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जापान यात्रा विवरण ( shinjuku gyoen national garden टोक्यो )

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Meiji jingu shrine देखने के बाद हम लोगों ने gyoen national गार्डन देखने की सोची और चूँकि Meiji shrine के पास ही ये गार्डन है तो हम लोगों ने एक बार फिर वॉक करना शुरू किया पर एक बार फिर हम लोग रास्ता भटक गए जबकि GPS दिखा रहा था की गार्डन आस पास ही है । ख़ैर फिर हम लोग एक आदमी से रास्ता पूछ ही रहे थे और वो हमें रास्ता बता रहा था कि तभी पास से गुज़रती हुई एक लड़की ने हम लोगों की बात सुनकर कहा कि वो उस तरफ़ ही जा रही है और वो हम लोगों को गार्डन तक छोड़ देगी । एक अच्छी बात ये थी की वो लड़की जिसका नाम yuki था इंग्लिश बोलती और समझती थी और इस तरह उससे बात करते हुए हम लोग गार्डन पहुँच गए । :) हम लोगों ने sendagaya गेट से २०० yen का टिकट लेकर गार्डन में प्रवेश किया । यह गार्डन तक़रीबन साढ़े तीन किलो मीटर तक फैला हुआ है और इस गार्डन में चार अलग तरह के गार्डन देखे जा सकते है जैसे French formal garden, English landscape garden, Japanese traditional garden और Mother and child forest । इसके अलावा छोटे बड़े ponds और ब्रिजेज़ भी है। gyoen गार्डन में एक छोटी सी कॉफ़ी शॉप भी है जहाँ कुछ ...

जापान यात्रा विवरण ( Meiji Jingu Shrine)

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डेढ़ घंटे की बस यात्रा के बाद हम लोग अपने होटेल gracery पहुँचे । ये होटेल Godzilla head के लिए जाना जाता है। इस होटेल की आठवीं मंज़िल पर godzilla head बना हुआ है और ये सड़क से भी दिखाई देता है । होटेल में रुकने वाले terrace पर जाकर इसे देख सकते है और होटेल के कुछ कमरों से भी Godzilla head दिखाई देता है । ख़ैर हमने भी कुछ फ़ोटो खींची इस की । :) अगले दिन हम लोगों ने Meiji jingu shrine देखने की सोची और चूँकि आजकल GPS का ज़माना है और हमारे होटेल से इस shrine की दूरी महज़ डेढ़ दो कि.मी . दिख रही थी तो हम लोगों ने वॉक करना शुरू किया पर फिर हम लोग थोड़ा रास्ता भटक गए और भाषा की समस्या के कारण रास्ता ढूँढने में भी दिक़्क़त आ रही थी तो हम लोगों ने टैक्सी ली और Meiji shrine पहुँच गए। वैसे यहाँ जाने के लिए harajuku स्टेशन पर उतरना पड़ता है।और yoyogi स्टेशन से भी यहाँ पहुँचा जा सकता है। इस shrine के कई गेट है । Meiji shrine जो की shibuya में है वहाँ के राजा Meiji और रानी shoken को समर्पित है जैसे ही shrine के area में पहुँचते है सबसे पहले torii गेट आता है और इस तरह के torii गेट हर s...

जापान यात्रा विवरण

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इस साल हम लोग मई में जापान और चीन घूमने गए थे तो सोचा वहाँ के अपने अनुभव आप लोगों के साथ बाटूँ । तो पहले हम जापान की बातों को साझा करेंगे । वैसे जापान जाने से पहले हम ने कुछ जापानी शब्द जो आम बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल होते है उन्हें सीखा भी जैसे थैंक यू को जापानी में arigato कहते है और हेलो को konnichiwa और सॉरी को gomennasai और ऐसे ही कुछ और शब्द ,जिससे एक बिलकुल ही नए देश जहाँ की भाषा ना हम समझते है और ना वो लोग हमारी भाषा ,ताकि वहाँ ज़्यादा परेशानी ना हो , हालाँकि कुछ लोग इंग्लिश समझ जाते है पर उसके लिए बहुत ही धीरे धीरे एक एक शब्द को बोलना पड़ता है । :)   (ये फ़ोटो प्लेन से ली है ) वैसे जापानी लोग बहुत ही ख़ुशदिल,मददगार होते है अगर उनसे कहीं का पता या रास्ता पूछिए तो अगर जगह आस पास है तो वो वहाँ तक आपके साथ चलकर दिखाते है पर जो लोग सिर्फ़ जापानी समझते है उनके साथ कभी कभी उनको अपनी बात समझने में दिक़्क़त आती थी ।वैसे कुछ दुकानदार इंग्लिश समझ लेते है और कहीं का भी रास्ता या पता किसी दुकानदार से पूछना ही बेहतर होता है । (टोक्यो airport) टोक्यो airport से टोक्यो शहर त...

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

नव वर्ष २०१६ का आगाज हो चुका है इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई । बहुत लोग हर साल जब नव वर्ष आता है तो बहुत सारे वादे अपने आप से करते है पर जैसे जैसे समय बीतता है वो अपने से किये गये वादे भूलने लगते है । बहुत कम या यूँ कहे कि विरले ही होते है जो अपने आप से किये कुछ वादे पूरे कर पाते है । हम भी पिछले दो सालो से हर नये साल मे यह सोचते थे कि हम वापिस अपने blog पर लिखना शुरू करेगे पर हर बार बस सोच-विचार कर ही रह जाते थे । इसलिये इस साल हमने कुछ भी प्लान नहीं किया है पर हाँ मन में ये विचार ज़रूर है कि इस बार हम blog लिखना नहीं छोड़ेंगे । अब देखना है कि हम इस पर कितना क़ायम रह पाते है । :) तो इसी बात पर आप सबको नये साल की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें ।

बिलकुल नही बदली दिल्ली

३ साल पहले १६ दिसमबर के दिन जो वीभतस घटना हुई थी जिसमें निरभया (जिसका असली नाम जयोती सिंह है ) की मृत्यु हो गई थी ,पर कया आज ३ साल बाद कुछ भी बदला है । ये लिखते हुये बेहद अफ़सोस हो रहा है कि आज भी हालात में बहुत ज़्यादा फ़र्क़ नहीं हुआ बल्कि हालात ख़राब ही हुये है । इस वीभतस घटना के बाद ऐसा लग रहा था कि जूवीनाईल क़ानून में कुछ बदलाव किया जायेगा पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । ना तो सरकार ना ही उचच न्यायालय ना ही उच्चतम न्यायालय ने इस के लिये कुछ किया । जबकि देश का क़ानून ऐसा होना चाहिये कि अपराधी भले ही नाबालिग़ क्यों ना हो सजा तो उसे भी वही होनी चाहिये जो एक निर्मम अपराधी की होती है । जब वो अपराध करता है तो सजा का भी हक़दार है । हमारे देश का क़ानून कहता है कि भले ही गुनहगार छूट जाये पर किसी बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिये पर इस केस में तो गुनहगार सामने था पर सिर्फ़ इसलिये कि वो नाबालिग़ था उसे सिर्फ़ ३ साल की सजा दी गई जो कि ठीक नहीं था । जब अपराध करते हुये उसने सबसे अधिक निर्ममता दिखाई तो फिर उसे जुवीनाईल कहकर कम सजा देना बहुत बड़ी ग़लती है । अब जब वो जेल से छूटने वाला है तो वो किस...

Times litfest delhi -2

कुछ दिन पहले लिखी पोस्ट में जैसा कि हमने कहा था कि ३० नवम्बर के टाइम्स लिटफेस्ट के बारे में लिखेंगे तो लीजिये हम अपने वादे के मुताबिक ३० तारीख के सेशन के बारे में लिख रहे है । पर थोड़ी देर से लिख रहे है । :) इस दिन बहुत जल्दी करने के बाद भी हम करीब १२ बजे के आस -पास पहुंचे जिसका हमें काफी अफ़सोस था क्यूंकि सुबह का सेशन जगदीश भगवती का था , और ये सेशन ११.३० बजे ख़त्म होना था और साढ़े ग्यारह बजे से रवीश कुमार और विनीत कुमार की दिल्ली की प्रेम कहानियाँ पर सेशन होना था जो हमें लग रहा था की हमसे छूट जायेगा पर खैर चूँकि शायद जगदीश भगवती जी का सेशन देर से ख़त्म हुआ तो रवीश जी का पूरा सेशन देखने को मिला। इस किताब में रवीश जी और विनीत कुमार ने जो रोज के जीवन में बस और मेट्रो में लड़के-लड़की की बात चीत ,इश्क और प्यार को बखूबी और बहुत ही रोचक अंदाज़ में लिखा है। उन दोनों ने अपनी किताब से कुछ बहुत ही दिलचस्प और छोटी -छोटी सी प्रेम कहानियां पदक कर सुनाई. इस किताब में सभी कहानियों को बड़े ही रोचक कार्टून की मदद से दिखाया गया है।जिसे विक्रम ने बनाया है । संक्षेप में ये एक छोटी,अच्छी,रोचक और दिलचस...

Times Litfest Delhi

टाईम्स ऑफ इंडिया  लिटफेस्ट  दिल्ली २८,२९,३० नवंम्बर को मेडन  होटल ,७ शाम नाथ मार्ग  में आयोजित  किया गया था  , २९ और ३० नवम्बर को हम भी गए थे , वहां पांच अलग -अलग  जगहों पर सुबह १० बजे से शाम ८बजे तक सेशन चलते रहते थे नौर हर सेशन के ख़त्म होने के १० मिनट पहले या यूँ कह  ले कि सेशन के आखिर में जनता  गेस्ट  पैनल से सवाल पूछ सकती थी.  आयोजकों की तारीफ़ करनी होगी की वो किसी भी  गेस्ट को निर्धारित समय से ज्यादा नहीं बोलने  थे  और अगर कोई जरा ज्यादा समय लेता था तो पहले तो वो एक स्लिप देते  तब भी सेशन ख़त्म नहीं होता था तो बजर  बजा देते थे।   :) २९ को हमने ३-४ सेशन देखे।  सबसे पहले शोभा डे  और सुनील खिलनानी , पैट्रिक फ़्रेंच  और सिद्धार्थ वरदराजन  का सेशन देखा।   उसके बाद देवदत्त पटनायक और  दिलीप  पडगाओंकर  के बीच का सेशन बहुत ही रोचक और अच्छा था जिसमे  देवदत्त ने माया के ऊपर एक बहुत ही रोचक किस्सा सुनाया  कि एक बार एक गुरु अपने शिष्यों के सा...