Wednesday, January 21, 2009

परसों हमने अपनी एक पोस्ट ( जाड़ा अंगीठी मूंगफली )पर घुघरी का जिक्र किया था तो प्रभात जी ने अपनी टिप्पणी मे पुछा था की ये घुघरी क्या है तो सोचा क्यों न आज घुघरी ही बना ली जाए वैसे भी जाड़े और हरी मटर का मौसम ज्यादातर जगहों पर चल रहा है । और घुघरी १०-१५ मिनट मे बन जाती है ।

सामग्री --

हरी मटर के दाने - १/२ किलो
बारीक़ कटी हुई हरी मिर्च - १
बारीक़ कटा हुआ लहसुन -६-७
बारीक़ कटा हुआ हरा धनिया
जीरा --१/२ चम्मच
oil या देसी घी --१ या २ चम्मच
नमक --स्वादानुसार

विधि--
सबसे पहले हरी मटर को छील लीजिये और फ़िर एक कढाई मे oil या घी डालकर उसमे जीरा डाले फ़िर लहसुन और कटी हुई हरी मिर्च डाले और ५-६ सेकंड के लिए भूने जिससे लहसुन थोड़ा लाल हो जाए और फ़िर उसमे हरी मटर के दाने डालकर ढक दीजिये और आंच धीमी कर दीजिये और बीच-बीच मे चलाते रहिये । जब मटर का पानी सूखने लगे तो उसमे नमक डाल दीजिये और थोडी देर और पकाइए । और बस ऊपर से हरा धनिया डालकर सजा दीजिये । हो गई घुघरी तैयार ।

वैसे हम कभी-कभी घुघरी मे एक आलू भी छोटा-छोटा काट कर डाल देते है ।:)

है न आसान ।

लावण्या जी अगली पोस्ट मे निमोना के बारे मे लिखेंगे ।

तो आप लोग बनाइये घुघरी और हम जा रहे है commissioning of samrat देखने





16 Comments:

  1. अभिषेक ओझा said...
    ये तो हमें भी बनाने आता है :-) ... आज ही बनाते हैं. हरे मटर की जगह हरा चना भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
    विनय said...
    मटर की जगह भीगे चने भी इस्तेमाल होते हैं


    ---आपका हार्दिक स्वागत है
    चाँद, बादल और शाम
    mehek said...
    waah bahut mast receipe
    seema gupta said...
    वाह स्वादिष्ट व्यंजन...

    Regards
    Udan Tashtari said...
    मेरे पसंद की डिश.
    Zakir Ali 'Rajneesh' (S.B.A.I.) said...
    हमारे गांव में ताजे कटे गेहूं को उबाल कर भी यह डिश बनाई जाती है। वैसे आपकी सुझाई डिश की रेसिपी पढ कर भी मुंह में पानी में आ गया। खाने पर तो न जाने क्‍या होगा।
    रंजना [रंजू भाटिया] said...
    आज ही बनाए है ..बहुत पसंद है यह मुझे भी ...सरसों के तेल में बना के देखे और चटपटा स्वाद देंगे :)
    Mired Mirage said...
    धन्यवाद। इसी को मटर के अलावा बहुत सी अन्य वस्तुओं से बनाया जा सकता है जैसे, गेहूँ, हरे चने, भीगे चने आदि से। परन्तु ताजा मक्का के दानों या फ्रोज़न दानों से भी बढ़िया बनती है।
    घुघूती बासूती
    Nirmla Kapila said...
    dhanyvaad ji aaj yahi sahi magar roj 2 kese khaayen abhi kal hi to khaayaa hai
    Arvind Mishra said...
    वाह यम् यम् घुघरी और निमोना ! ममता जी मूल रूप से आप हैं किधर की -मैं तो जौनपुरिया हूँ जहाँ बिना घुघरी और निमोना के तो जाड़े से जुडी आनन्ददायक अनुभूतियों का मजा ही नही लिया जा सकता ! दोनों ही मेरी फेवरिट नंबर वन !
    मैं जब घुघरी बनाता हूँ तो हरे लहसुन की पत्तियाँ डालता हूँ जिससे स्वाद और बढ़ जाता है -आप भी आजमाईये !
    Amit said...
    bahut bahut thanks..ham bhi banaayenge....
    विवेक सिंह said...
    हम भी घर में बनवाकर जब तब् खाते रहते हैं . हम तो घुंघुंनी बोलते हैं .
    राज भाटिय़ा said...
    अजी अभी बोलते है घर की माल्किन से...
    धन्यवाद
    लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...
    अरे वाह ! ये हुई ना बात !!
    इँतज़ार रहेगा ममता जी ...
    mamta said...
    आप सबका शुक्रिया आपकी टिप्पणियों के लिए और इतने सारे नए-नए ऑप्शन्स के लिए जिन्हें हम जरुर आजमाएंगे ।
    अरविन्द जी हम इलाहाबाद के है ।
    Gyan Dutt Pandey said...
    घुघरी तो प्रिय व्यन्जन/नाश्ता है सर्दियों का।

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