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तीसरा स्कूल रीयूनियन ( चाफी में कैंप फ़ायर )

चाफी से अगले दिन हम लोग सातताल ,नौकुचिया ताल और भीमताल घूमने गये । हालाँकि मौसम बहुत गड़बड़ था बहुत बादल छाये हुये थे पर फिर भी हम लोग घूमने निकले और सात ताल में हम लोग आराम से घूम लिये । वैसे भी किसी को वहाँ बोटिंग तो करनी नहीं थी और बूंदी बांदी शुरू सी हो रही थी तो तकरीबन आधा घंटा वहाँ बिताकर और फ़ोटो खींच खांचकर हम लोग नौकुचिया ताल की ओर चल दिये ।


नौकुचिया ताल पर जब हम लोग पहुँचे वहाँ तभी बस बारिश रूकी थी ।और इस वजह से वहाँ थोड़ा किच किच सा था पर जैसे ही हम लोग ताल की ओर बढ़े तो बत्तखों का झुंड दिखाई दिया । बत्तखें भी बहुत समझदार जैसे ही वो लोगों को देखती है तो बस क्वैक क्वैक करती हुई आ जाती है ताकि लोग उन्हें चने खिलायें ।



तो लाज़मी था कि जब बत्तखें हम लोगों की तरफ़ आई तो हम लोग उन्हें चने खिलाये । हमने भी चने ख़रीदे और हाथ से खिलाने में यूँ ते डर लग रहा था कि कहीं बत्तख काट ना ले पर फिर हिम्मत करके हाथ से चने खिलाये तो बड़ा मजा आया और हमने एक बार और चने ख़रीदकर बत्तखों को खिलाये ।( बीस रूपये में एक दोना चने देता है बेचने वाला ) और लौटकर गरमागरम भुट्टे हम लोगों ने खाये । और भी…

तीसरा स्कूल रीयूनियन ( २) चाफी रील एंड रिवर एडवैंचर कैम्प

काठगोदाम से हम लोगों को चाफी जाना था । चाफी जोकि नैनीताल से पहले एक छोटा सा गाँव है और जहाँ चाफी नदी बहती है ।यहीं पर जगाती के भांजे कान्हा का रिसॉरट है जहाँ हम सब दो दिन मौज मस्ती करने वाले थे । चूँकि ये रिसॉरट थोड़ा हटकर मतलब शहर से दूर था । कान्हा ने ही हम लोगों को काठगोदाम से लाने के लिये गाड़ियाँ भेजी थी ।


काठगोदाम से हम लोगों को चाफी रील एंड रिवर् एडवैंचर कैम्प ले जाने के लिये दो बड़ी गाड़ियाँ मय ड्राइवर ( टवेरा और क्वालिस ) आयी थी । चाफी रवाना होने से पहले एक बार फिर से फ़ोटो शोटो खींचीं गई । हम सब में कुछ लोगों को पहाड़ी रास्ते पर चक्कर की परेशानी तो कुछ को गाड़ी की पीछे की सीट पर बैठने में परेशानी थी । पर कुछ हर हालात में ख़ुश और एडजस्ट करने वालीं भी थी ।


सब लोग दोनों गाड़ियों में एडजस्ट होकर चाफी के लिये चल पडे और चालीस मिनट बाद हम लोग चाफी रिसॉरट पहुँचे तो सबसे पहले तो वहाँ की ख़ूबसूरती साफ़ और स्वच्छ हवा और मौसम पर हम सब फ़िदा हो गये । और पहाड़ों के बीच बने टेंट और बग़ल में पानी के कल कल की आवाज़ सुनते ही सबकी थकान और बीमारी मानो हवा हो गई । इस रिसॉरट में कुल आठ टेंट है…

तीसरा स्कूल रीयूनियन

चौंकिये मत एक बार फिर इस साल सितम्बर में हम स्कूल फ्रैंड्स नैनीताल में रीयूनियन के लिये इकट्ठा हुये थे । हालाँकि नैनीताल जाने का प्लान पिछले यानि २०१८ में ही बन गया था क्योंकि सभी लोग कुछ अलग जगह जाना चाहते थे ।

वैसे इस साल के रीयूनियन में कई बार झटके लगे और एक समय तो ऐसा लगने लगा था कि कहीं इस बार का रीयूनियन कैंसिल ही ना करना पडे । पर वो कहते है ना कि अंत भला तो सब भला । मतलब हम लोगों का रीयूनियन सफल रहा । 😊

अब नैनीताल जाना कोई आसान काम तो था नहीं । क़िस्मत से हम लोगों की एक दोस्त जगाती नैनीताल से ही है और जिसकी वजह से हम लोगों को बहुत सहूलियत रही ।


वैसे नैनीताल जाने के लिये हम लोगों की तकरीबन पाँच छ: महीने या यूँ कहें कि साल भर की प्लानिंग थी । क्योंकि हम सब अलग अलग जगह से इकट्ठा होने थे जैसे किसी को मुम्बई से तो कुछ लोग इलाहाबाद से तो कोई कानपुर से तो किसी को बनारस से आना था ,किसी को बिहार से तो कुछ को दिल्ली और गुरूग्राम से तो किसी को हैदराबाद तो कोई नागपुर से तो किसी को दुबई से आना था । कुछ को छुट्टी लेनी थी तो कुछ को घर बार की ज़िम्मेदारी थी पर कोई भी एक साल में एक बार होन…

नैनीताल यात्रा एक अनुभव ( आख़िरी पार्ट )

दो दिन भुवाली और भीमताल घूमने के बाद तीसरे दिन नैनीताल जाने का प्रोग्राम बना । उसका एक कारण यह भी था कि ये कहा जा रहा था कि सोमवार को नैनीताल जाना सम्भव होगा क्योंकि शनिवार और रविवार का जो पर्यटकों का हुजूम था वो कुछ कम हो जायेगा ।


अगले दिन सुबह सुबह फटाफट नाश्ता करके हम लोग साढ़े ग्यारह बजे तक नैनीताल के लिये निकले । रास्ते में कुछ ज़्यादा भीड़ भाड नहीं मिली और दो दिन पहले जहाँ से पुलिस वाले बैरियर लगाकर सबको वापिस भेज रहे थे वहाँ पुलिस वाले भी थोड़ा रिलैकस करते हुये दिखे । और मन ही मन हम ख़ुश हो रहे थे कि चलो आज तो आराम से नैनीताल पहुँच ही जायेंगे । पर जैसे ही नैनीताल दिखना शुरू हुआ और नैनीताल एक कि. मी. लिखा दिखा कि बस कार रूक गई । मतलब ट्रैफ़िक जाम की एक लम्बी सी लाइन उस घुमावदार पहाड़ी पर देखी जा सकती थी ।



और हम लोगों को लगा कि अब तो नैनीताल पहुँचना कहीं मुश्किल ना हो जाये । ट्रैफ़िक में खड़े खड़े जब आधा घंटा होने लगा तो कुछ लडकों ने टैक्सियों से अपना सामान लेकर पैदल चलना ही उचित समझा । और उनकी देखा देखी कुछ और लोग भी मय सामान के पैदल ही चल पड़े । और इंच इंच करके कार आगे बढ़ती…

नैनीताल यात्रा ( पार्ट ३ ) गोलू देवता का मन्दिर और चाय बाग़ान

इधर थोड़ा व्यस्त रहने की वजह से नैनीताल यात्रा का विवरण छूट गया था । पर चलिये आज आगे चलते है । 😊


भीमताल जाने और ट्रैफ़िक का बुरा हाल देखकर ये सोचा गया कि अगले दिन भुवाली के आस पास की जगह देखी जाये । और ऐसे में गूगल बाबा से ज़्यादा मददगार भला कौन हो सकता है । गूगल बाबा से पता चला कि जहाँ हम लोग रह रहे थे ( पाइन ओक ) वहाँ से चाय बाग़ान और गोलू देवता का मन्दिर बस दो-तीन कि.मी. की दूरी पर ही है ।


तो अगले दिन हम लोग पहले चाय बाग़ान देखने गये । जहां टिकट बीस रूपये का था । टिकट लेकर जब चाय बाग़ान में गये तो थोड़ा निराश हुये क्यों कि गूगल पर फ़ोटो में चाय बाग़ान काफ़ी बड़ा लग रहा था और हमें भी लगा था कि चाय बाग़ान बड़ा सा होगा पर वहाँ एक छोटे से एरिया को बस पर्यटकों के लिये खोला हुआ था बाक़ी सारा बंद था ।और चूँकि उस दिन रविवार था तो बाग़ान में पत्तियाँ तोड़ती हुई बाग़ान की महिलायें नहीं दिखी । 😏


और इसलिये वहाँ बमुश्किल पन्द्रह मिनट हम लोग रहे । क्योंकि वहाँ घूमने के लिये ज़्यादा कुछ था ही नहीं । हाँ हर कोई उसी जरा से एरिया में अलग अलग पोज देकर फ़ोटो खींच और खिंचा रहे थे । हमने भी कुछ फ़…

नैनीताल यात्रा एक अनुभव ( पार्ट २ भीमताल )

उम्मीद है कि आपकी थकान उतर गई होगी ।😊

इतने बुरे ट्रैफ़िक जाम के बाद तो उस शाम कहीं निकलने की इच्छा ही नहीं हुई । रात में पांडे जी के होटल से स्वादिष्ट शाकाहारी खाना मँगवाया गया और अगले दिन भीमताल घूमने का प्रोग्राम बनाया गया ।


सुबह तकरीबन बारह बजे के आस पास हम लोग भीमताल के लिये निकले पर चूँकि गूगल बाबा हम लोगों को भीमताल की बजाय नैनीताल वाले रास्ते पर लेकर चल पड़ें । वो इसलिये क्यों कि हमने तल्लीताल भीमताल लिख दिया था । 😳


जैसे ही नैनीताल के रास्ते पर चले कि थोड़ी दूर बाद भुवाली सैनिटोरियम पड़ा जो बहुत ही जर्जर हालत में लग रहा था । वैसे बता दें कि एक ज़माने में भुवाली इस सैनिटोरियम की वजह से ही जाना जाता था पर शायद अब नहीं ।


खैर सैनिटोरियम से बस एक या दो कि. मी. ही गये होगें कि एक बार फिर कारों की लम्बी क़तार नज़र आई और चूँकि वहाँ से कार को वापिस मोड़ना मुश्किल था लिहाज़ा हम लोग भी उसी लाइन में लग गये । रेंगते हुये जब नैनीताल जाने वाले रास्ते पर पहुँचे तो वहाँ बहुत सारे पुलिस वाले खड़े थे और नैनीताल का रास्ता बैरियर लगाकर बंद किया हुआ था । गाड़ियाँ या तो काठगोदाम जा सकती थी या भुव…

नैनीताल यात्रा एक अनुभव (पार्ट १)

कुछ दिन पहले हम नैनीताल गये थे । अब आप कहेंगे कि नैनीताल जाना भला कौन सी बड़ी बात है । गरमी की छुट्टियों मे तो हमेशा लोग नैनीताल ,मसूरी शिमला और मनाली वग़ैरह घूमने जाते ही है । तो भला इसमें नई बात क्या है ।


दरअसल काफ़ी समय से लोग कहते थे कि अब सड़कें बहुत अच्छी बन गई है और अब सड़क से यात्रा करना बहुत आरामदायक हो गया है । और वैसे भी नैनीताल गये हमें पच्चीस तीस साल हो गये थे । लिहाज़ा सोचा गया कि इस साल नैनीताल घूमकर आया जाये ।


नैनीताल से पहले भुवाली पड़ता है जहाँ हमारे पतिदेव के दोस्त का घर है और वो पिछले तीन चार साल से हम लोगों को कह रहे थे कि हम लोग भुवाली और नैनीताल घूमने आये और उनके घर पर रूकें । तो हम लोगों ने भी मन बनाया और नैनीताल जाने की तैयारी की और चल पड़े । 🚘

सुबह साढ़े सात बजे घर से चले और तकरीबन एक घंटे में हम लोग ग़ाज़ियाबाद पहुँच गये । हम बडे ख़ुश थे कि वाक़ई सड़कें बहुत अच्छी बन गई है ।

अरे पर ये क्या अभी तो हमने अच्छी सड़क की तारीफ़ ही की थी कि अचानक ही गड्ढा युक्त ( गड्ढा मुक्त नहीं 😒 ) सड़क शुरू हो गई और हमें बैठे बैठे हिंडोले का मजा मिलने लगा । हँसिये मत जिसपर …