Friday, April 6, 2007

स्टार प्लस पर आने वाले इस क़यामत नाम के सीरियल को देख कर ये समझ ही नही आता है कि हम कौन सा सीरियल देख रहे है क्यूंकि रोनित रॉय अरे वही अपने मिहिर या यूं कहें कि मि . बजाज उन्हें देख कर लगा कि शायद हम कसौटी देख रहे है पर तभी निम्मो रानी दिख गयी अभी हम असमंजस मे ही थे कि ऋषि वो कहीँ तो होगा वाले गेट अप मे नजर आ गए। बालाजी के सभी सीरियल मे कौन किसका बेटा है और कौन किसकी माँ या बाप ये पता ही नही चलता है। इनके सीरियल मे बेटे हमेशा अपनी माँ के दुश्मन होते है चाहे वो अंश हो या प्रेम हो ।

इससे पहले भी सीरियल बना करते थे जैसे हम लोग और बुनियाद ,उनमे हमे हक़ीकत दिखाई देती थी हालांकि नाटकीयता तो थोड़ी बहुत सभी मे होती है ,सास बहु के झगडे भी दिखाए जाते थे पर ऐसा नही जैसा आजकल के सीरियल दिखाते है । इनकी बहुएं चाहे वो कोमोलिका हो या मोहिनी हो या फिर अपर्णा और बहुओं की बात हो और हम पल्लवी को भूल जाये ऐसा कैसे हो सकता है इनकी परिवार से बदला लेने की नयी -नयी तरकीब देख कर कहना पड़ता है कि वाह क्या बहुंये है।

क्यूंकि .... मे फिर से मंदिरा को लाना तो कभी कहानी ....मे मरी हुई गायत्री को वापस लाना , ये बताता है कि एकता के पास जो थोड़े बहुत आईडिया बचे थे वो खत्म हो गए है। अब तो ये देखना है कि वो और किस-किसको वापस लाती है।

5 Comments:

  1. संजय बेंगाणी said...
    शादी को तो खेल बना दिया है. अगला झटकेदार कदम होगा बहू से ससुर का ब्याह.
    आपको विकृत सोच लगी? कोई बात नहीं एकतामाई जब करवायेगी तब उँगली उठाना, मैं भी देखुंगा.
    SHUAIB said...
    time mila to Star Plus walon ko ye bhi banana hai "sasur bhi kabhi jamai tha" ha ha ;)
    mamta said...
    सही कहा एकता के सीरियल मे कुछ भी हो सकता है।
    Sagar Chand Nahar said...
    इस विषय पर मैने भी एक लेख लिखा था, देखिये एक बार ठीक लगे तो उत्साह वर्धन करियेगा।
    http://nahar.wordpress.com/2007/02/09/hinditvserials/
    हरिराम Hariraama said...
    एकता जी कुछ भी करवा सकती हैं - दादी-पोते का विवाह या बिना विवाह के ही ... नया वंश! शायद यही एक युक्ति बची है, अपने अनन्त धारावाहिकों में आप जैसी विशेष दर्शक को बाँधे रखने हेतु ...

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