Posts

हाय हाय गरमी ( लॉकडाउन ४.० ) ग्यारहवाँ दिन

सच्ची में आजकल तो बस यही गाते हुये हम घूम रहें है

हाय हाय गरमी उफ़ उफ़ गरमी


पहले तो इन्द्र देवता अपनी कृपा बनाये हुये थे और हम लोग खूब ख़ुश भी थे कि अरे इस बार तो गरमी पता ही नहीं चल रही है ।

पर लगता है सूर्य देव ने ये बात सुन ली और उन्होंने जो तपती जलती धूप और गरमी करी कि बस हाय हाय करते ही दिन बीत रहा है । 😏

इतनी भीषण गरमी पड़ रही है कि ए.सी चल रहा है ये भी पता नही चलता है और इसलिये कभी कभी लगता है कि ए.सी ठंडा नहीं कर रहा है । पर जब कमरे से बाहर निकलते है तब लगता है कि हाँ ए.सी काम कर रहा है ।


हम लोग तो घरों में रहते हुये गरमी को झेल नहीं पा रहें है पर उन मज़दूरों के बारे में सोचकर ही दिल काँप उठता है जो इस कोरोना और लॉकडाउन के कारण शहरों में अपने बसे बसाये घरों को छोड़कर इस चिलचिलाती धूप में अपने गाँवों की ओर चले जा रहें है ।


उनकी हिम्मत को सलाम ।

हम सभी प्रवासी ( लॉकडाउन ४.० ) दसवाँ दिन

जब से देश में कोरोना फैला है और जब से पूरे देश में लॉकडाउन शुरू हुआ तब से ये प्रवासी शब्द बहुत सुनने में आ रहा है । ख़ासकर मज़दूरों के लिये जिन्हें हर टी वी चैनल प्रवासी मज़दूर और श्रमिक कह रहें है ।

जहाँ तक हमें मालूम है पहले तो प्रवासी विदेशों में रहने वालों को ही कहा जाता था पर अब तो अपने ही देश में रहने वालों को प्रवासी कहा जाने लगा है । हर साल प्रवासी भारतीय समिट होता है और उसमें एक तुक समझ आता है ।

कितनी अजीब बात है कि आजकल तो अपने ही देश में रहते हुये सब लोग प्रवासी हुये जा रहे है ।


अब इस तरह तो हम लोग भी जो रहने वाले तो उत्तर प्रदेश के है पर बसे दिल्ली में है तो एक क्या पूरी तरह से हम भी प्रवासी ही है । आख़िर हम भी तो अपना प्रदेश और घर छोड़कर यहाँ रह रहे है मतलब बसे है ।


अब अपने देश कोई भी एक ऐसा शहर ,प्रदेश या ज़िला है जहाँ सिर्फ़ उसी प्रदेश के लोग रहते हों या काम करते हों । हर राज्य में दूसरे राज्य से आये लोग नौकरी करते है और रहते है ।

देश के हर प्रदेश और हर शहर में अलग अलग प्रांतों के लोग रहते है । और इसी से अपने देश में अनेकता में भी एकता है ।

अंडमान में तो एक घर मे…

एकदम मस्त रही वर्चुअल किटी ( लॉकडाउन ४.० ) नवाँ दिन

कल आपसे कहा था ना कि हम वर्चुअल किटी में जा रहें । तो सोचा बता दें कि कैसी रही हमारी किटी ।

पोस्ट थोड़ी लम्बी है । 😛

अब इस कोरोना के चलते लॉकडाउन और लॉकडाउन के चलते हम सब घरों में बंद । अब जब घर से बाहर नहीं जा सकते तो किटी तो बंद होनी ही थी ।

हम सभी का मन मचलता था कि कैसे मिला जाये और कैसे किटी की जाये ।

कुछ दिन पहले एक किटी मेंबर विजेता ने कहा भी कि ज़ूम पर वर्चुअल किटी की जाये पर हम लोगों ने मना कर दिया क्योंकि ज़ूम को सब लोग कहते है कि सेफ़ नहीं है ।

और फिर बात आई गई हो गई । पर फिर जब हम लोगों में बाक़ी बचे किटी मेंबर को मनी ट्रांसफ़र की बात हुई तो एक बार फिर विजेता ने ज़ूम पर किटी करने को कहा तो हम सब तैयार हो गये ।


तो सबसे पहले तो हम सभी ने ज़ूम डाउनलोड किया ।


तो चार पाँच दिन पहले हम सबने सविता को किटी मनी ट्रांसफ़र किया और फिर उसने किटी की थीम बताई कि सबको सिर पर एक बैंड सा पहनना है जिसपर स्टे होम स्टे सेफ़ लिखना था और बीच में लाल रंग से कोरोना बनाना था ।

फिर तंबोला खेलने के लिये सविता ने सबको टिकट भेजे और हम लोगों ने वही टिकट पेपर पर बना लिया ।


और सब लोग पूरे जोश से …

पंचायत और पाताल लोक ( लॉकडाउन ४.० ) आठवाँ दिन

अरे घबराइये नहीं इसे पढ़कर । 😊

ना तो हम पंचायत करने वाले है और ना ही पाताल लोक जाने वाले है । दरअसल ये दोनों अमेजॉन प्राइम की वेब सीरीज़ है । चूँकि हमने दोनों देख ली है तो सोचा आप लोगों को बता दूँ ।


पंचायत गाँव की कहानी है । जहाँ हीरो ( जितेन्द्र कुमार ) जो की इंजीनियर है वो गाँव में पंचायत सचिव ( सेक्रेटरी ) बनकर आता है । और कैसे उसे गाँव के माहौल में ख़ुद को एडजस्ट करता है जहाँ कहने को गाँव की प्रधान एक महिला ( नीना गुप्ता ) है पर पंचायत का सारा कामकाज उनके पति ही संभालते है ( रघुवीर यादव ) ।

बहुत ही सिम्पल और बहुत ही ज़मीन से जुड़ा शो है । और सबसे बडी बात दिल पर कोई ज़ोर नहीं पड़ता है । गाँव और गाँववाले सभी बहुत ही नॉरमल से दिखाये गये है ।


तो वहीं पाताल लोक जिसमें चार लोग एक पत्रकार (नीरज क़ाबी ) की हत्या की एक साज़िश रचने के लिये पकड़े जाते है । वैसे इसकी कहानी का हीरो एक पुलिस वाला है (जयदीप अहलावत ) जिसे इस केस को सॉलव करने की ज़िम्मेदारी दी जाती है । और किस तरह वो इस केस के चलते ससपेंड होते हुये भी केस की तह तक जाता है और केस को सॉलव करता है । देखने लायक है ।

दोनों ही शो …

फिर से टहलना शुरू ( लॉकडाउन ४.० ) सातवाँ दिन

कोरोना के कारण हुये लॉकडाउन के पूरे दो महीने बाद हम लोगों ने एक बार फिर से टहलना शुरू किया है ।


पर अब टहलना भी पहले जैसा नहीं रहा क्योंकि अब टहलने के लिये जाने में पूरी तरह से लैस होकर जाना पड़ता है । अरे मतलब मास्क लगाओ ,सैनीटाइजर लेकर या ग्लव्ज पहनकर जाओ ।

अब कहाँ पहले बस सुबह शाम जब मन किया चल दो वॉक करने के लिये पर इस कोरोना के चलते ये भी देखना पड़ता है कि कहीं बहुत सारे लोग वॉक ना कर रहें हो । अरे वही सोशल डिसटेंसिंग के लिये ।

किसी चीज़ को छुओ मत । किसी से बात मत करो । बात करो भी तो दो फ़ीट की दूरी से जिसमें दूसरे आस पास से गुज़रने वाले कोई भी क्या बात हो रही है वो सुन भी सकते है । 😳😃

उफ़ इस कोरोना ने तो टहलना भी एक टास्क बना दिया है ।

क्या आपको भी ऐसा लगता है ( लॉकडाउन ४.० ) छठां दिन

जब भी ये दिल उदास होता है , जाने कौन आस पास होता है ।

आज कुछ भी लिखने का मन नहीं कर रहा है ।

बहुत सारी बातें दिलोदिमाग़ में घूम रही है ।

होता है कभी कभी ।

ज़्यादा कुछ सोचने की ज़रूरत नहीं है ।

कल मिलते है ।







हमें काम पर आना है ( लॉकडाउन ४.० ) पाचवां दिन

हमारी हैल्पर पार्वती काम पर आने के लिये बहुत इच्छुक है । और हम उसे बार बार मना कर रहें है ।

अभी कल ही उससे फोन पर बात हुई थी । और पूछने पर कि उसका क्या हाल है । वो बोली कि हमें काम पर आना है ।

तो हमने कहा कि अभी फिलहाल तो इकतीस मई तक लॉकडाउन है तो अभी तो मत आओ । उसके बाद हम बतायेंगे ।

तो पिछली बार की ही तरह वो कहने लगी कि हम इतने दिन से घर में ही रह रहें है । शुरू का एक महीना तो ठीक से निकल गया पर अब हम घर से थोडा बाहर निकलना चाहते है ।

हमने कहा कि घरवालों को जो तुमने हमारे यहाँ काम करते हुये खाना बनाना सीखा है वो सब बनाकर खिलाओ तो तपाक से बोली कि वो सब शुरू में बनाकर खिलाया ।

अब सब बनाने का मन नहीं करता है । घर में हमें उकताहट सी हो रही है ।

तो हमने उससे कह दिया कि अभी तो कुछ और दिन लगेंगें तुम्हें काम पर आने में क्योंकि अभी तो कोरोना ज़्यादा फैलना शुरू हो गया है ।

ये सुनकर वो बोली हाँ दीदी । बेचारी थोडा दुखी हो गई थी ।


पर हम भी क्या करें । अभी तो हम उसे काम पर बुलाने की हिम्मत भी नहीं कर सकते है ।