Friday, January 30, 2009

पिछले हफ्ते हमने अपनी पसंद के लता मंगेशकर के गाये हुए कुछ पुराने गीत सुनवाए थे जिन्हें आप लोगों ने पसंद भी किया था । आज उसी कड़ी को आगे बढाते हुए कुछ और मेरी पसंद के गीत सुनिए । इन गीतों की एक और ख़ास बात है की ये सारे गाने हमने अपने गिटार सीखने के दिनों में बजाने भी सीखे थे ।

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Wednesday, January 28, 2009

हमारी एक पोस्ट मे निमोना पढ़कर लावण्या जी ने अपनी टिप्पणी मे निमोना के बारे मे पूछा था तो आज ख़ास लावण्या जी के लिए हम निमोना बनाने जा रहे है । निमोना उत्तर भारत मे जाड़े के दिनों मे बनने वाली हरी मटर की ऐसी डिश है जिसके बिना बने या खाए जाड़ा आने का पता ही नही चलता है । तो चलिये तैयार है न निमोना बनाने के लिए ।

सामग्री--
छिली हुई हरी मटर - १/२ किलो
कद्दूकस किया हुआ प्याज --२-३
कद्दूकस किया हुआ लहसुन --४-५
पिसा धनिया --१ चम्मच
पिसी हल्दी- १/४ चम्मच
पिसी लाल मिर्च- १/४ चम्मच (वैसे आप चाहें तो ज्यादा भी डाल सकते है । )
पिसा गरम मसाला- १/२ चम्मच
उरद दाल की बड़ी- ७-८
नमक -स्वादानुसार
सरसों का तेल या रिफाईंड - २ या ३ बड़े चम्मच
बारीक कटा हुआ हरा धनिया --थोड़ा सा
हींग- चुटकी भर
मेथी दाना -- १५-२०
आलू-- २ या ३ (टुकड़े कटे हुए )

विधि--
सबसे पहले छिली हुई हरी मटर को पीस लीजिये पर बहुत महीन नही पीसना है । अब एक कढाई मे सरसों का तेल डालकर पहले उसमे उरद डाल की बड़ी को १ मिनट फ्राई करके निकाल लीजिये और उसी तेल मे हींग और मेथी दाना डाले और फ़िर उसमे कद्दूकस किया हुआ प्याज और लहसुन डालिए और इसे अच्छे से लाल होने तक भूने अब इसमे सारे पिसे मसाले डाल कर और थोड़ा पानी डालकर फ़िर से भूनिए और जब ये मसाला तेल छोड़ने लगे तो इसमे पिसी हुई मटर डाल कर खूब अच्छे से भूनिए ।

मटर को भुनने मे थोड़ा समय लगता है और मटर कढाई मे चिपकती भी है तो इसके लिए आंच को धीमा और तेज करते रहना पड़ता है जिससे मटर भुन भी जाए और जले भी नही । और जब मटर खूब अच्छे से मसाले मे मिल जाए और तेल छोड़ने लगे तो उसमे आलू के कटे हुए टुकड़े डाल कर थोड़ा और १-२ मिनट भून लीजिये और अब इसमे फ्राई की हुई बड़ी ,पानी और नमक डाल कर ढक कर धीमी आंच पर पका लीजिये और बीच-बीच मे चलाते रहिये तब तक जब तक की तेल ऊपर न आ जाए ।(आप चाहें तो कुकर मे - सीटी लगा कर भी बना सकते है क्यूंकि कढाई मे पकने मे समय लगता है ) और पकने के बाद सर्व करने के पहले ऊपर से हरा धनिया भी डाल दीजिये और गरमागरम चावल के साथ सर्व करिए और खाइए । और हाँ इसके साथ मूली का सलाद बहुत मजा देता है ।

वैसे आप चाहे तो मसाला अलग से तेल मे भून सकते है और मटर को अलग से देसी घी मे और इस तरह बने निमोने का स्वाद भी लाजवाब होता है । इस तरह का निमोना हमारी ससुराल मे बनता है और हम दोनों तरह का निमोना बनाते है । :)

Tuesday, January 27, 2009

पोर्ट ब्लेयर (अंडमान ) मे रहते हुए अक्सर चेन्नई से आना - जाना होता था और हर बार सोचते थे की चेन्नई से पांडेचेरी इतने पास है तो एक बार वहां जाया जाए पर हर बार बस सोचकर ही रह जाते थे । पर जब अंडमान से गोवा ट्रांसफर हुए तो चेन्नई से पांडेचेरी घूमने गए थे । :)

चेन्नई से पांडेचेरी की ड्राइव इतनी बढ़िया होगी ये पता नही था । चेन्नई से पांडेचेरी कार से जाने मे तकरीबन दो-ढाई घंटे का समय लगता है ।वैसे आपकी कार चलाने की स्पीड पर भी निर्भर करता है । चेन्नई से पांडेचेरी का रास्ता बहुत ही बढ़िया है । हाई वे पर बहुत ज्यादा आंधी -तूफ़ान टाइप ट्रैफिक कम रहता है और जो लोग बहुत तेज कार चलाते है वो पलक झपके ही आंखों से ओझल हो जाते है क्यूंकि सड़कें बहुत अच्छी है । वैसे चेन्नई से पांडेचेरी की ड्राइव मे मजा बहुत आता है ।क्यूंकि समुन्द्र और रास्ते की हरियाली देखते ही बनती है । और सड़क के दोनों और नमक के पहाड़ भी गजब लगते है नमक के पहाड़ तो हमने पहली बार वहीं देखे थे ।अब इसमे कोई चौंकने की जरुरत नही है अब दिल्ली मे हमेशा से रहने वाले के लिए तो नई बात ही है न ।

चेन्नई के मुख्य शहर से जब बाहर निकलते है तो ५-१० कि. मी.की दूरी तय करने के बाद ये snake and crocodile फार्म पड़ता है । इस फार्म का प्रवेश टिकट शायद ५य १० रूपये का था । ठीक से याद नही है क्यूंकि २००६ मे गए थे । :) अब टिकेट बढ़ गया हो तो नही कह सकते है । वैसे अगर गरमी के दिनों मे जाए तो इस फार्म के अन्दर जाकर बड़ी ठंडक अहसास होता है क्यों कि फार्म बिल्कुल घने पेडों के बीच है ।और बारिश के दिनों मे तो मौसम वैसे ही सुहाना रहता है ।


फार्म के अन्दर दाखिल होने के बाद जैसे ही बायीं ओर जाते है तो एक लाइन से बहुत सारे मटके रक्खे दिखाई देते है । इन मटकों का मुंह कपड़े से बंद किया होता है और वहां पर २-३ फार्म के कर्मचारी भी खड़े होते है । उन्ही मे से एक व्यक्ति बताता है कि इन मटकों मे अनेक विषैले सर्प है और विष है । इन्ही मटकों के आस-पास जमीन पर कुछ साँप हिस्स की आवाज करते हुए घूमते-टहलते भी नजर आते है और फार्म के कर्मचारी इन साँपों के बारे मे बताते है कि अगर उन्हें डिस्टर्ब न किया जाए तो वो काटते नही है । ऐसे ही एक साँप के बारे मे वो बता ही रहा था कि साँप ने उसे फन मारा और लकड़ी के बने एक बॉक्स मे चला गया । पर उस व्यक्ति को कुछ हुआ नही क्यूंकि उसका विष शायद निकाल रक्खा था ।और फ़िर वो व्यक्ति साँप का जहर कैसे निकालते है ये भी दिखाता है । वैसे क्या आप जानते है की साँप का विष बहुत ही महंगे दामों मे बेचा जाता है

साँपों को देखने के बाद जब आगे चलते है तो ढेर सारे मगरमच्छ बीच मे बने pond के किनारे सोते और आराम करते हुए नजर आते है । मानों दीन-दुनिया की उन्हें कोई फ़िक्र ही न हो ।पर अगर आप उन्हें आवाज लगाएं (आ-आ करके )तो उनमे हरकत होती है और एक झटके मे वो चलना शुरू कर देते है तो कुछ पानी मे गोता लगाने चले जाते है ।और ज्यादा तंग करने पर मुंह भी चिढाते है । हम लोग इन मगरमच्छों की फोटो खींच ही रहे थे की तभी फार्म का कर्मचारी उन्हें खाना खिलाने आ गया और जैसे ही उसने और जैसे ही उसने साथ लाई हुई बाल्टी को थोड़ा खड़काया और खाना डालना शुरू किया कि तभी अलसाए और सोते हुए मगरमच्छ धीरे-धीरे उठकर दीवार की तरफ़ आने लगे थे । अपने बड़े-बड़े मुंह खोलकर ऐसे आगे बढ़ रहे थे और उछल -उछल कर खा रहे थे और उन्हें देख कर लग रहा था कि जो अगर कही सबने ज्यादा जोश मे उछाल मारी तो ....... । :)

यहाँ से आगे बढ़ने पर एक काउंटर पड़ता है जहाँ शायद ३०-३५ रूपये देकर आप एक छोटे से मगरमच्छ (बच्चा ) को हाथ मे उठाकर फोटो खिंचा सकते है । उस काउंटर पर खड़ा व्यक्ति बताता है कि किस तरह से मगर के बच्चे को हाथ मे उठाना है मतलब एक हाथ उसके जबड़े के नीचे और दूसरा उसके धड के नीचे और इस तरह से पकड़ना होता है कि उसका मुंह खुल न जाए वरना तो क्या होगा ये तो हम सब जानते ही है । अब चूँकि हमें इन से बहुत डर लगता है सो हमने इसे हाथ मे नही उठाया

फार्म घूमते हुए और कुछ अलग-अलग pond मे मगरमच्छों को देखते हुए जब फार्म के आखिर मे पहुँचते है तो वहां शीशे के बने हुए बाड़े मे कुछ बहुत ही विशालकाय अजगर देखने को मिलते है । जो अपनी ही मस्ती मे उस बाड़े के अन्दर बने पेड़ों पर लिपटे और और चढ़ते -उतरते नजर आते है ।
इस तरह साँपों और मगरमच्छों को देखने के बाद हम लोग पांडेचेरी के लिए गए थे ।

Monday, January 26, 2009

आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर कुछ पुराने देश भक्ति के गीत पेश है आपकी नजर गीत भले ही पुराने है पर ये गीत आज भी हर भारतीय मे देश प्रेम का वही जज्बा भर देते है इन गीतों के हर शब्द और इनके अर्थ आज भी बहुत मायने रखते है

आप सबको गणतंत्र दिवस की शुभकामना

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Thursday, January 22, 2009


आज अपनी पसंद के कुछ बहुत पुराने लता मंगेशकर के गीत लगा रहे है आशा करते है कि आपको भी पसंद आयेंगे ।(गीत बहुत सारे है थोड़े-थोड़े करके सुनवायेंगे । :) अब वैसे ये कोई कहने कि बात नही क्योंकि हम सभी जानते है कि पुराने गीतों की अपनी ही मिठास है जिन्हें आज भी सुनकर एक अजीब सा सुकून मिलता है । पहले गीत सुनिए और फ़िर बताइये कि आपको ये गीत पसंद आए या नही ।

वैसे हम जानते है गीत ना पसंद आने का कोई सवाल नही है । :)

सही कहा है ना ।

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Wednesday, January 21, 2009

परसों हमने अपनी एक पोस्ट ( जाड़ा अंगीठी मूंगफली )पर घुघरी का जिक्र किया था तो प्रभात जी ने अपनी टिप्पणी मे पुछा था की ये घुघरी क्या है तो सोचा क्यों न आज घुघरी ही बना ली जाए वैसे भी जाड़े और हरी मटर का मौसम ज्यादातर जगहों पर चल रहा है । और घुघरी १०-१५ मिनट मे बन जाती है ।

सामग्री --

हरी मटर के दाने - १/२ किलो
बारीक़ कटी हुई हरी मिर्च - १
बारीक़ कटा हुआ लहसुन -६-७
बारीक़ कटा हुआ हरा धनिया
जीरा --१/२ चम्मच
oil या देसी घी --१ या २ चम्मच
नमक --स्वादानुसार

विधि--
सबसे पहले हरी मटर को छील लीजिये और फ़िर एक कढाई मे oil या घी डालकर उसमे जीरा डाले फ़िर लहसुन और कटी हुई हरी मिर्च डाले और ५-६ सेकंड के लिए भूने जिससे लहसुन थोड़ा लाल हो जाए और फ़िर उसमे हरी मटर के दाने डालकर ढक दीजिये और आंच धीमी कर दीजिये और बीच-बीच मे चलाते रहिये । जब मटर का पानी सूखने लगे तो उसमे नमक डाल दीजिये और थोडी देर और पकाइए । और बस ऊपर से हरा धनिया डालकर सजा दीजिये । हो गई घुघरी तैयार ।

वैसे हम कभी-कभी घुघरी मे एक आलू भी छोटा-छोटा काट कर डाल देते है ।:)

है न आसान ।

लावण्या जी अगली पोस्ट मे निमोना के बारे मे लिखेंगे ।

तो आप लोग बनाइये घुघरी और हम जा रहे है commissioning of samrat देखने





Tuesday, January 20, 2009


कल हम पतिदेव को लेने एअरपोर्ट गए थे और एअरपोर्ट से बाहर निकल कर हमारी कार लाल बत्ती पर रुकी हुई थी कि तभी-बात करते-करते अचानक हमारी नजर रोड की साईड मे लगे hoardings पर लिखे इन दोनों विज्ञापनों पर पड़ी और हमने फटाफट अपने मोबाइल से इसकी फोटो खींच ली ।
जरा गौर फरमाएं जहाँ बी.एस.एन.एल की कैच लाइन है वाह माईलेज हो तो ऐसा वहीं आईडिया की है एन आईडिया कैन चेंज यौर लाइफ दोनों ही ad बहुत कुछ कह रहे हैजैसे बी .एस.एन.एल की साइकिल पर जाइए और आईडिया की बाईक पर सवार होकर आइये । :)

वैसे पूरा विज्ञापन देखने के लिए और कैच फ्रेज पढने के लिए थोड़ा जूम करना पड़ सकता है
तो चलिए कुछ विज्ञापन का विश्लेषण हो जाए । :)

Monday, January 19, 2009

आजकल हर तरफ़ जाड़ा छाया हुआ है दिल्ली यू.पी. बिहार हो या चाहे अमेरिका ,लन्दन या कनाडा ही क्यूँ हो पर हमारे यहाँ ..... । कभी-कभी कोस्टल एरिया मे रहने का खामियाजा भी भुगतना पड़ता है :) क्योंकि आम तौर पर ऐसी जगहों पर सारे साल गरमी के जैसा ही मौसम रहता है ।गोवा मे जाड़े का अनुभव बस - दिन सुबह-सुबह होने वाले कोहरे को देख कर ही होता हैऔर सूरज देवता के बजे के बाद उगने से पता चलता है की गोवा मे जाड़ा गया हैऔर या फ़िर वाईन टेस्टिंग फेस्टिवल से :) अब आज कल जहाँ आधे से ज्यादा भारत देश मे ठण्ड पड़ रही है वहीं गोवा मे अभी २ -३ दिन पहले जनवरी का सबसे गर्म दिन हुआ था । :( :)

जाडे के कुछ नफे (ज्यादा)और नुक्सान (कम) है ।अब नफ़ा ये है कि इस जाड़े के मौसम मे एक तरफ़ जहाँ मूंगफली और अमरुद खाने का मजा है वहीं दूसरी तरफ़ घुघरी खाने का भी अपना अलग ही मजा है :) तो जाड़े का नुकसान है कि नल का पानी भी बिल्कुल बरफीला ठंडा हो जाता है और रजाई से बाहर निकलने पर दांत भी किटकिटाने लगते हैअब यहाँ चूँकि जाड़ा पड़ता नही है तो इसलिए यहाँ पर जाड़े के नफे-नुकसान से कोई फर्क नही पड़ता है:)

हो सकता है आप को लगे कि लो भाई यहाँ अपनी तो जाड़े के मारे मुसीबत है और एक ये है जिन्हें जाड़े की कमी महसूस हो रही हैअब क्या करें इंसान की फितरत ही ऐसी है जो नही है उसे ही पाने की ख्वाहिश होती हैऔर हम भी उसी फितरत के मालिक है :)

तो चलिए कुछ पुरानी बातें याद करके मन को खुश कर लिया जाए ।

आह वो भी क्या दिन थे (और इलाहाबाद की मूंगफली भी क्या गज़ब की दानेदार मूंगफली होती है) जब इलाहाबाद मे हम सब बहनें रजाई मे घुसकर मूंगफली खाने का कोम्पतीशन किया करते थेएक पूरा अखबार रजाई पर फैलाया जाता था और फ़िर मूंगफली का पूरा पैकेट उसमे पलट दिया जाता था और साथ मे होती थी नमक ,हरी धनिया और मिर्चे की चटनी फ़िर शुरू होता था मूंगफली खाने का कोम्पतीशनऔर सबसे मजे की बात की छिलका अलग नही रखते थे क्यूंकि आख़िर मे जब मूंगफली खत्म होने लगती थी तब ही तो असली मजा आता था उसमे से मूंगफली ढूँढने का और खाने का :)
और हाँ अगर आपने ऐसा मूंगफली खाने का कोम्पतीशन नही किया है तो करके देखिये यकीन जानिए बड़ा मजा आता हैयहाँ ना तो रजाई और ना ही वैसी मूंगफली मिलती है हाँ आज कल कभी कभार कच्ची मूंगफली सब्जी मंडी मे मिल जाती है (और फ़िर ख़ुद भूनो या उबालो और तब खाओउफ़ इतने मे तो सारा मजा ही खत्म हो जाता है)पर उसमे वो भुनी हुई मूंगफली का स्वाद कहाँ

भूनने से याद आया जब तक हम लोग दिल्ली मे थे तो जब बेटों की जाड़े की छुट्टियों होती थी तो हम लोग अक्सर लखनऊ ( हमारी ससुराल ) जाते थेऔर लखनऊ मे जाड़े के दिनों मे शाम को अंगीठी जलाई जाती थी और सब लोग उसके चारों ओर बैठ कर हाथ तापते थेअब अगर खाली हाथ ही तापा जाया तो फ़िर अंगीठी जलाने का भला क्या फायदा:)
अम्माजी (हमारी सास ) उसमे हरी मटर और आलू वगैरा भूनती थी और वहीं गरम-गरम भुना आलू और मटर खाने मे जो मजा और स्वाद आता था वो भला यहाँ कहाँ मिले । (वैसे इस एक महीने यहाँ हरी मटर जरुर मिल जाती है और हम निमोना और मटर की पूड़ी खा लेते है । :)


अब आख़िर हम ठहरे इलाहाबादी तो भला इलाहाबाद के पेड़े यानी अमरुद को कैसे भूल सकते है :)
पिछले कुछ सालों से दिल्ली से बाहर रहने के कारण इलाहाबाद के अमरूदों से भी वंचित हैअब दिल्ली मे तो इलाहाबाद से अमरुद जाते थे (हालाँकि उनका स्वाद कुछ अलग हो जाता था )पर यहाँ तक आते-आते तो अमरुद गल ही जाते है

अब जाड़ा ना सही जाड़े की यादें ही सही:)

Saturday, January 17, 2009


ये किसी फ़िल्म का नाम नही है और ही किसी नॉवेल का शीर्षक है बल्कि गोवा मे होने वाले एक पारंपरिक उत्सव का नाम है । हर साल जनवर के पहले रविवार को या यूँ कहें की क्रिसमस के बाद वाले दूसरे रविवार को मतलब jesus के जन्म के १२ दिन बाद ।२००६ मे जब हम गोवा शिफ्ट होकर आए थे तब २००७ के अखबार मे इसके बारे पढा था और सोचा था कि अगले साल यानी २००८ मे इस feast को देखेंगे पर २००८ की जनवरी आई और चली गई और हम ये feast नही देख पाये । पर इस बार यानी २००९ के इस feast मे हम भी शरीक हुए । क्योंकि इस बार chandor के ३ king बने बच्चों मे से एक king के पिता ने हम लोगों को इस feast को देखने के लिए निमंत्रण दिया था ।

चलिए थोड़ा सा इस feast के बारे मे भी जो कुछ वहां लोगों से बात करके जाना और समझा उसे आप लोगों को भी बता देते है । jesus के पैदा होने के बाद jesus को बुरे लोगों से बचाने और jesus को आशीर्वाद देने के लिए तीन magi बल्थ्हज़ार( Balthhazar ), गासपर (Gaspar )और, मेल्कोर (Melchior)ऊंट पर सवार अपने साथ गिफ्ट के रूप मे gold,(सोना)frank incense (धूप) और myrrh (तेल )लाये थे । इसी लिए इसे feast of Epiphany कहा जाता है ।

तो अब जब निमंत्रण था तो ६ जनवरी को हम भी पहुंचे ये feast देखने के लिए । । हर साल Candor ,Canasulim,Verem गाँवों से feast के लिए ९ बच्चों जो कि १० साल की उमर के होते है उन को चुना जाता है यानी हर गाँव के लिए ३ बच्चे king बनते है ।जिस परिवार के बच्चे को चुना जाता है उसके लिए ये बड़े गर्व की बात होती है । और ये बच्चे बिल्कुल king की तरह तैयार होते है और king बने ये बच्चे magi की तरह ही गिफ्ट मे gold ,frank incense और myrrh लेकर आते है । बस फर्क इतना है की ये ऊंट की जगह घोडे पर बैठ कर आते है ।

सबसे पहले ये तीनों king शंडोर के चैपल Nossa senhora de piedade मे ईकट्ठा होते है जो की एक पहाडी पर है और फ़िर वहां से तैयार होकर और सभी गिफ्ट लेकर एक काफिले की तरह Nossa senhora de Belem चर्च मे आते है जहाँ ये लोग अपने साथ लाये हुए गिफ्ट gold,frank incense,और myrrh देते है और उसके बाद प्रेयर (high mass) होता है जो करीब डेढ़ -दो घंटे का होता है ।पूरा चर्च खचाखच भरा था । चर्च के बाहर भी टी.वि स्क्रीन लगाए गए थे जिससे हर कोई चर्च मे हो रही प्रेयर को देख सके । जब प्रेयर खत्म हो गई तो खुशी जाहिर करने के लिए पटाखे भी चलाये गए थे । और बाहर बैंड भी बजता रहता है ।छोटा-मोटा सा मेला भी चर्च के बाहर लगा होता है । हाई मॉस के बाद जितने लोग चर्च मे होते है वो सभी चर्च से बाहर आकर दो लाइन बनाकर बाहर की तरफ़ चलने लगते है बीच मे तीनों king घोडे पर बैठ कर चर्च के पास चक्कर लगाते है और इन तीनों king के पीछे भी चर्च के लोग और जनता चलती है और चक्कर लगाने के बाद एक बार फ़िर सभी लोग चर्च मे जाते है । और वहां से फादर से आशीर्वाद ले कर बाहर आते है और फादर feast ख़त्म होने की घोषणा करते है । और शाम को फ़िर गाने और डांस का कार्यक्रम रहता है ।गोवा मे अगले २-३ दिन तक शाम को three king feast को नाच-गाकर सेलिब्रेट किया जाता है ।

इसके बाद तीनों king एक बार फ़िर घोडे पर सवार होते है और अपने -अपने घरवालों के साथ अपने -अपने घर की तरफ चलते है । आगे-आगे बैंड और उसके पीछे घोडे पर सवार king चलता है । घर आकर एक बार फ़िर परिवार के सभी लोग प्रेयर करते है और उसके बाद king एक बड़ी सी कुरसी पर बैठ जाता है और लोग उससे एक-एक कर मिलते है । और इसके बाद खान-पान का इंतजाम रहता है ।और गीत-संगीत का कार्य क्रम होता है ।
और इस दिन के बाद से क्रिसमस सेलेब्रेशन का अंत होता है

Friday, January 16, 2009

अनुराग कश्यप की आने वाली फ़िल्म dev d मे सुना है १८ गाने है । चिंता मत कीजिये हम १८ गाने नही लगा रहे है अभी फिलहाल कुछ गाने लगा रहे है वैसे ये भी सुना है कि अनुराग कश्यप ने अपनी साईट पर सारे गाने लगाए है । तो अगर सारे गाने सुनने का शौक है तो आप उस साईट को visit कर सकते है । :)

गाने बिल्कुल ही अपने ही style के है ।हर गाने को सुनकर लगता है कि अरे इस टाइप का गाना भी है । :) एक तरफ़ सॉफ्ट सॉंग है तो वहीं दूसरी तरफ़ रॉक सॉंग भी है ।अब जैसे Emosanal attyachaar के वर्जन है एक rock version और दूसरा brass band version

वैसे हमें इसके कुछ और गाने जैसे दुनिया ,परदेसी और ढोल यारा ढोल भी बहुत पसंद आए है पर वो e snip पर मिल नही रहे है इसलिए उन गानों को फ़िर कभी लगायेंगे ।


Thursday, January 15, 2009

२६ नवम्बर को जब मुंबई रेलवे स्टेशन ,ताज होटल,ओबराय होटल , नरीमन हाउस और कामा हॉस्पिटल मे आतंकी हमले हो रहे थे और उस समय राज की सेना मुंबई मे कहाँ थी किसी को भी नही पता था यहाँ तक की उस आतंकी हमले के पंद्रह दिन बाद भी कहीं भी राज की सेना और बाल ठाकरे की सेना का कहीं कुछ अता- पता नही था । पर फ़िर अचानक एक दिन बाल ठाकरे जी जागे और मुंबई हमले के आतंकी कसाब को सरेआम फांसी की अपील की । अब जब चाचाजी ने अपील की तो भला भतीजे जी कैसे पीछे रहते उनकी सेना भी हरकत मे आ गयी और जो वकील कसाब का केस लड़ने के लिए तैयार हुआ था उसके घर जाकर राज की सेना ने तोड़-फोड़ कर अपने जौहर का प्रदर्शन किया ।और आख़िर मे उस वकील ने अपना नाम वापिस ले लिया जबकि सभी को पता है कि अगर कोई वकील नही होगा तो कसाब का केस कमजोर हो जायेगा । और इसके लिए c.j.i. को स्टेटमेंट देना पड़ा तब कहीं जाकर कसाब के लिए वकील हुआ ।

और आज अखबार मे ख़बर पढ़ी कि (अब जब राज की सेना जाग गई है तो )कल उनकी सेना ने एक पाकिस्तानी कॉमेडियन को शो और देश से बाहर निकालने का बीड़ा उठाया और उसे बाहर कर दिया । काश राज की सेना २६ नवम्बर को जागी होती और उन गिनती के १० आतंक वादियों को अपना जौहर दिखाती तो इतने बेक़सूर लोगों की जाने नही जाती । भला एम .एन.एस के लिए क्या मुश्किल था १० आतंकियों को मार गिराना क्योंकि जिस तरह उनके सैनिक उत्तर भारतीय लोगों की गाड़ी और सर फोड़ते थे अगर उसी तरह वो मुंबई मे उस २६ नवम्बर को रहे हमले मे आतंक वादियों के सर फोड़ते तो शायद जनता उन पर गर्व कर सकती । ( बिल्कुल जलियांवाला बाग़ की तरह जिसमे जनरल डायर गोली चलवाते रहे और देश भक्त लोग गोली से डरे बिना आगे बढ़ते रहे और देश पर कुरबान होते रहे । )

काश ऐसा होता पर अफ़सोस उन्हें तो निहत्तथे और लाचार लोगों पर ही शायद वार करना आता है ।



Monday, January 12, 2009

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ओबामा के लिए लोगों की दीवानगी का हाल तो हम सभी ने टी.वी और अखबारों के जरिये खूब पढ़ा और देखा है । और इसी दीवानगी का आलम है की अब २० जनवरी को होने वाले राष्ट्रपति के उद्घाटन समारोह के ५०००टिकट सिर्फ़ ६० सेकंड मे ही बिक गए । बहुत पहले निकोलस केज की फ़िल्म gone in sixty seconds देखी थी और कल tickets gone in sixty seconds का टाइटल अखबारों मे पढ़कर उस फ़िल्म की याद आ गई । :)

चलिए ओबामा के इस समारोह के बारे मे कुछ और बता देते है वैसे आप लोगों ने भी पढ़ा ही होगा की ओबामा न केवल अब्राहम लिंकन के द्वारा इस्तेमाल की गई बाइबल से शपथ लेगें बल्कि समारोह के बाद लंच मे वही खाना खाएँगे जो अब्राहम लिकन ने उस ज़माने मे शपथ लेने के बाद खाया था क्यूंकि ओबामा अब्राहम लिंकन के self-professed follower है ।
अगर आपने ये ख़बर नही पढ़ी है तो अब पढ़ लीजिये ।

Saturday, January 3, 2009


आप किस सोच मे पड़ गए कि भला टाई पहनने का भी कोई नया style हो सकता है क्या । तो भाई आजकल तो जो न हो जाए वो थोड़ा है । वैसे इस ishtyle को देखने से पहले तो हम भी यही समझते और जानते थे कि टाई पहनने का सिर्फ एक ही style है जिसे हमने और आपने अपने घर के लोगों को जैसे बाबा,पापा,भइया ,चाचा मामा,और पतिदेव को टाई बांधते देखा है ।

पर आजकल जैसा कि हर रोज एक नया फैशन देखने को मिल रहा है तो भला टाई बाँधने वाले कैसे पीछे रहते सो आप भी देखिये ये नया टाई बाँधने का ishtyle और पसंद आए तो आजमा के भी देख सकते है । :)

ये इंडियन आइडल के प्रस्तुत करने वाले चैंग और हुसैन है और साथ ही एक प्रतियोगी रेमो भी है और ये अनोखा टाई बाँधने का ishtyle इन्ही का है । तो आप का क्या ख़्याल है इस नए ishtyle के बारे मे । :)

Thursday, January 1, 2009

ब्लॉगर परिवार के सभी सदस्यों को नव वर्ष की हार्दिक बधाई
नव वर्ष आपके और परिवार के लिए खुशियों की सौगात लाये