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इत्र

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आजकल लोग इत्र कम और परफ़्यूम और डियो जैसी चीज़ों का प्रयोग करते है । और वो भी ना केवल देशी बल्कि विदेशी ब्रांड के । वैसे कन्नौज का इत्र बहुत मशहूर है । अगर कार से कन्नौज से गुज़र रहे होते है तो इत्र की ख़ुशबू चारों तरफ़ फैली होती है । अगर आप सो भी रहे हो तो इत्र की ख़ुशबू से पता चल जाता है कि कन्नौज आ गया है क्योंकि वहाँ घर घर में इत्र बनाने का काम होता है ।

वैसे हम भी परफ़्यूम और डियो से अछूते नहीं है । पर अभी हाल में हमने इत्र ख़रीदा और यक़ीन मानिये इसकी ख़ुशबू और दाम दोनों ही बहुत बढ़िया ।

पहले तो लोग इत्र का ही इस्तेमाल किया करते थे । हमारे बाबा इत्र की छोटी सी बोतल रखते थे और जब भी कहीं जाते थे तो उसे अपने हाथ की कलाई पर लगाते थे । इत्र लगाने का यही तरीक़ा होता है ।

खैर हमने अभी हाल ही में इत्र ख़रीदा है । दरअसल एक दिन हम लोग दिल्ली एम्पोरियम गये थे तो वहीं की एक सेल्स गर्ल नें हमें इत्र ट्राई करने को कहा पहले तो हमने मना कर दिया कि हम ये लगाते ही नहीं है पर उसके ज़्यादा ज़ोर देने पर हमने अम्बर नाम के इत्र को ट्राई किया । उसने हमारी कलाई पर रोल ऑन लगाया और हमें ये काफ़ी पसंद …

मीठी यादें ज़ीरो की

आज सुबह जैसे ही फेसबुक खोला तो उसमें सात साल पुरानी फ़ोटो दिखी जिसे हमनें शेयर किया । कई बार हम लोग फ़ोटो को लगा कर भूल जाते है पर फेसबुक कभी एक साल पुरानी तो कभी दो साल पुरानी और कभी सात साल पुरानी कोई फ़ोटो को अचानक दिखा देता है और हम लोग वापिस उन्हीं लम्हों में पहुँच जाते है ।

आज की फ़ोटो देखकर जीरो जो कि अरूनाचल प्रदेश का एक डिस्ट्रिकट है उसकी याद ताज़ा हो आई ,जब हम लोग ज़ीरो गये थे इनके दृी फ़ेस्टिवल को देखने । वैसे यहाँ पर दूसरी ट्राईब भी रहती है पर मुख्य ट्राइब अपातानी है । ज़ीरो इटानगर से लगभग १६० कि. मी. की दूरी पर है । और तब चार घंटे का समय लगता था , एक तो पहाड़ी रास्ता दूसरा जगह जगह सड़क बनती रहती थी । वैसे हो सकता है अब रास्ते पहले से अच्छे हो गये होगें ।

यूँ तो अरूनाचल प्रदेश में सभी औरतें बड़ी ख़ूबसूरत होती है और अपातानी औरतें भी बहुत सुंदर होती है । पर जो वहाँ की वृद्ध औरतें है उनके चेहरे पर टैटू बना हुआ देखा जा सकता है माथे पर एक लम्बी सी लकीर और ठुड्डी पर चार या पाँच छोटी छोटी लकीरें । और नाक के दोनों तरफ़ में बड़ी ,काली सी लकड़ी की बाली सी पहनती है । और ये टैटू स…

वज़न घटाना कितना मुश्किल 😋

ना केवल अपने देश में बल्कि दुनिया भर में लोग वज़न बढ़ने से परेशान रहते है । और हों भी क्यूँ ना । वज़न ज़्यादा होना किसी के लिये भी अच्छा नहीं होता है फिर वो चाहे पुरूष हो या स्त्री । और तो और मोटापे से कितनी सारी समस्यायें जुड़ी होती है । तो भला कोई क्यूँ मोटा होना चाहेगा ।

अब वज़न कोई एक दिन में तो बढ़ता नहीं है पर काफ़ी समय तक तो हम लोग इस बढ़ते हुये वज़न और मोटापे को अनदेखा करते रहते है । और जब जागते है तब तक बड़ी देर हो चुकी रहती है मतलब वज़न इतना बढ गया होता है कि घटाना मुश्किल ।
वैसे वज़न घटाने में भले महीने या साल लग जायें पर बढनें में ज़रा भी समय नहीं लगता है ।

रोज़ सुबह उठकर सबसे पहले वेईंग मशीन पर वज़न देखना दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है । और अगर पाँच सौ ग्राम भी कम आता है तो मन ख़ुशी से झूम उठता है। ये हमारा अनुभव है ।

कल सुबह की ही बात है हम वेईंग मशीन पर अपना वज़न देखने के लिये खड़े हुये और एक किलो जी हाँ पूरा एक किलो कम आया तो हम ख़ुशी से फूले ना समाये । पर आज सुबह जब हमनें वज़न लिया तो डेढ़ किलो बढ़ गया । 😩

क्या क्या नहीं करते है इस बढ़े हुये वज़न को कम करने के लिय…

कैंसर एक ख़ौफ़

यूँ तो कोई भी बीमारी छोटी नहीं होती है पर कैंसर इस शब्द को सुनते ही शरीर में एक सिहरन सी महसूस होती है । और पिछले कई दशकों से इस बीमारी से लोग प्रभावित होते रहे है । ये एक ऐसी बीमारी है जो चुपके चुपके शरीर में आ जाती है और भनक भी नहीं लगती है । कई बार तो जल्दी पकड़ में आ जाती है पर कभी कभी बहुत देर में इसका पता चलता है ।

जब आनन्द और मिली फ़िल्मे देखीं थी तो ऐसा लगा नहीं था कि कुछ सालों के बाद ये बीमारी भी इतनी ज़्यादा फैल जायेगी । जब भी हम लोग सुनते है कि किसी को कैंसर हुआ है तो भले हम उसे जानते हों या ना जानते हो मन में एक टीस सी ज़रूर उठती है । हाल ही में इरफ़ान खान और सोनाली बिन्द्रे इस बीमारी से लड़ रहे है ,पता चला तो बहुत दुख हुआ और ख़राब लगा । और ये सोचने पर मजबूर हुये कि ये बीमारी कभी भी किसी को भी अपने चंगुल में ले सकती है । और इस से सिर्फ़ लड़ कर ही जीता जा सकता है । और इसके लिये भगवान ही हिम्मत देता है ।

हमने अपनी एक दोस्त को इस कैंसर से जूझते, लड़ते और इससे जीतते देखा है ।



संजू एक फ़िल्म

हमने संजू देखी और इसमें कोई दो राय नहीं है कि रनबीर कपूर ने बहुत ही अच्छी एक्टिंग की है । जिस तरह से संजय दत्त के स्टाइल में हाथ ढीले छोड़कर चलना ,सिर को थोड़ा हिलाकर डायलॉग बोलना और कैसे यंग संजय दत्त के लिये वज़न कम करना और बाद में बड़ा परिपक्व दिखने के लिये वज़न बढ़ाना । रनबीर कपूर की जितनी तारीफ़ की जाय उतनी कम है ।

कहानी तो सभी को संजय दत्त की मालूम है कि एक समय में वो ड्रग्स एडिकट था और कैसे टाडा में गन रखने के लिये उस पर केस चला और सज़ा हुई । और इस दौरान उसकी जिंदगी में क्या क्या घटित हुआ ये तो हम सभी पढ़ते और जानते रहे है ।

इस फ़िल्म से संजय दत्त को एक तरह से भटका हुआ दिखाया है । ठीक है बहुत बार माँ बाप ग़लत भी हो सकते है पर उसका मतलब ये नहीं होता है कि आप गलत रास्ते पर चल दें । और उस ग़लती का परिणाम ना केवल वो बल्कि उसके माँ बाप को भी झेलना पड़ता है ।

ड्रग्स के बारे में तो कहा ही जाता है कि इसको मज़े या दुख दर्द को भुलाने के लिये लेना तो आसान है पर इसके चंगुल से निकलना बहुत मुश्किल है । और इसको बख़ूबी फ़िल्म में दिखाया गया है ।

अपनी हिफ़ाज़त के लिये गन रखना सोचें तो ठीक भी…

पानी पानी दिल्ली

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मानसून ने जून के आख़िरी हफ़्ते से ना केवल दिल्ली बल्कि क़रीब क़रीब पूरे देश में दस्तक दी है । हालाँकि अभी पूरी तरह से खूब बारिश नहीं हो रही है (मतलब लगातार दो -तीन दिन तक बारिश होती रहना ) पर फिर भी बादल छाये रहते है । कई बार इन बादलों और हल्की फुलकी बारिश से राहत की बजाय उमस सी हो जाती है ।

परसों दिल्ली में बस एक डेढ़ घंटे खूब धुँआधार बारिश हुई थी और जिसका नतीजा जगह जगह सड़कों पर पानी का भर जाना । हर साल यही हालत होती है । और ये हालात धीरे धीरे बद से बदतर ही होते जा रहे है ।

परसों जब हम शॉपिंग के बाद मॉल से बाहर निकले तो पता चला कि बाहर तो धुँआधार बारिश हो रही है । पर ग़नीमत ये थी कि इतनी बारिश में भी हमें ऊबर कैब मिल गई थी । और जब हम लोग वसंत कुंज से निकले तो हर थोड़ी दूर पर सड़कों पर पानी भरा हुआ था । महिपालपुर पुर की क्रासिंग पर भी काफ़ी पानी भरा हुआ था । और लोगों को ये समझ नहीं आ रहा था कि उस गंदे पानी से भरी सड़क को कैसे पार करें । पर उस बारिश के पानी से भरी सड़क को क्रास करने के अलावा कोई और चारा भी तो नहीं था ।

बारिश का पानी हो तो भी ठीक पर नालियों और सीवर का पानी और दुनिया…

सेल ही सेल की बहार

आजकल तो हर बाज़ार और दुकान में सेल का बोर्ड दिखाई दे रहा है । वैसे भी जुलाई और फ़रवरी के महीनों में सेल लगती ही थी या दिवाली के समय सेल लगती थी । पर आजकल तो तो हर तीज त्योहार पर सेल लगना लाज़मी है । ऑनलाइन शॉपिंग में तो हमेशा ही सेल लगी रहती है चाहे मिनतरा हो या अमेजॉन हो या जबॉंग हो,फिलपकारट हो , हर तरफ़ सेल ही सेल । वैसे ऑनलाइन में तो किसी ना किसी रूप में सारे साल सेल लगी रहती है ।

कल हम वसंत कुंज मॉल गये थे वहाँ तो हर शॉप पर सेल का बड़ा सा बोर्ड लगा है । ज़्यादातर जगह अपटू ५०% छूट तो कहीं कहीं ७०% तक की छूट के बोर्ड लगे हुये है । और हर शॉप पर खूब भीड़ फिर वो चाहे ओनली हो या एच एंड एम हो या लाइफ़स्टाइल हो या ज़ारा हो या कोई और हो ।

ना केवल कपड़े , जूते, पर्स पर बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर भी ज़बरदस्त सेल लगती है । और अब तो ज्वैलरी में भी जैसे तनिष्क ,कल्यान ज्वैलरस भी कुछ ना कुछ ऑफ़र देते रहते है ।

सेल के दौरान दोपहर में मतलब दो-तीन बजे तक तो थोड़ी कम भीड़ भांड होती है पर जैसे जैसे शाम होने लगती है वैसे वैसे लोगों का मेला सा लग जाता है । दोपहर के समय तो कपड़े देखना और ट्राई कर…