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Showing posts from May, 2010

सांसदों और विधायकों को टोल टैक्स देने की जरुरत क्यूँ नहीं ?

हमारे देश के सांसद और विधायक ऐसे है जो देश और जनता के लिए दावा तो कुछ भी करने का करते है पर उनकी जेब से कुछ जाए ये उन्हें मंजूर नहीं है। अरे आप को यकीन नहीं है पर ऐसा ही है। कल मंत्री मंडल की बैठक मे ये निर्णय लिया गया कि अब से सांसदों और विधायकों को टोल टैक्स नहीं देना पड़ेगा ।

अरे पर आखिर ऐसा फैसला लिया क्यूँ गया ?

क्या आम जनता के पास इफरात धन-दौलत है और ये सांसद और विधायक टोल टैक्स देना भी afford नहीं कर
सकते है। जबकि किसी भी राज्य या शहर मे देखे तो गाड़ियों पर अपनी पार्टी के झंडे लगाए ये फर्राटे से घूमते नजर आते है। जहाँसेभीजनताकोलूटनेकामौकामिलभरजाए ,बस ।

जहाँ नेताओं को अपने लिए कुछ भी फैसला लेना होता तो फटाफट सर्व सम्मति से निर्णय ले लिए जाता है।

पर सवाल ये है कि अगर ये सांसद और विधायक टोल टैक्स नहीं देंगे तो फिर आम जनता क्यूँ दे। क्या सारे तरह के टैक्स देने का जिम्मा सिर्फ आम जनता का ही है।

ऐसा भला ये देश के लिए क्या कर रहे है जो इन्हें टोल टैक्स ना देने की छूट दे दी गयी है।

नबोग्रोह मंदिर (navagraha temple)

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आम तौर पर हम गौहाटी सिर्फ फ्लाईट से आने-जाने के लिए ही जाते है पर वहां रुकते नहीं थे। पर मई के शुरू मे हम ३-४ दिन के लिए गौहाटी गए थे तो जाहिर है कि जब ४ दिन रुकेंगे तो गौहाटी घूमेंगे भी। :) जब गेस्ट हाउस वाले से पूछा कि यहां क्या-क्या घूमने की जगह है तो एक सपाट सा उत्तर मिला कि कामख्या के अलावा तो ज्यादा कुछ नहीं है। मार्केट के बारे मे पूछने पर कहा कि बाजार बहुत दूर है । वो तो बाद मे पता चला कि बाजार सिर्फ १०-१२ कि.मी . दूर था जिसे वो लोग बहुत दूर कह रहे थे।
खैर हम लोग के साथ जो सज्जन गए थे उनसे हम लोगों ने एक टूरिस्ट गाइड मंगवाई और गाईड देख कर पता चला कि जैसा लोग कहते है कि यहां कुछ घूमने के लिए नहीं है वो गलत है। सो हम लोगों ने गौहाटी के मंदिरोंकेसाथ-साथगौहाटीकास्टेटम्यूजीयम ,आसामज़ू ,गौहाटीकेमार्केट देखने का कार्यक्रम बनाया ।और गाईड मे एक तरफ पड़ने वाली जगहों को देखने का पूरे दिन का प्रोग्राम बना। तो सबसे पहले नबोग्रोह मंदिर देखने का निश्चित हुआ और अगले दिन सुबह-सुबह हम लोग नबोग्रोह मंदिर के लिए च…

एक-दूसरे पर आक्षेप करना ही क्या ब्लॉगिंग है ?

कितनेअफ़सोसकीबातहैकिहरकुछदिनपरएकहंगामाहोनाब्लॉगजगतकाएकनियमसाबनगयाहै।हरबारहंगामापिछलेहंगामेसेज्यादाबड़ाहोताहै।कभीमहिलाब्लॉगरतोकभीउनकेद्वारालिखेगएलेखोंकोलेकरहंगामाहोजाताहै। औरकलतोहदहीहोगयी।कल हमनेकईदिनबादजबब्लॉग वाणीखोलातोहमकुछचकरासेगएक्यूंकिकईपोस्टेंसमीरजी,ज्ञानजीऔरअनूपजीकेनामकेसाथलिखीदिखी।औरउन्हेंपढ़करअफ़सोसतोहुआसाथहीबहुतदुःखभीहुआ।किआखिरहमलोगकिसतरहकिब्लॉगिंगकररहेहैजिसमेएक-दूसरेपरकीचडउछालनाक्यासहीहै।

जबहमने२००७मेब्लॉगिंगशुरूकीथीतबआजकीतुलनामेब्लोगरजरुरबहुतकमथे (शायद५००-६०० ) परइसतरहकारवैयाकभीएक-दूसरे केलिए नहीं देखाथा।हाँछोटी-मोटीनोक-झोकहोतीरहतीथीजोब्लॉगिंगऔरब्लॉगरदोनोंकेलिएजरुरीऔरअच्छीहोतीथी। परअबइसनोक-झोककास्वरुपबदलताहीजारहाहै। एकदमसीधेएक-दूसरेकेलेखनपर, एक-दूसरेकेव्यक्तित्वपरआक्षेपकरनाक्याहमब्लॉगरकोशोभादेताहै।

हमयेतोनहींजानतेकिइससबकेपीछेअसलीवजहक्याहैऔरजाननाभीनहींचाहेंगेपरइतनाजरुरकहेंगेकि समीरजी ,अनूपजीऔरज्ञानजीतीनोंकीहीअपनीलेखनशैलीहैऔरअपनाअलगअंदाजहैलिखनेकाऔरजिसेहमसभीब्लॉगरपसंदकरतेहैऔरबड़ेचावसेपढ़तेभीहै। औरइनलोगोंकीएक-दूसरेसेतुलनाकरनाठीकनहींहै।

इसतरहकेविवादसेब्लॉगिंगऔरब्लॉगरदोनोंकाहीनुक्सा…

गंगा गोमती ट्रेन का ऐसा हाल

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फरवरी मे हम कुछ दिनों के लिए इलाहाबाद गए थे और वहां से हमने लखनऊ अपनी दीदी के यहां जाने का कार्यक्रम बनाया था। अब इलाहाबाद से लखनऊ जाने के लिए गंगा गोमती ट्रेन ठीक होती है।हालाँकि इस ट्रेन को पकड़ने मे सुबह पूरी बर्बाद हो जाती है। क्यूंकि ६ बजे की ट्रेन के लिए ५ बजे ही उठाना जो पड़ता है। :) और इसमें एक और प्रोब्लम है कि ये ट्रेन प्रयाग स्टेशन पर बस २ मिनट रूकती है जबकि ज्यादा जनता प्रयाग से ही इस ट्रेन मे चढ़ती है ।
तो हम लोगों ने ए.सी.चेयर कार का टिकट बुक किया। और ट्रेन के समय स्टेशन पर पहुँच गए और इंतज़ार करने लगे।उसदिनअपनीकिस्मतहीखराबथी अचानक ही ट्रेन आने से चंद मिनट पहले खूब आंधी और बारिश शुरू हो गयी और जब ट्रेन आई तो पता चला कि ए.सी. वाला कोच एकदम पीछे है। जबकि कुली ने कहा था कि ए.सी.कोच जहाँ हम लोग खड़ेथे , वहीँ आता है।
खैर जब तक हम लोग कोच तक पहुंचे तो ट्रेन ने धीरे-धीरे चलना शुरू कर दिया था । एक तो बारिश ऊपर से चलती हुई ट्रेन और कुली उसी चलती ट्रेन मे सामान चढाने लगा और जो हम लोगों को बैठाने गया था वो बोला दीदी आप लोग चढ़ जाइए । तो हम लोगों ने कहा कि सामान मत चढाओ…