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२५ साल से एक पेड़ बना इस दंपत्ति का घर

आज दिनेश जी की पोस्ट पढ़ी थी जिसमे उन्होंने दो तरह की घटनाओं का जिक्र किया था उसी से हमें इस घटना की याद आ गई । वैसे ये न्यूज़ काफ़ी समय पहले पढ़ी थी पर लिख नही पाये थे । जिसमे झारखण्ड के मंगरा महाली और उनकी पत्नी बलखी दोनों ने अपने परिवार की मरजी के ख़िलाफ़ शादी की थी जिसके लिए उनके परिवारों ने उन्हें घर से निकाल दिया था और उसके बाद उन्होंने एक पेड़ जो बरगद के पेड़ से मिलता जुलता पेड़ है उस के नीचे रात गुजारी थी । और पिछले २५ सालों से यही पेड़ उनका घर बन गया और इसी घर मे उनके बच्चे भी पैदा हुए । इस न्यूज़ मे इस दंपत्ति की फोटो नही है और इनकी फोटो हमें मिल या दिख नही रही है वरना हम जरूर लगाते ।

ट्राइबल गाँव की आँगन वाडी

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गोवा के ट्राइबल गाँव मे घूमते हुए हम यहां की आंगन वाडी मे गए और आँगन वाडी की साफ-सफ़ाई और बच्चों को ड्रेस मे देख कर अचंभित हुए बिना नही रहे। आम तौर पर आँगन वाडी मे ड्रेस का कोई सिस्टम नही होता है पर इस आँगन वाडी मे इंचार्ज और अभिभावकों ने मिल कर ये ड्रेस का सिस्टम रक्खा है।इस ड्रेस का खर्चा बच्चों के माता-पिता ही करते है। और वहां की इंचार्ज ने बताया की इससे अभिभावकों को भी अच्छा रहता है और बच्चो ं मे स्कूल जाने की भावना भी आती है। जब हम लोग यहां पहुंचे तो बच्चे अपने खेल मे मस्त थे।हम लोगों को देख कर पहले टीचर ने और फ़िर बच्चों ने गुड मॉर्निंग कहा। उसके बाद टीचर ने इन बच्चों को एक गाना सुनाने को कहा। और बच्चों ने एक्शन के साथ गाना सुनाया । थोडी देर आँगन वाडी मे रुकने के बाद हम लोग वापिस पंजिम की ओर चल पड़े ।

गोवा के एक ट्राइबल गाँव की झलक

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ऐसा नही है की ट्राइबल सिर्फ़ जंगलों मे ही रहते है। अंडमान मे और मध्य प्रदेश मे भी हमने ट्राइबल देखे थे।और अब यहां गोवा मे ट्राइबल को देखने का अवसर मिला। ये ट्राइबल विलेज पंजिम से करीब ५० की.मी .दूर कनकोना के पास कजूर ( cazur ) नाम का छोटा सा गाँव है।जब हम लोग इस गाँव मे पहुंचे तो देखा की एक औरत अपने सिर पर लकड़ी को रखकर बड़े आराम से चली जा रही है। हालांकि इस गाँव मे पानी के लिए इन सबके घरों मे नल (tap water) नही है। गाँव मे कुआं है ये सब लोग उस कुएं से पानी भरते है। और पूछने पर की कुएं से पानी लाने मे दिक्कत होती होगी तो इनका जवाब था की नही कुआं पास मे ही है। इस गाँव मे महिला मंडल है और आँगनवाडी भी है।यहां के बच्चों को स्कूल के लिए काफ़ी दूर आना पड़ता है। गोवा का ट्राइबल विलेज देख कर खुशी हुई की ये लोग सभ्यता और संस्कृती से अलग नही है। और इसी गाँव मे हमने पहली बार boiled rice कैसे बनाते है उसे देखा। अब बोएल राइस के बारे मे तो हम सभी ने सुना है और घर मे भी कभी-कभी इस्तेमाल करते है।खास कर फ्राईड राइस के लिए। पर क्या आप जानते है की इसे कैसे बनाते है।नही ना। तो चलिए हम...