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Showing posts from March, 2010

अमिताभ बच्चन को लेकर इतनी नाराजगी क्यों ?

कल से सभी न्यूज़ चैनल यही खबर दिखा रहे है की मुंबई के बांद्रा सी लिंक के उदघाटन मे अमिताभ बच्चन कैसे गए और उन्हें किसने बुलाया । अरे भाई अगर चले भी गए तो ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा। आखिर अमिताभ बच्चन का अपना भी तो कोई वजूद है और फिर उन्हें इस सदी का महानायक भी कहा जाता है। तो अगर सदी के महानायक पुल के उदघाटन मे चले गए तो इसमें कांग्रेस को अपना इतना अपमान क्यूँ महसूस हो रहा है।

और फिर जब कांग्रेस के नेता और मंत्री उससे हाथ मिलाने मे जरा भी नहीं सकुचा रहे थे तो फिर बाद मे इस बात से मुकर जाना कि अमिताभ बच्चन को उन्होंने नहीं बुलाया था ,कहाँ की शराफत है।

दुनिया भर मे अमिताभ बच्चन को लोग इतना सम्मान देते है पर अपने ही देश मे इस तरह से अपमान होना ,कहाँ तक सही है।

कामाख्या मंदिर

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अबजबसेहमअरुणाचलआयेहैतोअरुणाचलआनेकेलिएहमेशागुवाहाटीसेहीआतेहैऔरकामख्यादेवीकामंदिरगुवाहाटीमेस्थितहै।अरुणाचलआनेकेपहलेयेजानतेतोथेकिकामख्यामंदिरआसाममेहैपरदेवीकेदर्शनहोंगेयानहींयेपतानहींथाक्यूंकिआसामकीतरफआनाहुआहीनहींथा।औरमंदिरगुवाहाटीमेहैयेपताभीनहींथा।परवोकहतेहैनाकीजबबुलावाआताहैतोअपनेआपसबकुछहोजाताहै।औरदेखियेअबहमअरुणाचलहीआगए।:)तोकुछदिनपहलेजबहमगुवाहाटीगएतोकामाख्यामंदिरभीदेखनेगए।हमलोगोंकेगेस्टहाउसजोकीएअरपोर्टकेपासहैवहांसेइसमंदिरकीदूरीक़रीब१०की.मी. थी।रातमेगेस्टहाउसवालेनेबतायाकीमंदिरमेसुबह-सुबह७बजेहीजानेसेअच्छाहोगाक्यूंकिबादमेभीड़बढ़नेलगतीहैऔरसाढ़ेआठबजेमंदिरकाद्वारखुलजाताहैऔरफिरदर्शनकरनेमेकाफीमुश्किलहोतीहै।खैरहमलोगोंनेउसे८बजेकेलिएकहातोवोतैयारहोगयाकी८भीठीकरहेगा।औरउसनेयेभीकहाकीवोवहांकिसीपुजारीकोजानताहैउसकीवजहसेदर्शनआरामसेहोजाएगाऔरदेवीमाँकेसामनेपूजाभीकरसकेंगे।वर्नावहांमंदिरमेपंडितलोगकईबारबहुतज्यादापैसालेलेतेहैदर्शनकरवानेमेखैरअगलीसुबहहमलोगतैयारहोकरठीक८बजेमंदिरजानेकेलिएनिकलपड़ेऔरआधेघंटेमेहीमंदिरपहुँचगए।मंदिरकाफीउंचाईपरकामागिरीहिलपरहै (तकरीबन२-३की.मी. चढ़ाईहै )औररास्तेमेकुछलोगपैदलजातेहुएभीदिखे…

ये कैसा डर है मुलायम सिंह को ?

शायद आप लोगों ने भी पढ़ा होगा की समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह को ये डर है की महिला आरक्षण देश को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है । यही नहीं मुलायम सिंह का तो ये तक सोचना है की महिला आरक्षण के कुछ साल बाद संसद सिर्फ महिला सांसदों की होगी ।

अभी मुलायम सिंह को काफी चिंता हो रही है की ३३ प्रतिशत आरक्षण के बाद संसद मे महिलाओं की संख्या हर चुनाव के बाद बढती जायेगी। और तो और उनका ये तक सोचना है कि देश का भविष्य क्या होगा जब देश inexperienced महिलाओं के हाथ मे होगा ।औरअनुभवतोतभीहोगानाजबवोसंसदतकपहुंचेंगी।

पर मुलायम सिंह जी शायद भूल रहे है कि आज देश के कई मुख्य पदों पर महिलायें ही काम कर रही है। फिर वो चाहे राष्ट्रपति का पद हो या फिर लोक सभा के स्पीकर का पद हो या चाहे विदेश सचिव का पद हो। या चाहे किसी प्राइवेट कम्पनी के उच्च पद या फिर बैंक के उच्च पद पर काम करने वाली महिला ही है।औरजहाँपक्षऔरविपक्षकीनेताभीमहिलाहीहै।

औरफिरयेमहिलायेंउनसांसदोंसेतोबेहतरहीहोंगीजोबन्दूकऔरनोटकेजोरपरवोटहासिलकरकेसंसदमेपहुँचतेहैऔरसंसदकीगरिमाकाजराभीख्यालनहींरखतेहै।

ससुराल गेंदा फूल

ये नाम है स्टार प्लस पर आने वाले एक सीरियल का । और इस सीरियल का जिक्र हम यहां इसलिए कर रहे क्यूंकि ये आम सास-बहू जैसे सीरियल जैसा नहीं है बल्कि एक सीरियल है जिसे देख कर मुस्कान अपने आप ही आ जाती है। और हमें ये सीरियल बहुत पसंद आ रहा है तो बस इसलिए लिख रहे है।

जिस तरह की सास और ससुराल हर चैनल पर दिखाई जाती है जहाँ हर सास और ननद सिर्फ बहू को सताने और तंग करने के अलावा कुछ नहीं करती है । और जहाँ joint family होते हुए भी सब अलग-अलग रहते है और परिवार का हर सदस्य एक दूसरे के खिलाफ साजिश करता रहता है। वहीँ इस सीरियल मे जो joint family दिखाई गयी है उसे देख कर लगता है कि हाँ ये एक परिवार है जहाँ लोग एक दूसरे की ख़ुशी मे खुश और दुःख मे दुखी होते है। और हाँ अभी तक जितना देखा है उसमे परिवार का कोई भी सदस्य किसी के खिलाफ साजिश नहीं करता है। और सास-बहू मे भी हर समय एक -दूसरे को परेशान करने की होड़ नहीं लगी रहती है। :)

इसमें जो कलाकार है उनमे कुछ तो जाने-माने टी-वी कलाकार है और कुछ नए कलाकार भी है । और सभी अच्छी एक्टिंग कर रहे है । इसलिए भी इसे देखने मे मजा आता है।

वैसे इस सीरियल को देख कर किस…

मायावती को पहनाई गयी लाखों करोड़ों की माला

आज कल राजनीति मे इतनी ज्यादा शो बाजी शुरू हो गयी है जिन्हें देख कर लगता है कि १५-२० साल पहले राजनैतिक पार्टियाँ भला कैसे अपना अधिवेशन या स्थापना दिवस मनाया करती थी। हो सकता है पहले ये खर्च हजारों मे होता रहा होगा । पर अब तो करोड़ों खर्च कर दिए जाते है सिर्फ दिखावे के लिए । और वो भी जनता का पैसा ही होगा । जिसे इस बेदर्दी से खर्च किया जाता है।

बी.एस.पी.के २५ साल होने की ख़ुशी मे मायावती और उनकी पार्टी ने २०० करोड़ तो यूँ ही उड़ा दिए । और सोने पे सुहागा की मायावती के कर्नाटक के समर्थक या so called fans ने उन्हें एक हजार के नोटों की माला पहनाई ।और वो भी किसलिए सिर्फ दिखावे के लिए । और उस माला मे तकरीबन ५ करोड़ के नोट लगे हुए थे।

२०० करोड़ मे से अगर कुछ करोड़ भी सड़क निर्माण और उत्तर प्रदेश के विकास मे लगाए गए होते तो यू.पी. का उद्धार हो जाता । पर भला ऐसा हों जाए तो यू.पी.क्या सारे देश से गरीबी का नामों निशान मिट जाएगा।पर भला देश के नेता ऐसा क्यूँ चाहेंगे क्यूंकि अगर ऐसा हो गया तो भला वो नोट देकर वोट कैसे लेंगे।

लोसर फेस्टिवल ऑफ़ अरुणाचल प्रदेश ( Losar )

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लोसर मतलब नया साल । लोसर अरुणाचल प्रदेश केतवांगडिस्ट्रिक्टकेमोनपा ( जोकिअरुणाचलप्रदेशकेमुख्यtribesमेसेएकहै) का सालाना उत्सव है । ये फेस्टिवल या तो फरवरी के अंत मे या मार्च के शुरू मे पड़ता है ।

मोनपा लोग लोसर की तैयारियां दिसंबर से ही शुरू कर देते है जैसे घर की साफ़ -सफाई करवाते है ,नए कपडे खरीदे जाते है,खाने पीने का सामान इकठ्ठा किया जाता है ,तरह-तरह के बिस्कुट और मीठी मठरी अलग-अलग आकार मे बनाई जाती है जो खाने मे बड़ी स्वादिष्ट होती है । ये फेस्टिवल तीन दिनों तक मनाया जाता है । पहले दिन लोग अपने घरवालों के साथ ही इसे मानते है और घर मे ही खाते पीते और विभिन्न तरह के खेल खेलते है । दूसरे दिन लोग एक -दूसरे के घर जाते है और नए साल की बधाई देते है । और तीसरे दिन prayer flags लगाए जाते है ।


अभी २८ फरवरी को ईटानगर की Thupten Gyatsaling monastery जो की सिद्धार्थ विहार मे है वहां इस फेस्टिवल को मनाया गया था । (और वहां हमने इस फेस्टिवल का भरपूर मजा लिया .) जिसमे अरुणाचल के पॉवर मिनिस्टर मुख्य अतिथि थे औए B.B.C.के मशहूर पत्रकार और लेखक MARKTully स्पेशल गेस्ट थे।और इसे देखने वालों की क…