Friday, August 4, 2017

तक़रीबन चालीस साल बाद हमने सपेरा देखा और वो भी दिल्ली में। दरअसल पिछले हफ़्ते हम सपरिवार पंडारा रोड के गुलाटी रेस्टौरेंट में लंच खाने गए थे । रेस्टौरेंट जाते समय हमने सपेरा देखा जिसने अपने पास दो टोकरी रखी हुई थी । उस समय तो हम नहीं रुके और हम लोग खाना खाने चले गए ।

जब खाना खाकर निकले तो देखा की सपेरा बीन बजा रहा है और सांप उसकी बीन पर झूम सा रहा है । अब इतने सालों बाद सांप को बीन की धुन पर झूमते देख हमसे रहा नहीं गया और हम भी पहुँच गए सांप देखने । वहाँ सपेरे ने एक विदेशी महिला के गले में सांप को डाला हुआ था । बहादुर महिला थी । :)

हम सभी ने बचपन में सांप और नेवले की लड़ाई , बंदर और भालू का नाच ज़रूर देखा होगा । और उसी की याद करके हम भी सांप का नाच देखने लगे ।

बाद में सपेरे ने हमसे कहा की अगर हम चाहे तो सांप को हाथ में ले सकते है पर हमारी हिम्मत नहीं हुई । भाई सांप तो आख़िर सांप ही है । :)

जिज्ञासावश हमने सपेरे से पूछा कि पहले तो हमने कभी उसे वहाँ नहीं देखा है तो उसने कहा की वो तो पिछले पचीस सालों से वहाँ बैठता है । हो सकता है जिस दिन हम पंडारा रोड गए हो उस दिन वो ना आया हो । और हमारे पूछने पर कि इससे कितने कमाई होती है इस पर उसने कहा की परिवार के खाने पीने का इंतज़ाम हो जाता है ।

ख़ैर हमने भी उसे सौ रुपए दिए और धन्यवाद कह कर चल दिए ।












Thursday, August 3, 2017



अगले दिन हम लोगों ने इम्पीरीयल पैलेस घूमने का प्रोग्राम बनाया और इस पैलेस में भी जाने के दो रास्ते है एक तो इम्पीरीयल होटेल के बिलकुल सामने से इसका गेट और रास्ता है और जिस रास्ते से हम गए थे वो बिलकुल विपरीत दिशा में है । हम लोग मेट्रो से kudanshita स्टेशन पहुँच गए और चल दिए पैदल क्यूँकि पैलेस पास ही था । अभी स्टेशन से बाहर निकले ही थे कि बाँयी ओर देखने पा लगा की हम लोग पैलेस पहुँच गए क्यूँकि वहाँ एक गेट था तो हम लोग भी उस तरफ़ चल दिए पर थोड़ा अंदर जाने पर एक स्टेडीयम दिखा जहाँ पर किसी rock show की तैयारी चल रही थी और काफ़ी भीड़ थी ।






वहाँ पहुँच कर एक बार फिर लगा की हम लोग रास्ता भटक नए है तो एक लड़के से बड़ी मुश्किल से पूछ पाए की पैलेस का रास्ता कौन सा है।और फिर हम लोग चल दिए रास्ते में science museum पड़ा पर पैलेस का नामोनिशान नहीं दिख रहा था। पर रास्ता बहुत सुन्दर और हरियाली से भरपूर था। चलते चलते हम लोग मेन रोड पर पहुँच गए और सड़क के उस पार पैलेस का गेट दिख रहा था ।



ये पैलेस जापान के राजा का महल है जहाँ आज भी वहाँ के राजा और उनका परिवार रहता है। इस पैलेस का सिर्फ़ ईस्ट गार्डन और इम्पीरीयल हाउस होल्ड एजेन्सी area में है लोग जा सकते है और बाक़ी का पैलेस जनता के लिए बैंड रहता है । मुख्य पैलेस सिर्फ़ राजा के जन्मदिन और नए साल में आम जनता के लिए खोला जाता है । वैसे imperial household agency पैलेस के अंदर कुछ १२० लोगों को पैलेस का टूर कराते है पर उसके लिए पहले से टिकट बुक करना होता है । या वहाँ गेट पर जाकर भी ,अगर आप क़िस्मत वाले हुए तो टिकट मिल जायेगा ।ख़ैर हमें टिकट नहीं मिल पाया था इसलिए हम पैलेस का गार्डन ही घूम पाए थे। वैसे पैलेस का गार्डन भी कुछ कम नहीं है। और गार्डन में प्रवेश के लिए गाते पर वो लोग टोकन देते है जिसे एग्ज़िट गेट पर लौटाना होता है।



यहाँ से थोड़ा आगे चलने पर एक Tenshu dai ( base of main tower) पड़ता है जिसे 1669 में बनाया गया था । इस टावर पर जाने के लिए थोड़ा ऊपर चढ़ना पड़ता है वैसे तो यहाँ स्लोप बना हुआ है पर ये काफ़ी स्टीप चढ़ाई है। ऊपर जाकर गार्डन का पूरा view भी दिखाई देता है और उसके पीछे आप आज के समय की ऊँची ऊँची इमारतें देख सकते है ।



और इस पैलेस के चारों तरफ़ पार्क और गार्डन है,जो बहुत ही ख़ूबसूरत है। और यहाँ बहुत सारे चेरी और मेपल के पेड़ है। गार्डन में घूमते हुए हम लोग Isimuro (stone cellar) के पास पहुँचे जिसे महत्त्वपूर्ण सामान को आग से बचाने के लिए बनाया गया था।



यहाँ से आगे बढ़ने defence house Fujimi Yagura पहुँचे जो थोड़ा पहाड़ी के ऊपर है इसके अंदर जूते पहनकर नहीं जाते है बल्कि जूते को एक बैग में रखना पड़ता है । वैसे तो ये बहुत ही छोटा सा लकड़ी का बना हुआ कमरा या यूँ कहे वॉच टावर जैसा है किसी ज़माने में यहाँ से माउंट फ़ूजी दिखाई देता रहा होगा हालाँकि हमने भी माउंट फ़ूजी देखने की कोशिश की पर बड़े बड़े पेड़ों के कारण हमें नहीं दिखा ।





यहाँ से और आगे चलने पर O Bansho मतलब गार्ड हाउस से गुज़रते हुए पैलेस में बनी सोविनीर शाप पर पहुँच गए और वहाँ से कुछ सोविनीर लेने के बाद हम लोग बाहर आ गए ।







एक बार और हम इस पैलेस को देखने गए क्यूँकि इसका जो पत्थर का बना Nijubashi bridge है वो पहली बार हम नहीं देख पाए थे । इस ब्रिज को पार करके ही इम्पीरीयल पैलेस में जाते है । आम तौर पर ये ब्रिज बंद रहता पर ख़ास मौक़ों पर इसे खोला जाता है।




nijubashi का अर्थ है दो ब्रिज । ये पत्थर का बना हुआ अर्ध चंद्राकर ब्रिज है और इसके ठीक पीछे लोहे का बना हुआ ब्रिज है अगर इन दोनो को सही ऐंगल से देखे तो ये एक ही ब्रिज लगते है । moth जिसे पैलेस के चारों ओर बनाया जाता था उस की वजह से ये ब्रिज वाक़ई में बहुत ख़ूबसूरत लगता है। बहुत से लोग गार्डन नहीं सिर्फ़ इस ब्रिज को ही देखने आते है।



चलिए आज काफ़ी घूम लिए अब अगली बार asakusa (असकूसा ) चलेंगे । :)