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नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

नव वर्ष २०१६ का आगाज हो चुका है इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई । बहुत लोग हर साल जब नव वर्ष आता है तो बहुत सारे वादे अपने आप से करते है पर जैसे जैसे समय बीतता है वो अपने से किये गये वादे भूलने लगते है । बहुत कम या यूँ कहे कि विरले ही होते है जो अपने आप से किये कुछ वादे पूरे कर पाते है । हम भी पिछले दो सालो से हर नये साल मे यह सोचते थे कि हम वापिस अपने blog पर लिखना शुरू करेगे पर हर बार बस सोच-विचार कर ही रह जाते थे । इसलिये इस साल हमने कुछ भी प्लान नहीं किया है पर हाँ मन में ये विचार ज़रूर है कि इस बार हम blog लिखना नहीं छोड़ेंगे । अब देखना है कि हम इस पर कितना क़ायम रह पाते है । :) तो इसी बात पर आप सबको नये साल की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें ।

बिलकुल नही बदली दिल्ली

३ साल पहले १६ दिसमबर के दिन जो वीभतस घटना हुई थी जिसमें निरभया (जिसका असली नाम जयोती सिंह है ) की मृत्यु हो गई थी ,पर कया आज ३ साल बाद कुछ भी बदला है । ये लिखते हुये बेहद अफ़सोस हो रहा है कि आज भी हालात में बहुत ज़्यादा फ़र्क़ नहीं हुआ बल्कि हालात ख़राब ही हुये है । इस वीभतस घटना के बाद ऐसा लग रहा था कि जूवीनाईल क़ानून में कुछ बदलाव किया जायेगा पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । ना तो सरकार ना ही उचच न्यायालय ना ही उच्चतम न्यायालय ने इस के लिये कुछ किया । जबकि देश का क़ानून ऐसा होना चाहिये कि अपराधी भले ही नाबालिग़ क्यों ना हो सजा तो उसे भी वही होनी चाहिये जो एक निर्मम अपराधी की होती है । जब वो अपराध करता है तो सजा का भी हक़दार है । हमारे देश का क़ानून कहता है कि भले ही गुनहगार छूट जाये पर किसी बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिये पर इस केस में तो गुनहगार सामने था पर सिर्फ़ इसलिये कि वो नाबालिग़ था उसे सिर्फ़ ३ साल की सजा दी गई जो कि ठीक नहीं था । जब अपराध करते हुये उसने सबसे अधिक निर्ममता दिखाई तो फिर उसे जुवीनाईल कहकर कम सजा देना बहुत बड़ी ग़लती है । अब जब वो जेल से छूटने वाला है तो वो किस...

Times litfest delhi -2

कुछ दिन पहले लिखी पोस्ट में जैसा कि हमने कहा था कि ३० नवम्बर के टाइम्स लिटफेस्ट के बारे में लिखेंगे तो लीजिये हम अपने वादे के मुताबिक ३० तारीख के सेशन के बारे में लिख रहे है । पर थोड़ी देर से लिख रहे है । :) इस दिन बहुत जल्दी करने के बाद भी हम करीब १२ बजे के आस -पास पहुंचे जिसका हमें काफी अफ़सोस था क्यूंकि सुबह का सेशन जगदीश भगवती का था , और ये सेशन ११.३० बजे ख़त्म होना था और साढ़े ग्यारह बजे से रवीश कुमार और विनीत कुमार की दिल्ली की प्रेम कहानियाँ पर सेशन होना था जो हमें लग रहा था की हमसे छूट जायेगा पर खैर चूँकि शायद जगदीश भगवती जी का सेशन देर से ख़त्म हुआ तो रवीश जी का पूरा सेशन देखने को मिला। इस किताब में रवीश जी और विनीत कुमार ने जो रोज के जीवन में बस और मेट्रो में लड़के-लड़की की बात चीत ,इश्क और प्यार को बखूबी और बहुत ही रोचक अंदाज़ में लिखा है। उन दोनों ने अपनी किताब से कुछ बहुत ही दिलचस्प और छोटी -छोटी सी प्रेम कहानियां पदक कर सुनाई. इस किताब में सभी कहानियों को बड़े ही रोचक कार्टून की मदद से दिखाया गया है।जिसे विक्रम ने बनाया है । संक्षेप में ये एक छोटी,अच्छी,रोचक और दिलचस...

Times Litfest Delhi

टाईम्स ऑफ इंडिया  लिटफेस्ट  दिल्ली २८,२९,३० नवंम्बर को मेडन  होटल ,७ शाम नाथ मार्ग  में आयोजित  किया गया था  , २९ और ३० नवम्बर को हम भी गए थे , वहां पांच अलग -अलग  जगहों पर सुबह १० बजे से शाम ८बजे तक सेशन चलते रहते थे नौर हर सेशन के ख़त्म होने के १० मिनट पहले या यूँ कह  ले कि सेशन के आखिर में जनता  गेस्ट  पैनल से सवाल पूछ सकती थी.  आयोजकों की तारीफ़ करनी होगी की वो किसी भी  गेस्ट को निर्धारित समय से ज्यादा नहीं बोलने  थे  और अगर कोई जरा ज्यादा समय लेता था तो पहले तो वो एक स्लिप देते  तब भी सेशन ख़त्म नहीं होता था तो बजर  बजा देते थे।   :) २९ को हमने ३-४ सेशन देखे।  सबसे पहले शोभा डे  और सुनील खिलनानी , पैट्रिक फ़्रेंच  और सिद्धार्थ वरदराजन  का सेशन देखा।   उसके बाद देवदत्त पटनायक और  दिलीप  पडगाओंकर  के बीच का सेशन बहुत ही रोचक और अच्छा था जिसमे  देवदत्त ने माया के ऊपर एक बहुत ही रोचक किस्सा सुनाया  कि एक बार एक गुरु अपने शिष्यों के सा...

ट्रेन में टिकट के प्रिंट आउट की जगह एस.एम एस. दिखाइए

बात 2010-2011 की है उस समय लखनऊ में हमारा बेटा पढ़ रहा था और जब भी दिल्ली शताब्दी या दुरंतो से आता था तो वो अक्सर टिकट का प्रिंट आउट लिए बिना ही ट्रेन board करता था और ट्रेन में टी.टी.को प्रिंट आउट की जगह एस.एम.एस. में टिकट दिखाने पर हर बार 50 या 100 रूपये का फाईन  देना पड़ता था।. और हम हमेशा उससे कहते थे की पहले से टिकट क्यूँ नहीं निकाल कर रखते हो।. हर बार फ़ालतू में फाईन देते हो।. और ऐसा ही एक बार हमारे साथ भी हुआ।. 2011 की बात है  हम लोग शताब्दी से भोपाल  से दिल्ली आ रहे थे और उस बार हम लोगों के पास  टिकट का प्रिंट आउट नहीं था जबकि फ़ोन में एस.एम.एस. में टिकट का पूरा डिटेल था यानी पी .एन.आर. नंबर वगैरा था पर उस समय टी.टी.उस पर यकीन नहीं कर रहा था और बार--बार टिकट प्रिंट आउट के लिए  ज्यादा जोर दे रहा था . जबकि  उसे अपना आई.डी वगैरा भी दिखाया  था।.और बस वो अपनी ही बात बार--बार दुहरा रहा था और ऐसा जता  रहा था मानो हम लोगों बिना टिकट यात्रा कर रहे हो।.   हम लोगों ने उससे कहा की ठीक है अगर आप इसे न...

नौ साल बाद दिल्ली वापिस .....

नौ साल बाद हम  दिल्ली वापिस लौट आये है। नौ साल पहले जब दिल्ली से अंडमान गए थे तब कभी सोचा नहीं था कि इतने लम्बे अरसे तक हम बाहर रहेंगे।  पहले अंडमान फिर गोवा और उसके बाद अरुणाचल प्रदेश। नौ साल दिल्ली बाद लौटने पर लगा की दिल्ली तो बदल ही गयी  है।  यूँ तो दिल्ली अब फ्लाई ओवर सिटी हो गयी है और मेट्रो चलने लगी है। और पहले जहाँ ज्यादातर छोटी कारे दिखती थी अब वहीँ बड़ी-बड़ी कारें दिखाई देने लगी है। पहले जहाँ एक एक-दो मॉल होते थे वहीँ अब हर जगह मॉल  खुल गए है। अब  ऐसा नहीं है की इन नौ सालों में हम दिल्ली न आये हो पर दिल्ली में भीड़-भाड़ पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ गयी है। और दिल्ली का मौसम बाबा रे बाबा ! इतने सालों में इतनी जबरदस्त गर्मी झेलने की आदत ख़त्म हो गयी है क्यूंकि चाहे अंडमान  हो या गोवा या फिर अरुणाचल सभी जगह बहुत बारिश होती है जिसकी वजह से मौसम बहुत ही सुहावना रहता था। सच हम इन जगहों का मौसम बहुत मिस करेंगे।   पर फिर भी दिल्ली दिल्ली है क्यूंकि यहाँ रहते हुए आप बाहर वाले नहीं  कहलाये  ...

ब्लॉगिंग के अद्भुत पांच साल

कुछ अजीब सी ख़ुशी महसूस हो रही है ये लिखते हुए कि हमें ब्लॉगिंग करते हुए पांच साल हो गए है जो कुछ अद्भुत सा लग रहा है क्यूंकि जब हमने ब्लॉगिंग शुरू की थी तो सोचा भी ना था की इतने दिन तक हम ब्लॉग लिखेंगे और उसे लोग पढेंगे भी। :) पर आप सभी के हमारे बलॉग पढ़ते रहने के कारण ही हम ये पांच साल पूरे कर पाए। हालांकि पिछले २ साल से हम बहुत ही कम लिख रहे है पर फिर भी जब भी हम कुछ लिखते है तो आप लोग उसे पढ़ लेते है और टिप्पणी भी करते है और यही हमारे हौसले को बढाने के लिए काफी है। वैसे २००९ मे जहाँ stats काउंटर ने २५ हजार दिखाया था वहीँ आज ७६ हजार से भी ज्यादा का आंकड़ा दिखा रहा है जो हमारे खुश होने के लिए काफी है क्यूंकि जितना कम हम आजकल ब्लॉग लिख रहे है उस हिसाब से ये आंकड़ा अद्भुत ही है । जहाँ २००७ मे १६० पोस्ट और २००८ मे १६७ पोस्ट लिखी थी वहीँ २००९ मे ६५ पोस्ट तो २०१० मे २४ पोस्ट और २०११ मे सिर्फ २ पोस्ट लिखी थी । वैसे २०१० और २०११ मे हमने अरुणाचल प्रदेश की वादियों से नाम का भी एक ब्लॉग बनाया था जिसपर हम ने कुछ पोस्ट लिखी थी । खैर हमने दोबारा से ब्लॉग लिखना शुरू तो उम्मीद करते ह...