फ एक बुआ (अदिरा )को छोड़कर, पर कम से कम इसमे वो सास -बहु की खिट-खिट नही है। वैसे बुआ ने गड़बड़ करने मे कोई कसर नही छोडी है। सबसे कमाल का तो एक लडकी अनजानी सी है जिसमे पिछले हफ्ते लगा की चलो अब तो हीरो -हिरोइन मिल गए और अब पूरा परिवार हंसी-ख़ुशी रहेगा पर नही फिर से एक नयी लडकी का किरदार इसमे जोड़ दिया , इसे आगे बढ़ाने के लिए। सबकी बात हो और बाबूजी की ना हो ऐसा कैसे कर सकते है। हम बात थोड़ी ख़ुशी थोड़े गम की कर रहे है जिसमे एक गुजराती परिवार को दिखाया ग

द ब्रित्तो

नाम कुछ अजीब है पर गोवा मे इस नाम का एक रेस्तारेंट समुन्दर किनारे बना है जहाँ अगर शाम को जाया जाये तो बहुत अच्छा लगता है वो इसलिये क्यूंकि आजकल गोवा मे बहुत गरमी पड़ रही है वैसे तो पर्यटक घूमते ही है पर बेहतर है की दिन की बजाए शाम को जाये। यहाँ पर भी माँसाहारी खाना जैसे sea food platter (जिसमे क्रेब को prawn मे stuff करते है) और chicken platter काफी अच्छा होता है और साथ ही साथ शाकाहारी भोजन मे भरवा मशरूम बहुत अच्छा होता है । britto मे खाने के साथ साथ आप आतिश बाजी का भी मजा उठा सकते है क्यूंकि अक्सर समुन्दर के किनारे होटल वाले आतिश बाजी करते है । और खाने के बाद आप समुद्र तट पर टहलने का आनंद भी उठा सकते है जो सेहत के लिए भी अच्छा होता है । खाना ,समुन्दर का किनारा ,और आतिश बाजी आपकी शाम को हसीन बनाते है ।

testing हिट के लिए नही था

हिट लेना हमारा मकसद नही था पर क्यूंकि उस समय हम अपनी ब्लोग पर कुछ बदलाव कर रहे थे और हमारे कंप्यूटर की स्क्रीन पर सब कुछ उल्टा पुल्टा दिख रहा था इसलिये ये देखने के लिए किया था कि कहीँ और लोगो को तो ब्लोग पढने मे दिक्कत नही आ रही है और आप सबकी बहुमूल्य टिप्पणियों की बदौलत हमे ये पता भी चल गया इसके लिए आप सबका धन्यवाद ।

दुर्योधन

क्या हुआ ये नाम सुनकर चौंक गए , घबराइये मत हम यहाँ कोई महाभारत नही सुनाने जा रहे है। ये नाम यूं तो आम तौर पर सुनाई नही देता है खासकर उत्तर भारत मे पर, अंडमान मे हम कह सकते है कि ये नाम बहुत आम है, वैसे ३ दुर्योधन नाम के व्यक्तियों से हमारा सामना हुआ। पहली बार ये नाम हमने p.w.d.मे काम करने वाले plumber का सुना तो सुनकर यकीन ही नही हुआ कि कोई दुर्योधन नाम भी रख सकता है। पर जब हमने दूसरी बार ये नाम अपने पतिदेव के ऑफिस मे काम करने वाले एक आदमी का सुना तो लगा की लो एक और दुर्योधन मिल गया । उन दिनों हम घर मे काम करने के लिए आदमी खोज रहे थे वैसे आपको शायद यकीन नही होगा कि अंडमान मे servant मिलना किसी खजाने के मिलने से कम नही है क्यूंकि वहां ज़्यादातर लोगों के पास या तो नारियल के बाग़ है सुपारी के बाग़ और काफी लोग खेती भी करते है। चुंकि वहां के लोगों खाना बहुत सादा है चावल और मछली, मतलब ना तो उन्हें काम की जरुरत है और ना वो करना चाहते है। और अगर काम करते भी है तो उन्हें पक्की नौकरी चाहिऐ होती है अगर नौकरी दिला सकते है तो आपको काम करने वाले मिल सकते है। खैर करीब २ महीने की जद्दो

ख़बरों की खबर २ :एक और किस्सा शिल्पा का

शिल्पा शेट्टी और रिचर्ड गेरे जो किसी एड्स जागरूकता कार्यक्रम के लिए दिल्ली गए थे, आज सुबह से हर न्यूज़ चैनल सिर्फ यही दिखा रहा है की गेरे ने शिल्पा के साथ क्या किया . हर कोई अपने हिसाब से न्यूज़ को बढ़ा - चढा कर दिखा रहा है की गेरे ने किस तरह शिल्पा के साथ बदतमीजी की या जोर जबरदस्ती की , ऐसा लगता है मानो और कोई न्यूज़ ही ना रह गयी हो। हर चैनल पर या तो ये सवाल पूछा जा रहा है की क्या गेरे को माफ़ी मांगनी चाहिऐ या क्या जो कुछ गेरे ने किया वो सही था या गलत ? मजाल है की आप कोई और न्यूज़ देख ले। इसमे सही या गलत का फैसला करना बड़ा मुश्किल है क्यूंकि २ संस्कृति के लोग है एक पश्चिमी सभ्यता जहाँ इसे बुरा नही माना जाता है.और हमारी हिंदुस्तानी सभ्यता जहाँ इसे बुरा मानते है। वैसे आजकल हमारे हिंदुस्तान मे भी लोग ( फिल्मी लोग और hi - fi लोग )एक - दुसरे से मिलते है। क्यों कि वो ये दिखने की कोशिश कर रहे थे की छूने और किस करने से एड्स नही फैलता है । हांलाकि जैसा कि शिल्पा ने कहा कि जरा कुछ ज्यादा ही हो गया था ।

राहुल के बोल

राहुल गाँधी ने अभी हाल ही मे उत्तर pradesh की एक चुनावी सभा मे कहा था की उनका खानदान जो कुछ करने की ठान लेता है उसे करके ही छोड़ता है चाहे वो आजादी हासिल करना हो या पाकिस्तान को २ भागों मे बाँटना हो या देश को २१वि सदी मे ले जाना हो पर वो ये भूल गए कि देश की इस हालत के जिम्मेदार भी उन्ही के खानदान वाले है। जोश मे होश खोना भी उनके खानदान की आदत सी है शायद आपको याद होगा एक बार राजीव गाँधी ने अपनी किसी चुनावी सभा मे विपक्षियों को उनकी नानी याद दिलाने की बात कही थी। अभी कुछ दिनों पहले तक तो वो जरा संभल -संभल कर बोलते थे पर शायद अब उनको ये लगता है कि अब वो अकेले अपने दम पर चुनाव जीत सकते है। पर भैया इस ग़लतफ़हमी मे मत रहना ।

कॉमेडी की ट्रेजेडी

आज कल राजू श्रीवास्तव हर चैनल चाहे वो न्यूज़ चैनल जैसे स्टार न्यूज़ और आज तक हो या सोनी और स्टार वन हो सब जगह छाये है। उनकी कॉमेडी का ये हाल है कि आपने स्टार वन पर उनके जो चुटकुले देखे है वही या तो स्टार न्यूज़ या आज तक पर भी सुनने को मिल जायेंगे। स्टार न्यूज़ ने सिर्फ कार्यक्रम का नाम नया रखा है पर बाकी सब कुछ पुराना है। उसमे कुछ clipping वो सहारा वन के सौजन्य से दिखाते है तो कुछ किसी और कार्यक्रम की। और सबसे कमाल की बात ये है की दोनो न्यूज़ चैनल एक ही समय पर राजू श्रीवास्तव का कार्यक्रम दिखाते है। भाई ठीक है आप कार्यक्रम दिखाइये पर कुछ नया तो दिखाइये। आज तक पर आने वाला ऐसी की तैसी तो वाकई मे ही ऐसी की तैसी है कॉमेडी की। सोनी का कार्यक्रम कॉमेडी का बादशाह है या ट्रेजेडी का शहंशाह ? और सोने पर सुहागा राखी सावंत भी है । कॉमेडी का जिक्र हो और सिद्धू की बात ना आये ये कुछ ठीक नही। सिद्धू तो जैसे हंसी का बटन लगाए हुए है। अभी चुटकुला ख़त्म भी नही हुआ की सिद्धू की हंसी चालू।

वीवा पंजिम

जी हाँ ये नाम गोवा के एक रेस्टोरेंट का है ,ये जैसा की इसके नाम से पता चलता है कि ये पंजिम मे है। ये बहुत ही छोटा सा रेस्टोरेंट है पर goan खाना बहुत अच्छा और बहुत सस्ता होता है। अगर आप मांसाहारी है और sea food के शौक़ीन है तो आप इस रेस्टोरेंट मे खाना खा सकते है। बस इस तक पहुँचने का रास्ता jara खराब है वो क्या है कि ये एक गली के अन्दर है । गोवा मे ज्यादातर रेस्टोरेंट मे a.c . रेस्तारं अलग से होता है और सर्विस tax देना पड़ता है अब ये आप पर है कि आप a.c.मे खाना चाहते है या बग़ैर a.c.के। sea food मे crab और prawn काफी अच्छा है। वैसे शाकाहारी खाना भी मिलता है और अच्छा भी होता है। यहाँ एक मैन डिश के साथ या तो चावल या goan ब्रैड देते है जो कि एक complete meal हो जाता है। यहाँ पर विदेशी लोग भी बहुत आते है ,और चूंकि ये रेस्टरां छोटा है इसलिये देर से जाने पर जगह नही मिलती है। इसलिये अगर कभी इच्छा हो तो जरा जल्दी ही जाइयेगा।

कमाल की बहनें

ज़ि t.v. पर आने वाले सीरियल क़सम से मे बहनों को इतना नीचे गिरा दिया कि यकीन नही होता। सीरियल मे जय की सगी बहन जिज्ञासा और मौसेरी बहन करुना और बानी की बहन पिया इन तीनो ने किस तरह मिल कर बानी की जिंदगी खराब की ये देख कर लगता है मानो दुनिया मे रिश्तों की कोई अहमियत नही रह गयी है। यथार्थ से तो दूर -दूर तक का नाता नही है। जिस तरह पिया ने अपनी ही बहन को पागल बनाया और अपने ही बहनोई को अपने से शादी के लिए मजबूर करना तथा छोटी बहन रानो को धमकाना ,ये सब क्यों ? जिस dvd को दिखाकर पिया जय वालिया को ब्लैकमेल कर रही है अरे mr. वालिया उसे जरा ध्यान से देखो उसमे साहिल की आवाज तो है पर उसने dialogue ही नही बोले है क्यूंकि उसके होंठ तो हिल ही नही रहे थे। बहनो से बुआ लोग भी याद आ गयी ,बुआ का किरदार हर सीरियल मे बस भाई का घर तोड़ने और भाई का पैसा लूटना इन्ही दो कामों मे लगा है। अब बुआ चाहे ज़ि t.v.की हो या स्टार प्लस की और भला हम सोनी को कैसे भूल सकते है । हर सीरियल मे होड़ लगी है की कौन कितना बुरा दिखा सकता है। भाई-भतीजों की बुद्धि तो घास चरने चली गयी है जो कुछ बुआ या बहन कह दे आंख मूँद क

खबरों की खबर

जी हाँ आज हम इसी बारे मे लिखने जा रहे है। सुबह के समय अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते है तो आज तक और स्टार न्यूज़ देख सकते है । अगर आज तक पर मिनाक्षी रानी आती है तो स्टार न्यूज़ पर २-३ ज्योतिषी मसलन शैली और माया सभी राशियों का भविष्य बताती है अब ये तो आप पर है की आप किसकी बात मानते है। आप ये भी कर सकते है कि अगर मिनाक्षी रानी ने आपका भविष्य कुछ खास अच्छा नही बताया है और माया या शैली के मुताबिक आपका दिन अच्छा गुजरने वाला है तो आप उसे अपने लिए मान लीजिये। भाई ये तो अपने ऊपर है। आजकल तो ज्योतिषी का धंधा भी काफी ग्लैमरस हो गया है । अब मिनाक्षी रानी को ही देखिए क्या स्टाइल है , इतने बडे -बडे earing पहनती है और make-up भी किसी हिरोइन से कम नही पर प्रस्तुतबोलने का स्टाइल जरूर बढ़िया है। इतना जोर दे-देकर बोलती है मानो सुनने वाला कही भाग ना जाये। स्टार न्यूज़ वाली इसके बिल्कुल उलट ऐसे नीरस भाव से बोलती है कि बस !

अंडमान निकोबार ३ (neil island )

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ये द्वीप पोर्ट ब्लेयेर से २ घंटे की दूरी पर है। पहले वहां बोट सीधे नही जाती थी ,बोट या तो havelock जाते हुए या फिर havelock से वापस आते हुए नील island जाती थी। पर अब स्पीड बोट से सीधे २ घंटे मे पहुंच जाते है। बोट से उतरते ही आप jetty से दोनो तरफ रंग - बिरंगी मछलियाँ ( कौवा फिश ) देख सकते है । ये द्वीप बहुत ही छोटा है पर खूबसूरत है और शांति तो इतनी कि एक बार को मन ये सोचने को मजबूर हो जाता है क ि क्या हम इसी दुनिया मे है ,क्यूंकि वहां गाडियां बहुत कम है इसलिये ना तो वहां गाड़ियों का शोर है और ना ही कोई भागम- भाग है। वहां जाकर सब कुछ भूलकर आप प्रकृति का लुत्फ़ उठा सकते है। वहां २-३ beach है पर चूंकि वहां ज्यादा लोग नही जाते है इसलिये beach खाली रहते है। जो एक तरह से अच्छा भी है और खराब भी है क्यूंकि भगवन ना करे अगर कोई हादसा होता है तो वहाँ कोई बचाने वाला नही होगा । हम लोग जब वहां गए तो ऐसा ही कुछ हमारे साथ हुआ था। सीतापुर beach जहाँ चट्टानें है और काफी आगे जाकर एक गुफा सी है। वहां लहरों के साथ टहलते -टहलते हम लोग गुफा तक जा पहुंचे ,और फोटो खिचाने के लिए

कुत्तों की बहादुरी धूम स्टाइल

आज हमने the week मे एक लेख पढा जिसमे ये लिखा था In Ghaziabad last year, two dogs had chased kidnappers on a bike and rescued an abducted child हमारा कैरी बाइक तो नही चलाता है पर frisbee जरूर पकड़ लेता है।

idiot

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कल हम pan कार्ड के लिए फॉर्म भर रहे थे तो उसमे एक जगह लिखा था कि वो कौन लोग है जिन्हें pan कार्ड फॉर्म भरने के लिए assessee की मदद लेनी होती है । वो लोग जो खुद फॉर्म नही भर सकते है। उस कॉलम मे बाकी तो सब ठीक था पर उसी मे idiot भी लिखा था जिसे पढ़कर हमे दुःख भी हुआ और अफ़सोस भी हुआ क्यूंकि ये फॉर्म एक सरकारी विभाग द्वारा जारी किया जाता है। idiot पढ़ कर हमे ये समझ नही आया की आख़िर इस श्रेणी मे कौन लोग आते है क्यूंकि जहाँ तक हमे मालूम है idiot की कोई परिभाषा नही है। वैसे तो हर कोई दूसरे इन्सान को idiot ही समझता है । अगर idiot का मतलब बेवकूफ है तब तो सारा देश इस श्रेणी मे आ जाएगा क्यूंकि हम सब या तो किसी को बेवकूफ बनाते है या खुद बेवकूफ बनते है। कमाल की सोच है आयकर विभाग की ।

घर की खोज

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कुछ दिन गेस्ट हाउस मे रहने के बाद घर की खोज शुरू हुई ,घर तो कई थे पर हमारी इच्छा थी की हमारा घर समुन्द्र के सामने हो बिल्कुल फिल्मी स्टाइल मे । इस चक्कर मे कुछ समय निकल गया ,हमारा ये कहना था की अगर हम अंडमान मे समुन्द्र के सामने नही रहेंगे तो कहॉ रहेंगे। बस अब इसे हमारी जिद ही समझ लीजिये .खैर कुछ दिन बाद हमे एक घर जो की sea facing था मिल गया। और उस जगह का नाम था जंगली घाट ,चौन्किये मत अंडमान मे नाम जरा अलग तरह के होते है । जब हमने घर पसंद कर लिया तो हमारे ड्राइवर ने कहा कि मैडम ये घर ठीक नही है.क्यूंकि यहाँ से ही शमशान घाट का रास्ता है । ये सुनते ही हमने उस घर को लेने से मना कर दिया और हम गेस्ट हाउस वापस आ गए । पर वो कहते है ना कि जो किस्मत मे लिखा हो उसे आप बदल नहीं सकते। गेस्ट हाउस मे रहते हुए समय अच्छे से बीत रहा था .रोज वहां से हम समुन्द्र का ,उसके पानी के अलग -अलग रंगों का मजा उठा रहे थे और जिंदगी मजे मे कट रही थी । यूं तो गेस्ट हाउस का खाना खाकर ज्यादा दिन नहीं रहा जा सकता था सो एक बार फिर से घर कि खोज शुरू हो गयी। और हमारी किस्मत कि इस बार भी हमे घर मिला तो वहीँ जंगल

गोवा मे खाने पीने की जगहें

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यूं तो गोवा मे खाने -पीने की ढेरों जगहें है और हर दो कदम पर एक रेस्टारेंट भी है पर कुछ ऐसी जगहों के बारे मे हम बात करने जा रहे है जहाँ आप खाने का भरपूर आन्नद उठा सकते है। आज हम शुरुआत एक ऐसे ही रेस्टारेंट से करने जा रहे है जिसका नाम o coqueiro है और जो पोरवरिम मे है। इस रेस्टारेंट की खास बात ये है कि यहां का खाना तो अच्छा होता ही है यहां का माहौल भी बहुत अच्छा है। एक इनका a.c. रेस्टारेंट है और एक बरामदे मे भी कुर्सी मेज लगा रखी है । सबसे अच्छा इनका ओपन एअर रेस्टारेंट है जहाँ आप खाने के साथ संगीत का भी आन्नद उठा सकते है। संगीत काफी अच्छा होता है और सबसे बड़ी बात कि बहुत तेज नही होता है। कानों को सुनने मे अच्छा लगता है। आप अपनी फरमाइश के गाने भी सुन सकते है। वही पर एक डान्स floor भी बना है अगर कोई चाहे तो वो डान्स भी कर सकता है। और एक बहुत ही खास बात है कि यहां से ही चार्ल्स सोबराज को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ये वही चार्ल्स सोबराज है जो दिल्ली पुलिस को बेवकूफ बनाकर चकमा देकर भाग गया था ।जिस समय उसे पकडा गया था उस समय वो यहीं बैठ कर किताब पढ़ रहा था।

क़यामत या मुसीबत

स्टार प्लस पर आने वाले इस क़यामत नाम के सीरियल को देख कर ये समझ ही नही आता है कि हम कौन सा सीरियल देख रहे है क्यूंकि रोनित रॉय अरे वही अपने मिहिर या यूं कहें कि मि . बजाज उन्हें देख कर लगा कि शायद हम कसौटी देख रहे है पर तभी निम्मो रानी दिख गयी अभी हम असमंजस मे ही थे कि ऋषि वो कहीँ तो होगा वाले गेट अप मे नजर आ गए। बालाजी के सभी सीरियल मे कौन किसका बेटा है और कौन किसकी माँ या बाप ये पता ही नही चलता है। इनके सीरियल मे बेटे हमेशा अपनी माँ के दुश्मन होते है चाहे वो अंश हो या प्रेम हो । इससे पहले भी सीरियल बना करते थे जैसे हम लोग और बुनियाद ,उनमे हमे हक़ीकत दिखाई देती थी हालांकि नाटकीयता तो थोड़ी बहुत सभी मे होती है ,सास बहु के झगडे भी दिखाए जाते थे पर ऐसा नही जैसा आजकल के सीरियल दिखाते है । इनकी बहुएं चाहे वो कोमोलिका हो या मोहिनी हो या फिर अपर्णा और बहुओं की बात हो और हम पल्लवी को भूल जाये ऐसा कैसे हो सकता है इनकी परिवार से बदला लेने की नयी -नयी तरकीब देख कर कहना पड़ता है कि वाह क्या बहुंये है। क्यूंकि .... मे फिर से मंदिरा को लाना तो कभी कहानी ....मे मरी हुई गायत्री को वापस ला

तेन्दुलकर को ग़ुस्सा क्यों आता है.

तेन्दुलकर गुरू ग्रेग से क्यों नाराज है सिर्फ इसलिये कि उसने कुछ सीनियर खिलाड़ियों के बारे मे कहा है। तेन्दुलकर ही तो अकेले सीनियर खिलाडी नही है फिर इतना ग़ुस्सा क्यों है। जैसा कि तेन्दुलकर कह रहे है कि उन्होने क्रिकेट को अपनी जिंदगी के सत्रह साल दिए है तो इसी क्रिकेट ने उन्हें महान खिलाडी तेन्दुलकर भी बनाया है। और इसी क्रिकेट की बदौलत उनके पास इतने विज्ञापन और बड़ी -बड़ी कम्पनियों के करार भी है। ऐसा नही है की आप ने ही क्रिकेट को सब कुछ दिया है सचिन इस क्रिकेट ने उससे कहीँ ज्यादा आप को दिया है। अगर खिलाडी अच्छा नही खेलेंगे तो उन्हें हर तरह की आलोचना तो सुननी ही पडेगी। ये तो कोई बात नही हुई । माना की आप क्रिकेट के लिए पूरी तरह समर्पित है तो वो समर्पण हमे विश्व कप मे क्यों नही दिखाई दिया। ये तो एक तरह से अपने आप को बचाने वाली बात हुई। अरे सचिन जब भी आप अच्छा नही खेले देश और क्रिकेट प्रेमी हमेशा आप के साथ रहे पर आख़िर कब तक? और सचिन आप ने वो कहावत तो सुनी ही है - अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत।

अंडमान निकोबार 2

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अंडमान पहुंच कर हम लोग बहुत खुश थे । एअरपोर्ट से साऊथ प्वाइंट circuit house का रास्ता ५ मिनट का है ओर circuit house थोडा ऊंचाई पर है । और वहां से बहुत ही सुन्दर view दिखायी देता है । अगर आप अपनी बालकनी से या कमरे से बाहर देंखे तो सामने समुन्द्र और पहाड़ और बादलों का अदभुत नजारा देखने हो मिलता है । चुंकि हम लोग जून मे गए थे और बारिश का मौसम था इसलिये वहां का नजारा देखते ही बनता था । वहां पर बारिश ऐसे होती है मानो पर्दा गिर रहा हो । एक समान बारिश होती रहती है । बारिश का कुछ कहा नही जा सकता है कभी झमाझम बारिश तो कभी चमचमाता सूरज निकल आता है कहने का मतलब है कि आपको वहां हमेशा छतरी लेकर चलना पड़ता है क्यूंकि पता नही कब इंद्र देव अपनी कृपा कर दे । पोर्ट ब्लेयेर मे समुन्द्र के साथ -साथ walking track बना है जिसे देख कर हमारा भी मन हो गया टहलने का। वहां सवेरा जल्दी हो जाता है यानी कि वहां का ६ दिल्ली के ८ बजे के बराबर

इंडियन क्रिकेट लीग

zee के सुभाष चंद्र जिन्होंने आज ये घोषणा की कि वो इंडियन क्रिकेट लीग बना रहे है वो सुनकर कुछ अजीब सा लगा क्यूंकि सुभाष जी से पहले b. c.c. i ने भी दो टीम इंडिया ब्लू और इंडिया सीनियर बनाने की घोषणा की थी। सुभाष चंद्रा की i.l.c.मेरे ख़्याल से जल्दबाजी मे लिया गया निर्णय है इससे पहले उन्होने kbc के competition मे सवाल दस करोड़ का शुरू किया था जो बहुत बड़ा फ्लॉप रहा था। इस तरह से टीम बनाकर वो क्या साबित करना चाहते है ? इसमे कोई शक नही है की टीम बहुत ही बुरा खेली है पर इसका मतलब ये नही है की हर कोई अपनी एक अलग टीम इंडिया के लिए बना ले । ये तो कोई हल नही हुआ ,अपने देश की टीम के आख़िर कितने हिस्से किये जायेंगे ? सबसे बड़ी बात है की हमे नए खिलाड़ियों को मौका देना चाहिऐ और एक ऐसी टीम तैयार करें जो अपने देश का गौरव बढ़ा सके। i.l.c.मे ६ टीम बना रहे है , सुभाष जी ये कोई चैनल या सीरियल नहीं है की आप जनता को बेवकूफ बनाए। हिंदुस्तान एक है और जैसा कपिल देव कहते है क्रिकेट देशभक्ति से जुड़ा है तो क्या आप देश के टुकड़े करना चाहते है?

दिल्ली से अंडमान तक का सफ़र

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ये बात १२ जून २००३ की है हम लोगों का अंडमान तबादला हो गया था और हम बहुत खुश भी थे क्यूंकि पिछले २१ साल से हम दिल्ली मे रह रहे थे और वहां की भागदौड़ भरी जिंदगी से ऊब चुके थे । हम लोगों के लिए ये ट्रान्सफर आर्डर एक blessing की तरह था । हालांकि हमारे घरवालों और रिश्तेदारों के लिए ये थोडा मुश्किल था क्यूंकि अंडमान को काला पानी जो माना जाता है। कुछ लोग मजाक भी करते थे कि भी तुम लोगों ने ऐसा क्या किया जो तुम को काले पानी कि सजा मिल गयी। कुछ लोग कहते थे कि अपना तबादला रुकवा लो। और तो और कुछ ने ये भी कहा कि वहां पर मसाले नही मिलते है इसलिये आप मसाले जरूर ले जाइए। हर कोई अपने हिसाब से राय देने मे लगा था। पर हम लोगो को इन सब बातों से कोई फर्क नही पड़ता था । हमारे मम्मी -पापा और हमारे पापाजी (ससुरजी ) को थोडा दुःख तो था पर वो हमारे साथ थे और हमारी ख़ुशी मे खुश थे। हम लोगो को ऐसा लग रहा था मानो हम कहीँ विदेश जा रहे हो हर कोई मिलने आ रहा था और हम भी जाने से पहले अपने मायके और ससुराल दोनो जगह जाकर लोगों से मिल आये थे। आख़िर हमारे जाने का दिन भी आ गया। पहले हम लोग दिल्ली से कोलकत्ता गए और वहां रात म

गोवा मे karting

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गोवा मे घूमने के साथ -साथ अगर कोई चाहे तो वो karting का मजा भी ले सकता है । यूं तो जो लोग घूमने आते आते है वो सिर्फ उन जगहों पर जाते है जो tourist गाइड मे लिखी होती है। पर अगर कोई karting का शौक़ीन है तो वो karting का मज़ा गोवा मे भी उठा सकता है। एक तो इन्गोस बाज़ार के पास karting ट्रैक है जहाँ शाम ४ बजे से रात १० बजे तक karting की जा सकती है और रेट भी ठीक है एक आदमी के लिए १३० रूपये और १३० रूपये मे १० चक्कर लगाते है। और अगर शनिवार का दिन है तो karting के साथ -साथ night बाज़ार का मजा भी ले सकते है। दूसरा karting का ट्रैक मदगांव मे है। ये ट्रैक काफी ऊंचाई पर है और रास्ता भी बहुत संकरा है .karting ट्रैक तक जाते हुए भी आप ड्राइव का मजा ले सकते है। वहां पहुंच कर यकीन ही नही होअत है की इतनी ऊंचाई पर भी ट्रैक बनाया जा सकता है। ये ट्रैक ज्यादा अच्छा है क्यूंकि इसमे जो karting नही कर रहे है वो प्रकृति का आनंद ले सकते है। शाम के समय karting के साथ ही सूर्यास्त का आन्नद भी उठाया जा सकता है। सबसे बड़ी बात ये है कि ट्रैक बहुत अच्छा है । यहाँ १२० रूपये मे १० चक्कर लगा सकते है। हम स

अन्ताक्षरी और अन्नू कपूर

कल रात स्टार वन कि अन्ताक्षरी मे अन्नू कपूर और जुही परमार के बीच नई जेनेरेशन और पुरानी जेनरेशन के लोगो पर जो बहस शुरू हुई वो पहले तो नोक -झोक कि तरह लग रही थी पर बाद मे कार्यक्रम के अंत मे ये बहस बहुत बढ गयी थी ,हालांकि जुही ने बहस को ख़त्म करके कार्यक्रम को आगे बढाने की बात भी कही पर अन्नू कपूर थे कि रुकने का नाम ही नही ले रहे थे। यहाँ तक कि उन्होने कुछ अपशब्द भी कहे जो की सुनने मे बहुत खराब लग रहे थे। अन्नू कपूर को ये नही भूलना चाहिऐ की अन्ताक्षरी जिसे ये रिश्तों की अन्ताक्षरी कहते है उसे परिवार के लोग एक साथ बैठ कर देखते है और उनके इस तरह के व्यवहार को लोग पसंद नही करेंगे। जैसा की अन्नू कपूर ने खुद कहा था की नई पीढ़ी के पास कुछ नही है पर अन्नुजी आप नई पीढ़ी को क्या दे और दिखा रहे है जब आप ही अपनी जबान पर काबू नही रख सकते है ? जुही ने कम से कम आपकी इज्जत का ख़्याल किया और वहां से चली गयी। वैसे ये भी आश्चर्य की बात है कि वहां जुही की गाड़ी तैयार खड़ी थी। गजेन्द्र सिंह को भी अपने प्रस्तुतकर्ता पर कुछ कण्ट्रोल रखना चाहिऐ , वैसे ये लोग कई बार t.r.p.बढ़ाने के लिए भी ये सब ड्रामा करते है