Friday, December 25, 2009

अंडमान के बारे मे तो हमने बहुत कुछ लिखा है पर निकोबार के बारे मे इससे पहले कभी नही लिखा । चूँकि निकोबार हम सिर्फ़ एक बार सुनामी के पहले गए थे और सुनामी के बाद कई बार सोचा पर दोबारा जाने की कभी हिम्मत ही नही हुई ।इससे पहले भी कई बार लिखने की सोची पर हर बार थोड़ा सा लिख कर छोड़ दिया था पर अब आज से हम निकोबार के बारे मे अपने अनुभव भी लिखना शुरू कर रहे है।

मई २००४ की बात है छोटे बेटे के दसवी बोर्ड के इम्तिहान ख़त्म हो चुके थे । घर मे जब भी निकोबार का कार्यक्रम बनता तो हम पीछे हट जाते थे क्यूंकि एक तो समुद्री यात्रा हमे बिल्कुल भी नही बहती है और हेलीकॉप्टर मे उड़ने मे भी डर लगता था। पर निकोबार जाना और घूमना भी था। अब अंडमान मे तो हमेशा ही बारिश होती है पर मार्च और अप्रेल और थोड़ा बहुत मई के शुरू के २ हफ्तों मे बारिश कम होती है. इसलिए मई के पहले हफ्ते मे प्रोग्राम बना की पूरा निकोबार एक हफ्ते मे घूम कर वापिस आयेंगे।

अब निकोबार के लिए हट बे से ही होकर जाना पड़ता था और निकोबार की समुद्री यात्रा २४ घंटे की थी। कुछ ज्यादा बड़े शिप जैसे स्वराज द्वीप और चौरा वगैरा १५ दिन मे चेन्नई से आने और जाने मे निकोबार को टच करते थे। उस समय येरवा नाम का एक शिप था जो हर दूसरे-तीसरे दिन निकोबार जाता था । तो हम लोगों ने भी येरवा मे एक केबिन बुक किया । येरवा पोर्ट ब्लेयर से सुबह ६ बजे निकोबार के लिए चला तो शुरू मे तो सब ठीक था। येरवा की स्पीड ज्यादा नही थी इसलिए शिप पर ही सुबह का नाश्ता भी हम लोगों ने शिप के कैप्टेन के साथ किया



पोर्ट ब्लेयर से हट बे की यात्रा मे करीब ८ घंटे लगते थे । एक दो घंटे बाद शिप ने अपना रंग दिखाना शुरू किया और हमे सी सिकनेस शुरू हो गई ।थोडी देर डेक पर भी जाकर बैठे पर सी सिकनेस मे अगर एक बार तबियत ख़राब हो जाती है तो फ़िर ठीक मुश्किल से ही होती है।शिप पर खाने और नाश्ते के लिए घंटी बजाई जाती थी। एक घंटी जिसमे यात्री लोग खाना खाने dinning hall मे जाते थे और दूसरी घंटी शिप के crew के लिए बजती थी।नाश्ते के बाद जब लंच की घंटी बजी तब तो हम इस लायक ही नही थे की लंच खा सकते . इसलिए हमने सिर्फ़ काफ़ी पी और खाया कुछ नही ।

करीब बजे शिप हट बे पहुँचा और यहां पर शिप - घंटे तक रुका रहाशिप मे सिर घूम गया था इसलिए हम लोग फ्रेश होने के लिए शिप से उतर कर हट बे के गेस्ट हाउस मे गएवहां नहाया और चाय वगैरा पीकर आराम करके निकोबार की यात्रा के लिए पूरी तरह से दिमागी तौर पर तैयार हो कर वापिस बजे तक शिप पर गए

हट बे से निकोबार का सफर १०-१२ घंटे का थाअगले हफ्ते तक इंतजार कीजिये

कुछ लिंक्स हम अपनी पुरानी पोस्ट के यहां दे रहे हैऔर आगे भी देते रहेंगे

दिल्ली से अंडमान तक का सफर

अंडमान निकोबार -२

घर की खोज

10 Comments:

  1. Arvind Mishra said...
    बहुत दिनों बाद टी वी दिखी या शायद मैंने देखी नहीं -निकोबार के बारे में और भी बताएं न
    Udan Tashtari said...
    क्या करें..अगले हफ्ते का इन्तजार करते हैं. :)
    सतीश पंचम said...
    हमने तो निकोबार को केवल नक्शे में ही जाना है, कभी कभार टीवी पर एकाध फुटेज भी देखा है....बहरहाल आप बताती रहें.... जानकारी रोचक है।
    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
    रोचक विवरण! आगे की तफसील का इंतजार रहेगा।
    परमजीत बाली said...
    प्रतीक्षा रहेगी।
    काजल कुमार Kajal Kumar said...
    यात्रा की कुछ फोटो भी टंगी होतीं तो स्वाद आ जाता
    Manish Kumar said...
    shukriya hut be tak sath le chalne ke liye aage ka vritant jaanne ki utsukta hai
    रंजना [रंजू भाटिया] said...
    बहुत दिनों बाद आपका लिखा पढ़ा आगे की जानकारी और दे रोचक लगा यह
    ज्ञानदत्त पाण्डेय G.D. Pandey said...
    अर्से बाद हट बे का नाम आया! :)
    डॉ. मनोज मिश्र said...
    वर्ष नव-हर्ष नव-उत्कर्ष नव
    -नव वर्ष, २०१० के लिए अभिमंत्रित शुभकामनाओं सहित ,
    डॉ मनोज मिश्र

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