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ब्लॉगिंग के अद्भुत पांच साल

कुछ अजीब सी ख़ुशी महसूस हो रही है ये लिखते हुए कि हमें ब्लॉगिंग करते हुए पांच साल हो गए है जो कुछ अद्भुत सा लग रहा है क्यूंकि जब हमने ब्लॉगिंग शुरू की थी तो सोचा भी ना था की इतने दिन तक हम ब्लॉग लिखेंगे और उसे लोग पढेंगे भी। :) पर आप सभी के हमारे बलॉग पढ़ते रहने के कारण ही हम ये पांच साल पूरे कर पाए। हालांकि पिछले २ साल से हम बहुत ही कम लिख रहे है पर फिर भी जब भी हम कुछ लिखते है तो आप लोग उसे पढ़ लेते है और टिप्पणी भी करते है और यही हमारे हौसले को बढाने के लिए काफी है। वैसे २००९ मे जहाँ stats काउंटर ने २५ हजार दिखाया था वहीँ आज ७६ हजार से भी ज्यादा का आंकड़ा दिखा रहा है जो हमारे खुश होने के लिए काफी है क्यूंकि जितना कम हम आजकल ब्लॉग लिख रहे है उस हिसाब से ये आंकड़ा अद्भुत ही है । जहाँ २००७ मे १६० पोस्ट और २००८ मे १६७ पोस्ट लिखी थी वहीँ २००९ मे ६५ पोस्ट तो २०१० मे २४ पोस्ट और २०११ मे सिर्फ २ पोस्ट लिखी थी । वैसे २०१० और २०११ मे हमने अरुणाचल प्रदेश की वादियों से नाम का भी एक ब्लॉग बनाया था जिसपर हम ने कुछ पोस्ट लिखी थी । खैर हमने दोबारा से ब्लॉग लिखना शुरू तो उम्मीद करते ह...

कभी-कभी धमकाना भी जरुरी होता है .... :)

अरे कहीं आप ये तो नहीं सोच रहे की हम आप लोगों को धमकाने जा रहे है। अरे नहीं इतने ज़माने बाद ब्लॉगिंग दोबारा शुरू की और उसपर आप लोगों को कुछ कहें भला ऐसा कैसे हो सकता है। अरे दरअसल पिछले साल हमारे बेटों ने मर्फी रिचर्ड का रूम हीटर खरीदा था जो कुछ दिन बाद यानी पिछले साल दिसंबर मे खराब हो गया था । बेटों ने कई बार कंपनी मे complaint की पर वहां से कोई भी नहीं आया। खैर इस साल चूँकि हम यहां दिल्ली मे है और रूम हीटर वारंटी पीरियड मे है तो सोचा की complaint कर दी जाए और बस २६ दिसंबर को मर्फी रिचर्ड के कस्टमर केयर पर फ़ोन करके complaint की और अगले दिन ही उनका टेक्नीशियन आया और उसने रूम हीटर देखने के बाद कहा कि वो तो बजाज का टेक्नीशियन है और ये प्रोडक्ट मर्फी का है इसलिए हमें दोबारा कस्टमर केयर पर फ़ोन करके नई complaint करनी होगी । तो हमने अगले दिन यानी २८ दिसंबर को फिर से मर्फी रिचर्ड के कस्टमर केयर पर फ़ोन किया और बहुत जोर देकर और खास तौर पर ये कहा कि मर्फी का ही टेक्नीशियन भेजे । और कमाल कि बात उसी दिन शाम को उनका टेक्नीशियन आया और रूम हीटर देखकर बोला कि ये तो यहां पर ठीक नह...

गणतंत्र दिवस की परेड और हम

कल सारे देश ने ६३ वां गणतंत्र दिवस मनाया । और हमने भी कल आठ साल बाद दिल्ली की गणतंत्र दिवस परेड देखी। अरे वहां जाकर नहीं बल्कि दूरदर्शन पर ही देखी। पर फिर भी काफी अच्छी लगी परेड। अब चूँकि पिछले आठ सालों से तो हम दिल्ली से बाहर है और जहाँ भी रहे वो चाहे अंडमान हो या गोवा या फिर अरुणाचल प्रदेश तो इन जगहों की परेड देखने हम लोग जाते थे और जब तक लौट कर आते तब तक दिल्ली की परेड भी खत्म होने वाली होती थी और हम राष्ट्रपति को बस वापिस जाते हुए देख पाते थे । :) पर इस बार चूँकि हम दिल्ली मे है तो अरसे बाद परेड देखी और वैसे भी दिल्ली की परेड की अपनी ही ख़ास बात है। अब हो सकता है की आप लोग कहें कि भई इसमें नया तो कुछ नहीं है हर साल ही ऐसी परेड होती है ।हाँ आप लोगों का कहना भी सही है तो भला परेड मे हमें क्या अच्छा लगा। अब ऐसा नहीं है कि अंडमान ,गोवा और ईटानगर मे कंटिजेंट मार्च पास्ट नहीं करते थे पर वहां मार्च पास्ट छोटा होता था और झांकियां भी कम होती थी पर हाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम उन जगहों पर दिल्ली से ज्यादा होते थे। कल जब परेड मे कंटिजेंट मार्च पास्ट करते हुए दिखाए गए तो वो काफी...

गणतंत्र दिवस और ये खबर

आज सुबह जब अखबार उठाया तो सोचा भी ना था की ऐसी दर्दनाक खबर पढने को मिलेगी और जिसे पढ़कर रोंगटे खड़े हो गए। क्या होता जा रहा है हमारे इस समाज को जहाँ इस तरह का बर्ताव बेटियों के साथ किया जाता है। इंसान दिन पर दिन नीचे ही गिरता जा रहा है ।

dirty politics

यूँ तो राजनीति मे हमेशा ही सभी राजनैतिक पार्टियां एक-दूसरे के काम काज पर ,चुनाव प्रचार पर आरूप प्रत्यारोप लगाती रहती है पर इस बार तो उत्तर प्रदेश के होने वाले चुनाव मे सभी पार्टियों ने सभी सीमाएं तोड़ दी। यूँ तो चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की सभी हाथियों की मूर्तियों को ढकने का आदेश दिया था और ये काम पूरे जोर-शोर से हो भी रहा था । पर शायद राज नेताओं को इतने से ही संतोष नहीं था। क्यूंकि उन्हें इलाहाबाद के चिल्ड्रेन पार्क जिसे सुमित्रा नंदन पन्त पार्क या जैपनीज पार्क या फिर हाथी पार्क के नाम से भी जाना जाता है वहां बच्चों के झूलने के लिए बने एक हाथी को इन नेताओं की नजर लग गयी। और इन नेताओं ने चुनाव आयोग को उस हाथी ढकने के लिए भी कहा। जो की बहुत ही शर्म की बात है। चिल्ड्रेन पार्क का ये हाथी जिसे कुछ नहीं तो काम से काम ४० साल हो गए है बने हुए । हम लोग भी अपने बचपन मे उस पार्क मे बड़े चाव से जाते थे ,और ४० साल पहले तो हाथी पार्क का कुछ ऐसा क्रेज था (शायाद अभी भी है )की जब भी हमारे घर कोई मौसी,मामा या चाचा और उनका परिवार आता तो हाथी पार्क जाना तो लाजमी था. और हम ही क्या इलाहाबाद मे रहने ...

फूलों की बगिया महकेगी .....

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अरे हम कोई गाना नहीं सुनवाने जा रहे है बल्कि हमने सोचा की क्यूँ ना आज आप लोगों को अपने बगीचे की कुछ सैर करवा दी जाए । अब आप लोग कहेंगे कि अब तो फूलों का मौसम कुछ ख़त्म हो रहा है और हम अब फूलों की बात कर रहे है। तो वो क्या है कि हम घर मे नवम्बर मे शिफ्ट हुए थे । और घर मे शिफ्ट होने के बाद ही फूलों के पौधे लगाए थे तो जाहिर सी बात है कि जब पौधे देर से लगाए थे तो फूल भी देर से ही आने थे। :) और फिर हमारे carrey (doggi)से भी तो पौधों को बचना होता है क्यूंकि जब carrey दौड़ते है तो उसके पैरों से कुछ पौधे दब जाते थे। और हम लोग रोज गिनते थे कि आ ज कि तने पौधे बचे। ना केवल पौधे बल्कि जब फूल खिल गए तब भी यही हाल है । रो ज देखते है कि आज कौन सा फूल टूटा या बचा। काफी समय बाद अपनी बगिया मे ४-५ रंग के हमने गेंदे के फूल जिसमे सफ़ेद गेंदे का फूल भी है । गेंदे के फूल वो चाहे हजारा हो या फिर माला मे पिरोये जाने वाले छोटे -छोटे पीले और कुछ लाल से फूल ही क्यूँ ना हो । सभी खूब खिले । औए डहेलिया के इतने सारे रंग देखे कि क्या कहें। ए क ही पेड़ मे २ अलग-रंग के डहेलिया देखकर मन खुश हो जाता है।...

परेशान हो गए है बी एस एन एल की ब्रॉड बैंड सेवा से

आज बड़े समय बाद इन्टरनेट चला तो सोचा की इससे पहले की नेट बंद हो जाए एक पोस्ट बी एस एन एल की ब्रॉड बैंड सेवा के बारे मे लिख ही देनी चाहिए। यहां पर तो सिर्फ कहने को ही ब्रॉड बैंड है क्यूंकि एक पल को नेट चलता है तो अगले ही पल बंद हो जाता है। यूँ तो पिछले कुछ समय से हम ज्यादा कुछ लिख नहीं रहे है और जब भी लिखने की सोचते है तो नेट बंद मिलता है। जब तक सर्किट हाउस मे थे तब तक तो फिर भी इन्टरनेट चल जाता था पर जब से हम ने घर मे शिफ्ट किया है तब से इन्टरनेट चलना तो एक सपने जैसा हो गया है। रोज सुबह नियम से कम्प्लेंट करना हमारा एक काम हो गया है। और वहां से जो आदमी आता है वो इस तरह से सवाल करते है मानो हम पहली बार इन्टरनेट चला रहे है । जैसे की फ़ोन चल रहा है की नहीं या मोडेम मे लाईट जलती है या नहीं । और सबसे कमाल की बात ये है कि अगर इन्टरनेट चलता है तो फ़ोन नहीं चलता और अगर फ़ोन चलता है तो इन्टरनेट नहीं चलता है। क्यूंकि पिछली बार जब कम्प्लेंट पर बी एस एन एल का आदमी नेट ठीक करने आया तो हमारे बताने पर कि नेट चल गया है उसने कहा कि चेक करिए कि फ़ोन चल रहा है कि नहीं और जैसे ही उसने...