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फूलों की बगिया महकेगी .....

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अरे हम कोई गाना नहीं सुनवाने जा रहे है बल्कि हमने सोचा की क्यूँ ना आज आप लोगों को अपने बगीचे की कुछ सैर करवा दी जाए । अब आप लोग कहेंगे कि अब तो फूलों का मौसम कुछ ख़त्म हो रहा है और हम अब फूलों की बात कर रहे है। तो वो क्या है कि हम घर मे नवम्बर मे शिफ्ट हुए थे । और घर मे शिफ्ट होने के बाद ही फूलों के पौधे लगाए थे तो जाहिर सी बात है कि जब पौधे देर से लगाए थे तो फूल भी देर से ही आने थे। :) और फिर हमारे carrey (doggi)से भी तो पौधों को बचना होता है क्यूंकि जब carrey दौड़ते है तो उसके पैरों से कुछ पौधे दब जाते थे। और हम लोग रोज गिनते थे कि आ ज कि तने पौधे बचे। ना केवल पौधे बल्कि जब फूल खिल गए तब भी यही हाल है । रो ज देखते है कि आज कौन सा फूल टूटा या बचा। काफी समय बाद अपनी बगिया मे ४-५ रंग के हमने गेंदे के फूल जिसमे सफ़ेद गेंदे का फूल भी है । गेंदे के फूल वो चाहे हजारा हो या फिर माला मे पिरोये जाने वाले छोटे -छोटे पीले और कुछ लाल से फूल ही क्यूँ ना हो । सभी खूब खिले । औए डहेलिया के इतने सारे रंग देखे कि क्या कहें। ए क ही पेड़ मे २ अलग-रंग के डहेलिया देखकर मन खुश हो जाता है।...

परेशान हो गए है बी एस एन एल की ब्रॉड बैंड सेवा से

आज बड़े समय बाद इन्टरनेट चला तो सोचा की इससे पहले की नेट बंद हो जाए एक पोस्ट बी एस एन एल की ब्रॉड बैंड सेवा के बारे मे लिख ही देनी चाहिए। यहां पर तो सिर्फ कहने को ही ब्रॉड बैंड है क्यूंकि एक पल को नेट चलता है तो अगले ही पल बंद हो जाता है। यूँ तो पिछले कुछ समय से हम ज्यादा कुछ लिख नहीं रहे है और जब भी लिखने की सोचते है तो नेट बंद मिलता है। जब तक सर्किट हाउस मे थे तब तक तो फिर भी इन्टरनेट चल जाता था पर जब से हम ने घर मे शिफ्ट किया है तब से इन्टरनेट चलना तो एक सपने जैसा हो गया है। रोज सुबह नियम से कम्प्लेंट करना हमारा एक काम हो गया है। और वहां से जो आदमी आता है वो इस तरह से सवाल करते है मानो हम पहली बार इन्टरनेट चला रहे है । जैसे की फ़ोन चल रहा है की नहीं या मोडेम मे लाईट जलती है या नहीं । और सबसे कमाल की बात ये है कि अगर इन्टरनेट चलता है तो फ़ोन नहीं चलता और अगर फ़ोन चलता है तो इन्टरनेट नहीं चलता है। क्यूंकि पिछली बार जब कम्प्लेंट पर बी एस एन एल का आदमी नेट ठीक करने आया तो हमारे बताने पर कि नेट चल गया है उसने कहा कि चेक करिए कि फ़ोन चल रहा है कि नहीं और जैसे ही उसने...

ईटानगर मे स्वतंत्रता दिवस समारोह

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कल १५ अगस्त को सारे भारत वर्ष की तरह ईटानगर मे भी स्वतंत्रता दिवस काफी जोश से मनाया गया। हालाँकि यहां एक दिन पहले बारिश हुई थी जिसकी वजह से १५ अगस्त को मौसम काफी सुहावना था । हाँ थोड़ी - थोड़ी बूंदा - बादी हो रही थी पर उससे लोगों के जोश और उत्साह मे कोई कमी नहीं थी।क्यूंकि लो ग छाता लगाकर परेड देख रहे थे । सुबह - सुबह ६ जब हम लोग उठे तो देखा सर्किट हाउस मे ( हम अभी यही रह रहे है ) बड़ी चहल - पहल दिखी और छोटे - छोटे बच्चे तैयार होकर इकठ्ठा हो रहे थे पूछने पर पता चला कि सभी बच्चे झंडा फहराने के लिए इकठ्ठा हो रहे है। तो सर्किट हाउस वालों से पूछने पर पता चला कि सात बजे झंडा फहराया जायेगा। बस फिर हम अपना कैमरा लेकर तैयार हो गए फोटो खींचने के लिए। और ठीक ७ बजे सर्किट हाउस के जे . इ . ने झंडा फहराया और सभी ने राष्ट्रीय गान भी गाया और उसके बाद जे . इ . ने एक छोटा सा भाषण भी दिया और फिर बच्चों को लड्डू और रसगुल्ले बांटे गए ।...

स्मार्ट गार्डनर

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अब आजकल तो सभी जगह गर्मी की बहार सी आई हुई है और यहां भी जब कभी सूरज देवता नजर आते है तो अपने पूरे तेज के साथ नजर आते है यानी कड़क धूप । वैसे यहां पर बारिश मे तो लोग छाता लेकर चलते ही है पर अगर धूप निकली हो तब तो जरुर ही छाता लेकर चलते है। क्यूंकि धूप से बचना भी बहुत जरुरी होता है क्यूंकि यहां बिलकुल झुलसा देने वाली धूप होती है। और वो शायद इसलिए क्यूंकि यहां कोई प्रदुषण नहीं है । धूप के समय हर तरफ रंग-बिरंगी छतरी नजर आती है। :) यहां पर बागीचे और पार्कों मे काम करने वाली महिलायें भी इस बात का पूरा ध्यान रखती है । यूँ तो ये लोग पूरे दिन काम नहीं करती है बस सुबह के २ घंटे काम करती है और उसके बाद चली जाती है। ( अभी तक तो हमने इतनी देर ही इन्हें काम करते देखा है ) फिर भी ये ख्याल रखती है और अपना धूप से बचाव करती है और इसके लिए वो कैप,छाता,और सिर पर कपडा वगैरा बाँध करके ही काम करती है। ये बहुत अच्छी बात ये है । वैसे यहां जो औरतें मजदूरी करती है वो भी हमेशा अपना मुंह और सिर कपडे से बांधे रहती है धूप और धूल - मिटटी से बच...

बारिश बादल और कोहरे की आँख-मिचौली

आजकल दिल्ली और उत्तर भारत मे बहुत ज्यादा गर्मी पड़ रही है । आज सुबह ही बेटे से बात हुई तो उसने कहा कि दिल्ली मे गर्मी के मारे बुरा हाल है ।और उसके ठीक उलट यहां ईटानगर मे बारिश के मारे बुरा हाल है ।यहां भी मार्च के दूसरे हफ्ते मे बहुत गर्मी पड़नी शुरू हो गयी थी पर मार्च के आखिरी हफ्ते से जो बारिश शुरू हुई है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही है । कभी- कभी अचानक ही खूब जोर-जोर से बारिश शुरू हो जाती है तो कभी अचानक बादल या यूँ कहें कि बिलकुल ऐसा घना कोहरा घिर आता है कि सब कुछ उस बादल और कोहरे की धुंध के पीछे छिप जाता है और चंद क्षणों के बाद ही बादल एकदम छंटने लग जाता है और एक खूबसूरत नजारा दिखता है । :) और ऐसा नजारा यहां अक्सर क्या रोज ही देखने को मिल रहा है। इस खूबसूरत नज़ारे का हमने विडियो बनाया है ,आप भी देखिये। आप लोग गर्मी से परेशान है और हम बारिश से । :)

अब इसमें यू.पी.बिहार वाली क्या बात है ?

अरुणाचल प्रदेश मे ज्यादातर बैंक के ए. टी.एम. मे अलग लाईन जैसा कुछ system है शुरू मे ये हमें पता नहीं था। अब वैसे ए.टी.एम मे महिला और पुरुष की अलग लाईन का कोई तुक तो नहीं बनता है ।और कहीं ऐसा देखा भी नहीं था। यहां ए.टी.एम मे कोई भी गेट के बाहर नहीं इंतज़ार करता है बल्कि सभी लोग अन्दर लाईन लगा कर खड़े रहते है ।बिलकुल एक के पीछे एक इतना पास-पास खड़े रहते है कि एक दूसरे का पिन नंबर भी देख सकते है। ये जरुर हमारे पतिदेव ने बताया था। वैसे ए.टी.एम.के बाहर लिखा भी रहता है तो भी हर कोई अन्दर आ जाता है । खैर ये जनवरी की बात है जब हम नए-नए थे, एक दिन हम एक बैंक के ए.टी.एम. मे पैसे निकालने गए और चूँकि वहां ३-४ लड़के अन्दर खड़े थे इसलिए हम शराफत मे गेट पर खड़े होकर अपने नंबर का इंतज़ार करने लगे । ए . टी . एम के अन्दर एक महिला भी थी जो कभी ए . टी . एम . मशीन के पास जाती और कभी वापिस गेट पर आती । हम समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर माजरा क्या है । फिर उसने हमसे पूछा कि क्या हम उसकी पैसे निकालने मे मदद कर देंगे । तो हमने हाँ कह दिया । तब ...

लोसर फेस्टिवल ऑफ़ अरुणाचल प्रदेश ( Losar )

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लोसर मतलब नया साल । लोसर अरुणाचल प्रदेश के तवांग डिस्ट्रिक्ट के मोनपा ( जो कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्य tribes मे से एक है ) का सालाना उत्सव है । ये फेस्टिवल या तो फरवरी के अंत मे या मार्च के शुरू मे पड़ता है । मोनपा लोग लोसर की तैयारियां दिसंबर से ही शुरू कर देते है जैसे घर की साफ़ -सफाई करवाते है ,नए कपडे खरीदे जाते है,खाने पीने का सामान इकठ्ठा किया जाता है ,तरह-तरह के बिस्कुट और मीठी मठरी अलग-अलग आकार मे बनाई जाती है जो खाने मे बड़ी स्वादिष्ट होती है । ये फेस्टिवल तीन दिनों तक मनाया जाता है । पहले दिन लोग अपने घरवालों के साथ ही इसे मानते है और घर मे ही खाते पीते और विभिन्न तरह के खेल खेलते है । दूसरे दिन लोग एक -दूसरे के घर जाते है और नए साल की बधा ई देते है । और तीसरे दिन prayer flags लगाए जाते है । अभी २८ फरवरी को ईटानगर की Thupten Gyatsaling monastery जो की सिद्धार्थ विहार मे है वहां इस फेस्टिवल को मनाया गया था । (और वहां हमने इस फेस्टिवल का भरपूर मजा लिया .) जिसमे अरुणाचल के पॉवर मिनिस्टर मुख्य अतिथि थे औए B . B . C .के मशहूर पत्रकार और लेखक MARK Tu...

दिल्ली से ईटानगर का सफ़र

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जैसा कि हमने अपनी पिछली पोस्ट मे लिखा था कि अब हम ईटानगर आ गए है तो सोचा कि दिल्ली से ईटानगर तक के सफ़र की बातें भी कुछ की जाए । दिल्ली या कहीं से भी सीधे ईटानगर नहीं आया जा सकता है फिर चाहे रेल से यात्रा कर रहे हो या हवाई जहाज से यात्रा कर रहे हो। सभी ट्रेने गुवाहाटी तक आती है और कुछ उसके आगे रंगिया, तिनसुखिया तक भी आती है ,उसके बाद सड़क यातायात का सहारा लेना पड़ता है । और हवाई जहाज से भी गुवाहाटी तक ही आते है उसके बाद ईटानगर आने के लिए या तो सड़क यातायात माने कार या बस या फिर हेलीकाप्टर से ही आया जा सकता है ।वैसे अगले ३-४ साल मे अरुणाचल तक रेल मार्ग बन जाएगा ऐसी संभावना है । खैर किंग फिशर की ११ बजे चलने वाली फ्लाईट से दिल्ली से गुवाहाटी की बुकिंग करवाई गयी ।जिससे गुवाहाटी सवा बजे तक पहुँच जाए क्यूंकि गुवाहाटी से ईटानगर का हेलीकाप्टर दो से ढाई बजे के बीच मे चलता है । चूँकि जनवरी मे दिल्ली मे कोहरा काफी रहता था इस लिए हम लोगों की फ्लाईट आधे घंटे लेट हो गयी और हम लोग सोच रहे थे की हेलीकाप्टर तो चला गया होगा पर जब plane से हेलीकाप्टर को खड़े देखा तो लगा कि हम लोग ईटानगर के लिए...

२०१० मे वेलकम तो ईटानगर

itanagar मे आप सबका स्वागत है । अब ईटानगर का नाम तो सुना ही होगा ,और अगर नहीं सुना है तो हम बता देते है कि ईटानगर अरुणाचल प्रदेश की राजधानी है और ५ जनवरी को हम गोवा छोड़कर अरुणाचल आ गए है । अरे obvious है पतिदेव का ट्रांसफर ईटानगर हो गया है । :) तो अब से आप लोगों को कुछ ईटानगर और इसके आस-पास की भी खोज खबर देते रहेंगे । वैसे २००९ के आखिरी महीनों मे जिंदगी मे इतना कुछ घटित हुआ की ब्लॉग लिखने का मन ही नहीं हुआ । और निकोबार की जो पोस्ट आप लोगों ने पढ़ी वो तो हमने शायद फरवरी मे schedule कर रक्खी थी ।और फोटो इसीलिए नहीं थी उसमे क्यूंकि बाद मे उसमे फोटो add करनी थी पर फिर ब्लॉगिंग ही कम कर दी थी ,खैर आप लोगों ने उसे पढ़ा इसके लिए शुक्रिया । और अंत मे देर से ही सही नए साल और बसंत पंचमी की आप सभी को ढेरों बधाई और शुभकामनाएं ।