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निकोबार का सफर

अंडमान के बारे मे तो हमने बहुत कुछ लिखा है पर निकोबार के बारे मे इससे पहले कभी नही लिखा । चूँकि निकोबार हम सिर्फ़ एक बार सुनामी के पहले गए थे और सुनामी के बाद कई बार सोचा पर दोबारा जाने की कभी हिम्मत ही नही हुई ।इससे पहले भी कई बार लिखने की सोची पर हर बार थोड़ा सा लिख कर छोड़ दिया था पर अब आज से हम निकोबार के बारे मे अपने अनुभव भी लिखना शुरू कर रहे है।

मई २००४ की बात है छोटे बेटे के दसवी बोर्ड के इम्तिहान ख़त्म हो चुके थे । घर मे जब भी निकोबार का कार्यक्रम बनता तो हम पीछे हट जाते थे क्यूंकि एक तो समुद्री यात्रा हमे बिल्कुल भी नही बहती है और हेलीकॉप्टर मे उड़ने मे भी डर लगता था। पर निकोबार जाना और घूमना भी था। अब अंडमान मे तो हमेशा ही बारिश होती है पर मार्च और अप्रेल और थोड़ा बहुत मई के शुरू के २ हफ्तों मे बारिश कम होती है. इसलिए मई के पहले हफ्ते मे प्रोग्राम बना की पूरा निकोबार एक हफ्ते मे घूम कर वापिस आयेंगे।

अब निकोबार के लिए हट बे से ही होकर जाना पड़ता था और निकोबार की समुद्री यात्रा २४ घंटे की थी। कुछ ज्यादा बड़े शिप जैसे स्वराज द्वीप और चौरा वगैरा १५ दिन मे चेन्नई से आने और जाने मे …

असली -नकली नोट का चक्कर

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इतने समय से सुनते आ रहे थे की मार्केट मे नकली नोट चल रहे है पर पहली बार हमें नकली नोट मिला और पहली बार ही नकली नोट देखा भी । :)

तो सवाल ये की नकली नोट भला हमारे पास आया कहाँ से ?

१९ सितम्बर को हम दिल्ली के अंसल प्लाजा मे बने Mcdonalds मे गए थे ।(जानते है आप लोग सोच रहे है की पिछली पोस्ट तो गोवा से लिखी थी और अब दिल्ली से लिख रहे है . अचानक हम गोवा से दिल्ली आ गए है ) और वहां से हमने take away लिया । और जब हमने काउंटर पर ५०० रूपये का नोट दिया तो उस काउंटर वाले ने बाकायदा लाइट मे चेक किया की ५०० का नोट असली है या नही । और उसने हमें २०० रूपये वापिस किए और हमने बिना सोचे और बिना चेक किए दोनों १०० के नोट अपने पर्स मे रख लिए । (अबयेतोसपनेमेभीनहीसोचाथाकी१००कानकलीनोटमिलेगा ):)

खैर अगले दिन घर पर जब सब्जी वाले से सब्जी लेने के बाद उसे १०० का नोट दिया तो उसने ये कह कर की ये नोट ठीक नही है ,नोट वापिस कर दिया । तो हमने उससे पूछा की भला इस नोट को वो क्यूँ नही ले रहा है । तो इस पर वो सब्जी वाला बोला की जी ये नोट कुछ हल्का है । और रंग कुछ अलग है ।

ये सुनकर पहले तो सब्जी वाले पर गुस्सा आया (जो क…

गणपति बप्पा मोरया

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अरे ये क्या , आप लोग तो कुछ अचरज मे लग रहे है ? अरे माना की गणेश चतुर्थी तकरीबन २० दिन पहले थी और हम आज गणपति की जय कर रहे है । अरे वो क्या है न की अभी १५-२० दिन के लिए हम गोवा आए हुए है और यहाँ पर गणेश चतुर्थी को गणेश उत्सव के रूप मे २१ दिन तक मनाया जाता है ।वैसे कुछ जगहों पर गणपति १ दिन (ज्यादातर वो लोग घर मे गणपति स्थापित करते है )तो कुछ ७ दिन तो कुछ ११ दिन और कुछ जगहों पर २१ दिन तक गणपति की प्रतिमा स्थापित रहती है . तो हमने सोचा की इतने दिनों बाद हम पोस्ट लिख रहे है तो इससे अच्छा विषय भला और क्या हो सकता है ।

गोवा मे अगर आप कभी गणेश चतुर्थी के आस-पास घूमने आए तो मार्शेल (marcel)मे जरुर गणपति की मूर्तियाँ देखने जाइयेगा क्यूंकि इस छोटे से गाँव मे हर दस कदम की दूरी पर गणपति की विबिन्न प्रकार की और विभिन्न वस्तुओं से बनी गणेश की प्रतिमा देखने को मिलती है ।और यहाँ पर २१ दिन तक गणेश उत्सव मनाया जाता है । इस बार भी यहाँ पर कोई गणेश रस्सी से तो कोई गणेश जूट से बने थे । तो कहीं अलमुनियम फोयल से गणेश बनाए गए थे । कहीं वंश पात्र गणेश थे तो कहीं floating गणेश थे जिसमे गणेश जी शेषना…

divar island of goa

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इससे पहले गोवा के beaches और मन्दिर के बारे मे तो कई बार हमने लिखा है पर आज गोवा के island के बारे मे हम लिखने जा रहे है ।गोवामेislandsहैयेपढ़करकहींआपकोआश्चर्यतोनहीहोरहाहै । गोवा मे न सिर्फ़ beaches और मन्दिर है बल्कि गोवा मे कुछ ५-६ island भी है जैसे chorao,divar,वगैरा panjimकेपासहै । वैसे chorao island नदी और सड़क दोनों रास्ते से जुड़ा है पर सड़क के रास्ते जाने मे ज्यादा समय लगता है इसलिए ज्यादातर लोग ferry से ही जाते है ।chorao islandपरहीडॉक्टरसलीमअलीbirdसैंक्चुरी भी है जिसके लिए या तो सुबह या फ़िर शाम को जाना चाहिए क्यूंकि वो समय ही सबसे सही होता है विभिन्न प्रकार की चिडियों और पक्षियों को देखने का ।

चलिए तो आज आपको divar island की सैर करा दी जाए । divar island सिर्फ़ ferry के द्वारा ही जाया जा सकता है । और इसके लिए ferry रायबंदर मे बने गोवा इंस्टीटियुत ऑफ़ मैनजमेंट के ठीक सामने से मिलती है । अभी तक इस पर यात्रियों से कोई भी किराया नही लिया जाता था पर कार ट्रक वगैरा से बहुत ही (subsidised rate ) नोमिनल सा किराया या यूँ कह ले बस नाम के लिए लिया जाता था पर अब पहली जुलाई से…

दिल्ली मे तो नही पर इलाहाबाद के ब्लॉगर से हुई मुलाकात

अप्रैलमेजबदिल्लीगएथेतोशुरूमेतोकुछसोचनेसमझनेकीसुधहीनहीथीक्यूंकिपापाहॉस्पिटलमेथेपरजबकुछदिनबादउनकीतबियतकुछसंभलीतोएकदिनहमनेरचनाकोफ़ोनकियातोरचनानेसबसेपहलेयहीपूछाकिहमकबदिल्लीआरहेहैऔरयेबतानेपरकिहमदिल्लीमेहीहैरचनाकाफ़ीखुशहोगईकिइसबारतोहमलोगजरुरहीमिलेंगे।परजबहमनेपापाकेबारेमेबतायातोरचनानेकहाकिकभीभीकोईभीभीहोतोहमउन्हेंजरुरबताये।रचनाकाइतनाकहनाहीबहुतथा।

रचनासेबातकरनेकेबादहमनेरंजनाजीकोफ़ोनकियातोपताचलाकिरंजनाजीकुछbusyथीइसलिएउनसेबातनहीहोपायीथी।इसबीचमे२-३बाररचनासेबातहुईऔरहरबारबातइसपरख़तमहोतीकीइसबारतोहमलोगजरुरमिलेंगे । इलाहाबादमेजबहमथेतबरचनानेबतायाथाकिअविनाशवाचस्पतिजी४जूनकोदिल्लीमेएकब्लॉगरमीटरखरहेहैऔरअविनाशजीसेभीबातहुईथीपरबादमेवोमीटकैंसिलहोगईथीऔरफ़िरसन्डेकोहमकुछऐसेउलझेरहेकीनतोरचनाऔरनहीअविनाशजीसेबातकरपाये । दिल्लीसेगोवाआनेकेपहलेएकबारफ़िररंजनाऔररचनासेफ़ोनपरबातहुईपरमुलाकातनहीहोपायीथी ।

औरफ़िरजबपापाकोहॉस्पिटलसेछुट्टीमिलीतोहमलोगइलाहाबादचलेगए । २-३दिनबादहमनेसोचाकीदिल्लीमेतोपरेशानीकीवजहसेकिसीसेमुलाकातनहीहुईऔरअबजबपापाठीकहैऔरहमइलाहाबादमेहैतोक्यूँनइसबारइलाहाबादकेbloggersसेमिललियाजाए । अबयेसोचनातोबहुतआसानथापरमुश्किलयेथी…

शायद अब रेलवे ट्रैक को शोर्टकट के रूप मे इस्तेमाल करना बंद हो जाएगा

आज अखबार मे ये ख़बर पढ़ी थी जिसमे मुंबई की रेलवे कोर्ट ने एक मेडिकल रिप्रेजनटेटिव को रेलवे ट्रैक क्रॉस करने के कारण जेल भेज दिया था । पूरी ख़बर आप भी यहाँपढ़ सकते है ।

वैसे रेलवे ट्रैक क्रॉस करने का नजारा हर शहर के प्लेटफोर्म पर देखा जा सकता है जहाँ न केवल लड़के और आदमी और आरतें बल्कि कई बार तो लोग सपरिवार बेधड़क रेलवेट्रैकको एक प्लेटफोर्म से दूसरे प्लेटफोर्म पर जाने के लिए इस्तेमाल करते है । और कोई उन्हें ऐसा करने से रोक भी नही सकता था पर अब जब रेलवे पुलिस इस तरह लोगों को पकडेगी और कोर्ट उन्हें सबक सिखाने के लिए २-४ दिन के लिए जब जेल भेजेगी तब ही लोगों की इस तरह से रेलवे ट्रैक क्रॉस करने की आदत छूटेगी । ऐसी उम्मीद की जा सकती है ।

पता नही इस तरह के शोर्टकट से वो कितना समय बचा लेते है । बमुश्किल ५-१० मिनट ,पर उसके लिए अपनी जान जोखिम मे डालने से भी नही चूकते है ।

हम वापिस आ गए :)

आज बड़े दिनों बाद जब मेल बॉक्स देखा तो अल्पना जी का मैसेज पढ़ा तो सोचा की आज एक छुटकी सी पोस्ट लिख ही दी जाए । अल्पना जी हमारे गायब होने पर हमारी खोज ख़बर लेने का शुक्रिया । दरअसल कुछ परेशानी के चलते अप्रैल से जून तक हम दिल्ली और इलाहाबाद मे थे और उस बीच मे नेट करने का बिल्कुल भी समय नही मिला था । पर अब हम वापिस गोवा आ गए है और अब २-४ दिन मे पूरी तरह से ब्लॉग पढने और लिखने का काम शुरू कर देंगे । :)

आख़िर आज बड़े दिनों बाद नेट चल ही गया ... :)

पिछले काफ़ी समय से हमारे यहाँ इन्टरनेट की समस्या आ रही थी पर फ़िर भी हम किसी तरह काम चला रहे थे पर पिछले संडे से नेट जो बिगडा तो आज ठीक हुआ है ।मतलब पूरे एक हफ्ते के बाद आज नेट चला है । अब ये संडे के कारण है या .... :)

bsnl वालों को रोज फ़ोन कर-करके हम तो तंग ही आ गए । असल मे bsnl की helpline पर जब भी complaint करते थे तो वो लोग हमेशा कहते की अड़तालीस घंटे मे ठीक हो जायेगा पर ठीक हो नही रहा था । कल शाम को जब फ़िर फ़ोन किया तो पता चला की helpline के जिस नम्बर पर हम कॉल करते है वो यहाँ का नही बल्कि pune का है ।

और फ़िर हमें समझ मे आया की जब भी हम फ़ोन मिलाते है तो हमेशा bsnl गोवा -महाराष्ट्र मे आपका स्वागत है क्यों बोलते है । अब कल pune वाले ने कहा की आप गोवा मे जो भी nearest bsnl ऑफिस है उससे बात कीजिये ।

पर खैर फिलहाल आज तो नेट चल रहा है देखें कल क्या होता है ।

चलिए लगे हाथ ये भी बता दे की गोवा की १९७ सर्विस जिसकी जरुरत अभी हाल ही मे पड़ी थी और वो भी pune से ही मैनेज होती है इसलिए कभी-कभी गोवा मे किसी का नम्बर पूछने पर उन्हें समझ ही नही आता है ।

आज की पोस्ट बेटे के नाम ...........

हमारा छोटा बेटा जो की दिल्ली मे है ,अभी हाल ही में उस के collage मे फेस्ट था । और इस बार फेस्ट को औरगानाईज करने में बेटे ने काफ़ी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । तीन दिन तक चले इस फेस्ट के आखिरी दिन बेटे ने भी अपने दोस्तों के साथ पहली बार perform किया । कलउसनेअपनाये वीडियो हमें भेजा तो हमने सोचा की अपने इस ब्लॉगर परिवार को भी दिखाया जाए । तो आजउसीकावीडियोहमयहाँपरलगारहेहै ।

हमारे सुपुत्र अभिनव नीले कुरते मे बेस गिटार बजा रहे है । सफ़ेद शर्ट में मैथयू जैकब है ,नीली शर्ट मे समीर फराज है काले कुरते मे aparna और लाल कुरते मे निखिल ड्रम बजा रहे है ।

शहर और यारा मौला from गुलाल सुनेंगे

इससे पहले आपने आरम्भहै और ओदुनिया सुना था । वैसे बहुत सालों बाद गुरूवार को हमने दोबारा ये फ़िल्म देखी । :)औरइसबारभीहमेंयेफ़िल्मपसंदआई ।

तोसोचाकिआजशहरऔरयारामौलाभीआपलोगोंकोसुनवायाजाए । अरे तो इंतजार कैसा । :)



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जरा एक नजर इस फोटो पर ....देखिये जरुर

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दोदिनपहलेकेनवहिंदटाईम्स मेंयेफोटोछपीथी।सबसेपहलेआपफोटोदेखेंऔरउसकेनीचेलिखेशब्दों (सेंटेंस) कोध्यानसेपढ़े।

कुछसमझमेंआया।
नहीआया। :)

तोचलिएहमबतादेतेहै ,वोक्याहैकिआजकलचुनावोंकासमयहैऔरसभीजगहनोमिनेशनकीप्रक्रियाचलरहीहै। (इसफोटोमेबी .जे.पी.केप्रत्याशीअपनानोमिनेशनफाइलकरनेकेबादबाहरआकारफोटोखिंचारहेहै )

साथहीगोवामेंइन्हीदिनोंलेंटपीरियड (जिसमेंक्रिशचनलोग४०दिनतकनॉन-वेजनहीखातेहैऔरइसदौरानsaintsकीमूर्ति (statues) केसाथprocessionनिकलतेहै। ) भीचलरहाहै।

औरइसफोटोमेंइनदोनोंबातोंकोमिलादियागयाहै। :)

मतलबफोटो election कीऔरसेंटेंसलेंटका।

अरे कोई है या सबके सब ब्लौगर सम्मलेन मे चले गए .....

अब आज तो सभी दिल्ली वासी गए होंगे अरुण जी के बुलाए गए ब्लौगर सम्मलेन मे तो पता नही लोग पोस्ट पढेंगे या नही और टिप्पणी करेंगे या नही । पर खैर उनके सम्मलेन की खबरें तो हम लोगों को मिल ही जायेगी । :)

आज पहली अप्रैल है और अब तो कम पर एक ज़माने मे इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार किया करते थे ।और कितना मजा आता था लोगों को अप्रैल फूल बनाने मे । घर मे तो बहुत ही आम सा तरीका था अप्रैल फूल बनाने का ,अरे वही फ़ोन उठा कर कहना कि पापा आपका फ़ोन है या जिज्जी तुम्हारा फ़ोन है । या दरवाजे की ओर इशारा कर कहना की भइया बाहर कोई मिलने आया है ।औरस्कूलमेदोस्तोंकोकहनाकितुम्हेटीचरनेबुलायाहैऔरजैसेहीकोई लड़की उठकर चलने लगती तोजोरसेअप्रैलफूल चिल्लाते थे ।

वो भी क्या दिन थे । खैरछोडियेउनबीतेदिनोंको।

आजसुबहअखबारमे ये ख़बरपढ़ीतोसोचाकिआपलोगोंकोभीबतादियाजाए । वैसेभीआजकलहरतरफ़चुनावऔरउससेजुड़ीखबरेंहीज्यादापढनेऔरदेखनेकोमिलरहीहै । तो ख़बरपढिये और बताइये कि क्या ऐसा हो सकता है ।


कार चलाना सीखा वो भी तीन दिन मे .....

अब साइकिल और स्कूटर सीखने का किस्सा तो हम ने एक जमाने पहले ही आप लोगों को बता दिया था पर कार का किस्सा बताना रह गया था ।तो सोचा आज आप लोगों को अपने कार चलाने के सीखने का अनुभव भी बता दिया जाए ।अबवोक्याहैनाचूँकिमायकेमेहमसबसेछोटेथेइसलिएकारसीखनेकानंबरआते-आतेहमारीशादीहोगईथी । :)

आपयहीसोचरहेहैनाकितीनदिनमेकारचलानासीखातोकौनसाबड़ातीरमारलिया। अरेभईहमजानतेहैकिआपलोगोंनेएकघंटेयाएकदिनमेकारचलानासीखाहोगा । :)

दिसम्बर ८९ की बात है उस समय बेटे छोटे थे और हम इलाहाबाद गए हुए थे और हमारी बाकी जिज्जी भी इलाहाबाद आई हुई थी । एक दिन शाम को हम सब चाय पी रहे थे और बातें हो रही थी तभी हमें कार चलाना सीखने का भूत चढ़ गया ।तो भइया बोले की कार चलाना तो बहुत आसान है । बस गियर लगाना आना चाहिए । और कार चलाते समय बिल्कुल भी डरना नही चाहिए । फ़िर भइया ने घर मे खड़ी कार मे ही गियर लगाना सिखाया ।क्योंकितबambassadorमेहैंडगियरहोताथा । ४-५ बार गियर लगाने की प्रैक्टिस करने के बाद ड्राईवर मुन्ना लाल को बुलाया गया और हम चल दिए कार सीखने के लिए ।

घर से तो मुन्ना लाल ही एमबैसडर कार लेकर चला और संगम के पहले बायीं ओर की सड़क ज…

कभी गिनती से जामुन खरीदा है .....

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आपकोगिनतीसेजामुनखरीदनेकाअनुभवहुआहैकिनहीहमनहीजानतेहैपरहमेंजरुरअनुभवहुआहै । गिनतीसेजामुनखरीदनेकाअनुभवहमेंहुआहैऔरवोभीगोवामें । कलकीहीबातहैहमसब्जीमंडीगएथेऔरवहांजामुनदेखकरजबबेचनेवालीसेपूछाकैसेदिया ? तोबोलीकी४०रूपयेमे१००।
तोहमनेकहाकिकिलोमेकैसे ?
तोवोबोलीकिलोनही ,४०रूपयेमे१००।
हमनेकहाकिइतनीगिनतीकरोगीतोमुस्कारातेहुएसरहिलाकरबोलीहाँ।

औरजबहमनेकहाकिगड़बड़तोनहीकरोगी तोबोलीनही।
औरहमारेकहनेपरकीठीकहैदेदोतो उसनेजामुनगिननाशुरूकियाऔर२-३मिनटमेजामुनसेभरापैकेटहमारेहाथमेथा। :)
कहनापड़ेगाकिबड़ेहीएक्सपर्टअंदाजमेफटाफटगिनतीकरतीहैयेजामुनबेचनेवाली।

पहलेजामुनकभीगिनतीकरकेनहीखरीदा।बनारस ,इलाहाबादऔरदिल्लीमेतोदरवाजेपर (घर )जामुनवालासिरपरटोकरीलिएआताथा । बनारस(६०-७० मे )मेतोजामुनवालेएकस्टैंडसाभीसाथलेकरचलतेथेजिसपरवोजामुनकीटोकरीरखतेथे । औरफ़िरजामुनकोतौलकरमिटटीकीहंडियामेजामुनऔरनमक -मसालामिलाकरझोरता (हिलाता ) थाऔरदोनेमेदेताथाऔरउसकोखानेमेबड़ाहीमजाआताथा।औरकोई -कोईजामुनवाले२-३अलग-अलगमापके लकड़ीकाडिब्बासाभीरखतेथेऔरजितनीकीजामुनलेनीहोउसीमापकेडिब्बेमेजामुनडालकरनमकलगाकरझोरतेथेऔरफ़िरदोनेमेदेतेथे ।

औरदिल्लीमेतोइंडियागेटकेआस-पासथोडी-थोडीदूरपर…

सजन रे झूठ मत बोलो .......

भईहैतोयेगानाबहुतपुरानापरआजभीइसकेएक-एकबोलबिल्कुलसोनेकेजैसेखरेहै । उससमयकीहिटचौकडीयानीराजकपूर ,मुकेश,शैलेन्द्रऔरशंकरजयकिशनकाकोईमुकाबलानहीहै । तोलीजियेहमज्यादाबक-बकनहीकरतेहैऔरआपलोगोंकोगीतसुननेदेतेहै ।
वैसेआपकोयादहैनकिआजरातसाढ़ेआठबजेसेसाढ़ेनौबजेतकयानीएकघंटेearthhourकेलिएलाइटबंदरखनीहै ।
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अब क्या होगा दादा ( सौरभ गांगुली )और चीयर लीडर्स का ....

इस साल मार्च मे जब से IPL के मैचों की घोषणा हुई है तब एक तरह का घमासान सा चल रहा है । पहले तो IPL की तारीखों के ले कर सरकार और B.C.C.i.और IPL के ललित मोदी के बीच खींच - तान चलती रही । क्योंकि देश मे लोक सभा चुनावों की घोषणा भी मार्च मे ही हुई और चुनाव देश के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है । ये तो सभी जानते है ।

और चूँकि अब चुनाव ५ फेज मे हो रहा है यानी १६ अप्रैल से १३ मई तक पोलिंग और १६ मई को counting यानी पूरा एक महीना । और IPL के मैच भी १० अप्रैल से शुरू होकर २४ मई तक होने थे । ऐसे मे जो तारीख ललित मोदी कहते उसमे गृह मंत्रालय राजी नही होता क्योंकि सुरक्षा की जरुरत चुनाव और IPL दोनों को है । अब ये दूसरी बात है कि मोदी और B.C.C.i.को शायद ऐसा नही लग रहा था ।औरIPLनहोनेपरइनलोगोंको१हजारकरोड़कानुक्सानउठानापड़तासोअलग ।वोभीआजकेrecessionकेसमयमे ।

हालाँकि चुनावोंकेमद्दे-नजर कई बार मैच की तारीखें बदली गई पर हर बार गृह मंत्रालय जब राज्य सरकारोंसे सुरक्षा देने की बात पूछता तो राज्य सरकार जहाँ पर ये IPL मैच होने थे ,ने भी सुरक्षा देने से इनकार किया तो आख़िर मे ललित मोदी ने IPL को भारत के…

आ गई प्यारी सी छोटी सी nano ....

अब जैसा की टाटा ने वादा किया था हिन्दुस्तान की जनता को लखटकिया कार देने का तो वो इंतजार ख़त्म हुआ और टाटा ने तीन दिन पहले अपना वादा पूरा किया । मुंबई मे पूरे शान-ओ- शौकत से nano को लॉन्च किया गया । और इस कार के एक नही बल्कि ३ नए मॉडल लॉन्च किए गए है । और हर मॉडल का दाम और सुविधाएं (फीचर्स)अलग -अलग है ।

वैसे टाटा ने एक लाख की कार का वादा किया था पर सबसे कम दाम वाली कार एक लाख बारह हजार की है (मतलब लाख से ऊपर) जिसमे न तो ए.सी.है और न ही स्टीरियो है पर हाँ इन सबके लिए कार मे स्पेस दिया हुआ है जिससे अगर कार लेने वाला चाहे तो बाद मे अपनी सुविधा से ए.सी.और स्टीरियो लगवा सकता है ।

बाकी के दूसरे मॉडल जैसे CX और LX मे जहाँ दाम ज्यादा है वहीं इन मॉडल मे ए.सी और स्टीरियो के साथहीसाथ कुछ और नए फीचर्स भी है । कार के रंग से भी जैसे अगर मेटलिक है तो कार का दाम ज्यादा हो गया है । इसके अलावा हर शहर मे भी nano का दाम अलग है । और सबसे महँगी एक लाख पचासी हजार (१.८५ )की होगी ।

जितना कुछ nano के बारे मे पढ़ा और देखा है उससे लगता है ये nano काफ़ी हलकी-फुलकी कार है पर sturdy हो सकती है क्यो…

क्या चमगादड़ सिर के बाल नोच सकता है ?

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आप लोग भी सोच रहे होंगे कि हम भी कहाँ सुबह-सुबह चमगादड़ (bats)की बात ले बैठे है । पर क्या करें । यहाँ गोवा मे इन सब जीवों से फ़िर से मुलाकात जो हो गई है । :)

अब है तो ये सवाल थोड़ा बेतुका पर क्या करें । असल मे यहाँ हमारे घर मे जो पेड़ है जिसमे कुछ चमगादड़ भी रहते है । वैसे पेड़ मे लटके हुए ये काफ़ी अच्छे लग रहे है । (वैसेभीफोटोतोदिनमेंखींचीहैऔरयेएकसालपुरानीफोटोहै । अरेमतलबकीअबयेचमगादड़भीबड़ेहोगएहै । ) दिन भर तो नही पर हाँ शाम को जैसे ही अँधेरा होने लगता है कि ये पेड़ से निकल कर चारों ओर उड़ने लगते है । और कभी-कभी काफ़ी नीचे-नीचे उड़ते है । कई बार तो ऐसा लगता है कि सिर छूते हुए ही उड़ रहे है । तो इस डर से की कहीं ये सिर के बाल ना नोच ले ,हम झट से सिर को हाथ से ढक लेते है ।

हम लोग रोज शाम को बाहर बैठते है पर जैसे ही चमगादड़ उड़ने लगते है तो हम लोग घर के अन्दर आ जाते है । वो क्या है कि हमेशा से सुनते आ रहे है कि अगर चमगादड़ सिर पर बैठ जाए तो वहां से बाल नोच लेता है । इसीलिए चमगादड़ को देखते ही हम घर मे आ जाते है और नही तो सिर को ढक लेते है ।

हालाँकि हमारे पतिदेव का मानना है…

गुलाल देख ली और अब पोस्ट हाजिर है आप लोगों के लिए

जैसा कि हमने अपनी पिछलीपोस्टमे कहा था सो कल हमने गुलाल देख ली । फ़िल्म तो अच्छी है ,और फ़िल्ममेयूनिवर्सिटी और स्टेट लेवल कीराजनीतिदिखाईगईहैपरगालीकुछज्यादाबोलीगईहै । हालाँकि इस फ़िल्म मे काफ़ी मार-पीट और खून-खराबा है पर फ़िर भी फ़िल्म देखने के बाद भी सिर मे कोई भारीपन नही महसूस होता है । ये शायद अनुराग कश्यप के डायरेक्शन का कमाल है । इसफ़िल्ममेभीरामलीलाकोबीच-बीचमेकहानीकेसाथजोड़ागयाहैबिल्कुलdelhi6कीतरह ।फ़िल्मकेपहलेसीनकीशुरुआतके.केसेहोतीहैऔरआखिरीसीन की ...... से ।


फ़िल्म की शुरुआत मे एक सीधा सा लड़का दिलीप सिंह law करने के लिए जयपुर कॉलेज - यूनिवर्सिटी मे admission लेता है और वो रहने के लिए एक जगह कमरा किराये पर लेता है जहाँ उसकी मुलाकात रानाजय से होती है ।और जब दिलीप हॉस्टल मे वार्डन से मिलने जाता है तो हॉस्टल मे दादा टाइप लड़के कैसे पहले दिन ही उसकी रैगिंग करते है (बुरी तरह)और जब रानाजय को पता चलता है तो वो उसके साथ उन लड़कों की पिटाई करने जाता है पर .... । औरफ़िरकिसतरहनचाहतेहुएभी दिलीपराजनीतिमेआताहै । औरजनरलसेक्रेटरीकाइलेक्शनजीतजाताहै । औरफ़िरकैसेसारेहालातबदलजातेहै ।…