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गुलाल देख ली और अब पोस्ट हाजिर है आप लोगों के लिए

जैसा कि हमने अपनी पिछली पोस्ट मे कहा था सो कल हमने गुलाल देख ली । फ़िल्म तो अच्छी है ,और फ़िल्म मे यूनिवर्सिटी और स्टेट लेवल की राजनीति दिखाई गई है पर गाली कुछ ज्यादा बोली गई है । हालाँकि इस फ़िल्म मे काफ़ी मार-पीट और खून-खराबा है पर फ़िर भी फ़िल्म देखने के बाद भी सिर मे कोई भारीपन नही महसूस होता है । ये शायद अनुराग कश्यप के डायरेक्शन का कमाल है । इस फ़िल्म मे भी राम लीला को बीच - बीच मे कहानी के साथ जोड़ा गया है बिल्कुल delhi 6 की तरह । फ़िल्म के पहले सीन की शुरुआत के . के से होती है और आखिरी सीन की ...... से । फ़िल्म की शुरुआत मे एक सीधा सा लड़का दिलीप सिंह law करने के लिए जयपुर कॉलेज - यूनिवर्सिटी मे admission लेता है और वो रहने के लिए एक जगह कमरा किराये पर लेता है जहाँ उसकी मुलाकात रानाजय से होती है ।और जब दिलीप हॉस्टल मे वार्डन से मिलने जाता है तो हॉस्टल मे दादा टाइप लड़के कैसे पहले दिन ही उसकी रैगिंग करते है (बुरी तरह)और जब रानाजय को पता चलता है तो वो उसके साथ उन लड़कों की पिटाई करने जाता है पर .... । और ...

आरम्भ है प्रचंड ......from गुलाल

गुलाल फ़िल्म जिसे अनुराग कश्यप ने बनाया है ये गीत आरम्भ है उसी का है । वैसे अभी हमने फ़िल्म तो नही देखी ( सन्डे को देखेंगे ) पर इस फ़िल्म के २-३ गाने हमें बहुत पसंद आए है । एक-एक करके आपको सुनवायेंगे । इन गानों की सबसे अच्छी बात हमें ये लगी कि गाने के सारे बोल बहुत साफ़ है मतलब एक बार मे ही समझ आ जाते है । :) पियूष मिश्रा इसके गीतकार ओर संगीतकार है । राहुल राम ने गाया भी बहुत अच्छा है । पियूष मिश्रा का संगीत भी बहुत अच्छा है । Powered by eSnips.com

अरविन्द जी की इस टिप्पणी ने बहुत hurt किया

आम तौर पर हम कभी किसी टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नही करते है भले ही कोई चाहे टिप्पणी मे प्रशंसा हो या बुराई . और न ही कभी कुछ ऐसा लिखते है जिसमे कहीं भी महिला या पुरूष के लिए कुछ अलग माप दंड होता है । हम जो भी लिखते है बस अपने मन के भाव लिखते है । आज अभी-अभी जैसे ही अपने ब्लॉग पर आई टिप्पणी देखी और उसमे अरविन्द जी की टिप्पणी पढ़कर मन बहुत दुखी हो गया । कल हमारी dev d यानी bold and beautiful पर लिखी समीक्षा पर अरविन्द जी की टिप्पणी जिसे हम नीचे वैसे ही लगा रहे है क्या यह फिल्म महिलाओं को सिर्फ़ इसलिए अच्छी लग रही है की उनकी विभीषिकाओं को यह मुखर करती है और पुरूष को नकारा साबित करती है -केवल पुरूष ही इमोशनल अत्याचारी है ? यह नारी एंगल को उभारती एक चालाक कोशिश है -पर कुछ दृश्य सचमुच सौन्दर्यबोध का कबाडा कर देते हैं पोर्नो को भीमात करते हैं ! पढ़कर ये सोचने लगे कि हमने उसमे ऐसा क्या और कहाँ लिखा जिससे उन्हें ये पुरूष विरोधी लग गई । अगर एक महिला होने के नाते हमें फ़िल्म पसंद आई तो उसमे हमारी ऐसी भावना कहाँ से उजागर हो गई । क्या फ़िल्म को सिर्फ़ एक फ़िल्म के तौर पर न...

हीरोइने और उनके ट्रेड-मार्क हेयर स्टाइल :)

अब है तो ये अजब - गजब शीर्षक पर इस पर लिखने का ख़्याल एक पुरानी फ़िल्म देखते हुए आया।अब आज के समय मे तो हर हीरोइन के कपड़े और हेयर स्टाइल मिलते - जुलते से रहते है। यहां तक की आज की नई हीरोइनों का डांस का स्टाइल भी बहुत कुछ करीब - करीब एक सा ही होता है । अब ६० और ७० के दशक की हीरोइनों का अपना एक अलग ही अंदाज या स्टाइल होता था बाल बनाने का। और उस समय की ज्यादातर हीरोइने उनके हेयर स्टाइल की वजह से भी जानी जाती थी।और हर हेयर स्टाइल पर हर हीरोइन का अपना अधिकार होता था यानी की ट्रेड - मार्क ।ये हीरोइने ज्यादातर अपने हेयर स्टाइल को ही अपनाती थी पर कभी - कभी हेयर स्टाइल बदल भी लेती थी।और गौर करने की बात ये ही की जो हीरोइने घोसला बनाती थी उनका भी अपना - अपना स्टाइल होता था। मधुबाला -- इनका हेयर स्टाइल चाहे जैसा भी हो पर इनके चेहरे पर जुल्फे एक अलग अंदाज मे रहती थी। महल , और मुग़ल - ऐ - आजम। साधना -- साधना का नाम याद आत...

इश्क-विश्क प्यार-.....

कल तीन महीने के दौरे के बाद टीम इंडिया कल भारत लौटी तो उसका जोरदार स्वागत हुआ और ढेर सारे इनाम भी दिए गए। अभी ये जश्न थमा भी नही था कि सारे न्यूज़ चैनल सभी नए और अविवाहित खिलाड़ियों की शादी और इश्क के चक्कर मे पड़ गए।कहीं धोनी को दिखाते की उनके लिए किस तरह लड़कियां शादी का प्रस्ताव रख रही है तो कहीं युवराज को दिखाते की उनकी शादी होते-होते रह जाती है। तो कहीं प्रवीण कुमार को दिखाते की उनके लिए कितने रिश्ते आ रहे है। तो कहीं इरफान पठन को दिखाते और उनके प्यार की कहानी बताते । अरे भइया अभी-अभी तो धोनी और युवराज का दीपिका के साथ नाम जुड़ने का अंजाम देख चुके है कि युवराज को उससे उबरने मे कितना समय लगा वो तो जैसे खेलना ही भूल गए थे। अब इरफान पठन कल दिल्ली मे हुए जश्न मे शामिल नही थे तो उसका कारण भी इश्क बताया जा रहा है कि कल इरफान मुम्बई से सीधे अपनी गर्ल फ्रेंड से मिलने चले गए थे।अरे जरा कुछ दिन सब्र तो कर लो। अच्छे भले और सुधरे हुए खिलाड़ियों को क्यों बिगाड़ने मे लगे है ये सभी चैनल वाले। यूं तो प्यार करना कोई ग़लत बात नही है पर ये चैनल वाले जिस तरह से प्यार की रेड़ पीटते है कि बस...

मिथ्या और जोधा अकबर (फ़िल्म समीक्षा )

अरे चौकने की कोई जरुरत नही है।वो क्या हैं ना की हमने अभी हाल ही मे ये दोनों फिल्में देखी तो सोचा की क्यों ना एक साथ ही इन दोनों फिल्मों के बारे मे लिख दिया जाए। मिथ्या और जोधा अकबर इन दोनों फिल्मों मे यूं तो कोई समानता नही है पर फ़िर भी हम दोनों की समीक्षा एक साथ कर रहे है। दोनों फिल्में बिल्कुल ही अलग है हर लिहाज से। वो चाहे कहानी हो या बड़े-बड़े सेट हो या कलाकार ही क्यों ना हो। मिथ्या एक बहुत ही आम सी कहानी पर बनी फ़िल्म है तो जोधा अकबर बहुत ही लैविश फ़िल्म है। मिथ्या फ़िल्म की कहानी एक ऐसे लड़के की कहानी है जो मुम्बई हीरो बनने आता है और मुम्बई मे हुए एक मर्डर को देख लेता है और फ़िर किस तरह वो एक ऐसे डॉन के चक्कर मे पड़ता है कि उसकी सारी जिंदगी ही बदल जाती है। इस फ़िल्म मे नेहा धूपिया भी है और नेहा को इससे पहले हमने किसी फ़िल्म मे नही देखा था सो वो कुछ ख़ास नही लगी । पर पूरी फ़िल्म का श्रेय रणवीर शोरी को जाता है।रणवीर शोरी जिसने इस फ़िल्म मे वी.के.और राजे दोनों की ही भूमिका निभाई है उसने कमाल की एक्टिंग की है। इस फ़िल्म मे रणवीर शोरी को जहाँ एक बहुत ही आम इंसान यानि स्...

पुनर्जन्म का चक्कर अब टी.वी.सीरियल मे भी

टी.वी.सीरियल की एक बात बहुत अच्छी है कि इसमे दर्शक कुछ भी मिस नही करता है क्यूंकि आप जब भी देखना शुरू करें लगता है कहानी अभी वहीं की वहीं है हाँ बस खलनायक और खलनायिका के जुल्म जरुर बढ़ गए होते है। वो चाहे क्यूंकि ......हो या कहानी घर....हो सलोनी हो...या दुल्हन ...या फ़िर छूना है आस्मान ही क्यों ना हो। अभी कल ही हमने कई दिनों बाद जी टी.वी.देखा तो दुल्हन सीरियल मे कहानी तो कुछ ख़ास नही बढ़ी थी पर हाँ पुनर्जन्म का किस्सा देखने को मिला और हमे हमारी पोस्ट लिखने का विषय भी मिला। टी.वी.के सीरियल मे भी फिल्मी दांव-पेंच देखने को मिलते है। अब जब टी . वी . मे जब नाच - गाना सब कुछ फिल्मी स्टाइल का होने लगा है तो भला पुनर्जम का विषय कैसे छूट जाता। अभी तक तो फिल्मों मे ही पुनर्जन्म दिखाया जाता था पर अब तो टी . वी . के सीरियल मे भी पुनर्जन्म की कहानी दिखाने का चलन होने जा रहा है।पुनर्जन्म पर बनी फिल्में जैसे सुभाष घई की कर्ज और अभी हाल ही मे बनी फरहा खान की ओम शान्ति ओम काफी चली है। अभी तक एकता कपूर के सीरियल मे तथा ...

द एसैसिनेशन ऑफ़ जेस्सी जेम्स बाय कावर्ड रॉबर्ट फोर्ड (the assassination of jesse james by the coward robert ford )

ये फ़िल्म ऑस्कर मे बेस्ट फ़िल्म के लिए तो नही पर बेस्ट ऐक्टर इन अ सपोर्टिंग रोल के लिए nominated है। हालांकि फ़िल्म मे brad pitt है जो jesse james के रोल मे है और casey affleck जो robert ford के रोल मे है ।फ़िल्म मुख्य रूप से इन्ही दो किरदारों पर है। फ़िल्म की कहानी कुछ ख़ास नही है ।jesse james जो की एक notorious robber है । robert ford बचपन से ही jesse james के जैसा बन कर मशहूर होना चाहता था और इसीलिए robert अपने भाई के साथ jesse james का ग्रुप भी ज्वाईन करना चाहता है । बाद मे किस तरह robert jesse james के काम करने के तरीके को देख कर बदल जाता है । यूं तो फ़िल्म मे brad pitt भी है पर इस फ़िल्म मे brad pitt की एक्टिंग कुछ ख़ास जमी नही। अपने लंबे नाम की तरह ही ये फ़िल्म भी लम्बी है । और फ़िल्म इतनी धीमी गति से आगे बढ़ती है की हमने इस फ़िल्म को टुकड़े-टुकड़े मे देखा अरे मतलब दो -तीन दिन मे। क्लाइमेक्स का सीन तो बिल्कुल ही बोरिंग है। एक बार मे झेलना इस फ़िल्म को हमारे बस की बात नही थी। क्यूंकि फ़ि...

संजय की शादी (देश की सबसे बड़ी खबर)

सारे टी . वी चैनल के मुताबिक आज देश की सबसे बड़ी खबर संजय दत्त की शादी है। आज सुबह से सारे टी.वी.चैनल संजय दत्त की शादी की खबर से भरे पड़े है।कि संजय दत्त और मान्यता की शादी हिंदू रीति-रिवाज से आज हो रही है जबकि गोवा मे अभी हाल ही मे उनकी कोर्ट मैरेज हो चुकी है।सुबह से चैनल वाले लगे है कि क्या संजय कि बहनें शादी मे शामिल होंगी या नही ।कोई चैनल कहता कि संजय ने शादी का निमंत्रण अपनी बहनों को दिया है तो कोई कहता है कि निमंत्रण नही दिया है। कभी कहते है कि प्रिया दत्त ने इस शादी पर कुछ भी कहने से इनकार किया तो कभी कहते है कि संजय ने अपनी बहनों को शादी मे नही बुलाया है। बहनों को अपने भाई की शादी मे शिरकत करनी चाहिऐ क्यूंकि जब उसके बुरे वक्त मे साथ दिया है तो अच्छे वक्त मे भी साथ देना ही चाहिऐ । और ख़ुशी का हकदार तो हर कोई होता है। संजय दत्त की शादी हो रही है तो एक चैनल ने तो बनारस के एक पंडित जी से ही पूछना शुरू कर दिया की उसकी ये शादी सफल होगी या नही और पंडित जी बेचारे बार-बार यही कहते रहे की आज चूँकि बसंत पंचमी है तो आज का दिन शादी के लिए बहुत शुभ है।अब शादी चलती है या नही इ...

Atonement (एक झलक )

अतोनेमेंट इस साल के ऑस्कर के लिए nominated हुई है । इस फिल्म को ऑस्कर अवार्ड के लिए सात श्रेणियों मे nominate किया गया है । कल हमने ये फिल्म देखी तो सोचा की आज इसके बारे मे ही लिखा जाये । यूं तो इस फिल्म की कहानी द्वितीय विश्व युद्ध के समय को दर्शाती है और साथ ही ये कहानी एक परिवार पर आधारित है और मुख्य रुप से cecilia,briony,roobie पर ही आधारित है। कि किस तरह एक छोटी सी गलती से सबकी जिंदगी बदल जाती है। cecilia और robbie एक -दुसरे से प्यार करते है पर एक ऐसी गलती जो की robbie ने की ही नही थी और जिसके लिए robbie को जेल जाना पड़ता है।यही सबकी जिंदगी बदल देता है। विश्व युद्ध के समय जेल मे गए लोगों को ये option होता था कि या तो वो जेल मे रहे या आर्मी मे भर्ती हो जाएँ ।और robbie आर्मी मे भर्ती हो जाता है।बाद मे briony ,robbie और cecilia का क्या होता है. ये ही तो सस्पेंस है. बाक़ी की कहानी हम नही बता रहे है। इस फिल्म मे कई flash backs है।फिल्म का संगीत तो ठीक था पर कुछ सीन मे फोटोग्राफी बहुत अच्छी है।पर एक्टिंग सबकी ठीक ही लगी।briony के किरदार को बचपन से बु...

आगे-आगे शहंशाह पीछे- पीछे बादशाह

शाह रुख खान हिन्दी फिल्मी दुनिया के बादशाह है तो अमिताभ बच्चन इसी हिन्दी फिल्मी दुनिया के शहंशाह है । और शहंशाह तो वो पिछले १५ - २० सालों से है । अब बेचारे शाह रुख खान आख़िर कब तक बादशाह बने रहेंगे और फिर शाह रुख करे तो क्या करें शहंशाह बनने के लिए । अब शहंशाह बनने का नुस्खा तो उन्होने हाल ही मे हुए एन . डी . टी . वी . के इन्डियन ऑफ़ द ईयर अवार्ड समारोह मे बॉस रजनी कान्त से पूछा था । और रजनीकांत ने उन्हें नुस्खा बताया भी था । अब जब आज तक ब्रिटेन के प्रिन्स चार्ल्स प्रिन्स ही है किंग नही बने :) अरे क्यूंकि क्वीन ने अभी तक गद्दी नही छोडी है । तो शाह रुख पता नही शहंशाह कभी बन भी पायेंगे या नही ये कहना मुश्किल है । अब शाह रुख पिछले ४ - ५ सालों से जाने - अन्जाने अमिताभ बच्चन के पदचिन्हों पर चल रहे है । वो चाहे फिल्में हो या फिर विज्ञापन ही क्यों ना हों । अब डॉन फिल्म इसका जीता जागता सबूत है । आज कल तो कुछ विज्ञापन जिनमे पहले ...