Friday, September 25, 2009

इतने समय से सुनते आ रहे थे की मार्केट मे नकली नोट चल रहे है पर पहली बार हमें नकली नोट मिला और पहली बार ही नकली नोट देखा भी । :)

तो सवाल ये की नकली नोट भला हमारे पास आया कहाँ से ?

१९ सितम्बर को हम दिल्ली के अंसल प्लाजा मे बने Mcdonalds मे गए थे ।(जानते है आप लोग सोच रहे है की पिछली पोस्ट तो गोवा से लिखी थी और अब दिल्ली से लिख रहे है . अचानक हम गोवा से दिल्ली आ गए है ) और वहां से हमने take away लिया । और जब हमने काउंटर पर ५०० रूपये का नोट दिया तो उस काउंटर वाले ने बाकायदा लाइट मे चेक किया की ५०० का नोट असली है या नही । और उसने हमें २०० रूपये वापिस किए और हमने बिना सोचे और बिना चेक किए दोनों १०० के नोट अपने पर्स मे रख लिए । (अब ये तो सपने मे भी नही सोचा था की १०० का नकली नोट मिलेगा ):)

खैर अगले दिन घर पर जब सब्जी वाले से सब्जी लेने के बाद उसे १०० का नोट दिया तो उसने ये कह कर की ये नोट ठीक नही है ,नोट वापिस कर दिया । तो हमने उससे पूछा की भला इस नोट को वो क्यूँ नही ले रहा है । तो इस पर वो सब्जी वाला बोला की जी ये नोट कुछ हल्का है । और रंग कुछ अलग है ।

ये सुनकर पहले तो सब्जी वाले पर गुस्सा आया (जो की ग़लत था )और फ़िर Mcdonalds वालों पर की अपना तो नोट देख कर लेते है और कस्टमर को नकली नोट देते है । अपने पर भी गुस्सा आया की नोट को देख कर क्यूँ नही लिया हालाँकि उस समय तो हमें फर्क भी नही पता चलता ।

उस दिन के बाद से अब तो हम हर नोट चेक करते है पर अब भी असली -नकली का फर्क समझना मुश्किल लग रहा है । क्यूंकि किसी मे रंग तो किसी मे १०० अलग तरह से लिखा है तो किसी मे साइन अलग बना है । अब तो हर नोट ही नकली लगता है ।

और कल जब gas वाला आया तो उसने ५०० के बदले मे जो १०० के नोट दिए उन्हें जब हम चेक कर रहे थे तो वो बोला की मैडम सब नोट ठीक है और हमारे ये कहने पर की एक बार हमें नकली नोट मिल चुका है और जब उसे वो नकली नोट दिखाया तो बोला की उसका दिया हुआ नोट असली है . और हमारे पूछने पर की अगर नकली निकला तो वो बोला की आप हमें वापिस कर देना। और उसने अपना नाम उस नोट पर लिखा दिया ।

चलिए कुछ असली और नकली नोट की फोटो लगा रहे है । देखे आप लोग फर्क कर पाते है या नही ।तो बताइये कौन सा असली है और कौन सा नकली नोट है । :)


Monday, September 14, 2009

अरे ये क्या , आप लोग तो कुछ अचरज मे लग रहे है ? अरे माना की गणेश चतुर्थी तकरीबन २० दिन पहले थी और हम आज गणपति की जय कर रहे है । अरे वो क्या है न की अभी १५-२० दिन के लिए हम गोवा आए हुए है और यहाँ पर गणेश चतुर्थी को गणेश उत्सव के रूप मे २१ दिन तक मनाया जाता है ।वैसे कुछ जगहों पर गणपति १ दिन (ज्यादातर वो लोग घर मे गणपति स्थापित करते है )तो कुछ ७ दिन तो कुछ ११ दिन और कुछ जगहों पर २१ दिन तक गणपति की प्रतिमा स्थापित रहती है . तो हमने सोचा की इतने दिनों बाद हम पोस्ट लिख रहे है तो इससे अच्छा विषय भला और क्या हो सकता है ।

गोवा मे अगर आप कभी गणेश चतुर्थी के आस-पास घूमने आए तो मार्शेल (marcel)मे जरुर गणपति की मूर्तियाँ देखने जाइयेगा क्यूंकि इस छोटे से गाँव मे हर दस कदम की दूरी पर गणपति की विबिन्न प्रकार की और विभिन्न वस्तुओं से बनी गणेश की प्रतिमा देखने को मिलती है ।और यहाँ पर २१ दिन तक गणेश उत्सव मनाया जाता है । इस बार भी यहाँ पर कोई गणेश रस्सी से तो कोई गणेश जूट से बने थे । तो कहीं अलमुनियम फोयल से गणेश बनाए गए थे । कहीं वंश पात्र गणेश थे तो कहीं floating गणेश थे जिसमे गणेश जी शेषनाग की शैय्या पर बैठे दिखाए गए है । तो कोई गणेश थर्माकोल के बनाए गए थे ।

वैसे इस बार हम ज्यादा तो नही बस कुछ ही देख पाये और फोटो त बस २-३ की ही खींच पाये क्यूंकि इस बार अधिकतर जैसे ही मूर्ति देखने के लिए प्रवेश करते है वही सामने बड़ा-बड़ा लिखा रहता है फोटो खींचने की सख्त मनाही है . अरे किसी डर या आतंक की वजह से नही बल्कि इसमे भी commercialisation हो गया है ।पंडाल मे फोटो नही खींच सकते है पर पंडाल से उस मूर्ति की फोटो खरीद सकते है ।(१० रूपये में) पर फ़िर भी कुछ जगहों पर फोटो खींचने की पूरी छूट थी और हमने उस छूट का पूरा फायदा उठाया । :)
अब मूर्ति को लोग इतनी मेहनत से बनाते है और हम जैसे लोग जाकर बस आराम से फोटो खींच लेते है । भला ये क्या बात हुई ।

खैर आप भी इन २-३ फोटो को देखिये और गणपति बनाने वाले की तारीफ करिए और जोर से बोलिए गणपति बप्पा मोरया ।

ये पहले गणेश जी ११ फ़ुट ऊँचे बनाए गए है ।

और ये वाले गणेश जी रस्सी से बने है और इस मूर्ति को नागेन्द्र कुमार ने बनाया है ।

और ये तीसरे गणेश जी floating गणेश (कुंभारजुवे गाँव मे )है और इन्हे विष्णु के अवतार रूप मे दिखाया गया है ।