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मुंबई को नजर लग गई है ...

मुंबई जिसे महानगरी , मायानगरी , सपनों की नगरी और न जाने क्या - क्या कहा जाता रहा है जहाँ धर्म - जाति या प्रांत के लिए नही बल्कि व्यक्ति को उसके नाम और काम से जाना जाता रहा है । पर अब ऐसा नही है अब व्यक्ति को उसके नाम और गाँव के नाम से जाना जा रहा है । जनवरी २००८ की शुरुआत से ही मुंबई मे कुछ न कुछ ऐसा घटता चला आ रहा है जिसे देख और पढ़ कर लगता है कि मुंबई को नजर लग गई है । अब इस प्रदेश की लड़ाई को ही देख लीजिये धीरे - धीरे कितना विकराल रूप लेती जा रही है । मुंबई जहाँ के लिए कहा जाता रहा है कि वहां धर्म - जात - प्रदेश को महत्त्व नही दिया जाता है अब उसी मुंबई मे इन्ही सब बातों के लिए लोगों को मारा - पीटा जाता है । कुछ दिन पहले शुरू हुई प्रदेश की लड़ाई भी अब दिनों दिन बढती ही जा रही है । चंद रोज पहले railways की परीक्षा देने गए छात्रों के साथ जो कुछ हुआ उस के बारे मे तो हम सभी जान गए है कि किस बुरी तरह से छात्रों क...

दीपावली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

दीपक का प्रकाश हर पल आपके और आपके परिवार के जीवन मे एक नई रौशनी दे बस यही कामना है हमारी दीपावली की शुभकामनाओं के साथ आइये इस शुभ अवसर पर कुछ गीत भी सुनते चले । Powered by eSnips.com

चलता-फिरता ATM

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काफ़ी दिन पहले न्यूज़ जरुर पढ़ी थी कि मोबाइल ATM उद्घाटन के बारे में पर सोचा नही था कि ऐसा हो भी सकता है . हमने तो इससे पहले चलता - फिरता ATM नही देखा था पर अभी ३-४ दिन पहले हम बेटे के साथ कहीं घूमने जा रहे थे तभी SBI की इस मोबाइल ATM वैन को देखा और बिना समय गवाएं हुए हमने फोटो खींच ली ।(अपने सैल फ़ोन से ) :) और दूसरे बैंक के भी मोबाइल ATM चलते है या नही ये पता नही पर ऐसा लगता है की इसमें सबसे पहला नंबर SBI का ही है । और हो सकता है की SBI की देखा-देखी दूसरे बैंक भी मोबाइल ATM की शुरुआत करेंगे । अब ATM कार्ड तो हर बैंक अपने कस्टमर को देता ही है फ़िर वो चाहे शहर में रहने वाला हो या गाँव में रहने वाला हो । इस मोबाइल ATM के आने के बाद तो लोगों को और भी आराम हो जायेगा क्यूंकि जहाँ तक हमारा ख़्याल है की इस तरह की मोबाइल ATM वैन की शुरुआत इसी लिए की गई होगी । अब मोबाइल ATM की बदौलत गाँव वाले भी बैंक की लम्बी लाइन में लगने की बजाय ATM से पैसा निकाल कर अपना समय बचा सकते है । क्यूँ है न अच्छी बात ।

क्या करें लगता है हम भी लो फेज मे आ गए है .... :(

जब तक हम दिल्ली मे थे उस दौरान तो हमने बहुत ही कम लिखा था पर गोवा आने के बाद सोचा था कि अब पहले की तरह ही रोज लिखा करेंगे पर पता नही जब भी लिखने चलते है तो जैसे दिमाग बिल्कुल खाली सा लगता है (है या नही पता नही ) तो कुछ आधी-अधूरी पोस्ट लिख कर छोड़ देते है . तो कभी कुछ ब्लॉग पोस्ट पढ़कर या कभी-कभी बस ब्लौगवाणी को स्क्रोल करके देख लेते है और कम्पूटर बंद कर देते है । पिछले १०-१२ दिन बेटा आया हुआ था तो घूमने-फिरने मे लगे थे पर कल बेटा वापिस चला गया और कल शाम से भी कई बार पोस्ट लिखने की सोची पर फ़िर न जाने क्यूँ मन ही नही हुआ । ऐसा नही है कि विषयों की कमी हो गई है इतना कुछ है लिखने के लिए पर बस लिखते समय मन उचट जाता है । अब इस ८ लाइन की पोस्ट लिखने मे ही आधे घंटे से ज्यादा लगा दिया तो आप समझ ही सकते है । और आज से हम कोशिश करने वाले है कि पहले की तरह ही हम अपने ब्लॉग पर लिखना शुरू कर दे । :)

गोवा का मखरोत्सव ( आरती )

वैसे हम ३- ४ दिन पहले ये पोस्ट लिखने वाले थे पर लिख नही पाये क्यूंकि हमारा बेटा छुट्टियों मे घर आया हुआ है । और अब वैसे तो नवरात्र और दशहरा ख़त्म हो गया है पर फ़िर भी हमने सोचा कि इस मखरोत्सव आरती की बात कर ही ली जाए क्यूंकि ये आरती कुछ अलग तरह से होती है । गोवा के मंदिरों मे नवरात्रों के नौ दिन तक ये मखरोत्सव मनाया जाता है । और जगहों का तो पता नही पर हमने यहाँ पर ही इस तरह की आरती देखी है ।(पिछले ३ साल से ) मखर यानी की लकड़ी का बना हुआ मन्दिर जिसमे हर रोज एक नए देवी या देवता को बैठाया जाता है । इस मखर को खूब सजाया जाता है । और फ़िर उस देवी - देवता की आरती की जाती है । खैर अष्टमी के दिन हम लोग भी इस आरती को देखने के लिए महालसा मन्दिर गए थे । आरती रात मे नौ -साढ़े नौ के आस-पास शुरू होती है ।और ये आरती तकरीबन एक घंटे तक चलती है। और यहाँ पर एक तरफ महिलायें और दूसरी तरफ पुरूष बैठते है । आरती शुरू होने के पहले वहां पर प्रवचन होता है और फ़िर ढोल शहनाई और ताशे के साथ आरती शुरू होती है । मन्दिर मे तो लोग बहुत पहले पहुँच कर बैठ जाते है क्यूंकि बाद मे जगह ...

गोवा मे गुजरात का गरबा और डांडिया

नवरात्रों मे गरबा और डांडिया खेलने के बारे मे सुना तो बहुत था ( गुजरात का गरबा और डांडिया तो पूरी दुनिया मे मशहूर है ) पर देखा यहाँ गोवा मे आकर ही । दिल्ली मे तो जगहों की दूरी की वजह से डांडिया वगैरा देखने कभी गए ही नही । पर यहाँ गोवा मे पहली बार गरबा और डांडिया देखा वरना इससे पहले तो सिर्फ़ टी . वी . और फिल्मों मे ही देखा था । :) गोवा मे मीरामार पर स्थित gasper dias club मे गुजराती समाज ने इसे आयोजित किया है . वहां पहुंचकर लगता है मानो गोवा मे नही बल्कि एक छोटे से गुजरात मे आ गए हो जहाँ कुछ लड़कियां और औरतें पारंपरिक वेश - भूषा मे ( और पूरे श्रृंगार के साथ ) तो कुछ सलवार - कुरता पहने तो कुछ साड़ी पहने दिखती है । लड़के भी कुछ तो पारंपरिक वेश - भूषा तो कुछ कुरता - पैजामा वगैरा मे सजे - धजे घूमते और डांडिया खेलते नजर आते है । वैसे रात ९ बजे से गरबा और डांडिया शुरू होता है । वैसे गरबा तो १० बजे के आस - पास ही श...

कोई बताये कि आख़िर न्यूज़ के लिंक लगाने मे क्या गड़बड़ हो रही है ?

एक बार पहले भी हमने एक न्यूज़ के साथ लिंक लगाने की कोशिश की थी पर सबने टिप्पणी की कि न्यूज़ के लिए दिया गया लिंक नही खुल रहा है और आज भी हमने पोस्ट पर लिंक लगाया तो सीमा जी कि टिप्पणी मिली कि लिंक नही खुल रहा है तो हमने भी जब कई बार चेक किया तो देखा वो लिंक भी नही खुल रहा है ।तब से कई बार कोशिश कर चुके पर असफल रहे . आख़िर क्या वजह हो सकती है जबकि पहले तो जब भी गूगल के लिंक देते थे तो वो खुल जाते थे और न्यूज़ पढ़ी जाती थी। तो अब क्या हो गया है। वैसे अभी हाल मे ही ये प्रॉब्लम शुरू हुई है । कोई हल बताइये। नोट -- ज्ञान जी और सीमा जी हमने अब पूरी न्यूज़ लिख दी है । :)