Saturday, November 24, 2007




जी हाँ कल से गोवा मे भारत का ३८ वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह शुरू हुआ है। जिसमे देश-विदेश से कुल मिला कर करीब २०० फिल्में दिखाई जायेंगी। गोवा मे पिछले चार सालों से ईफ्फी का आयोजन होता आ रहा है और आगे भी गोवा मे ही ईफ्फी होगा क्यूंकि गोवा को ईफ्फी का स्थाई आयोजक बना दिया गया है। ।कल गोवा के कला अकेडमी मे हुए इस उदघाटन समारोह के मुख्य अतिथि शाह रुख खान थे।दक्षिण की हिरोइन प्रिया मणि ,प्रिय रंजन दास मुंशी,गोवा के मुख्य मंत्री,गोवा के मुख्य सचिव ,गोवा के मेयर ,फिल्म फेडरेशन की डाइरेक्टर, आदि लोग इस उदघाटन समारोह मे मौजूद थे।

पिछले की तरह इस साल नाच-गाना तो नही हुआ पर भाषण पिछले साल की तरह ही हुए। इस समारोह की शुरुआत मे सभी ने भाषण दिए। भाषण पर हम यहां प्रिय रंजन दास मुंशी के भाषण का जिक्र करना चाहेंगे।( बस जरा चूक हो गयी कि हम रेकॉर्ड नही कर पाए) जिसमे उन्होंने शुरुआत मे तो फिल्म समारोह पर बोला और फिर उन्होने मुख्य अतिथि शाह-रुख खान के बारे मे जो बोलना शुरू किया की रुकने का नाम ही नही लिया कि शाह रुख खान एक महान हस्ती है किंग खान है । और इन्होंने अपना कैरियर फौजी से शुरू किया और फिर फिल्मों मे खूब अच्छा काम किया जिनमे चक दे फिल्म भी है। आज के यूथ आइकोन है । के .बी.सी.के होस्ट रह चुके है।और तो और उन्होंने ये तक कह दिया कि चक दे फिल्म के बाद से भारत मे खेल के प्रति लोगों का प्रेम जाग गया है।मुंशी ने गोवा के मुख्य मंत्री से गोवा मे बड़ा ऑडिटोरियम बनवाने की सिफारिश की और शाह रुख से कहा कि उस ऑडिटोरियम के उदघाटन के लिए शाह रुख खान को आना होगा।और भी ना जाने क्या-क्या। ओह-हो इतने बडे भाषण को बताने का अभिप्राय है कि उन्हों ने अपने नाम के अनुरूप भाषण दिया । :)


और उसके बाद दीप जलाकर समारोह का उदघाटन किया गया।

कल की ओपनिंग फिल्म फ़ोर मंथ्स थ्री वीक्स ऎंड टू डेज थी जो की एक रोमानियन फिल्म थी जिसमे सत्तर के दशक की पृष्ठभूमि है । इसकी कहानी दो लड़कियां के इर्द-गिर्द घूमती है। ये दोनो लड़कियां रूम मेट है और एक डोरमेट्री मे रहती है।इस फिल्म मे अबोर्शन जो की सत्तर के दशक मे रोमानिया मे एक अपराध माना जाता था उस पर आधारित है। कान फिल्म समारोह २००७ मे इस फिल्म को गोल्डेन पाम अवार्ड मिला था। वैसे फिल्म ठीक थी । इस विषय पर भारत मे भी पहले फिल्में बन चुकी है जैसे अस्सी के दशक मे कुछ ऐसी फिल्में आई थी जैसे भ्रूण हत्या ।इस फिल्म की हिरोइन और डाइरेक्टर इस फोटो मे आप देख सकते है।



अब चूँकि ईफ्फी चल रहा है तो आजकल हम फिल्में देखने मे लगे है। आज तीन फिल्में जों हमने देखी है उसके बारे मे कल बताएँगे।

10 Comments:

  1. Nitin Bagla said...
    क्या बात है...इतनी सारी फिल्में...मौज है फिर तो आपकी।
    Dard Hindustani (पंकज अवधिया) said...
    इतनी सारी फिल्मे देखकर कंफ्यूजिया नही जाइयेगा।
    Gyandutt Pandey said...
    जीवन प्रतिक्षण उत्सव होना चाहिये - इस अनिवार्य सत्य को गोवा से बेहतर और कोई रेखांकित नहीं करता।
    Sanjeeva Tiwari said...
    शाह रूख के भाषण के संबंध में जानकारी मिली बढिया है अच्‍छी फिल्‍में आपके माध्‍यम से हमें भी पढने को मिलेंगी ।
    yunus said...
    ममता जी हमें तो भई आपसे ईर्ष्‍या हो रही है । अपन फिल्‍म समारोहों के जुनूनी रहे हैं । गोवा समारोह में जाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है । लेकिन अब हमें इंतज़ार है मुंबई अकादमी ऑफ मूविंग इमेजेस के फिल्‍म समारोह का । जिसे हम पिछले कई बरसों से लगातार अटेन्‍ड कर रहे हैं ।
    Sanjeet Tripathi said...
    वाह वाह मजे हैं आपके तो!!
    मस्त!!
    चलिए देखी गई फ़िल्मों के बारे मे बताते चलिए!!
    रवीन्द्र प्रभात said...
    जीवन का ही दूसरा रूप उत्साह है और उत्साह का ही दूसरा रूप उत्सव , अच्छा लगा आपके उत्सवी अंदाज़ को देखकर , बधाईयाँ !
    राज यादव said...
    ममता जी ,हमका एक बात बताएंगी ....आप पत्रकारिता से है क्या ...कभी इन्देपेंदेंस की झांकी .कभी अंडमान के सापों वाली पोस्ट ...कभी इफ्फी ....बहुत ही अच्छा कवरेज करती है आप ....जवाब का इंतज़ार रहेगा ....

    Raj Yadav
    mamta said...
    राज जी पत्रकारिता से हम बिल्कुल भी नही जुडे है। बस अपने अनुभव आप लोगों से बांटते है।
    शास्त्री जे सी फिलिप् said...
    आपको जो फिल्में सबसे अच्छी लगें उनकी समीक्षा का इंतजार रहेगा -- शास्त्री

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.
    हर महीने कम से कम एक हिन्दी पुस्तक खरीदें !
    मैं और आप नहीं तो क्या विदेशी लोग हिन्दी
    लेखकों को प्रोत्साहन देंगे ??

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