गुलाल देख ली और अब पोस्ट हाजिर है आप लोगों के लिए
जैसा कि हमने अपनी पिछली पोस्ट मे कहा था सो कल हमने गुलाल देख ली । फ़िल्म तो अच्छी है ,और फ़िल्म मे यूनिवर्सिटी और स्टेट लेवल की राजनीति दिखाई गई है पर गाली कुछ ज्यादा बोली गई है । हालाँकि इस फ़िल्म मे काफ़ी मार-पीट और खून-खराबा है पर फ़िर भी फ़िल्म देखने के बाद भी सिर मे कोई भारीपन नही महसूस होता है । ये शायद अनुराग कश्यप के डायरेक्शन का कमाल है । इस फ़िल्म मे भी राम लीला को बीच - बीच मे कहानी के साथ जोड़ा गया है बिल्कुल delhi 6 की तरह । फ़िल्म के पहले सीन की शुरुआत के . के से होती है और आखिरी सीन की ...... से । फ़िल्म की शुरुआत मे एक सीधा सा लड़का दिलीप सिंह law करने के लिए जयपुर कॉलेज - यूनिवर्सिटी मे admission लेता है और वो रहने के लिए एक जगह कमरा किराये पर लेता है जहाँ उसकी मुलाकात रानाजय से होती है ।और जब दिलीप हॉस्टल मे वार्डन से मिलने जाता है तो हॉस्टल मे दादा टाइप लड़के कैसे पहले दिन ही उसकी रैगिंग करते है (बुरी तरह)और जब रानाजय को पता चलता है तो वो उसके साथ उन लड़कों की पिटाई करने जाता है पर .... । और ...