Thursday, March 25, 2010

कल से सभी न्यूज़ चैनल यही खबर दिखा रहे है की मुंबई के बांद्रा सी लिंक के उदघाटन मे अमिताभ बच्चन कैसे गए और उन्हें किसने बुलाया । अरे भाई अगर चले भी गए तो ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा। आखिर अमिताभ बच्चन का अपना भी तो कोई वजूद है और फिर उन्हें इस सदी का महानायक भी कहा जाता है। तो अगर सदी के महानायक पुल के उदघाटन मे चले गए तो इसमें कांग्रेस को अपना इतना अपमान क्यूँ महसूस हो रहा है।

और फिर जब कांग्रेस के नेता और मंत्री उससे हाथ मिलाने मे जरा भी नहीं सकुचा रहे थे तो फिर बाद मे इस बात से मुकर जाना कि अमिताभ बच्चन को उन्होंने नहीं बुलाया था ,कहाँ की शराफत है।

दुनिया भर मे अमिताभ बच्चन को लोग इतना सम्मान देते है पर अपने ही देश मे इस तरह से अपमान होना ,कहाँ तक सही है।

Tuesday, March 23, 2010

अब जब से हम अरुणाचल आये है तो अरुणाचल आने के लिए हमेशा गुवाहाटी से ही आते है और कामख्या देवी का मंदिर गुवाहाटी मे स्थित है अरुणाचल आने के पहले ये जानते तो थे कि कामख्या मंदिर आसाम मे है पर देवी के दर्शन होंगे या नहीं ये पता नहीं था क्यूंकि आसाम की तरफ आना हुआ ही नहीं था और मंदिर गुवाहाटी मे है ये पता भी नहीं था पर वो कहते है ना की जब बुलावा आता है तो अपने आप सब कुछ हो जाता है और देखिये अब हम अरुणाचल ही गए :)तो कुछ दिन पहले जब हम गुवाहाटी गए तो कामाख्या मंदिर भी देखने गए हम लोगों के गेस्ट हाउस जो की एअरपोर्ट के पास है वहां से इस मंदिर की दूरी क़रीब १० की.मी. थी रात मे गेस्ट हाउस वाले ने बताया की मंदिर मे सुबह-सुबह बजे ही जाने से अच्छा होगा क्यूंकि बाद मे भीड़ बढ़ने लगती है और साढ़े आठ बजे मंदिर का द्वार खुल जाता है और फिर दर्शन करने मे काफी मुश्किल होती है खैर हम लोगों ने उसे बजे के लिए कहा तो वो तैयार हो गया की भी ठीक रहेगा और उसने ये भी कहा की वो वहां किसी पुजारी को जानता है उसकी वजह से दर्शन आराम से हो जाएगा और देवी माँ के सामने पूजा भी कर सकेंगे र्ना वहां मंदिर मे पंडित लोग कई बार बहुत ज्यादा पैसा ले लेते है दर्शन करवाने मे खैर अगली सुबह हम लोग तैयार होकर ठीक बजे मंदिर जाने के लिए निकल पड़े और आधे घंटे मे ही मंदिर पहुँच गए मंदिर काफी उंचाई पर कामागिरी हिल पर है (तकरीबन - की.मी. चढ़ाई है )और रास्ते मे कुछ लोग पैदल जाते हुए भी दिखे और जैसे ही कार से उतरे सामने मंदिर की ओर जाती हुई सीढियां दिखी तो हम लोग उधर चल पड़े तो दोनों तरफ बनी दुकानों से दुकानदार लोग चढ़ावे का सामान खरीदने के लिए आवाज लगाते हुए नजर आये थोडा और ऊपर जाने पर बहुत सारे पंडित लोग भी दिखाए दिए ( मंदिर मे प्रवेश करते ही चारोंओर लाल रंग के कपड़ों मे घुमते नजर आते है। )
,उनमे से कुछ ने पूछा कि माँ का दर्शन करना हो तो वो करवा सकते है हम लोगों के साथ गए हुए आदमी हम लोगों के लेकर अन्दर चल पड़े और सौभाग्य कुंड के पास हम लोगों को रुकने के लिए कह कर पंडित (उन्हें महाराज कहते है ) ढूँढने चले गए और कुछ ही मिनटों मे पंडित को लेकर गएतो पंडित जी ने हम लोगों को कुंड मे हाथ धोकर आने के लिए कहा क्यूंकि मंदिर मे जाने के पहले इस कुंड मे हाथ धोकर ही जाते हैऔर कुंड तक जाने के लिए १५ -२० सीढियां बनी है इस कुंड के पास ही गणेश जी की मूर्ति बनी है और इनके दर्शन करके ऊपर मंदिर के लिए जाते हैपंडित जी से ये पूछने पर कि पूजा की सामग्री कहाँ से लेंगे वो बोले आप बेफिक्र रहे हम सब कुछ ले आयेंगे और हम लोगों को एक द्वार (जिसे back door कहा जा सकता है ) के पास खड़ा कर के चले गए कि अभी थोड़ी देर मे द्वार खुलेगा लाईन मे खड़े-खड़े पता चला कि वो लाईन ५०० रूपये वाली है इसीलिए हां थोड़े से ही लोग थे जब पूछा की हम लोगों का टिकट कहाँ है तो पता चला की पंडित जी टिकट लेकर आयेंगे।और कुछ ही मिनट मे पंडित जी ५०० रूपये वाले टिकट लेकर गए लाईन मे खड़े-खड़े ही दूर की एक लाईन पर नजर पड़ी तो पता चला कि वो कुछ कम रूपये वाली लाईन है इसलिए वहां ज्यादा भीड़ थी (वैसे ऐसा हर मंदिर मे होता है )
क़रीब बजे मंदिर के द्वार खुले तो सभी पंडित अपने-अपने दर्शनार्थी को लेकर चले और गेट पर खड़े एक गार्ड से टिकट चेक करवा कर आगे चले मंदिर मे अन्दर प्रवेश करते ही जरा दूर चलने पर पतली और संकरी सी सीढियां मिली जिनमे बमुश्किल एक या दो लोग खड़े हो सकते थे और वहां थोडा अँधेरा सा भी था खैर लाईन मे लगे रहे - परिवारों के बाद हम लोगों का नंबर गया और देवी माँ के पास जाने वाली सीढ़ी बहुत ही संकरी थी पर जहाँ माँ कि ज्योति जल रही थी वो जगह थोड़ी बड़ी थीऔर वहां पर पानी भी था जिसे पंडित कह रहे थे कि वो कुदरती है हम लोगों को पंडित ने बैठने को कहा और सबसे पहले जल को को छूकर सिर पर लगाने को कहा और हम लोगों के लिए पूजा शुरू की (बस एक मिनट की पूजा ) और जब हमने रूपये चढ़ाए तो वहां बैठे दूसरे पंडित बार-बार ये कहने लगे कि आप कम से कम १००० रूपये और डालिए तो आप के नाम से माँ की आरती की जायेगी और हमारे ये कहने पर कि हमने रूपये चढ़ा दिए है वो इसी बात पर अड़े रहे ,और यहां तक कि जो नारियल हमने चढ़ाया था उसे देने के पहले भी यही कहते रहे तो हमने एक १०० रूपये और माँ के चरणों मे चढ़ाया और सब कुछ इतनी जल्दी -जल्दी होता है कि बस
वहां से निकलने पर पंडित ने कह की अब आप कहीं और ना तो रुकिए और ना ही कुछ ढ़ाईए तो पहले लगा की ये कैसे पंडित है पर वहां से आगे चलते ही हर कदम पर पंडित लोग रूपये चढाने के लिए कहते नजर आये और हम ने पंडित की बात अनसुनी करके कुछ जगहों पर रूपये भी चढ़ाए फिर पंडित वहां ले गए जहाँ भोग की सामग्री रक्खी थी

ये पंडित जी है वैसे इन्होने पूजा अच्छे तरीके से करवाई थी

मंदिर के अंदर नारियल नहीं तोड़ते है इसलिए वहां से बाहर आकर पंडित जी ने पतिदेव को नारियल तोड़कर पानी को चढाने के लिए कहा । और वहीँ खड़े -खड़े हमारी नजर इन दो बकरी के बच्चों पर पड़ी जिन्हें बलि के लिए वहां बाँधा गया था।तो दूसरी तरफ लोग दिए जलाते हुए दिखाई पड़े कामख्या मंदिर मे लोग घंटी बाँध कर मन्नत मांगते है और मन्नत पूरी होने पर घंटी उतारने आते हैऔर कबूतर,बकरी वगैरा दान भी करते है और बलि भी चढाते हैवहां चारों ओर बकरी और कबूतर हाथ मे लिए लोग दिखाई देते रहते है
दर्शन के बाद हम लोगों ने कामख्या स्वीट्स मे पूड़ी और आलू की सब्जी खाई और वापिस चल पड़े अरे भाई दर्शन तो बिना खाए -पिए ही करते है ना :)

Thursday, March 18, 2010

शायद आप लोगों ने भी पढ़ा होगा की समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह को ये डर है की महिला आरक्षण देश को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है । यही नहीं मुलायम सिंह का तो ये तक सोचना है की महिला आरक्षण के कुछ साल बाद संसद सिर्फ महिला सांसदों की होगी ।

अभी मुलायम सिंह को काफी चिंता हो रही है की ३३ प्रतिशत आरक्षण के बाद संसद मे महिलाओं की संख्या हर चुनाव के बाद बढती जायेगी। और तो और उनका ये तक सोचना है कि देश का भविष्य क्या होगा जब देश inexperienced महिलाओं के हाथ मे होगा ।और अनुभव तो तभी होगा ना जब वो संसद तक पहुंचेंगी

पर मुलायम सिंह जी शायद भूल रहे है कि आज देश के कई मुख्य पदों पर महिलायें ही काम कर रही है। फिर वो चाहे राष्ट्रपति का पद हो या फिर लोक सभा के स्पीकर का पद हो या चाहे विदेश सचिव का पद हो। या चाहे किसी प्राइवेट कम्पनी के उच्च पद या फिर बैंक के उच्च पद पर काम करने वाली महिला ही है।और जहाँ पक्ष और विपक्ष की नेता भी महिला ही है

और फिर ये महिलायें उन सांसदों से तो बेहतर ही होंगी जो बन्दूक और नोट के जोर पर वोट हासिल करके संसद मे पहुँचते है और संसद की गरिमा का जरा भी ख्याल नहीं रखते है

Wednesday, March 17, 2010

ये नाम है स्टार प्लस पर आने वाले एक सीरियल का । और इस सीरियल का जिक्र हम यहां इसलिए कर रहे क्यूंकि ये आम सास-बहू जैसे सीरियल जैसा नहीं है बल्कि एक सीरियल है जिसे देख कर मुस्कान अपने आप ही आ जाती है। और हमें ये सीरियल बहुत पसंद आ रहा है तो बस इसलिए लिख रहे है।

जिस तरह की सास और ससुराल हर चैनल पर दिखाई जाती है जहाँ हर सास और ननद सिर्फ बहू को सताने और तंग करने के अलावा कुछ नहीं करती है । और जहाँ joint family होते हुए भी सब अलग-अलग रहते है और परिवार का हर सदस्य एक दूसरे के खिलाफ साजिश करता रहता है। वहीँ इस सीरियल मे जो joint family दिखाई गयी है उसे देख कर लगता है कि हाँ ये एक परिवार है जहाँ लोग एक दूसरे की ख़ुशी मे खुश और दुःख मे दुखी होते है। और हाँ अभी तक जितना देखा है उसमे परिवार का कोई भी सदस्य किसी के खिलाफ साजिश नहीं करता है। और सास-बहू मे भी हर समय एक -दूसरे को परेशान करने की होड़ नहीं लगी रहती है। :)

इसमें जो कलाकार है उनमे कुछ तो जाने-माने टी-वी कलाकार है और कुछ नए कलाकार भी है । और सभी अच्छी एक्टिंग कर रहे है । इसलिए भी इसे देखने मे मजा आता है।

वैसे इस सीरियल को देख कर किसी ज़माने मे दूरदर्शन पर आने वाले सीरियल हम लोग की याद आ गयी।

Tuesday, March 16, 2010

आज कल राजनीति मे इतनी ज्यादा शो बाजी शुरू हो गयी है जिन्हें देख कर लगता है कि १५-२० साल पहले राजनैतिक पार्टियाँ भला कैसे अपना अधिवेशन या स्थापना दिवस मनाया करती थी। हो सकता है पहले ये खर्च हजारों मे होता रहा होगा । पर अब तो करोड़ों खर्च कर दिए जाते है सिर्फ दिखावे के लिए । और वो भी जनता का पैसा ही होगा । जिसे इस बेदर्दी से खर्च किया जाता है।

बी.एस.पी.के २५ साल होने की ख़ुशी मे मायावती और उनकी पार्टी ने २०० करोड़ तो यूँ ही उड़ा दिए । और सोने पे सुहागा की मायावती के कर्नाटक के समर्थक या so called fans ने उन्हें एक हजार के नोटों की माला पहनाई ।और वो भी किसलिए सिर्फ दिखावे के लिए । और उस माला मे तकरीबन ५ करोड़ के नोट लगे हुए थे।

२०० करोड़ मे से अगर कुछ करोड़ भी सड़क निर्माण और उत्तर प्रदेश के विकास मे लगाए गए होते तो यू.पी. का उद्धार हो जाता । पर भला ऐसा हों जाए तो यू.पी.क्या सारे देश से गरीबी का नामों निशान मिट जाएगा।पर भला देश के नेता ऐसा क्यूँ चाहेंगे क्यूंकि अगर ऐसा हो गया तो भला वो नोट देकर वोट कैसे लेंगे।

Saturday, March 6, 2010

लोसर मतलब नया साल । लोसर अरुणाचल प्रदेश के तवांग डिस्ट्रिक्ट के मोनपा ( जो कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्य tribes मे से एक है ) का सालाना उत्सव है । ये फेस्टिवल या तो फरवरी के अंत मे या मार्च के शुरू मे पड़ता है ।

मोनपा लोग लोसर की तैयारियां दिसंबर से ही शुरू कर देते है जैसे घर की साफ़ -सफाई करवाते है ,नए कपडे खरीदे जाते है,खाने पीने का सामान इकठ्ठा किया जाता है ,तरह-तरह के बिस्कुट और मीठी मठरी अलग-अलग आकार मे बनाई जाती है जो खाने मे बड़ी स्वादिष्ट होती है । ये फेस्टिवल तीन दिनों तक मनाया जाता है । पहले दिन लोग अपने घरवालों के साथ ही इसे मानते है और घर मे ही खाते पीते और विभिन्न तरह के खेल खेलते है । दूसरे दिन लोग एक -दूसरे के घर जाते है और नए साल की बधा देते है । और तीसरे दिन prayer flags लगाए जाते है ।


अभी २८ फरवरी को ईटानगर की Thupten Gyatsaling monastery जो की सिद्धार्थ विहार मे है वहां इस फेस्टिवल को मनाया गया था । (और वहां हमने इस फेस्टिवल का भरपूर मजा लिया .) जिसमे अरुणाचल के पॉवर मिनिस्टर मुख्य अतिथि थे औए B.B.C.के मशहूर पत्रकार और लेखक MARK Tully स्पेशल गेस्ट थे।और इसे देखने वालों की काफी भीड़ भी थी ।

monastery के बाहर भगवान् बुद्ध की प्रतिमा को एक पेड़ के नीचे स्थापित किया गया था और यहां पर सबसे पहले बुद्ध की मूर्ति की सामने दिया जलाया गया था ।क्यूंकि इस फेस्टिवल की शुरुआत सबसे पहले दिए जला कर की जाती है । और उसके बाद prayer flags को बाँधा जाता है । जिस समय इन flags को ऊपर किया जाता है उस समय flour को हाथ मे लेकर जोर जोर से बोलते है -- लहा सो लो ,की की सो सो लहा ग्यल लो ( may the gods be victorious मतलब भगवान की जीत हो )और flour को आसमा की तरफ उछालते है ।

और इस के बाद तवांग डिस्ट्रिक्ट के विभिन्न नृत्य प्रस्तुत किये गए जिनमे से एक नृत्य का विडियो हम यहां पर लगा रहे है । इनका संगीत बहुत ही मधुर होता है और डांस का स्टाइल बहुत ही smooth और soft सा होता है ।इस फोटो मे जो आदमी डांस कर रहे है उन्होंने जो cap पहनी है वो YAK के बाल से बनी है और ये मोनपा लोगों को बहुत ही traditional cap होती है । (वैसे तवांग मे स्त्री और पुरुष दोनों ही इस cap को पहनते है ।( विडियो हम यहां नहीं लगा पा रहे है क्यूंकि लाइट बार-बार जा रही है ।इसलिए फोटो ही लगा रहे है । वैसे you tube पर हम विडियो लगाने की कोशिश कर रहे है । इच्छा हो तो देख लीजियेगा । )





डांस
के कार्यक्रम के बीच मे ही बिस्कुट जिन्हें khapse कहते है और राईस बीयर सर्व की जाती है । और इसके बाद monastery मे ही लंच भी होता है जिसमे बिलकुल शाकाहारी भोजन सर्व किया जाता है जिसमे मटर पनीर और चावल के साथ -साथ नूडल (चाऊ मीन और फ्राइड राईस )और लोकल ब्रेड जिसे मैदे से बनाया जाता है ,मोमो ,मिक्स वेज जिसे कुछ अलग तरह के cheese से बनाया जाता है जिसकी वजह से इसका फ्लेवर अलग ही लगता है , सर्व किया जाता हैऔर साथ मे fruit cream भी सर्व की जाती है । :)