ममता जी इस विषय पर लगातार लिखिये, आज अगर आपने अखबार देखा हो तो शायद उसमेंपड़ा होगा । बालमीकि रामायण का हवाला देकर जो टिप्पणी दी गयी हैं वह गलत है। मैं बचपन से प्रतिदिन उसका ही पाठ करता हूँ और उसमें वह कहीं नहीं है।चूंकि लोग रामचरित मानस को ज्यादा पड़ते हैं इसलिये उन्हें पता नहीं है। दीपक भारतदीप
ममता जी मेरी इस टिप्पणी का उद्देश्य किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाना नहीं है परंतु मैं ये अवश्य कहुंगा कि यह विषय इतना तूल सिर्फ इसीलिये पकड़ रहा है क्यों कि ये हिंदुस्तान की सबसे बडे सामुदाय की धार्मिक आस्था का मुद्द है। परंतु हम अगर निष्पक्ष हो कर देखें तो हम ही लोग हैं जो क्राइस्ट और अल्लाह के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगते हैं। और आज जब हयेह बात हमारे ऊपर अ रही है तो हम ऐसी प्रक्रिया दे रहे हैं। मैं जैसा कि हमेशा कहता हुं कि सिर्फ हमारा दिःख ही दुःख क्यो? दूसरे का दुःख दुःख क्यों नहीं?
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जय श्री राम!!!
इस विषय पर लगातार लिखिये, आज अगर आपने अखबार देखा हो तो
शायद उसमेंपड़ा होगा । बालमीकि रामायण का हवाला देकर जो टिप्पणी दी गयी हैं वह गलत है।
मैं बचपन से प्रतिदिन उसका ही पाठ करता हूँ और उसमें वह कहीं नहीं है।चूंकि
लोग रामचरित मानस को ज्यादा पड़ते हैं इसलिये उन्हें पता नहीं है।
दीपक भारतदीप