Posts

Showing posts from November, 2007

ईफ्फी २००७ गोवा

Image
जी हाँ कल से गोवा मे भारत का ३८ वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह शुरू हुआ है। जिसमे देश-विदेश से कुल मिला कर करीब २०० फिल्में दिखाई जायेंगी। गोवा मे पिछले चार सालों से ईफ्फी का आयोजन होता आ रहा है और आगे भी गोवा मे ही ईफ्फी होगा क्यूंकि गोवा को ईफ्फी का स्थाई आयोजक बना दिया गया है। ।कल गोवा के कला अकेडमी मे हुए इस उदघाटन समारोह के मुख्य अतिथि शाह रुख खान थे।दक्षिण की हिरोइन प्रिया मणि ,प्रिय रंजन दास मुंशी,गोवा के मुख्य मंत्री,गोवा के मुख्य सचिव ,गोवा के मेयर ,फिल्म फेडरेशन की डाइरेक्टर, आदि लोग इस उदघाटन समारोह मे मौजूद थे।

पिछले की तरह इस साल नाच-गाना तो नही हुआ पर भाषण पिछले साल की तरह ही हुए। इस समारोह की शुरुआत मे सभी ने भाषण दिए। भाषण पर हम यहां प्रिय रंजन दास मुंशी के भाषण का जिक्र करना चाहेंगे।( बस जरा चूक हो गयी कि हम रेकॉर्ड नही कर पाए) जिसमे उन्होंने शुरुआत मे तो फिल्म समारोह पर बोला और फिर उन्होने मुख्य अतिथि शाह-रुख खान के बारे मे जो बोलना शुरू किया की रुकने का नाम ही नही लिया कि शाह रुख खान एक महान हस्ती है किंग खान है । और इन्होंने अपना कैरियर फौजी से शुरू किया औ…

राखी के नाटक

नच बलिये जो कि स्टार प्लस पर आता है उसमे जब शो शुरू हुआ था तो दस जोडियाँ थी पर हर हफ्ते एक-एक जोड़ी बाहर होती गयी। और अब आख़िर चार जोडियाँ बची है । इस बार के नच बलिये मे राखी सावंत भी भाग ले रही है तो कुछ न कुछ तमाशा तो होना ही था। अब राखी सावंत हो और कोई बात न हो ऐसा कहाँ हो सकता है।

राखी सावंत पहले दिन से लोगों का ध्यान अपनी और करने के लिए हर बार कुछ करती है। पहले दिन तो उसने कश्मीरा(वैसे हम न तो कश्मीरा और न ही राखी को पसंद करते है ) के लिए कहा था कि वो नही चाहती है कि राखी शो मे आगे बढे। फिर हर बार नाचने के बाद भी वो कोई न कोई बात जरुर कहती है। यहां तक की एक बार शो के होस्ट हुसैन ने भी कहा था कि आप हर बार कहती है कि ऐसा आपने पहले कभी नही किया है। जबकि सभी जानते है कि वो एक डांसर है और काफी समय से स्टेज शो ( डांस) करती आ रही है और कुछ फिल्मों मे भी डांस किया है । पर फिर भी औरहर बार एक नयी बात कहती है।



राखीसावंतजोपहलेदिनसेहीकुछनकुछनाटककरतीआरहीहै नच बलिये मे पहलीबारख़तरेमेआईहै। अबराखीसावंतख़तरेमेहोऔरवोकुछनकरेऐसाकहाँहोसकताहै।तो शो मे बने रहने और जीतने के लिए राखी पहुंच गयी न…

बकरियों कच्चे-पक्के सब खा जाओ

बात उन दिनों की है जब हम लोग इलाहाबाद के म्योराबाद मोहल्ले मे रहते थे यही कोई चालीस -बयालीस साल पहले । तब का म्योराबाद आज के म्योराबाद जैसा नही था । उन दिनों वहां इतनी ज्यादा घनी आबादी नही थी। ज्यादातर ईसाइयों के घर थे और कुछ घर दूसरे लोगों के थे। अब चूँकि उन दिनों आबादी कम थी इसलिए पेड़-पौधे ज्यादा हुआ करते थे।और म्योराबाद मोहल्ला बहुत ही छोटा हुआ करता था बस जहाँ मुम्फोर्ड गंज ख़त्म वहां से सड़क पार करते ही म्योराबाद शुरू हो जाता था।हर घर के आगे बड़ा सा दालान होता था। सारे घर लाइन से बने थे और आगे की लाइन के पीछे एक औए लाइन मे घर बने होते थे। जिनमे खेलने मे बड़ा मजा आता था।

हमलोगोंकेघरसेकोईदसकदमकीदूरीपरएकपरिवाररहताथा जिसमे दक्कू ,टेरी ,टेरी कि पत्नी बीना आंटी उनकेमाता-पिताऔरऔरदक्कूकीदादीरहतीथी। दादीयूंतोबहुतअच्छीथीपरहमबच्चोंसेजरागुस्सारहतीथीक्यूंकिहमसबउन्हेंबहुततंगजोकरतेथे।कभीआईस -पाईसखेलतेतोउनकेघर के बरामदे मे छिप जाते तो कभी उनके दालान से कूद कर भागतेथे।अगरकभीहमलोगदादीकीनजरमेआजातेतोशामतहीआजातीथी। हर किसी की मम्मी से वो शिक़ायत करती थी की हम बच्चे उन्हें परेशान करते है और…

मुझे बोलना आता है।

कहीं आप लोग ये तो नही सोच रहे है कि ये हम अपने बारे मे कह रहे है , अरे नही ये हमारे नही ये तो राहुल गाँधी के शब्द है जो उन्होने हाल ही मे अपने उत्तर प्रदेश के दौरे मे कहे थे।जहाँ उन्होने अपनी पार्टी को कैसे मजबूत करे और किस तरह से दुबारा से उत्तर प्रदेश मे तथा अन्य राज्यों मे कैसे उनकी पार्टी अपनी पकड़ बना सके।अब राहुल गाँधी को बोलना आता है या नही उससे भला किसी को क्या फर्क पड़ता है ।

जब राहुल गाँधी को वाकई मे बोलना नही आता था तब भी लोग उनके बिना कुछ कहे ही सब कुछ समझ लेते थे तो भाई अब तो माशा अल्लाह बोलना भी आ गया है। और इसका तो वो अब दावा भी कर रहे है।

जब से राहुल गाँधी की पदोन्नति हुई है तब से तो उनके मिजाज भी कुछ बदल गए है। और बदले भी क्यों न आख़िर इतनी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी का भार जो उनके कन्धों पर डाल दिया गया है।


पर भाई बोलने से ये बेहतर नही है कि आपका काम बोले।

मनोरमा सिक्स फ़ीट अंडर

ये अभी हाल ही मे रिलीज हुई पिक्चर का नाम है।वैसे हमने इसे हॉल मे नही बल्कि घर पर देखी है।क्यूंकि इससे पहले की हम इसे देखते ये पिक्चर हॉल से चली गयी। आज कल जहाँ नाच-गाने से भरपूर फिल्में बन रही है वहीं ये फिल्म धरातल से जुडी लगती है। इसकी कहानी पूरी तो नही पर हाँ थोडी सी बता देते है । इस फिल्म मे कहानी अभय देओल जो की एक इंजीनियर है और साथ-ही साथ एक लेखक भी है और जासूसी का शौक भी रखते है, उनके ही इर्द-गिर्द घूमती है कि किस तरह वो एक हत्या के मामले मे फंस जाते है।और किस तरह वो उससे बाहर निकलते है।

अभय देओल और गुल पनाग दोनो ने ही अच्छी एक्टिंग की है।गुल पनाग जो वैसे तो ज्यादा फिल्मों मे दिखाई नही देती है पर इसमे अभय देओल की पत्नी के रोल मे अच्छा काम किया है। और अभय देओल ( जिसकी हमने इससे पहले कोई भी पिक्चर नही देखी थी )ने अपने मार-धाड़ वाले भाइयों (सनी और बॉबी ) के बिल्कुल विपरीत रोल किया है। और काफी नैचुरल एक्टिंग की है। और बाक़ी के कलाकारों जैसे सारिका विनय पाठक,कुलभूषण खरबंदा, आदि ने भी अच्छा अभिनय किया है।

वैसे ये पिक्चर ज्यादा नही चली है क्यूंकि ये ना तो पूरी तरह कमर्शियल प…

वाह रे ड्रेस

Image
जरा इस ड्रेस पर गौर फरमाइए।कहिये कैसी लगी ये ड्रेस। :)

ये सारी ड्रेस चोकलेट से बनी है। और हाँ इन्हें देखने के लिए क्लिक करना न भूले।

गोवा की दिवाली कुछ अलग सी .....

Image
गोवा मे आज दिवाली मनाई जा रही है जबकि शायद बाक़ी सारे देश मे दिवाली कल यानी ९ नवम्बर को मनाई जायेगी। अब चूँकि हम यू.पी.के है तो जाहिर तौर पर आज हम छोटी दिवाली और कल यानी ९ को हम भी बड़ी दिवाली मनाएंगे। यहां गोवा मे दिवाली मनाने का अंदाज उत्तर भारत से बिल्कुल भिन्न है। जैसे उत्तर भारत मे दिवाली भगवान राम के वनवास से अयोध्या वापिस आने की ख़ुशी मे मनाई जाती है पर यहां भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर राक्षस के वध की ख़ुशी मे मनाई जाती है। हम लोग राम की पूजा करते है तो यहां पर कृष्ण की पूजा होती है।

जिस तरह दशहरे मे रावण को जलाया जाता है ठीक उसी तरह यहां गोवा मे दिवाली मे नरकासुर को जलाया जाता है।नरकासुर जलाने का चलन तो हमने यहीं पर देखा है। बडे-बडे नरकासुर बनाए जाते है और भोर मे यानी की सुबह ४ बजे इन्हें जलाया जाता है।नरकासुर जलाने का कारण है बुराई पर अच्छाई की जीत या अँधेरे पर रौशनी की जीत। चलिए थोडी इसकी कहानी भी बता देते है। जैसा की नाम से ही पता लग रहा है कि नरकासुर नरक के असुरों का राजा था।और इस नरकासुर ने १६ हजार गन्धर्व रानियों को कैद कर रखा था ।इन रानियों ने भगवान कृष्ण क…

ये भी एक खबर है ...

कल यहां गोवा के लोकल अखबार मे ये खबर छपी थी।पर कल हम इसे अपने ब्लोग पर नही लगा पाए थे इसलिए आज इसे पोस्ट कर रहे है। यूं तो ये बड़ी ही अजीबोगरीब खबर है पर फिर भी हमने सोचा की आप लोगों तक इसे पहुंचाया जाये।

जेनरेशन गैप

कुछ अजीब सा विषय है ना पर ये जेनरेशन गैप हर पीढ़ी मे होता है।बस हमारा देखने का नजरिया अलग होता है।

आख़िर ये जेनरेशन गैप है क्या बला ?

आम तौर पर माना जाये तो ये दो पीढ़ी के बीच मे आने वाला फर्क है या यूं कहें की हर बात मे, सोच मे ,आचार -विचार मे ,बातचीत के तरीके मे ,व्यवहार मे अंतर होने को जेनरेशन गैप कह सकते है।हमेशा नयी पीढ़ी पुरानी पीढ़ी को और पुरानी पीढ़ी नयी पीढ़ी को यही कहकर चुप करा देती है कि जेनरेशन गैप है।वो चाहे हम लोगों का जमाना रहा हो या फिर आज हमारे बच्चों का जमाना ही क्यों ना हो। ऐसा हम अपने अनुभव के आधार पर कह रहे है । पर हमेशा नयी पीढ़ी को ही क्यों दोष दिया जाता है कि नयी पीढ़ी या आजकल के बच्चे तमीज-तहजीब खो चुके है। उनमे छोटे-बडों का फर्क समझने की बुद्धि नही है। जबकि हम सभी उस नयी पीढ़ी वाले दौर से गुजर चुके है। पर क्या हम सबने अपने बडे-बुजुर्गों से कभी भी ऐसी बातें नही कही या करी है ? और क्या इन सबसे बडे-बुजुर्गों के साथ संबंधों या रिश्तों मे फर्क आ गया था।जब तब नही आया तो अब हम बच्चों को क्यों ये कहकर अहसास दिलाते है ।


ये तो सोचने वाली बात है की जो बात हम अपने दौर …

बैरेन आइलैंड

Image
barren island जैसा की नाम से ही लग रहा है कि ये एक ऐसा द्वीप होगा जहाँ जनजीवन नही होगा। और बिल्कुल ऐसा ही है । barren island हिंदुस्तान का एकमात्र जीवित ज्वालामुखी है जो अंडमान मे है। ।ये द्वीप पोर्ट ब्लेयर से १३०-१३५ कि .मी.की दूरी पर है। और यहां भी जाने के लिए बोट से ही जाना पड़ता है। अब का तो पता नही कि ये ज्वालामुखी जीवित है या नही पर २००५ मे करीब ९-१० साल बाद ये जीवित हो गया था मतलब ज्वालामुखी फट गया था।

शुरू मे जब ये ज्वालामुखी ज्यादा तीव्र था तब तो कम पर बाद मे इसे भी एक पर्यटन स्थल बना दिया गया था क्यूंकि ये भी जिंदगी मे बार-बार कहॉ देखने को मिलता है। कभी-कभी तो वहां बडे शिप भी ले जाये जाते थे जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस ज्वालामुखी को देख सकें।और इसके अलावा छोटी बोट barren island जाने के लिए फीनिक्स बे jetty से रात नौ बजे जाती थी और बिल्कुल सुबह तीन बजे इस द्वीप के पास पहुंचती थी। रात मे बोट इसलिये जाती थी क्यूंकि सुबह यानी भोर मे सिर्फ तीन से पांच बजे तक ही लावा दिखता था क्यूंकि अँधेरे मे लाल-पीला लावा साफ तौर पर देखा जा सकता था। और जैसे ही उजाला हो जाता है सिर्…