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जरा एक नजर इस फोटो पर ....देखिये जरुर

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दो दिन पहले के नवहिंद टाईम्स में ये फोटो छपी थी । सबसे पहले आप फोटो देखें और उसके नीचे लिखे शब्दों ( सेंटेंस ) को ध्यान से पढ़े । कुछ समझ में आया । नही आया । :) तो चलिए हम बता देते है , वो क्या है कि आजकल चुनावों का समय है और सभी जगह नोमिनेशन की प्रक्रिया चल रही है । ( इस फोटो मे बी . जे . पी . के प्रत्याशी अपना नोमिनेशन फाइल करने के बाद बाहर आकार फोटो खिंचा रहे है ) साथ ही गोवा में इन्ही दिनों लेंट पीरियड ( जिसमें क्रिशचन लोग ४० दिन तक नॉन - वेज नही खाते है और इस दौरान saints की मूर्ति ( statues ) के साथ procession निकलते है । ) भी चल रहा है । और इस फोटो में इन दोनों बातों को मिला दिया गया है । :) मतलब फोटो election की और सेंटेंस लेंट का ।

अरे कोई है या सबके सब ब्लौगर सम्मलेन मे चले गए .....

अब आज तो सभी दिल्ली वासी गए होंगे अरुण जी के बुलाए गए ब्लौगर सम्मलेन मे तो पता नही लोग पोस्ट पढेंगे या नही और टिप्पणी करेंगे या नही । पर खैर उनके सम्मलेन की खबरें तो हम लोगों को मिल ही जायेगी । :) आज पहली अप्रैल है और अब तो कम पर एक ज़माने मे इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार किया करते थे ।और कितना मजा आता था लोगों को अप्रैल फूल बनाने मे । घर मे तो बहुत ही आम सा तरीका था अप्रैल फूल बनाने का ,अरे वही फ़ोन उठा कर कहना कि पापा आपका फ़ोन है या जिज्जी तुम्हारा फ़ोन है । या दरवाजे की ओर इशारा कर कहना की भइया बाहर कोई मिलने आया है । और स्कूल मे दोस्तों को कहना कि तुम्हे टीचर ने बुलाया है और जैसे ही कोई लड़की उठ कर चलने लगती तो जोर से अप्रैल फूल चिल्लाते थे । वो भी क्या दिन थे । खैर छोडिये उन बीते दिनों को । आज सुबह अखबार मे ये ख़बर पढ़ी तो सोचा कि आप लोगों को भी बता दिया जाए । वैसे भी आजकल हर तरफ़ चुनाव और उससे जुड़ी खबरें ही ज्यादा पढने और देखने को मिल रही है । तो ख़बर पढिये और बताइये कि क्या ऐसा हो सकता है ।

नेताओं के मंचों का टूटना ,गिरना और बच जाना ...... :)

कल ज्ञान जी कि पोस्ट पर टूट मचान शीर्षक देख कर हमने समझा था कि उन्होंने मंच टूटने वाली घटनाओं पर लिखा है । खैर उन्होंने तो नही लिखा तो हमने सोचा कि हम ही इस पर लिख दे । अब वो क्या है कि आजकल चुनावों का मौसम है तो रोज ही नए और पुराने नेता और अभिनेता बड़ी-बड़ी रैली करते है । अब रैली होगी तो स्टेज या मंच भी बनेगा जहाँ से नेता भाषण बाजी करते है । पर आजकल या तो मंच बनाने वाले मंच ठीक से नही बना रहे है या फ़िर ये मंच इन नेताओं को इनकी सही जगह दिखा रहा है । :) कल ही किसी न्यूज़ चैनल पर दिखा रहे थे कि बंगाल मे कहीं भाषण देने पहुँची कोई फ़िल्म अभिनेत्री जो इस बार शायद चुनाव लड़ रही है , वो बाकी मंच पर खड़े कार्यकर्ताओं के साथ हाथ उठाकर शायद जनता का अभिवादन कर रही थी तभी अचानक मंच समेत वो और बाकी लोग नीचे गिर पड़े । इससे कुछ दिन पहले अमर सिंह भाषण देते-देते अचानक नीचे चले गए । अब जब तक लोग समझे तब तक अमर सिंह नीचे गिर गए । ये अलग बात है कि वो फटाफट उठा कर खड़े भी हो गए । अमर सिंह ही नही उमा भारती भी अपनी किसी रैली के दौरान बड़े शान से...